क्या है 60 दिन का अमेरिकी H-1B वीजा ग्रेस पीरियड ?

अमेरिका में H-1B वीजा पर काम कर रहे किसी व्यक्ति की नौकरी चली जाती है या उसे कंपनी से निकाल दिया जाता है, तो उसे अमेरिका में कानूनी रूप से रहने के लिए 60 दिन का ग्रेस पीरियड यानी मोहलत मिलती है। इस 60 दिन के समय में वह कर्मचारी,किसी नई कंपनी में नौकरी खोज सकता है, जो उसके वीजा को स्पॉन्सर कर सके। अपने वीजा की कैटेगरी बदल सकता है (जैसे स्टूडेंट वीजा या टूरिस्ट वीजा में) या फिर अपने देश वापस लौटने की पूरी तैयारी कर सकता है। यह नियम साल 2017 में लागू किया गया था। यह सिर्फ H-1B तक सीमित नहीं है, बल्कि L-1, O-1, E-1, E-2, E-3, H-1B1 और TN वीजा धारकों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों पर भी लागू होता है। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने 60 दिन के इस सुरक्षा कवच को खत्म करने का एक नया प्लान तैयार किया है। इस प्रस्ताव को समीक्षा के लिए व्हाइट हाउस ऑफिस ऑफ मैनेजमेंट एंड बजट (OMB) के पास भेज दिया गया 
है। यह कदम ट्रम्प प्रशासन की उस बड़ी नीति का हिस्सा है, जिसके तहत H-1B प्रोग्राम को और अधिक सख्त बनाने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी सरकार का तर्क है कि इस वीजा प्रोग्राम का दुरुपयोग किया जा रहा है और इसके जरिए अमेरिकी नागरिकों की नौकरियां छीनी जा रही हैं। इस संभावित बदलाव की सबसे बड़ी मार भारतीयों पर ही पड़ेगी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा H-1B वीजा भारतीयों को ही मिलते हैं। साल 2024 में मंजूर किए गए कुल H-1B आवेदनों में से 71% हिस्सा अकेले भारतीयों का था। 

फिलहाल 52 लाख से अधिक भारतीय मूल के लोग अमेरिका में रह रहे हैं। अगर 60 दिन की मोहलत खत्म हो जाती है, तो नौकरी जाने की स्थिति में भारतीय कर्मचारियों को लगभग तुरंत ही देश छोड़ना पड़ेगा। उनके पास नया स्पॉन्सर खोजने या वीजा ट्रांसफर कराने का कोई समय नहीं बचेगा, जब तक कि इमिग्रेशन अधिकारी कोई विशेष छूट न दें। अगर आप या आपका कोई जानने वाला अमेरिका में है, तो फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. अभी यह नियम लागू नहीं हुआ है। प्रस्ताव अभी OMB के पास रिव्यू होने के लिए भेजा गया है। जब वहां से इसे मंजूरी मिल जाएगी, तब इसे फेडरल रजिस्टर में पब्लिश किया जाएगा। इसके बाद आम जनता को इस पर अपनी राय देने के लिए 30 से 60 दिन का समय दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के बाद ही DHS इस नियम को अंतिम रूप देकर लागू कर सकता है यानी अभी 60 दिन का ग्रेस पीरियड पूरी तरह से एक्टिव है और नौकरी जाने पर किसी को भी तुरंत अमेरिका छोड़ने की जरूरत नहीं है।
09 August 2026
Posted by achhiduniya

पुलिस-पशु तस्कर गठजोड़ का पर्दाफाश, 4 पुलिसकर्मी गिरफ्तार...

