“राधा के श्याम” जीवन साथी 26 वां परिचय सम्मेलन समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो व सिंधी सोशल फोरम का संयुक्त उपक्रम
नागपुर:- सिंधी समाज द्वारा
नागपुर शहर में पिछले 25 सालों से पूरे भारत में प्रख्यात परिचय सम्मेलन को हर वर्ष काफी अच्छा प्रतिसाद मिलता रहा है। इसी कडी को
आगे बढाते हुए इस साल भी 29/11/2026 को पुज्य समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो नागपुर और सिंधी
सोशल फोरम नागपुर संयुक्त रूप से मिलकर स्वागत लान पाम रोड सिव्हिल लाइन नागपुर मे
26 वे परिचय सम्मेलन का आयोजन कर रहे है। पुज्य समाधा आश्रम मैरेज ब्यूरो नागपुर
और सिंधी सोशल फोरम नागपुर के सभी सदस्यगणों ने सिंधी समाज के पालकों
और युवक युवतियों से अनुरोध किया है कि अपने बेटे या बेटी का शादी-विवाह योग्य
उच्च शिक्षित वर्ग के ( Doctor , Engineer, CA ,CS , MBA, Architech,LLB, LLM,B PHARM, M PHARM,HOTEL
MANAGEMENT, MA, MCOM, MSC, MS, MPHIL, MLIB, BED, MED, MCA, ICWA, PGDBN, PGDCA,
ANY POST GRADUATE DIPLOMA/ DEGREE) युवक व युवतियों का
अंतरराष्ट्रीय परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाता रहा है।इस परिचय सम्मेलन में
पंजीकरण करवाये ताकि एक ही समय एक ही स्थान पर शादी-विवाह लायक युवक-युवतियों का
अवलोकन कर अपने जीवन साथी का चयन कर सकें। पंजीकरण शुल्क मात्र रूपये 1500/- है। युवक और युवतीयों के केवल 100 - 100 पंजीकरण किए जाएंगे
इसलिये सभी से अनुरोध है कि अपना पंजीकरण तुरंत करवाये। सम्मेलन में पंजीकृत
अभिभावकों के 3 सदस्यों की सुबह की चाय- नास्ता-दोपहर का खाना-शाम की चाय और दूर दराज से
आनेवाले अभिभावकों को रात का खाना पार्सल दिया जाएगा। दूर दराज से आने वाले अभिभावकों के लिए रात में लान पर ही रहने की और खाने की व्यव्स्था की गई है। अतः सभी सिंधी
भाई-बहनों से आग्रह पूर्वक नम्र निवेदन है कि अपने शादी-विवाह लायक बच्चों /
रिश्तेदारों का पंजीकरण करवाएं। इस समाजसेवी
कार्य उपलक्ष्य में आयोजकों द्वारा:- श्रीमान फतनदास गोपचंदानी,श्रीमान पेसूराम दारा,श्रीमान दिलीप सावलानी,श्रीमान प्रकाश चेतवानी और श्रीमान अशोक माखीजानी ने
सिंधी समाज के लोगों से अधिकाधिक लाभ लेने की प्रार्थना की है। अधिक जानकारी के लिए
संपर्क करें:- Contact
numbers:- Pujya samadha marriage Beuro Nagpur-7447626066 / Sindhi Social Forum
Nagpur-9503237161
न्यायपालिका को कोई धमका नहीं सकता,राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी और अन्य इंडिया ब्लॉक नेताओं द्वारा दायर उन
याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें SIR
से संबंधित निर्णयों को
लेकर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के कामकाज पर सवाल उठाए गए
थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन के अन्य नेताओं के सुप्रीम कोर्ट
परिसर पहुंचने के दौरान हुई नारेबाजी और कथित हंगामे मामले में आज सुनवाई हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को इस मामले में फटकार लगाई। साथ ही नोटिस भी जारी
किया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने राहुल गांधी
के सुप्रीम कोर्ट मार्च का जिक्र करते हुए कहा,न्यायपालिका को कोई धमका
नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट में हुए विरोध प्रदर्शन का मुद्दा सॉलिसिटर
जनरल तुषार मेहता और सीनियर वकील गौरव भाटिया द्वारा उठाए जाने के बाद कोर्ट ने
