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सोनिया गांधी द्वारा वंदे मातरम् के अपमान पर घिरी कांग्रेस दी सफाई
सरकार
की ओर संसद में प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल हॉनर( अमेंडमेंट) बिल 2026
को इसी मानसून
सत्र के दौरान राज्यसभा में 29 जुलाई और लोकसभा में 30
जुलाई को पारित
किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद वंदे मातरम् को
राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के तहत अतिरिक्त कानूनी संरक्षण मिला है। नए
प्रावधानों के तहत वंदे मातरम् के गायन का जानबूझकर अपमान करना या उसके गायन में
बाधा डालना दंडनीय बनाया गया है। इस तरह राष्ट्रीय गीत को कानूनी संरक्षण के मामले
में राष्ट्रीय गान के बराबर लाने की कोशिश की गई है। दरअसल, भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस मुख्यालय में हुए आयोजन के दौरान
सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने पूरा वंदे मातरम् गाने पर सवाल उठाए और रोकने की
कोशिश की। अब इस मामले पर कांग्रेस की सफाई देते हुए कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने बीजेपी के इन आरोपों को गलत बताते हुए
पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जयराम रमेश ने कहा कि सोनिया गांधी ने
वंदे मातरम् गाने से नहीं रोका था बल्कि वह मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने
की बात कर रही थीं, जो कि बहुत देर से खड़े थे।
भाजपा का यह यह आरोप पूरी
तरह गलत है। कार्यक्रम में नए कानून के मुताबिक
पूरा वंदे मातरम् गाया गया और किसी ने रोका नहीं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी सफाई पेश करते हुए कहा कि कांग्रेस
मुख्यालय में वंदे मातरम् के दौरान कोई व्यवधान नहीं हुआ। जयराम रमेश पार्टी का कहना है कि वंदे मातरम् का गायन कार्यक्रम में
किया गया और इसे रोकने का कोई सवाल ही नहीं था। कांग्रेस के मुताबिक, कार्यक्रम को लेकर बनाए गए प्रोटोकॉल
और नए कानून के तहत जिस तरह गायन होना था, उसी के अनुसार कार्यक्रम आगे बढ़ा। सोशल मीडिया पर एजेंडे के तहत बीजेपी के तरफ से फैलाए गए वीडियो के
एक हिस्से को आधार बनाकर सोनिया गांधी या राहुल गांधी पर वंदे मातरम् रोकने का
आरोप लगाना सही नहीं है। सरकार ने वंदे मातरम् के गायन को लेकर
नया प्रोटोकॉल भी जारी किया है। गृह मंत्रयालय के दिशा-निर्देशों के
मुताबिक आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगीत वंदे मातरम्
के शुरुआती दो
छंदों की बजाय सभी छह छंदों वाला पूरा संस्करण (अवधि लगभग 3
मिनट 10
सेकंड) गाना
अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियमों के तहत कुछ औपचारिक सरकारी
कार्यक्रमों में वंदे मातरम् को राष्ट्रीय गान से पहले या बाद में निर्धारित
प्रोटोकॉल के अनुसार बजाने/गाने की व्यवस्था करने का भी निर्देश दिया गया।
ऑपरेशन टाइगर पर मातोश्री में मंथन
संजय राउत ने
कहा कि ऑपरेशन टाइगर की चर्चा पिछले दो वर्षों से लगातार हो
रही है, लेकिन ऐसा कोई ऑपरेशन नहीं हुआ है। बीजेपी पर निशाना साधते हुए राउत
ने कहा,जिस दिन हमारी सत्ता आएगी, उस दिन बीजेपी नहीं बचेगी। हम उसे
टुकड़े-टुकड़े कर देंगे और उनके नेताओं का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा। उद्धव ठाकरे के घर में हो रही बैठक में
अरविंद सावंत मुंबई से और नासिक से राजा भाऊ वाजे पहुंचे। इसके अलावा भी कई सांसद
मातोश्री पहुंचकर मीटिंग में शामिल हुए। कुछ नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के
जरिए मीटिंग अटेंड की। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे की
मौजूदगी में पार्टी सांसदों की यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि,
धाराशिव से सांसद
ओमराजे नाईक निंबालकर बैठक में शामिल नहीं हो पाए। जानकारी के अनुसार उनके बेटे को