पशु तस्करी के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई ने कथित पुलिस-तस्कर गठजोड़ का खुलासा बिहार के मुंगेर जिले में NH-333B पर पुलिस ने 35 भैंसों से लदे एक ट्रक को पकड़ा, जिसमें चार भैंस मृत पाई गईं।  मामले की जांच के दौरान पुलिस ने ट्रक की कथित पासिंग कराने वाले एक लाइनर को गिरफ्तार किया। उसके मोबाइल की जांच में कुछ पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों से संपर्क के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस ने यातायात थाना के सहायक अवर निरीक्षक (ASI) अयोध्या कुमार समेत चार पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में ट्रक चालक, सहायक चालक और कथित लाइनर समेत कुल सात लोगों की गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तार 
आरोपियों में ट्रक चालक अमित कुमार उर्फ मैनू, सहायक चालक मो. जियाउल हक, कथित लाइनर राकेश कुमार उर्फ घनश्याम, यातायात थाना के ASI अयोध्या कुमार, चालक सिपाही विमलेश सिंह, मुफस्सिल थाना के गृह रक्षक सिपाही अरविन्द यादव और यातायात थाना के गृह रक्षक सिपाही अभिलेश कुमार शामिल हैं। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान एक ट्रक, एक अपाचे बाइक, सात मोबाइल फोन, 47 हजार रुपये नकद और 35 भैंस बरामद की हैं. इनमें चार भैंस मृत मिलीं। पुलिस जांच में सभी आरोपियों के खिलाफ सबूत पाए गए, जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था। पुलिस के अनुसार, मोबाइल जांच में सामने आए संपर्कों के आधार पर कुछ अन्य पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। संलिप्तता की पुष्टि होने पर उनके खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिले में पशु तस्करी के कथित नेटवर्क और तस्करों की पासिंग में पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह नेटवर्क कब से सक्रिय था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। मामले की जांच जारी है।
Posted by achhiduniya

बार-बार यौन शोषण ब्लैकमेलिंग फोन में मिले 200 अश्लील वीडियो आरोपी गिरफ्तार

 
पुलिस को शुरुआती जांच के आधार पर ये शक है कि साल 2022 से ही बच्चों और युवाओं का यौन शोषण और उनको ब्लैकमेल किया जा रहा था ये सिलसिला 6 अगस्त 2026 तक चला आरोपी द्वारा बच्चों और युवाओं का योन शोषण और उनको ब्लैकमेल करने की सूचना मिलने पर पुलिस ने एक विशेष टीम गठित कर उस पर नजर रखी इसके बाद, शहर के भोने फाटा इलाके से संदिग्ध परिस्थितियों में पाए जाने पर उसे गिरफ्तार किया गया। दरअसल,महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले से 40 बच्चों और युवाओं के कथित यौन शोषण और ब्लैकमेल का एक गंभीर मामला सामने आया हैइस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है आरोपी का नाम चेतन कोली है पुलिस ने आरोपी का मोबाइल और अन्य सामान जब्त किए हैं पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान आरोपी के फोन से 200 अश्लील वीडियो और बहुत सी तस्वीरें मिली हैं आरोपी पर अश्लील वीडियो बनाकर पीड़ितों का बार-बार यौन शोषण करने 
और उनके आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करने का आरोप हैजिला पुलिस अधीक्षक अश्विनी सनप ने बताया कि इस मामले में बच्चे और युवा पीड़ित हैं मामले की गहन जांच चल रही है नंदुरबार शहर के रायसिंहपुरा इलाके में आरोपी पैसों का लालच देकर बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाता था बाद में उन्हें प्रताड़ित करता थाइस संबंध में मिली शिकायत के अनुसार, 6 अगस्त को आरोपी ने एक नाबालिग लड़के को पपीते के खेत में मिलने के लिए बुलाया थाहालांकि, इससे पहले सादे कपड़ों में पुलिस इलाके पर नजर रख रही थी आरोपी के मौके पर पहुंचते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन में मौजूद वीडियो की जांच करके पीड़ितों की पहचान करने का काम शुरू कर दिया है आरोपी से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य सामान जब्त किए गए हैंबताया जा रहा है कि जब्त किए गए सामान की जांच के बाद वीडियो और तस्वीरों की संख्या बढ़ने की संभावना हैपुलिस फिलहाल डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है वहीं इस मामले के सामने आने के बाद हलचल मच गई है माता-पिता से अपने बच्चों का ख्याल रखने को कहा जा रहा हैसाथ ही उनसे अपने बच्चों के साथ लगातार संवाद बनाए रखने की सलाह दी जा रही है
Posted by achhiduniya

फौजियों (मिलट्री ड्रेस) की नकली कॉम्बैट कपड़े बेचने के कारोबार का पर्दाफाश....

