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- तारीख पे तारीख बेनतीजन बड़ता कृषि कानूनों पर किसानो और सरकार का गतिरोध....
Posted by : achhiduniya
04 January 2021
किसानों की ओर से बार-बार तीनों कानून को रद्द
करने की बात की गई जबकि सरकार की तरफ से सुधार करने की बात की गई। कृषि मंत्री
नरेंद्र सिंह तोमर ने किसानों से अपील की कि आप सुधार पर मान जाइए। जानकारी के
अनुसार, बातचीत के दूसरे दौर में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का कानूनी रूप देने पर बातचीत का प्रस्ताव किया,लेकिन किसान यूनियन के नेताओं ने इस पर चर्चा से इनकार कर दिया।
वे कृषि कानून को निरस्त करने की अपनी मांग पर अडिग रहे। सातवें दौर की वार्ता के
बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इस बात से इनकार
किया कि किसान यूनियन को सरकार पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार और
यूनियन की रजामंदी से ही आठ तारीख की बैठक तय हुई है। इसका मतलब है कि किसानों को
सरकार पर भरोसा है। उन्होंने कहा कि किसानों की भी मंशा है कि सरकार रास्ता
तलाशे और आंदोलन खत्म करने का स्थिति हो। चर्चा में दो अहम विषय एमएसपी और कानून
थे, कुल मिलाकर चर्चा अच्छे वातावरण में हुई, दोनों पक्ष चाहते हैं कि समाधान निकले। सरकार ने कानून बनाया है
तो किसानों के हित को ध्यान में रखकर बनाया है। हम चाहते हैं कि यूनियन की तरह से
वह बात आए जिस पर किसानों को ऐतराज है, इस पर
सरकार खुले मन से बातचीत करने को तैयार है। बैठक के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने
कहा, जब तक सरकार एमएसपी (MSP) पर
गारंटी और तीनों कानूनों को वापिस नहीं ले लेती, तब तक
हम यहीं रहेंगे। चाहे सरकार कोई भी समिति गठित कर ले। वहीं भारतीय किसान सभा के नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा, मानवीय दृष्टिकोण से सरकार को विचार करना चाहिए और किसानों की
समस्या को सुलझाना चाहिए। कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसान और केंद्र सरकार के बीच 30 दिसंबर
को छठे दौर की बाचतीच हुई थी। लगभग पांच घंटे चली बैठक में बिजली दरों में वृद्धि
और पराली जलाने पर दंड को लेकर किसानों की चिंताओं को हल करने के लिए कुछ सहमति
बनी, लेकिन दो बड़े मुद्दों पर गतिरोध बना रहा। किसानों की मांग है
कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी दी जाए
और तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द किया जाए। दोनों पक्ष 8 जनवरी को फिर बातचीत की
टेबल पर बैठेंगे।