संक्षिप्त टिप्पणी की। सीनियर वकील गौरव भाटिया ने कहा कि कोर्ट परिसर में जो हुआ,
उससे वकील आहत हैं और 200
वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट
बार एसोसिएशन (SCBA) को चिट्ठी लिखी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोर्ट को धमकाने की कोशिश की गई। इस पर CJI
ने दो टूक कहा कि कोर्ट को
कोई धमका नहीं सकता। उन्होंने कहा कि लोग बाहर कुछ भी बोलते हैं,
लेकिन अदालत में आकर उनकी
भाषा बदल जाती है। भाटिया के इस दावे पर कि
विपक्ष का विरोध प्रदर्शन और सुप्रीम कोर्ट मार्च अदालत पर दबाव बनाने
का प्रयास था।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने इन प्रयासों को कमजोर बताया। सीजेआई ने
कहा,ये कमजोर प्रयास हैं जिन पर कोई ध्यान नहीं देता। बाहर वे बयान देते हैं। हम
कोई अलग-थलग जगह पर नहीं बैठे हैं, हमें भी चीजों की जानकारी
है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इंडिया ब्लॉक के
विरोध प्रदर्शन के दौरान अदालत परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित रखा जाए।
आचार की टंकियों में मच्छर, मकड़ियां, जाले और मृत छिपकलियां…. खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने श्री श्याम फूड्स के बेसमेंट का निरीक्षण किया।
यहां करीब 100 प्लास्टिक की टंकियों में आचार और उसे बनाने का कच्चा माल
रखा हुआ था। इनमें लगभग 5 हजार किलो तैयार आचार और
गाजर, कैरी, नींबू व मिर्च सहित करीब 80
हजार किलो कच्चा माल मिला। जांच के दौरान
टंकियों में मच्छर, मकड़ियां और जाले पाए गए। वहीं, एक-दो टंकियों में मृत
छिपकलियां भी मिलीं। परिसर की खिड़कियां और जालियां टूटी हुई थीं और आस-पास गंदगी फैली हुई थी। राजस्थान की राजधानी जयपुर में उपभोक्ताओं तक पहुंचने वाले
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल,
जयपुर के मुहाना मंडी स्थित
श्री श्याम फूड्स में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच के दौरान आचार की टंकियों में
मच्छर, मकड़ियां, जाले और मृत छिपकलियां
मिलीं। विभाग ने कार्रवाई करते हुए करीब 85 हजार किलो तैयार आचार और
कच्चे माल को सीज कर दिया है। साथ ही, परिसर को सील कर खाद्य
कारोबार पर भी रोक लगा दी गई। निरीक्षण के दौरान विभाग ने सॉस,
मिक्स आचार और आम के आचार
के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे। इसके अलावा, करीब 1,700
किलो पैकिंग किए हुए आचार
और सॉस को भी सीज किया गया। दूषित होने की आशंका के चलते कुल करीब 85
हजार किलो सामग्री को नष्ट
करवाने की कार्रवाई शुरू की गई है।
खाद्य सामग्री को चोरी-छिपे बेचने या खुर्द-बुर्द करने की आशंका के चलते परिसर सील कर दिया
गया है। खाद्य कारोबार पर अग्रिम आदेशों तक रोक लगाई गई है। विभाग ने फर्म का खाद्य
लाइसेंस निलंबित करने के लिए भी नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रयोगशाला रिपोर्ट और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर खाद्य सुरक्षा
एवं मानक अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। मुहाना स्थित पायोनियर
नेचुरल प्रोडक्ट्स के निरीक्षण में भी खाद्य उत्पादों पर स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक
दावों और अधूरे पते जैसी अनियमितताएं मिलीं। विभाग ने नमूने लेकर संबंधित माल सीज
किया और अग्रिम आदेशों तक उत्पादों का निर्माण व बिक्री बंद रखने के निर्देश दिए।
बहुत बड़े नकली टोमेटो सॉस रैकेट का भंडाफोड़….