उत्तर प्रदेश के बरेली में नकली सैन्य कॉम्बैट कपड़ा जांच में पता चला कि इस कपड़े का स्रोत राजस्थान के श्रीगंगानगर से जुड़ा हुआ है। इसके बाद भारतीय सेना की खुफिया टीम ने श्रीगंगानगर में गोपनीय जांच शुरू की. जांच में एक स्थानीय फर्म की भूमिका सामने आई। आरोप है कि यह फर्म श्रीगंगानगर शहर, लालगढ़ जट्टान, सूरतगढ़ और आसपास के बाजारों में दुकानों तक सेना के पैटर्न वाला नकली कॉम्बैट कपड़ा पहुंचा रही थी। सेना ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट जुलाई के मध्य में राजस्थान पुलिस को सौंपी। इसके बाद 30 जुलाई को सेना और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाया। इस दौरान जिले की कई दुकानों पर छापेमारी की गई। तलाशी में करीब 1,000 मीटर 
नए पैटर्न का बिना अनुमति वाला नकली सैन्य कॉम्बैट कपड़ा बरामद हुआ। अधिकारियों का कहना है कि सेना की वर्दी जैसे पैटर्न वाले कपड़े को बिना अनुमति रखन, बेचना या इस्तेमाल करना कानूनन अपराध है। ऐसे कपड़ों का गलत इस्तेमाल कर कोई व्यक्ति खुद को सेना का जवान बताने की कोशिश कर सकता है। इससे सुरक्षा संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए इस तरह के मामलों को गंभीरता से लिया जाता है। फिलहाल, मामले की जांच जारी है। एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क से और कौन-कौन लोग जुड़े हैं और नकली सैन्य वर्दी का यह कारोबार कितने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा था।  दरअसल, भारतीय सेना की खुफिया इकाइयों और राजस्थान पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर श्रीगंगानगर जिले में सेना की वर्दी जैसे दिखने वाले नकली कॉम्बैट कपड़े के कारोबार का पर्दाफाश किया है। कार्रवाई के दौरान करीब 1,000 मीटर बिना अनुमति वाला सैन्य पैटर्न का कपड़ा जब्त किया गया।
 
02 August 2026
Posted by achhiduniya

पति वही होगा, धारा 80 और 85 के तहत जिसने महिला से….

