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- बकवास बातों {केसो} के चलते गंभीर केसों की सुनवाई के लिए समय नहीं मिल रहा...सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
Posted by : achhiduniya
01 June 2021
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये दुखद है कि जो भी मामले सुनवाई के
लिए मंगलवार की लिस्ट थे उनमें हमने फाइल देखी और 90 फीसदी महत्वहीन मामले थे जो
फालतू किस्म के थे। अदालत ने ये भी टिप्पणी की है कि सुप्रीम कोर्ट को ऐसे मामले
में समय नहीं देना चाहिए ये समय की बर्बादी है। इस बात पर बल होना चाहिए कि गंभीर
मामले में सुनवाई के लिए समय दिया जाए। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक अभी
67898 केस पेंडिंग है और इनमें करीब 50 हजार नए केस हैं। कोर्ट ने कहा है कि अदालत
में कई गैर जरूरी यानी फालतू मामले आने से गंभीर मामलों की सुनवाई के लिए समय नहीं
मिल पा रहा है और इस तरह देखा जाए तो फालतू मामले सुप्रीम कोर्ट को निष्क्रिय
बनाने में लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उस मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की
जिस उपभोक्ता मामले का निपटारा मार्च में कर दिया गया था,लेकिन दोबारा उसे उठाया गया। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि
फालतू मामले के कारण जज गंभीर मामले नहीं देख पाते हैं। अदालत ने कहा कि फालतू और
बिना महत्व वाले मामलों की बाढ़ है और इस कारण गंभीर मसलों पर सुनवाई के लिए जज को
समय नहीं मिल पाता है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान ये तथ्य सामने आया कि
याची ने जो याचिका दायर की है उस मामले में पहले ही मार्च में आदेश पारित हो चुका
था,लेकिन बेहद कम मसलों के साथ उसे फिर से वापस
लाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि आप क्यों आए हैं। जो घर
आपको अलॉट किया गया है उसके
लिए आपको पेमेंट करना है और उससे पहले आप दस्तावेज की छानबीन चाहते हैं इसलिए आप सुप्रीम कोर्ट आए। ये सब क्या है। अदालत ने कहा कि इस तरह के मामलों से ही सुप्रीम कोर्ट को निष्क्रिय बनाने की कोशिश है। ये फालतू मामले हैं जिनका कोई महत्व नहीं है और इन मामलों से गंभीर मामलों की सुनवाई पर असर होता है।



