गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार की कला में पीएचडी है ममता की तृणमूल कांग्रेस, CAA होगा लागू …प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने गुंडागर्दी
और भ्रष्टाचार की कला में महारत हासिल कर ली है और इसमें पीएचडी कर ली है। हम
टीएमसी शासन के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुए हर अत्याचार की फाइलें फिर से खोलेंगे।
हम बलात्कार के हर मामले की फाइलें फिर से खोलेंगे और हर मामले में जवाबदेही
सुनिश्चित करेंगे। यह मोदी की गारंटी है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा
कि पूरे बंगाल के लोग एकजुट हुए थे। साथ ही उन्होंने दावा किया कि टीएमसी का अन्य
राज्यों में विस्तार असफल रहा है क्योंकि न तो इसका कोई इरादा है और न ही कोई
नीति। मोदी ने शनिवार को पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में आयोजित चुनावी
रैलियों में तृणमूल कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला और राज्य में बीजेपी की सरकार
बनने पर कई बड़े वादों को पूरा करने की बात कही। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UGC) लागू करने, नागरिकता
संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत
नागरिकता देने की प्रक्रिया तेज करने और कथित ‘सिंडिकेट राज’ को खत्म
करने का संकल्प दोहराया। मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर में एक
रैली को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी तुष्टीकरण की राजनीति को समाप्त करने के लिए UCC लागू करेगी और बंगालियों को राज्य में अल्पसंख्यक नहीं बनने
देगी। उन्होंने
चुनाव को राज्य की पहचान और भविष्य की रक्षा की लड़ाई बताया। पीएम मोदी ने कहा, देश की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। बीजेपी का संकल्प है
कि पश्चिम बंगाल में तुष्टीकरण की राजनीति को हमेशा के लिए समाप्त करने के वास्ते UCC लागू किया जाये।
पीएम मोदी ने TMC पर आरोप लगाया कि उसने मां-माटी-मानुष के नारे को छोड़कर घुसपैठियों और वोट बैंक की राजनीति को अपना लिया है। उन्होंने कहा, तृणमूल कांग्रेस मां-माटी-मानुष का नारा लगाकर सत्ता में आई थी। लेकिन अब वह घुसपैठियों के
मतों से सरकार बनाना चाहती है। पश्चिम बंगाल अब तुष्टीकरण और वोट बैंक की राजनीति
बर्दाश्त नहीं करेगा। हम बंगालियों को राज्य में अल्पसंख्यक नहीं बनने देंगे। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि राज्य में तेजी से
जनसांख्यिकीय बदलाव हो रहे हैं और यह चुनाव पश्चिम बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। कटवा में रैली के दौरान पीएम मोदी ने सीएए को लेकर बड़ा
वादा किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बनने पर मतुआ, नामशूद्र और अन्य शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया
तेज की जाएगी।
उन्होंने कहा, 'सीएए
कानून इसलिए लाया गया ताकि मतुआ, नामशूद्र
और सभी शरणार्थी परिवारों को नागरिकता की संवैधानिक गारंटी मिल सके। जैसे ही यहां
बीजेपी की सरकार बनेगी, सीएए के
तहत नागरिकता देने का काम तेज किया जाएगा। मैं हर घुसपैठिए से कहूंगा कि वह अपना
सामान समेट ले, अब जाने
का समय आ गया है।' प्रधानमंत्री
ने यह भी कहा कि घुसपैठियों के “मददगारों” पर भी कार्रवाई होगी। पीएम मोदी ने आर्थिक मुद्दों पर भी
राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और सिंडिकेट राज के कारण पश्चिम बंगाल विकास में पीछे रह गया है और राज्य पर आठ
लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज' हो चुका