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फैसला सुनाया मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (दहेज हत्या) और धारा 85 (क्रूरता) से जुड़ा था। फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 80 और 85 के तहत पति वही होगा, जिसने महिला से कानूनी रूप से शादी की हो, न कि वह व्यक्ति जिसकी महिला के साथ शादी ही अमान्य है। आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब हुआ कि जिस व्यक्ति की दूसरी शादी पहली शादी के कायम रहने की वजह से अमान्य है, उसे आमतौर पर पति नहीं माना जा सकता यानी, पहली पत्नी जिंदा है और तलाक नहीं हुआ है तो दूसरी शादी अपने आप में अमान्य है और ऐसे मामले में व्यक्ति को दूसरी शादी में पति का दर्जा नहीं मिल सकता। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील कुमार नाम के शख्स की पहली पत्नी जिंदा थी। इसके बावजूद 
उसने तलाक दिए बगैर दूसरी शादी कर ली,लेकिन दूसरी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और सुनील कुमार पर BNS की धारा 80, 85 और दहेज कानून के तहत आरोप लगे। आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि महिला उसकी दूसरी पत्नी थी, क्योंकि यह शादी तब हुई थी जब उसकी पहली शादी कायम थी, इसलिए दूसरी शादी अमान्य थी और उसे पति नहीं माना जा सकता। इससे सवाल खड़ा हुआ कि अगर किसी व्यक्ति ने पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी की है तो क्या वह धारा 80 और 85 के तहत दूसरी पत्नी का पति माना जाएगा? 
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने माना कि पहली पत्नी के रहते हुए दूसरे शादी करने वाले व्यक्ति को पति नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने उन दो अपवादों का भी जिक्र किया, जहां यह नियम लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया कि दो परिस्थितियों में दूसरी शादी के मामले में भी व्यक्ति को पति माना जाएगा:- अगर पहली शादी को लेकर कोई संदेह हो तो दूसरी शादी में पति के तौर पर रह रहे व्यक्ति को धारा 80 और 85 के तहत पति की परिभाषा में शामिल किया जाएगा- अगर कोई व्यक्ति पहली पत्नी के होते हुए अपनी शादी को छिपाकर दूसरी महिला से शादी करता है और दूसरी पत्नी के साथ पति के तौर पर रहता है तो ऐसी स्थिति में भी उसे पति माना जाएगा नहीं। कोर्ट ने आगे साफ किया कि पहली शादी के रहते हुए की गई दूसरी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट, फॉरेन मैरिज एक्ट, क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, पारसी मैरिज एंड डिवोर्ट एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अमान्य होती है। हालांकि, कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होने वाली शादियों को इससे अलग माना। कोर्ट ने कहा कि अगर शादी शरिया कानून से हुई है तो दूसरी, तीसरी और चौथी शादी भी मान्य होगी और ऐसे मामलों में मुस्लिम व्यक्ति को धारा 80 और 85 के तहत पति माना जाएगा।
23 July 2026
Posted by achhiduniya

कब कर सकती है पुलिस लाठीचार्ज क्या है कानून....?