टमाटर के नाम पर इस फैक्ट्री में बीमारियों का खतरनाक कॉकटेल तैयार हो रहा था।
यहां सड़े हुए आलू, स्टार्च, एसिटिक एसिड और घातक केमिकल
कलर्स को मिलाकर हूबहू टमाटर जैसा दिखने वाला सॉस बनाया जा रहा था,
जो सीधे लोगों की सेहत से
खिलवाड़ था। फूड सेफ्टी विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मौके से करीब
10000 किलोग्राम (दस हज़ार किलोग्राम) तैयार नकली सॉस और रॉ
मटीरियल जब्त किया, जिसे तुरंत नष्ट कर दिया
गया है। दरअसल,अहमदाबाद
से स्वास्थ्य से जुड़ी बड़ी
खबर सामने आ रही है। अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) के फूड सेफ्टी विभाग ने शहर
में चल रहे एक बहुत बड़े नकली टोमेटो सॉस रैकेट का
भंडाफोड़ किया है।
यह पूरी कार्रवाई अहमदाबाद
के गोता इलाके में अंजाम दी गई, जहां थोड़े समय पहले से एक
फैक्ट्री में नकली टमाटर का सॉस बनाकर धड़ल्ले से बाज़ारों में बेचा जा रहा था। जब
फूड सेफ्टी विभाग की टीम ने यहां छापा मारा, तो वहां का नजारा देखकर
अधिकारी भी दंग रह गए। जिस सॉस को लोग बड़े चाव से खाते हैं,
उसे बनाने में टमाटर का
इस्तेमाल एक प्रतिशत भी नहीं किया जा रहा था। इस जालसाज फैक्ट्री मालिक के खिलाफ
पहले भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है। लेकिन लालच में अंधे हो चुके इस
कारोबारी ने कानून को ठेंगा दिखाते हुए दोबारा दूसरे नाम से उसी जगह पर नकली
टोमेटो केचप बनाने का यह काला धंधा फिर से शुरू कर दिया,लेकिन इस बार AMC
प्रशासन बेहद सख्त मूड में
है। अधिकारियों का कहना है कि इस बार इस मिलावटखोर को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं
जाएगा। AMC अब कानूनी तौर पर यह पुख्ता तौर पर सुनिश्चित करने जा रही
है कि इस आरोपी को भविष्य में कभी दोबारा नया बिजनेस लाइसेंस ही न मिले,
ताकि यह फिर कभी लोगों की
जिंदगी के साथ ऐसा जानलेवा खिलवाड़ न कर सके।
बच्चों की सेहत से खिलवाड़ बैलों,घोड़ों, गायों, भैंसों जैसे पशुओं की..नकली स्टिकर लगाकर,नकली दवाएं
पुलिस की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, पशुओं के लिए इस्तेमाल होने
वाले 1 लीटर के पैक की कीमत करीब 330 रुपये बताई गई है,
जबकि मनुष्यों के लिए बेचे
जाने वाले 60 ML ‘लिव.52 ड्रॉप्स की बताई गई MRP 160 रुपये है। आरोप है कि आरोपी
बड़े पैक से तरल पदार्थ छोटी बोतलों में भरकर उन्हें कथित नकली लेबल के साथ अधिक
कीमत पर बेचता था। इस प्रक्रिया से अवैध मुनाफा कमाने का संदेह है।
पुलिस के अनुसार,
आरोपी पिछले करीब एक साल से
इस गतिविधि में संलिप्त था। पूछताछ में लगभग 1,000 बोतलें बेचने की बात सामने
आने का दावा किया गया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इन बोतलों की
बिक्री किन-किन क्षेत्रों में की गई और
क्या इन्हें अन्य मेडिकल स्टोर, अस्पतालों या क्लीनिकों तक भी पहुंचाया गया था।
दरअसल,गुजरात के सूरत शहर में
बच्चों और आम नागरिकों की सेहत से खिलवाड़ करने का गंभीर मामला सामने आया है। सूरत
स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने खाद्य एवं औषधि विभाग की टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए गोपीपुरा के मोमनावाद रोड
स्थित शांतिनाथ मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। यहां से मेडिकल
स्टोर संचालक मोहम्मद
साजिद इब्राहिम मुल्ला को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर पशुओं के लिए इस्तेमाल होने
वाले लिवर टॉनिक को छोटी बोतलों में भरकर, उन पर नामी कंपनी के नकली
स्टिकर लगाकर बेचने का आरोप है। जांच के अनुसार,
आरोपी घोड़ों,
गायों,
भैंसों और बैलों जैसे पशुओं