है। उन्होंने दावा किया कि हजारों कंपनियां राज्य छोड़ चुकी हैं और युवाओं को
पलायन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार बनने पर भ्रष्टाचार पर श्वेत
पत्र लाया
जाएगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, 'जनता के अधिकारों का हनन करने वालों के लिए कोई लाल कालीन
नहीं बिछाया जाएगा,उनके लिए
जेल के दरवाजे खोल दिए जाएंगे।
LPG की कालाबाजारी पर कार्रवाई,451 एलपीजी सिलेंडर जब्त
पश्चिम एशिया संकट के बीच LPG की कालाबाजारी पर कार्रवाई करते हुए खाद्य एवं नागरिक
आपूर्ति विभाग ने शुक्रवार को वाडीबंदर ब्रिज और डोंगरी इलाके से 451 गैस सिलेंडर और 8 वाहन
जब्त किए हैं। मुंबई
में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने एलपीजी गैस की कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी
कार्रवाई की है। यहां अवैध तरीके से स्टोर किए 451 एलपीजी सिलेंडर जब्त किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक 19 किलो के कमर्शियल सिलेंडर बिना लाइसेंस के अवैध रूप से स्टोर
और ट्रांसपोर्ट किए जा रहे थे। जब्त सामग्री की कुल
कीमत करीब 40.61 लाख रुपये बताई गई है। यह छापेमारी नियंत्रक खाद्य वितरण एवं
नागरिक आपूर्ति निदेशक चंद्रकांत डांगे को मिली विशेष सूचना के आधार पर की गई।
कार्रवाई विशेष टीम ने गणेश बेल्लाळे, माधुरी
शिंदे और प्रदीप यादव के नेतृत्व में की। जांच के दौरान ‘जय हिंद गैस एजेंसी’ पर सरकारी नियमों के उल्लंघन और अवैध भंडारण के आरोप लगे
हैं। एजेंसी की मालिक नजमा सनारुल मंडल और संचालक सनारुल रहमतुल्ला मंडल के खिलाफ
डोंगरी पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
जम्मू-कश्मीर की सुंदरता पर लग रहा ग्रहण 500 से ज़्यादा झीलें पूरी तरह से गायब ,315 झीलें तो पूरी तरह से लुप्त….
भारत के नियंत्रक और
महालेखा परीक्षक (CAG) के हालिया ऑडिट से पता चला है कि जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश
में पिछले कुछ दशकों में 500 से ज़्यादा झीलें या तो पूरी तरह से गायब हो गई
हैं या फिर काफी हद तक सिकुड़ गई हैं, जिससे पर्यावरण को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई
हैं। 1967 में
जम्मू-कश्मीर में 697 झीलें थीं। मौजूदा हालात के मुताबिक, 315 झीलें पहले ही गायब हो चुकी हैं,
जो कुल झीलों का 45% है; जबकि 203-205 झीलें गायब होने की कगार पर हैं। कुल मिलाकर,
74% झीलें प्रभावित हैं।
या तो वे सिकुड़ रही हैं या पूरी तरह से गायब हो चुकी हैं। सरकार से लेकर आम लोगों
तक, सभी इसके लिए
ज़िम्मेदार हैं। अगर हम सरकारी विभागों की बात करें जैसे वन विभाग,
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड या झील संरक्षण
बोर्ड जो इनका प्रबंधन करते हैं; या पर्यटन विभाग, या शहरी नियंत्रण विभाग, तो ये सभी ज़िम्मेदार हैं। साथ ही,
आम लोग भी उतने ही ज़िम्मेदार हैं,
जिन्होंने इन जमीनों को खेती या बागवानी
की
जमीन में बदल दिया, या इन पर निर्माण कार्य करके घर बना लिए। इसके अलावा,
बिना साफ किया हुआ सीवेज भी इन जलाशयों
में जाता है। इसलिए लोग और सरकार, दोनों ही समान रूप से जिम्मेदार हैं। क्षेत्रफल
के लिहाज से इस इलाके ने अपनी झीलों का लगभग 2,850 हेक्टेयर सतही क्षेत्र खो दिया है। यह न केवल
झीलों की संख्या में आई कमी को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि यहां जल-विस्तार में भी
भारी गिरावट आई है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि 63
झीलें अपने मूल क्षेत्रफल का आधे से अधिक