भारतीय अदालतों ने कई फैसलों में साफ कहा है कि पुलिस केवल न्यूनतम और उचित बल का ही इस्तेमाल कर सकती है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि बल प्रयोग से पहले तीन बातें जांचना जरूरी हैं। पहला, जमावड़ा गैरकानूनी हो। दूसरा, भीड़ को पहले हटने का आदेश देना होगा और तीसरा, आदेश के बावजूद भीड़ न हटे। इन तीनों शर्तों के बगैर पुलिस बल का प्रयोग उचित नहीं माना जाएगा। ऐसा ही दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक मामले में निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि पुलिस केवल उतना ही बल इस्तेमाल कर सकती है, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हो। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। इस मामले में जस्टिस एके सिकरी ने कहा था कि अगर पुलिस का उद्देश्य शांति बहाल करने के बजाय लोगों को सजा देना या डराना हो, तो ऐसा बल प्रयोग कानून के खिलाफ होगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत अपने अधिकारों का शांतिपूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर रहे नागरिकों के खिलाफ हिंसा करना असंवैधानिक है। भारतीय कानून के मुताबिक, अगर 5 या उससे 
ज्यादा लोग किसी ऐसे मकसद से इकट्ठा हों जिससे सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल हो। कानून के पालन में बाधा डाली जाए। दंगा, हिंसा या गंभीर उपद्रव की आशंका हो। ऐसे मौजूदगी को गैरकानूनी जमावड़ा माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में इकट्ठा लोगों को प्रशासन हटाने का आदेश दे सकता है। कानून के मुताबिक आमतौर पर मजिस्ट्रेट या थाने का प्रभारी अधिकारी भीड़ को हटाने का आदेश दे सकते हैं,अगर आदेश के बाद भी लोग नहीं हटते, तभी पुलिस बल प्रयोग पर विचार कर सकती है। देश का कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि भले ही कभी-कभी सीमित बल का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है,
लेकिन जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा यानी कानून कहीं भी यह नहीं बताता कि कितनी लाठी चल सकती है या कितनी ताकत इस्तेमाल की जा सकती है,लेकिन अदालतों ने बार-बार कहा है कि जितनी जरूरत हो, सिर्फ उतना ही बल इस्तेमाल किया जाए। लोगों को सजा देने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता और स्थिति सामान्य होते ही बल प्रयोग रोक देना चाहिए। अनिता ठाकुर बनाम जम्मू-कश्मीर सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी हिंसक भी हो जाएं, तब भी पुलिस जरूरत से ज्यादा बल नहीं इस्तेमाल कर सकती साथ ही यह भी कहा गया था कि एक बार स्थिति नियंत्रण में आ जाए तो पुलिस को बल प्रयोग तुरंत रोक देना चाहिए। अदालत ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग मानवाधिकार और मानव गरिमा का उल्लंघन है। कुछ राज्यों के पुलिस मैनुअल में लाठीचार्ज के नियम भी दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, केरल पुलिस मैनुअल कहता है कि पहले लोगों को पर्याप्त चेतावनी दी जाए। न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए। लाठी शरीर के मुलायम हिस्सों पर मारी जाए। सिर और गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों पर वार करने से बचा जाए। संयुक्त राष्ट्र के बेसिक प्रिंसिपल ऑन द यूज ऑफ फोर्स ऐंड फायरआर्म्स (1990) के मुताबिक अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो पुलिस को बल प्रयोग से बचना चाहिए,अगर बल प्रयोग जरूरी हो, तो वह न्यूनतम होना चाहिए। जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल केवल बेहद गंभीर और अंतिम स्थिति में ही किया जा सकता है। कुल मिलाकर भारत के कानून में लाठीचार्ज शब्द नहीं लिखा है। हालांकि पुलिस को केवल जरूरी और सीमित बल इस्तेमाल करने की अनुमति है,लेकिन इससे पहले चेतावनी देना और भीड़ को हटने का मौका देना जरूरी है। यहां तक कि हिंसक प्रदर्शन भी हो, तो जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग अदालतों की नजर में गैरकानूनी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों कई मामलों में कह चुके हैं कि पुलिस का उद्देश्य व्यवस्था बहाल करना होना चाहिए, लोगों को दंड देना नहीं। पुलिस हर तरह के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं कर सकती। इसके लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी हैं। पुलिस तभी बल प्रयोग कर सकती है जब भीड़ को कानून के मुताबिक गैरकानूनी जमावड़ा माना गया हो। सक्षम अधिकारी ने भीड़ को हटने का आदेश दिया हो। लोगों को पहले चेतावनी दी गई हो। चेतावनी के बावजूद भीड़ वहां से न हटे और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग जरूरी हो यानी बिना चेतावनी या बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए सीधे बल प्रयोग करना कानून के खिलाफ माना गया है।
Posted by achhiduniya

ड्राइविंग लाइसेंस होंगे रद्द अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालको ने मराठी भाषा परीक्षा पास न की...

 

महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने सभी गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समय सीमा 15 अगस्त निर्धारित की थी। विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि लगभग 450 शिक्षकों को चालकों को कार्यात्मक मराठी सिखाने के लिए नियुक्त किया गया है और सरकार ने उन्हें भाषा सीखने के लिए 16 अगस्त तक का समय दिया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालक कार्यात्मक (Functional) मराठी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहते हैं, तो 16 अगस्त से उनके ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर 
दिए जाएंगे। मोटर वाहन नियमों का हवाला देते हुए परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 22 और 85 के तहत चालकों को कार्यात्मक मराठी सीखने के लिए समय दिया गया था। इस अवधि के बीत जाने के बाद बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यदि कोई वाहन चालक इस निर्धारित मराठी परीक्षा में असफल साबित होता है, तो क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) को उस चालक का लाइसेंस रद्द करने का पूरा अधिकार दे दिया गया है। परिवहन मंत्री ने कहा कि उल्लंघनों के लिए पहले 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन संशोधित प्रावधानों के तहत अब मराठी भाषा परीक्षा में असफल होने वालों का लाइसेंस रद्द करने की अनुमति दी गई है। 
बाइक टैक्सी संचालकों के लिए अधिवास प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के सवाल का जवाब देते हुए सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र में दोपहिया टैक्सी सेवा आधिकारिक रूप से एक अगस्त से शुरू होगी। इस नई सेवा के साथ ही चालकों के सामाजिक कल्याण का भी ध्यान रखा गया है। इसके तहत प्रत्येक बाइक टैक्सी पर प्रतिदिन 5 रुपये का कल्याण उपकर (Welfare Cess) और प्रत्येक किराये पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा। इस राशि का उपयोग विशेष रूप से बाइक टैक्सी संचालकों के कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। अंत में मंत्री ने यह भी दोहराया कि महाराष्ट्र सरकार पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का स्वागत करती है और राज्यभर में इनके व्यापक उपयोग को लगातार बढ़ावा देती रहेगी।
08 July 2026
Posted by achhiduniya