के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘लिव.52 प्रोटेक लिक्विड एनिमल फीड सप्लीमेंट’ के 1
लीटर और 5
लीटर के पैक से तरल पदार्थ
निकालकर 60 ML और 100 ML की छोटी बोतलों में भरता
था। इसके बाद इन बोतलों पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले नकली लेबल चिपकाकर
बाजार में बेचा जाता था।
इस तरह पशुओं के लिए बने
उत्पाद को मानव उपयोग की दवा के रूप में पेश किए जाने का आरोप है। मामले की
गंभीरता को देखते हुए SOG और खाद्य एवं औषधि विभाग की
टीम जांच कर रही है। जांच के अनुसार,
आरोपी घोड़ों,
गायों,
भैंसों और बैलों जैसे पशुओं
के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘लिव.52 प्रोटेक लिक्विड एनिमल फीड सप्लीमेंट’ के 1
लीटर और 5
लीटर के पैक से तरल पदार्थ
निकालकर 60 ML और 100 ML की छोटी बोतलों में भरता
था। इसके बाद इन बोतलों पर बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाले नकली लेबल चिपकाकर
बाजार में बेचा जाता था। इस तरह पशुओं के लिए बने
उत्पाद को मानव उपयोग की दवा के रूप में पेश किए जाने का आरोप है। मामले की
गंभीरता को देखते हुए SOG और खाद्य एवं औषधि विभाग की
टीम जांच कर रही है। जांच में यह भी सामने आया
है कि शांतिनाथ मेडिकल स्टोर करीब 20 साल पुराना है। हालांकि,
दुकान के संचालन से संबंधित
लाइसेंस हाल ही में जारी होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि आरोपी की
बेटी ने बी.फार्म की पढ़ाई पूरी की है
और दुकान उसके फार्मासिस्ट लाइसेंस के आधार पर
संचालित हो रही थी। पुलिस अब इस पहलू की भी जांच कर रही है कि दुकान के संचालन और
कथित अवैध गतिविधियों में अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
पुलिस की जांच में यह आशंका
जताई गई है कि आरोपी आयुर्वेदिक उत्पाद होने के कारण इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित
मानकर बेच रहा था। हालांकि, पशुओं के लिए तैयार उत्पाद
को बिना उचित अनुमति और गुणवत्ता की पुष्टि के बच्चों या अन्य मनुष्यों को देना
स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है। किसी उत्पाद का आयुर्वेदिक होना अपने आप
में मानव उपयोग के लिए उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं है। प्राप्त जानकारी के अनुसार,
आरोपी मोहम्मद साजिद मुल्ला
के खिलाफ संबंधित पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023
की धाराओं 123,
125, 336(2), 336(3), 336(4) और 278 सहित अन्य संबंधित कानूनों
के तहत मामला दर्ज किए जाने की बात कही गई है। मामले में औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन
संबंधी कानूनों तथा अन्य लागू प्रावधानों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। SOG
अब कथित नकली स्टिकर कहां
छपवाए गए, बोतलों की आपूर्ति कहां-कहां की गई और इस गतिविधि
में अन्य लोग शामिल थे या नहीं, इसकी जांच शुरू कर दी है।
UCC- लैंड जिहाद कानून लाने की तैयारी में PB-CM शुभेंदु अधिकारी सरकार
पश्चिम बंगाल-CM शुभेंदु अधिकारी ने दुर्गा पूजा को लेकर राज्य में भाजपा के सत्ता में आने के बाद
से उठाए गए कई कदमों का जिक्र करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने
कौशिकी अमावस्या पर तारापीठ में कांवड़ यात्रियों और भक्तों पर हेलीकॉप्टर से फूल
बरसाए थे। साथ ही,
उन्होंने कहा कि
पितृपक्ष के दौरान दुर्गा पूजा शुरू करने की इजाजत नहीं दी जाएगी
और कहा कि केंद्रीय
गृह मंत्री अमित शाह ईडन गार्डन्स में होने वाले बड़े महालया कार्यक्रम में मुख्य
अतिथि होंगे, जहां VHP को भी बुलाया जाएगा। शुभेंदु अधिकारी ने आने वाले कई
