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- जमीन खरीद विवाद की PMO कार्यालय व RSS शीर्ष नेतृत्व को अपनी रिपोर्ट भेजी राममंदिर ट्रस्ट ने...
Posted by : achhiduniya
15 June 2021
रामजन्मभूमि ट्रस्ट को बाग बिजेस की जमीन की बिक्री करने वाले
प्रापर्टी डीलर सुलतान अंसारी ने कहा है कि जमीन खरीद में सभी नियमों का पालन किया
गया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों की ओर से लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं।
अंसारी ने कहा कि इस जमीन की डील दस मिनट में नहीं हुई। सबसे पहले इस जमीन का
एग्रीमेंट वर्ष 2011 में हुआ था। उस समय एग्रीमेंट में मेरे पिता और हरीश कुमार
पाठक थे। इसके बाद एग्रीमेंट का अब तक चार बार नवीनीकरण हो चुका है। वर्ष 2021 में
जब बैनामा हुआ तो इसमें रवि मोहन तिवारी को भी शामिल किया गया। अंसारी ने कहा कि
दूसरा एग्रीमेंट वर्ष 2014 में हुआ। ट्रस्ट की ओर से महासचिव चंपत राय और अन्य
सदस्यों ने जमीन लेने के लिए संपर्क किया और फिर उनके साथ डील हुई। साढ़े 18 करोड़
में डील तय हुई। इसके पूर्व वर्ष 2011 में एक करोड़ रुपये में एग्रीमेंट हुआ था।
वर्ष 2019 में जब एग्रीमेंट कराया तो जमीन की कीमत दो करोड़ हो गई। उन्होंने कहा कि
मौजूदा समय में यह जमीन 24 करोड़ रुपये की है। अंसारी ने स्वीकार किया कि वह पूर्व
में समाजवादी पार्टी से सभासद का चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन अब उनका पार्टी से कोई
नाता नहीं है। अयोध्या के जमीन खरीद विवाद पर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने
प्रधानमंत्री कार्यालय और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व को अपनी
रिपोर्ट भेजी है। इस रिपोर्ट में जमीन खरीद में घोटाले के संबंध में लगाए जा रहे
आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों ने बताया कि एक दिन
पूर्व राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र के सामने भी इस विवाद के
बारे में विस्तार से पक्ष रखा गया है। ट्रस्ट की ओर से अपनी रिपोर्ट में बताया गया
है कि जमीन की खरीद में सभी नियमों का पालन हुआ है। किसी भी तरह की कोई अनियमितता
नहीं हुई है। राजनीतिक कारणों से कुछ लोग जमीन खरीद के माध्यम से ट्रस्ट को विवाद
से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से बताया गया है कि जो जमीन ली गयी है
वह प्राइम लोकेशन पर है और जमीन की कीमत 1423 रुपये
प्रति वर्गफुट है। यह कीमत आसपास के इलाके की जमीनों के मौजूदा दाम से काफी कम है।
सभी भुगतान सीधे खाते में किए गए हैं। गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय
सिंह और सपा नेताओं की ओर से मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया गया है। कहा गया
कि उस जमीन का पहले दो करोड़ में बैनामा हुआ उसके दस मिनट बाद ट्रस्ट को 18 करोड़ में रजिस्ट्री की गई।