हिस्सा खो चुकी हैं, जिससे उनके अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है। तेजी से हो रहा शहरीकरण,
अतिक्रमण, कुप्रबंधन और संरक्षण के लिए लगातार प्रयासों की
कमी को इस गिरावट के मुख्य कारणों के रूप में पहचाना गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि कश्मीर की खूबसूरती का
एक अहम हिस्सा उसकी झीलों, नदियों और झरनों में छिपा है।
CAG
की हाल ही में जारी रिपोर्ट गहरी चिंता की
बात है, क्योंकि
यह बताती है कि पिछले कुछ दशकों में एशिया की सबसे बड़ी झील- वूलर-डल झील के
साथ-साथ अपनी पुरानी शान खोती दिख रही है। इस गिरावट के मुख्य कारण अतिक्रमण,
प्रदूषण और कुप्रबंधन हैं। इस स्थिति के
लिए सरकार और आम जनता दोनों जिम्मेदार हैं। अगर बची हुई झीलों को बचाने के लिए समय
पर कदम नहीं उठाए गए, तो कश्मीर न सिर्फ अपनी अंदरूनी खूबसूरती खो देगा,
बल्कि उसके टूरिज्म सेक्टर को भी बड़ा
झटका लगेगा। इसके अलावा, देखे गए क्लाइमेट चेंज जिससे ग्लेशियर पिघल रहे
हैं और झीलें गायब या सिकुड़ रही हैं, ने बाढ़ जैसे हालात की संभावना को काफी बढ़ा दिया
है। आम लोगों के साथ-साथ सरकार को भी इसे बहुत गंभीरता से लेना होगा। इन झीलों की
तस्वीर देख कर लोग भी बेहद चिंतित हैं।
लोगों का कहना है कि एक वक्त ऐसा था जब
कश्मीर की झीलों का पानी लोग पीने के लिए इस्तेमाल करते थे। यहां बड़ी रौनक हुआ
करती थी। ये झील,कश्मीर की दूसरी झीलें, खास कर डल झील और निगीन झील से कनेक्ट हो जाते
थे। पर्यटक एक बार शिकारा की सवारी का आनंद लेने और मछली पकड़ने के लिए खुशाल सार
झील में आते थे। हालांकि, अतिक्रमण और प्रदूषण के कारण यह झील आज डंपिंग
साइट बनकर रह गई है। अब यह झील कम और नाला ज्यादा दिखता है। ख़ुशाल सार झील इस
दुर्दशा में अकेली नहीं है; श्रीनगर का सबसे बड़ा डल झील, भी इसी तरह के भाग्य का सामना कर रहा है। पिछले
कुछ दशकों में, डल झील
का एक महत्वपूर्ण हिस्सा सूख गया है, और इसके आंतरिक क्षेत्रों में अतिक्रमण बढ़ गया
है। होटलों से निकलने वाला सारा कचरा सीधे डल में प्रवाहित होता है। स्थानीय लोगों
को दुख है कि झील की मौजूदा हालत देखकर उनकी आंखों में आंसू आ जाते हैं।
ममता -A हुमायूं-B टीम सुवेंदु ने ममता को बताया- झूठों की रानी
पश्चिम बंगाल
विधानसभा चुनाव में, सुवेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी को सीधी टक्कर दे रहे हैं। ममता
बनर्जी, भवानीपुर
सीट से चुनाव लड़ रही हैं और सुवेंदु भी इसी सीट से ममता बनर्जी को टक्कर देने के
लिए भारतीय जनता पार्टी के टिकट
पर चुनावी मैदान में उतरे हैं। सुवेंदु अधिकारी पिछले विधानसभा चुनाव में ममता
बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हरा चुके हैं। पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता और भाजप लीडर
सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ममता
बनर्जी का नाम आते ही चोर मचाए शोर की
बात कही। साथ ही, वायरल हो रहे हुमायूं कबीर के वीडियो पर भी बयान दिया। ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा, वह झूठी हैं। यह बात सभी लोगों को पता है। वह झूठों की रानी हैं। वह चोर हैं और चोर शोर मचा रहा है। वहीं, हुमायूं कबीर के वीडियो पर सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि साजिश की बात पर हुमायूं बोलेंगे। हम लोग बाबरी मस्जिद के खिलाफ हैं। जो बाबर के नाम पर काम करता है, मैं उसके खिलाफ हूं। ये A और B टीम की लड़ाई है। ममता बनर्जी A टीम हैं और हुमायूं B टीम हैं।
फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर महाकुंभ की वायरल गर्ल की शादी,पति फर्मान खान के खिलाफ पोक्सो एक्ट..