कार्यक्रमों की जानकारी दी, जिसमें नवंबर में नेताजी इंडोर स्टेडियम
में 20,000 लोगों द्वारा हनुमान चालीसा का पाठ और 29
दिसंबर को 10
लाख लोगों द्वारा
सामूहिक गीता पाठ शामिल है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को बताया कि उनकी सरकार ने अगले साल
गंगासागर मेले की तैयारी शुरू कर दी है, जिसमें इंटरनेशनल स्टैंडर्ड की सुविधाएं
होंगी। पश्चिम बंगाल
की भाजपा सरकार
समान नागरिक संहिता लागू करने के बाद लव जिहाद,
लैंड जिहाद
और धर्म परिवर्तन के
खिलाफ सख्त कानून लाएगी। मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा और वादों को पूरा करने के लिए छह महीने का समय
मांगा।
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म
शताब्दी के मौके पर कोलकाता एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए,उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार
संविधान के अनुसार काम करेगी,लेकिन भारतीय संस्कृति,परंपरा और पूजा स्थलों पर हमलों को
बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा,यह सरकार यहां किसी भी देश-विरोधी गतिविधि
की अनुमति नहीं देगी।
शुभेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी में देश-विरोधी ताकतों
के खिलाफ राष्ट्रवादी
युवाओं के विरोध प्रदर्शन पर एक अखबार की रिपोर्ट का जिक्र किया
और दावा किया कि कुछ
लोग अभी भी वहां आजादी का नारा लगा रहे हैं। उन्होंने कहा,हमें उन्हें जड़ से उखाड़ फेंकना होगा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग तब चुप
रहते हैं जब आतंकवादी पीड़ितों को चुनकर, उनके धर्म के आधार पर उन्हें नंगा करके
मार देते हैं, लेकिन जब IAF दुश्मन के इलाके में 100
km अंदर
आतंकी ढांचे को नष्ट
करती है तो वे जुलूस निकालते हैं। भगवा रंग का गलत इस्तेमाल या अनदेखी करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए,
क्योंकि कई लोगों के
लिए इसका गहरा मतलब है। शुभेंदु
अधिकारी ने कहा,आप निश्चिंत रह सकते हैं कि सरकार संविधान के अनुसार काम करेगी,
लेकिन यह भारतीय
संस्कृति, सनातनी परंपराओं, मंदिरों और मठों, और हमारी विरासत पर किसी भी हमले की
इजाज़त नहीं देगी, जिसे आध्यात्मिक गुरु विवेकानंद और
महाप्रभु श्री चैतन्य ने बताया है। समान नागरिक संहिता के बारे में बात करते हुए, मुख्यमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल समान
नागरिक संहिता लागू करने में उत्तराखंड और गुजरात की तरह काम करेगा। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा,हम समान नागरिक संहिता के बाद लव जिहाद,
लैंड जिहाद और धर्म
परिवर्तन के खिलाफ कड़े कानून लाएंगे। हमें छह महीने दीजिए। पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (UCC)
के प्रारूप की जांच
के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अगुवाई में एक
हाई-लेवल कमेटी बनाई है।
गैस सिलेंडर में शराब की तस्करी,पुलिस गिरफ्त में आरोपी
गोपालगंज के
कुचायकोट थाना क्षेत्र के कर्म टोला फुलवरिया के पास का है। उत्पाद टीम यहां शराब
तस्करी के खिलाफ जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान यूपी की तरफ से एक बाइक आती
दिखाई दी। बाइक पर एक सिलेंडर लदा था और उसे चादर से ढककर रखा गया था। पुलिस ने
बाइक को रोका और जब सिलेंडर की जांच शुरू की तो पूरा मामला खुल गया। सिलेंडर को जब
खोला गया तो उसमें एक गुप्त तहखाना बनाया गया था। इस तहखाने में गैस की जगह शराब
की बोतलें छिपाकर रखी गई थीं। दरअसल,बिहार के गोपालगंज में शराब तस्करी का एक
ऐसा तरीका सामने आया है,जिसे देखकर उत्पाद विभाग की टीम भी हैरान
रह गई। यूपी की तरफ
