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- क्या हर घर मे जरूरी है....होम-मैनेजर...?
Posted by : achhiduniya
10 March 2016
आइए
आज आपसे एक पारिवारिक अहम मुद्दे पर चर्चा करेंगे अगर सहमत हो जाए तो विचार और कदर
जरूर करे। मैं हाउस-वाइफ हूं!' महिलाएं अक्सर अपने परिचय में यही
कहती हैं। लेकिन श्रीमती शेट्टी जरा अलग हैं। वो कहती हैं, 'मैं
होम मैनेजर हूं । कई बार लोग समझ नहीं पाते, पूछ बैठते हैं,
'ये क्या होता है? आप घर पर रह कर किसी कंपनी
के लए काम करती हैं क्या?' वो हंस पडती हैं और यूं समझाती
हैं-आपको क्या लगता है भाई साहब, घर अपने आप चलता है?
नहीं ना! आप तो जानते ही हैं, ऑफिस में एक
ऐडमिनिस्ट्रेशन मैनेजर होता है जो ध्यान रखता है कि रोज सफाई हो, बिजली-पानी की सुविधाएं चलती रहें। टेलिफोन के बिल वक्त पर भरे जाएं। प्रसाधन
कक्ष साफ सुथरे हों। अगर ये जनाब ना हों तो पूरे ऑफिस में धूल उडती दिखेगी। गंदगी
फैली होगी।
बिजली गुल हो जाएगी और कंप्यूटर काम नहीं करेंगे। इसी तरह घर भी अपने आप नहीं चलता। होम मैनेजर उसका पूरा प्रबंधन करती है। उनकी बात में दम है। घर चलाना कोई आसान काम नहीं,पानी कब आएगा, गैस की टंकी कब खत्म होगी, स्कूल की फीस कब भरनी है, किसी को तो ध्यान रखना पडेगा। हम सब तो भूख लगी है का हल्ला मचा देते हैं,लेकिन रोज वक्त पर खाना बनें इसके लिए प्लानिंग जरूरी है। बच्चों को क्या अच्छा लगता है, दादा जी को डॉक्टर ने क्या परहेज बताए हैं, दादी जी का कौन सा व्रत है,पति जी का कोलेस्ट्रोल बढ गया है। उनको क्या खिलाया जाए और क्या नहीं? इन सब मुद्दों को नजर में रखते हुए पहले से राशन की व्यवस्था करनी पडती है। अगर कार्यालयों में ऐसी जटिल प्लानिंग करनी हो तो भाई लोग सॉफ्टवेयर की मांग करने लगेंगे। मैनेजर लोग ऑफिस का बजट तय करते हैं।
किस काम के लिए कितना खर्च होगा, कोई बडा इवेंट आ रहा है तो पैसा कहां से आएगा? हमारी होम-मैनेजर भी इन मुद्दों से जूझती है। पति की तनख्वाह से ही घर चलाना है। रोजर्मरा की जिंदगी के अलावा त्यौहार आते हैं। शादी-ब्याह में जाना है। लोगों को उपहार देना हैं। बच्चों का जन्म दिन आता है। कभी कोई बीमार पड जाता है। और मेहमान ? इन सब के लिए कभी इधर कटौती कभी उधर और फिर भी सब यथावत चलता रहे। ये कारनामा सबके बस की बात नहीं। कार्यालयों में एच-आर मैनेजर होते हैं जो सबकी समस्याएं सुनते हैं और सुलझाते हैं। हमारी होम-मैनेजर भी ये करती है। वो बच्चों को पढाती है, जो कार्यालयों में ट्रैनिंग मैनेजर का काम है। यूं समझिए हमारी होम-मैनेजर बहुत से मैनेजरों का काम अकेले ही कर देती है।
साल के 365 दिन ना रविवार की छुट्टी, ना त्यौहार की। उल्टे इन अवसरों पर तो उनका काम बढ जाता है। सबसे बडी बात, नौकरी छोड देने की धमकी नहीं। अगर इन सब कामों की तनख्वाह होती तो कितनी होती ? फैक्टरियों और कार्यालयों में रविवार और त्यौहार के दिन काम करने पर डेढ से दोगुना तनख्वाह का प्रावधान है। बोनस जोडेंगे ? यकीन मानिए होम-मैनेजर की कमाई भी पति जितनी ही होगी। अपनी सफलता में होम-मैनेजर के योगदान को खुल के स्वीकार कीजिए।
बिजली गुल हो जाएगी और कंप्यूटर काम नहीं करेंगे। इसी तरह घर भी अपने आप नहीं चलता। होम मैनेजर उसका पूरा प्रबंधन करती है। उनकी बात में दम है। घर चलाना कोई आसान काम नहीं,पानी कब आएगा, गैस की टंकी कब खत्म होगी, स्कूल की फीस कब भरनी है, किसी को तो ध्यान रखना पडेगा। हम सब तो भूख लगी है का हल्ला मचा देते हैं,लेकिन रोज वक्त पर खाना बनें इसके लिए प्लानिंग जरूरी है। बच्चों को क्या अच्छा लगता है, दादा जी को डॉक्टर ने क्या परहेज बताए हैं, दादी जी का कौन सा व्रत है,पति जी का कोलेस्ट्रोल बढ गया है। उनको क्या खिलाया जाए और क्या नहीं? इन सब मुद्दों को नजर में रखते हुए पहले से राशन की व्यवस्था करनी पडती है। अगर कार्यालयों में ऐसी जटिल प्लानिंग करनी हो तो भाई लोग सॉफ्टवेयर की मांग करने लगेंगे। मैनेजर लोग ऑफिस का बजट तय करते हैं।
किस काम के लिए कितना खर्च होगा, कोई बडा इवेंट आ रहा है तो पैसा कहां से आएगा? हमारी होम-मैनेजर भी इन मुद्दों से जूझती है। पति की तनख्वाह से ही घर चलाना है। रोजर्मरा की जिंदगी के अलावा त्यौहार आते हैं। शादी-ब्याह में जाना है। लोगों को उपहार देना हैं। बच्चों का जन्म दिन आता है। कभी कोई बीमार पड जाता है। और मेहमान ? इन सब के लिए कभी इधर कटौती कभी उधर और फिर भी सब यथावत चलता रहे। ये कारनामा सबके बस की बात नहीं। कार्यालयों में एच-आर मैनेजर होते हैं जो सबकी समस्याएं सुनते हैं और सुलझाते हैं। हमारी होम-मैनेजर भी ये करती है। वो बच्चों को पढाती है, जो कार्यालयों में ट्रैनिंग मैनेजर का काम है। यूं समझिए हमारी होम-मैनेजर बहुत से मैनेजरों का काम अकेले ही कर देती है।
साल के 365 दिन ना रविवार की छुट्टी, ना त्यौहार की। उल्टे इन अवसरों पर तो उनका काम बढ जाता है। सबसे बडी बात, नौकरी छोड देने की धमकी नहीं। अगर इन सब कामों की तनख्वाह होती तो कितनी होती ? फैक्टरियों और कार्यालयों में रविवार और त्यौहार के दिन काम करने पर डेढ से दोगुना तनख्वाह का प्रावधान है। बोनस जोडेंगे ? यकीन मानिए होम-मैनेजर की कमाई भी पति जितनी ही होगी। अपनी सफलता में होम-मैनेजर के योगदान को खुल के स्वीकार कीजिए।