महाकुंभ
की वायरल गर्ल के नाबालिग होने का खुलासा होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने उसके
पति फर्मान खान के खिलाफ पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। यह मामला
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (एनसीएसटी) की जांच के बाद सामने आया। आयोग के
अनुसार लड़की की जन्मतिथि 30 दिसंबर 2009 है और शादी के समय उसकी उम्र महज 16 वर्ष थी। आयोग ने यह भी आरोप लगाया है कि शादी कराने
के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया गया। इस मामले में आयोग ने केरल और मध्य
प्रदेश के डीजीपी को 22 अप्रैल को दिल्ली में पेश होने के लिए समन जारी किया
है। गौरतलब है कि यह हाई-प्रोफाइल शादी 11 मार्च को तिरुवनंतपुरम के पास पूवर स्थित एक मंदिर
में हुई थी,जिसे
राजनीतिक समर्थन भी मिला था। शादी से पहले दंपति ने थंपानूर पुलिस स्टेशन में
सुरक्षा की मांग की थी और परिवार से खतरे की बात कही थी। इस विवाह को उस समय माकपा
के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी ने और भी चर्चा
में ला दिया था। पार्टी के राज्य सचिव
एम.वी.गोविंदन, शिक्षा मंत्री वी.शिवनकुट्टी और राज्यसभा सांसद ए.ए.रहीम ने इसे केरल की असली
कहानी बताते
हुए सामाजिक सौहार्द का उदाहरण बताया था। उस समय पुलिस ने दंपति के इस दावे पर
भरोसा किया था कि लड़की बालिग है और उसे अपनी पसंद से विवाह करने का अधिकार है। वारल गर्ल मध्य प्रदेश के इंदौर
की रहने वाली है और महाराष्ट्र के फर्मान खान के बीच करीब 18 महीने पहले सोशल मीडिया के जरिए संबंध शुरू हुआ था। अंतरधार्मिक संबंध होने के कारण दोनों ने विरोध की आशंका में
केरल को शादी के लिए चुना था। अब लड़की के नाबालिग होने के खुलासे ने इस पूरे
मामले को नया मोड़ दे दिया है। इससे न केवल शादी की वैधता पर
सवाल उठे हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और
राजनीतिक समर्थन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
रसोई गैस की झंझट से छुटकारा आ गया पानी से चलने वाला कॉम्पैक्ट कुकटॉप….