से एक बाइक पर सिलेंडर लादकर एक शख्स गोपालगंज आ रहा था। सिलेंडर
ऊपर से चादर से ढका हुआ था। पुलिस को शक हुआ तो बाइक को रोककर जांच की गई,लेकिन
जैसे ही सिलेंडर की चादर हटाई गई और उसकी जांच हुई, तो अंदर का नजारा देखकर पुलिस के भी होश
उड़ गए। उत्पाद पुलिस के मुताबिक, सिलेंडर से 200 एमएल की 127 पीस बंटी-बबली शराब बरामद की गई है। पुलिस
ने बाइक को भी जब्त कर लिया है और आरोपी तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया है।
उत्पाद
अधीक्षक अमृतेश कुमार के मुताबिक, गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ की जा रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसे कहां
पहुंचाया जाना था।
इसके साथ ही आरोपी के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज को भी खंगाला
जा रहा है, ताकि शराब तस्करी से जुड़े दूसरे लोगों तक पहुंचा जा सके। गोपालगंज के
अलग-अलग इलाकों में वाहन जांच से लेकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
फिलहाल सिलेंडर के अंदर बनाए गए इस गुप्त तहखाने ने शराब तस्करी के नए तरीके का
खुलासा हुआ है। अब पुलिस की जांच इस बात पर टिकी है
कि आखिर इस शराब के पीछे कौन है और यूपी से गोपालगंज तक चल रहे इस नेटवर्क में और
कितने लोग शामिल हैं।
मुस्लिम पर्सनल लॉ नाबालिग पत्नी के यौन उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं दिल्ली हाई कोर्ट...
कोर्ट
ने ये टिप्पणियां तब कीं जब उसने अपनी नाबालिग पत्नी के यौन उत्पीड़न के आरोपी एक
व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। शादी के समय
लड़की की उम्र 16 साल तीन
महीने थी, जबकि
आरोपी की उम्र 28 साल थी।
इसके बाद वे साथ रहने लगे और लड़की गर्भवती हो गई। गर्भावस्था के दौरान सरकारी
अस्पताल जाने पर उसकी उम्र का पता चला। दरअसल,दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले
में मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर छूट देने से इनकार कर दिया। याचिका में जोड़े ने
तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, एक मुस्लिम लड़की बालिग होने पर शादी के लिए
योग्य होती है और चूंकि शादी वैध है, इसलिए उसके बाद बने यौन संबंधों से कोई आपराधिक
दायित्व नहीं बनता है। हालांकि,
कोर्ट ने कहा कि इस तर्क को स्वीकार नहीं
किया जा सकता कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुई शादी के बाद बने यौन संबंध अपने आप
अपराध की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानूनों के तहत
आपराधिक दायित्व से छूट का दावा करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ का सहारा नहीं लिया
जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग पुरुष को पर्सनल लॉ के तहत मान्यता
प्राप्त मैरिज सर्टिफिकेट दिखाकर 18 साल से कम उम्र की लड़की से जुड़े मामले में
जिम्मेदारी से बचने की इजाजत दी जाती है, तो इससे POCSO एक्ट का मकसद खत्म हो जाएगा। इसीलिए POCSO
में किसी भी तरह की छूट नहीं मिलेगी और
केस दर्ज किया जाएगा। जस्टिस संजीव नरूला ने 23 सितंबर के एक आदेश में ये बातें कहीं,अस्पताल
प्रशासन द्वारा पुलिस को मामले की जानकारी देने के बाद व्यक्ति के खिलाफ POCSO
एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं,
पुलिस को दिए बयान में लड़की ने कहा कि
शादी दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और उस पर कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं की गई
थी। उसने पति की जमानत अर्जी का समर्थन किया था और गर्भावस्था के दौरान उसकी
मौजूदगी की इच्छा जताई थी।
बच्चो का अपहरण कर भीख मंगवाने के गिरोह का भांडाफोड़...