LoC खोल हमें राशन-पानी दे भारत JAAC नेता सरदार अमन खान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि पीओके में लोग भोजन और आवश्यक आपूर्ति की कमी के कारण संघर्ष कर रहे हैं, और उन्होंने नई दिल्ली से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। हमें भारत की मदद चाहिए। राशन की कमी है। हमें आपके मदद की जरूरत है। रावलकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) को खोलने की मांग की और कहा कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो नागरिकों के पास भारत में प्रवेश करने का विकल्प होना चाहिए। उन्होंने भीड़ से पूछा कि क्या उन्हें एलओसी की ओर मार्च करना चाहिए, जिस पर लोगों ने बार-बार जवाब दिया,उसकी ओर बढ़ो। सरदार अमन खान ने पुंछ और डोडा सेक्टरों में नियंत्रण रेखा खोलने की भी अपील की, उनका तर्क था कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने आम नागरिकों का जीवन और भी कठिन बना 
दिया है।  अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान की दमनकारी कार्रवाई ने इस क्षेत्र को एक गंभीर संकट में धकेल दिया है। उन्होंने अधिकारियों को बल प्रयोग न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोगों की मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो हमारे पास अन्य रास्ते भी हैं। एक दिन बाद जारी एक अलग वीडियो संदेश में खान ने श्रीनगर, बारामूला, पुंछ, राजौरी, जम्मू, लद्दाख, कारगिल और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के लोगों से अपनी अपील का विस्तार किया। 
प्रदर्शन के 26वें दिन, प्रोटेस्ट के मुख्य लीडर्स में से एक सरदार अमन खान ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार के लोगों और इंडिया से मदद की अपील की। ​​उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले तीन हफ्तों से पाकिस्तान के कब्ज वाले जम्मू-कश्मीर में खाने और दवा की सप्लाई रोक दी है, जिससे गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। हाल के हफ्तों में प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों, सुरक्षा अभियानों और गिरफ्तारियों की खबरों के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा 5 जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगाने और इस जमीनी संगठन को आतंकवादी समूह घोषित करने के बाद अशांति और बढ़ गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों पर व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है, एक ऐसा कदम जिसके बारे में आलोचकों का कहना है कि इसने स्थिति को नियंत्रण में लाने के बजाय जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। जानकारों के अनुसार, इस संकट ने पीओके के लोगों और क्षेत्र के राजनीतिक प्रशासन के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है, जिस पर लंबे समय से इस्लामाबाद के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया जाता रहा है।
06 July 2026
Posted by achhiduniya

वक्फ बोर्ड में दो हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया..