पानी
से चलने वाला ये कॉम्पैक्ट कुकटॉप हाइड्रोजन को ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करता है। इस कुकटॉप को एक बार किचन में लगा लिया तो सालों-साल LPG, PNG की टेंशन दूर हो जाएगी। कंपनी ने घरेलू और व्यवसायिक, दोनों
तरह के इस्तेमाल के लिए चूल्हा लॉन्च किया है। इस चूल्ह
के सिस्टम में कुकिंग यूनिट के भीतर ही एक PEM यानी प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन इलेक्ट्रोलाइजर
लगाया गया है,जो पानी
से तुरंत हाइड्रोजन पैदा करता है। इस इनोवेशन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें
गैस स्टोरेज या डिस्ट्रिब्यूशन के लिए अलग से किसी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत
नहीं पड़ती है। सामान्य तौर पर गैस चूल्हे, सिलेंडर और पाइपलाइन पर निर्भर रहती हैं,
लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं चाहिए यानी कि ये
अपने आप में पूरी तरह आत्मनिर्भर और परफेक्ट सॉल्युशन बन जाता है। पानी हाइड्रोजन और
ऑक्सीजन से मिलकर बना है। इसके इलेक्ट्रोलिसिस प्रोसेस में पानी के अणु
फिर से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाते हैं। इस
चूल्हे के सिस्टम
में भी ऐसा ही होता है। PEM इलेक्ट्रोलाइजर से इलेक्ट्रोलिसिस की प्रक्रिया
के दौरान, यहां भी
पानी के अणु हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में टूट जाते हैं। इसी हाइड्रोजन का
इस्तेमाल पकाने के ईंधन के रूप में किया जाता है। ग्रीनवाइज एनर्जी सॉल्यूशन के फाउंडर संजीव चौधरी का दावा है कि इस
उपकरण को 6 घंटे
तक लगातार चलाने के लिए केवल 100 मिली
डिस्टिल्ड वॉटर जरूरी होगा। आप RO वाले पानी का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं 1 किलोवाट बिजली की जरूरत होगी। एक स्टैंडर्ड
इंडक्शन कुकटॉप आमतौर पर प्रति बर्नर 1.5 से 2 किलोवाट बिजली का उपयोग करता है,जो 6 घंटे में लगभग 9 से 12 यूनिट बिजली की खपत करता है। इसके उलट ग्रीनवाइज
का कुकटॉप 6 घंटे
की कुकिंग के लिए पर्याप्त हाइड्रोजन बनाने के लिए केवल 1 यूनिट (1 kWh) बिजली की खपत करता है। कंपनी ने फिलहाल
सिंगल और डबल-बर्नर कुकटॉप लॉन्च किए हैं। सिंगल-बर्नर हाइड्रोजन स्टोव की कीमत लगभग 1,05,000 रुपये और डबल-बर्नर की कीमत 1,50,000 रुपये रखी गई है। इसमें GST
शामिल नहीं है। संजीव चौधरी ने
बताया कि इस सिस्टम को सोलर रूफटॉप सेटअप के साथ जोड़ा जा सकता है। ऐसा करने पर ग्रीन एनर्जी
के जरिये पूरा खाना बनेगा। ये फिलहाल कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर एवलेबल हैं। जल्द ही भारतीय
बाजार में उपलब्ध होंगे।
उद्धव ठाकरे के सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में,महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर की सुगबुगाहट
शिवसेना के एकनाथ शिंदे गुट के नेता
संजय शिरसाट ने कहा कि ऑपरेशन टाइगर अंतिम चरण में है और आने वाले समय
में सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे ऑपरेशन मीडिया में बताकर नहीं
किए जाते, बल्कि
सही समय पर अंजाम दिए जाते हैं। वहीं, संजय राऊत
ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया। उनका
कहना है कि उनकी पार्टी का कोई भी सांसद शिंदे के संपर्क में नहीं है।
अरविंद
सावंत ने भी इन दावों को
खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने कभी शिंदे से संपर्क नहीं किया और अगर यह साबित
हुआ तो वे सजा भुगतने को तैयार हैं। दरअसल,महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चाएं तेज हो
गई हैं। सूत्रों के
मुताबिक, उद्धव ठाकरे की शिवसेना के कुछ
सांसद एकनाथ शिंदे के संपर्क में हैं। हालांकि, इस तरह की खबरों का शिंदे और ठाकरे गुट दोनों ने
खंडन किया है। बताया जा रहा है कि उद्धव ठाकरे गुट के 9 सांसदों में से 5 से ज्यादा सांसद शिंदे के संपर्क में हो सकते
हैं। हाल ही में इन सांसदों ने मातोश्री पर उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी और
नाराजगी जाहिर की थी। उनका कहना था कि शिंदे उनसे आसानी से मिल लेते हैं,
जबकि उद्धव ठाकरे तक पहुंचना उतना आसान
नहीं है। सांसदों ने यह भी कहा कि एकनाथ शिंदे विकास कार्यों के लिए फंड दिलाने में मदद करते
हैं, इससे यह चर्चा और
तेज हो गई कि शिंदे गुट लगातार ठाकरे गुट के नेताओं के संपर्क में है। कांग्रेस के
नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि बीजेपी हो महायुति या एनडीए देश और राज्य में हमेशा तोड़-फोड़ की ही राजनीति की जा रही है।
महाराष्ट्र आईटी कंपनी में लड़कियों का धर्म परिवर्तन व लैंगिक शोषण...