बच्चे के अपहरण के
मामले में रांची पुलिस ने साहिबगंज पुलिस के सहयोग से पांच आरोपियों को गिरफ्तार
किया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी
सार्वजनिक स्थानों से छोटे बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करने के बाद उन्हें
साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में रखते थे। यहां बच्चों से भीख मंगवाने और अन्य
आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। मामला 24
सितंबर की सुबह का है। बच्चे की मां अपने
चार वर्षीय बेटे के साथ छत्तीसगढ़ स्थित अपने घर लौट रही थी। ट्रेन बदलने के लिए वह
रांची रेलवे स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन के इंतजार के दौरान स्टेशन परिसर के बाहर से
उसका चार वर्षीय बेटा अचानक
गायब हो गया। काफी तलाश के बाद बच्चे का पता नहीं चला
तो मां ने रांची के चुटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। मामला संवेदनशील होने के कारण रांची पुलिस ने
बच्चे की तलाश के लिए विशेष टीम का गठन किया। विशेष टीम ने तकनीकी अनुसंधान और
ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए बच्चे से जुड़े सुराग जुटाने शुरू किए। जांच के दौरान
पुलिस को अपहरण में शामिल एक आरोपी के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद रांची
पुलिस ने धनबाद पुलिस के सहयोग से एक आरोपी को धनबाद रेलवे स्टेशन के पास से
गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे
बढ़ाया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से
अपहृत चार वर्षीय बच्चे को भी सकुशल बरामद कर लिया। बच्चे की बरामदगी के बाद
चुटिया थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों को
सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में गिरोह के काम करने
के तरीके को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक,
आरोपी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे
सार्वजनिक स्थानों के आसपास छोटे बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करते थे। इसके बाद
बच्चों को साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। आरोप है
कि बच्चों को भीख मांगने के लिए तैयार किया जाता था। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि बच्चों का
इस्तेमाल अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता था। हालांकि,
गिरोह के पूरे नेटवर्क और बच्चों से कराए
जाने वाले अपराधों की जानकारी पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया पर सवालिया निशान...?