पुणे के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिसके चलते वे अनुपस्थित रहे। इस बैठक में
पार्टी के दो सांसद शामिल नहीं हुए। इसे लेकर कई तरह
के कयास लगाए जा रहे हैं।
वहीं, उद्धव ठाकरे गुट के नेता और सांसद संजय राउत ने कथित ऑपरेशन टाइगर
की चर्चाओं पर
प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आज पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सांसदों की बैठक
बुलाई है, जो एक नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है।संजय राउत ने कहा,जिस तरह विधायकों की बैठकें होती हैं,
उसी तरह आज सांसदों
की बैठक बुलाई गई है। हमारे सभी सांसद बैठक में उपस्थित रहेंगे। जो सांसद किसी
कारणवश नहीं आ पाएंगे, उन्हें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से
बैठक से जोड़ा जाएगा और उनसे चर्चा की जाएगी। संजय राऊत ने कहा कि मातोश्री में
आयोजित सांसदों की बैठक में पार्टी के सभी 9 सांसद शामिल हुए। इनमें से 4
सांसद मातोश्री में
शारीरिक रूप से मौजूद रहे, जबकि 5 सांसद ऑनलाइन माध्यम से बैठक में जुड़े। राऊत ने बताया कि उस्मानाबाद के सांसद ओम राजे निंबालकर के
बेटे की तबीयत खराब है और वह पुणे के अस्पताल में भर्ती हैं,
इसलिए निंबालकर
ऑनलाइन शामिल हुए। शिर्डी के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे की पत्नी बीमार हैं और
अस्पताल में भर्ती हैं, इसलिए वह भी ऑनलाइन जुड़े। हिंगोली के सांसद नागेश पाटील आष्टीकर
अपने बेटे के विधानसभा चुनाव अभियान में व्यस्त होने के कारण ऑनलाइन शामिल हुए। यवतमाल-वाशिम के सांसद संजय देशमुख के घर
बेटी का विवाह समारोह होने के कारण वह ऑनलाइन बैठक में जुड़े। संजय जाधव भी ऑनलाइन माध्यम से बैठक में
शामिल हुए।
सोनिया गांधी और कांग्रेस उन्हें अध्यक्ष बनाना चाहती तो...गहलोत ने दोहराई होटल में बंद होने वाली कहानी
अशोक
गहलोत ने कहा, अगर
कांग्रेस और सोनिया गांधी मुझे कांग्रेस अध्यक्ष बनातीं, तो क्या मैं मना करूंगा? राजस्थान
सरकार के मंत्री जोगाराम पटेल ने अशोक गहलोत के इस बयान पर रिएक्शन दिया है।
जोगाराम पटेल ने कहा कि जब-जब सचिन पायलट का नाम किसी प्रतिष्ठित पद के लिए आगे
किया जाता है या संभावना बनती है तो अशोक गहलोत होटल में बंद होने वाली कहानी फिर
दोहरा देते हैं। सितंबर, 2022 में जब कांग्रेस नेतृत्व ने नए सीएम के नाम का
निर्णय करने के लिए जयपुर में विधायक दल की बैठक बुलाई, तो गहलोत के समर्थक विधायकों ने इस मीटिंग का
बहिष्कार कर दिया था। कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षक इंतजार ही करते रह गए,
लेकिन
गहलोत के समर्थक विधायक वहां नहीं
पहुंचे थे। इसके बाद, गहलोत गुट के लगभग 90 से ज्यादा विधायक शांति धारीवाल के घर पर जमा हुए
थे और वहां से ये सभी तत्कालीन स्पीकर सीपी जोशी के आवास पर गए और अपना इस्तीफा
सौंप दिया था। विधायकों ने मांग की थी कि राजस्थान का नया मुख्यमंत्री अशोक गहलोत
की पसंद का ही हो। इस खुले विद्रोह से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व बहुत नाराज हो
गया था। हालांकि, इसके बाद अशोक गहलोत ने दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलकर घटना पर खेद
जताया था और इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली थी।
उसके बाद, अशोक गहलोत खुद कांग्रेस अध्यक्ष पद की रेस से
बाहर हो गए थे। इसी के बाद मल्लिकार्जुन खरगे को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया
था। जोगाराम पटेल ने कहा, अशोक गहलोत प्रत्यक्ष तौर पर सचिन पायलट पर आरोप
लगाते हैं कि उन्होंने BJP के साथ मिलकर पार्टी तोड़ने की कोशिश की थी। अगर
उनकी सरकार में ऐसी कोई घटना हुई थी तो उन्होंने आज तक केस क्यों नहीं दर्ज कराया?
अशोक गहलोत खुद अपनी पार्टी में दरकिनार
हो चुके हैं इसलिए बिना किसी आधार पर ऐसे स्टेटमेंट देने के आदि हो चुके हैं।'