पुलिस को मिली
शिकायत में बताया गया है कि आरोपी तैसीफ अत्तर, दानिश, शाहरुख शेख और रजा मेमन ने एक हिंदू युवक
को धर्म बदलने के लिए मजबूर किया। इन लोगो ने कंपनी में एक हिंदू युवक को दोपहर
में नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा, शिकायत में यह भी बताया गया है कि हिंदू
युवक को बीफ मटन भी खिलाया गया। धर्म बदलने के बाद उसी युवक की तस्वीरें भी सामने
आई हैं। दरअसल,महाराष्ट्र के
नाशिक जिले में एक प्रतिष्ठित आईटी कंपनी में लड़कियों के शोषण का गंभीर मामला
सामने आया है। नाशिक पुलिस ने आईटी कंपनी के बीपीओ सर्विस के 6
टीम लीडर्स को
गिरफ्तार किया है। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग यहां काम करने वाली जूनियर लेवल की
लड़कियों और महिलाओं का यौन शोषण कर रहे थे। यहां तक की कुछ लड़कियों का तो धर्म
परिवर्तन कराने की कोशिश की गयी है। इस मामले में अभी तक 8 पीड़ित लड़कियां सामने आई हैं,
जबकि एक जूनियर लेवल
पर काम करने वाला लड़का भी है, जिसका धर्म परिवर्तन कराया गया है।
पुलिस ने इन 6
टीम लीडर्स पर
छेड़छाड़, बलात्कार, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का मामला
दर्ज किया है। सभी टीम लीडर्स को अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया है। सबसे
ज्यादा चौकाने वाली बात यह है कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए हर संस्थान
में पॉश (प्रोटेक्शन ऑफ विमेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस) पॉलिसी लागू होती ,
जिसे सही तरीके से
लागू कराने की जिम्मेदारी एचआर पर होती है।
जब पीड़ित लड़कियां अपनी शिकायत लेकर
एचआर हेड के पास गईं तो उन्होंने कहा कि ये सब तो एमएनसी में नार्मल बात है और
आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस ने कंपनी के एचआर हेड के खिलाफ भी
मामला दर्ज कर लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्पेशल जांच टीम बनाई गई है,
क्योंकि पुलिस को शक
है कि इस मामले में अभी और भी पीड़ित लड़कियां हैं, जो अभी तक सामने नहीं आई हैं,
जिनकी संख्या 50
भी हो सकती है।
पुलिस ने अभी तक कुल 9 एफआईआर इस मामले में दर्ज की हैं। पुलिस को
ये भी शक है कि नाशिक में ये सब एक संगठित तरीके से, पूरी फंडिंग के साथ किया जा रहा था,
जिसकी जांच अब की जा
रही है।
अवैध फैक्ट्री में बिना टमाटर के खतरनाक एसिड और प्रतिबंधित सिंथेटिक रंगों के मिश्रण से तैयार 200 लीटर जहरीली सॉस...