महाराष्ट्र के रहने वाले तीन
लोगों ने याचिका कोर्ट में दायर की है। इसमें दावा किया गया है कि दोनों चुनाव
आयुक्तों की आपत्तियां वोटरों के नाम हटाने, ऐड करने, इलेक्टोरल रोल डेटाबेस आदि
को लेकर है। याचिकाकर्ता का कहना है मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2023
के
कानून के सेक्शन 18 के तहत अपना काम नहीं किया
है। उन्होंने 14 फैसलों को रद्द करने, महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया
रोके जाने की मांग की है। साथ ही, जिन लोगों के नाम एसआईआर
प्रोसेस में काट दिए गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने की
मांग की है। दरअसल,बॉम्बे हाई कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)
ज्ञानेश
कुमार के खिलाफ याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच में याचिका
दायर करके याचिकार्ता ने मांग की है कि महाराष्ट्र में हाल ही में हुए स्पेशल
इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए
गए
हर मतदाता को वापस लाया जाए. साथ ही, ज्ञानेश कुमार के आदेशों को
भी रद्द करने की मांग की गई है। दरअसल याचिका में महाराष्ट्र में हालिया SIR
(Special Intensive Revision) के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की
गई है। साथ ही ECI और CEC ज्ञानेश कुमार द्वारा पिछले
करीब 10 महीनों में जारी 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द
करने की मांग की गई है। साथ ही महाराष्ट्र में SIR
प्रक्रिया
पर रोक लगाने की मांग की गई। विभिन्न राज्यों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया भी
ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों की देखरेख में हो रहा है। इस प्रक्रिया को
लेकर विपक्ष जमकर विरोध कर चुका है। राहुल गांधी, ममता बनर्जी समेत तमाम
विपक्षी नेता इस प्रक्रिया के खिलाफ हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि यह विपक्षी दलों
के वोटों को काटने की प्रक्रिया है।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों से
इनकार किया है। SIR वाले राज्यों में आगामी
विधानसभा चुनावों को तब तक टालने की मांग की गई है,जब तक नए और कानून के अनुरूप
इलेक्टोरल रोल तैयार न हो जाएं। हालिया SIR में कथित डाटा डिटेक्शन और
सॉफ्टवेयर ब्लॉकेज की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र
न्यायिक समिति बनाने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है, ‘पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग और CEC
ज्ञानेश
कुमार ने जिन 14 प्रशासनिक आदेशों को पारित किया है, उन्हें रद्द किए जाएं। इसके
बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने इन आदेशों पर
आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और
विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस को लेकर
कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई थी।
कहां होनी थी सप्लाई 10 हजार से अधिक गर्भपात किट बरामद....
जानकारी के अनुसार औषधि नियंत्रक विभाग को सूचना मिली थी कि
धार कोठी क्षेत्र स्थित एक मकान के गोदाम में बड़ी मात्रा में ऐसी दवाइयों और किट
का भंडारण किया गया है, जिनका
इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है। सूचना के सत्यापन के बाद विभागीय टीम ने मौके
पर पहुंचकर गोदाम की जांच की। बताया जा रहा है कि कार्रवाई जिला कलेक्टर शिवम
वर्मा के निर्देशन में की गई। छापेमारी के
दौरान बड़ी संख्या में किट मिलने के बाद अधिकारियों ने सामग्री को अपने कब्जे में
ले लिया और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। दरअसल,मध्य प्रदेश के इंदौर में औषधि नियंत्रक विभाग ने धार कोठी
क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मकान में बने गोदाम
पर छापा मारा। विभाग की
टीम ने यहां से 10 हजार से
अधिक गर्भपात किट बरामद किए जाने का दावा किया है। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत
करीब 52 लाख रुपये
बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद विभाग ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर जांच
शुरू कर दी है। कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अधिकारी यह
पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बरामद किट कहां से खरीदी या मंगाई गई थीं और
इन्हें किन लोगों या संस्थानों तक पहुंचाया जाना था। इसके लिए सप्लाई से जुड़े
दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच
पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बरामद सामग्री की कानूनी स्थिति क्या है और
इसके भंडारण या सप्लाई में किन लोगों की भूमिका रही है। संबंधित व्यक्तियों के
खिलाफ नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की संख्या, दवाइयों की वैधता, बैच नंबर
और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है
कि इतनी बड़ी मात्रा में गर्भपात किट गोदाम तक कैसे पहुंचीं और इन्हें कहां सप्लाई
किया जाना था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिस मकान में गोदाम संचालित हो
रहा था, वह किसके
नाम पर है। विभाग की टीम गोदाम के मालिक और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा
रही है। फिलहाल औषधि नियंत्रक विभाग की कार्रवाई जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट
का इंतजार है। कलेक्टर शिवम वर्मा की ओर से भी मामले में विभागीय जांच और आगे की
कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी।

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