हापुड़ प्रशासन को लंबे समय से शिकायत
मिल रही थी कि शहर में 'वेजिटेबल सॉस' के नाम पर कुछ गड़बड़ चीजें बेची जा रही है, जिसके बाद टीम ने एक मकान में दबिश दी और इस पूरे काले खेल का पर्दाफाश किया। उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से एक ऐसी खबर सामने आई
है,जिसे जानकर शायद आप बाहर ठेलों पर मिलने वाली चाउमीन, बर्गर या मोमोज खाने से पहले दस बार सोचेंगे। जिले के पन्नापुरी इलाके में खाद्य सुरक्षा विभाग ने
एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा है। जहां टमाटर सॉस के नाम
पर जहर परोसा जा रहा था। इस छापेमारी में करीब 200 लीटर संदिग्ध सॉस बरामद की गई है, जिसे बेहद गंदी स्थितियों में तैयार किया जा रहा था। इस पूरी कार्रवाई में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात जो सामने आई,
वो सॉस बनाने का
तरीका था। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया कि सॉस बनाने में टमाटरों का उपयोग बिल्कुल भी नहीं किया जा रहा था। इसकी जगह सॉस
को गाढ़ा और लाल बनाने के लिए एसिड, सड़े-गले बेकार
सामान और प्रतिबंधित
सिंथेटिक रंगों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था। मौके पर
मौजूद अधिकारियों ने बताया कि पहली नजर में ये मिश्रण देखने में ही इतना खराब लग
रहा था कि इसे किसी भी सूरत में खाने लायक नहीं माना जा सकता। विभाग ने
तुरंत सारा माल सीज कर दिया और सैंपल लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। हेल्थ
एक्सपर्ट्स और मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, इस तरह की मिलावटी सॉस शरीर के लिए स्लो
पॉइजन -धीमा जहर की तरह काम करती है।
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल (BMJ)
और कई हेल्थ
रिपोर्ट्स में यह बात सामने आ चुकी है कि सॉस को लाल करने के लिए इस्तेमाल होने
वाले रोडामाइन-बी जैसे सिंथेटिक रंग कैंसर का कारण बन सकते
हैं। यदि लैब रिपोर्ट में ये बात सामने आती है तो गंभीर चिंताजनक स्थिति
है। इस बारे में मैक्स हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट्स की अलग-अलग
रिपोर्ट्स बताती है कि ऐसे सॉस में इस्तेमाल होने वाला इंडस्ट्रियल ग्रेड एसिड
सीधे तौर पर पेट की परत को जला देता है, जिससे अल्सर और फूड पाइप में इंफेक्शन की
समस्या शुरू हो जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक, इसमें मिलाया जाने वाला लेड और कॉपर जैसे
भारी तत्व किडनी और लिवर को हमेशा के लिए डैमेज कर सकते हैं। बच्चों के लिए
यह और भी घातक है क्योंकि उनके विकासशील अंगों पर इन रसायनों का असर बहुत तेजी से
होता है, जिससे उनकी इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है और भविष्य में गंभीर बीमारियां
घेर सकती हैं। यह जहरीला सॉस स्थानीय बाजारों, छोटे ढाबों और सड़क किनारे लगने वाले
ठेलों पर सप्लाई किया जा रहा था। चंद रुपयों के मुनाफे के चक्कर में लोगों
की जान के साथ यह खिलवाड़ काफी समय से चल रहा था। मौके पर मौजूद
खाद्य सुरक्षा अधिकारी सुनील कुमार त्यागी ने बताया कि टीम ने संदिग्ध सामान को
नष्ट करवा दिया है और इसे बेचने वाले नेटवर्क से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही
है।
ट्रेन के पहिए व पटरी किससे बनते हैं?
ट्रेन में जो
लोग सफर करते हैं उन्होंने भी और जो नहीं करते हैं उन्होंने भी कई बार ट्रेन की
पटरियों को कई बार देखा होगा। आमतौर पर जब भी कोई ट्रेन की पटरियों को देखता है तो
उसे लगता है कि इन्हें लोहे से बनाया जाता है और उसके बारे में जानकारी नहीं लेता
है लेकिन ऐसा सोचना ही गलत है क्योंकि ट्रेन की पटरियां लोहे से बनती ही नहीं हैं।
आपको बता दें कि ट्रेन की पटरियां लोहे से नहीं बल्कि मैंगनीज स्टील से बनती हैं।
मैंगनीज स्टील में 12 प्रतिशत मैंगनीज और करीब 1
प्रतिशत तक कार्बन
मिलाया जाता है। इससे होता यह है
कि पटरियां मजबूत और टिकाऊ बन जाती हैं और ट्रेन
का वजन सह लेती हैं। ट्रेन के पहिए किससे बनते हैं। अगर आपको लगता है कि पहिए तो
लोहे से ही बनते होंगे तो आप यहां भी गलत हैं। आपको बता दें कि फोर्ज्ड स्टील या
फिर कार्बन स्टील मिक्स धातु से बनाए जाते हैं। ये पहिए बहुत ही मजबूत,
उच्च दबाव और भारी
वजन को सहने के लिए बनाया जाता है।
कोर्ट ने अंधविश्वास, जादू-टोना, नरभक्षण, सती प्रथा के बारे में क्या कहा….?
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस
जॉयमाल्य बागची ने सॉलिसिटर जनरल से महत्वपूर्ण सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि अगर
जादू-टोना को धार्मिक प्रथा का हिस्सा बताया जाए, तो क्या उसे अंधविश्वास
माना जाएगा या नहीं? उन्होंने आगे पूछा कि
यदि ऐसे मामलों में विधायिका चुप रहती है, तो क्या अदालत अछूते
क्षेत्र के सिद्धांत का सहारा लेकर सार्वजनिक व्यवस्था
और नैतिकता के आधार पर ऐसी प्रथाओं पर रोक नहीं लगा सकती? इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया कि अदालत सार्वजनिक व्यवस्था,
नैतिकता
और स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन केवल अंधविश्वास
के
आधार पर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों के पास यह अधिकार नहीं है कि वे तय
करें कि कोई ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ अंधविश्वास है या नहीं,
चाहे
जज कितने भी विद्वान क्यों न हों। पीठ ने कहा,अदालत को यह तय करने का
अधिकार है कि क्या यह प्रथा अंधविश्वास है। इसके बाद विधायिका को इस पर क्या करना
है,यह तय करना होगा। लेकिन अदालत में आप यह नहीं कह
सकते कि 'अंतिम निर्णय विधायिका का है'। ऐसा नहीं हो
सकता..." पीठ ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए अन्य अंधविश्वासी प्रथाओं-जादू-टोना,
नरभक्षण
और सती के उदाहरण दिए। केंद्र का कहना है कि अदालतों को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई
आवश्यक धार्मिक प्रथा अंधविश्वास है या नहीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का तर्क है कि
अदालतों को, चाहे न्यायाधीश कितने भी विद्वान क्यों न हों,
यह तय
करने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं है कि कोई आवश्यक
धार्मिक
प्रथा अंधविश्वास है या नहीं।
सॉलिसिटर जनरल ने न्यायमूर्ति बागची से कहा कि अदालत
को किसी प्रस्ताव का परीक्षण अतिवादी आधार पर नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति बागची
ने जवाब दिया कि तर्क की तार्किक समझ का आकलन करने के लिए रिडक्टियो एड एब्सर्डम
सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने सबरीमाला
मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों
के पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और
सीमा से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है। कल भी इस मामले की
सुनवाई हुई थी, जिसमें कोर्ट ने कई अहम बातें कही थीं। नौ
जजों की पीठ विशेष रूप से अनुच्छेद 25 और 26
पर
विचार करेगी, जो धर्म और धार्मिक संप्रदाय की स्वतंत्रता से
संबंधित हैं। मंगलवार (7 अप्रैल,
2026) को पिछली सुनवाई में, केंद्र सरकार की ओर से
पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी विशेष आयु वर्ग के किसी खास
जेंडर को पूजा स्थल में
प्रवेश करने से रोकना भेदभाव नहीं है।




