संशोधित वक्फ कानून 2025 के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है और मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल करना वक्फ बोर्ड के इतिहास में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश में नए कानून के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है और ये पहली बार है जब किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियक्ति की गई है। जी हां, राज्य के पुनर्गठित वक्फ बोर्ड में दो हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति की है। इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को वक्फ बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल किया गया है और राज्य सरकार की ओर से इसका अधिसूचना राजपत्र भी जारी कर दिया गया है, जिसके अनुसार सनवर पटेल बोर्ड के अक्ष्यक्ष होंगे। इसी के साथ मध्यप्रदेश वक्फ अधिनियम 1995 
(संशोधित 2025) की धारा 13 और धारा 14 के प्रावधानों के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। राज्य के नवगठित वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की बात करें तो सनवर पटेल इसके अध्यक्ष होंगे, जो पिछले बोर्ड के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें पहली बार दो हिंदुओं को सदस्य बनाया गया है। पुनर्गठित वक्फ बोर्ड की बात करें तो विधायक आतिफ अकील (भोपाल उत्तर), फैजान खान (उज्जैन), नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली), शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया), बहन फातेमा चौधरी (इंदौर) शबाना खान  (पार्षद, रतलाम), मनोज मालपानी (इंदौर), अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना) और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में साफ किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अभी जारी रहेगा। उनका चयन साल 2023 में वक्फ अधिनियम के तहत हुआ था और 18 अप्रैल 2028 तक उनका कार्यकाल जारी रहेगा। यही वजह है कि उन्हें बचे हुए कार्यकाल के लिए नए बोर्ड में भी शामिल किया गया है।
05 July 2026
Posted by achhiduniya

चढ़ावा चोरी पर क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत....?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आया है.सन्मार्ग माइंड वेलनेस के उद्घाटन समारोह के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस मामले पर कोई और टिप्पणी करने से परहेज किया और इसके बजाय एक दिन पहले जारी किए गए RSS के बयान का ज़िक्र किया। मोहन भागवत ने इस विवाद पर RSS महासचिव दतात्रेय होसवोले के बयान का सर्मथन किया है। RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान में हेराफेरी के आरोपों पर संगठन के आधिकारिक रुख का ज़िक्र किया। मोहन भागवत ने दत्तात्रेय होसबोले के बयान का जिक्र किया उन्होंने संगठन के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के बयान की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें इस घटना को बेहद निंदनीय 
बताया गया था और दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की गई थी। मालूम हो कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में RSS की ओर से दत्तात्रेय होसबोले ने शुक्रवार को जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि श्री राम लला मंदिर में दान पेटियों से कथित चोरी ने देश भर के भक्तों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चल रही जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। होसबोले ने कहा,कई पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों राम भक्तों के समर्पण, त्याग और शहादत की वजह से श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पूरे हिंदू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र बन गया है। 
अयोध्या में श्री राम लला मंदिर में रखी दान पेटियों से चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाओं और श्रद्धा को आहत किया है और हम सभी इस घटना से दुखी हैं। होसबोले ने ट्रस्ट से यह भी आग्रह किया कि वे इस घटना को एक असाधारण मामला मानें और वित्तीय प्रबंधन तथा प्रशासनिक प्रणालियों में किसी भी कमी को दूर करें।  उन्होंने कहा,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत पूरे हिंदू समाज को उम्मीद है कि ट्रस्ट इस बेहद निंदनीय घटना को एक असाधारण मामला मानेगा और मैनेजमेंट और कामकाज में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए असरदार और गंभीर कदम उठाएगा यह इसलिए ज़रूरी है ताकि अयोध्या मंदिर में लाखों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा अटूट और मज़बूत बनी रहे। कथित हेराफेरी को बेहद निंदनीय घटना बताते हुए होसबोले ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और उसकी सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। होसबोले ने कहा,यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसे कड़ी सज़ा मिले।
Posted by achhiduniya

भारतीय नागरिकता मुग़ल काल में क्या थी प्रामाणिकता...?

बादशाह कह दें, वही सही मान लिया जाता था। धर्म, जाति और पेशा पहचान तय करते थे। राज्य कर व्यवस्था में योगदान करने वाले, राज व्यवस्था में भरोसा करने वाले लोगों पर राज तंत्र भी भरोसा करता था। परिवार और कबीला पहचान के पारंपरिक साधन थे। मुग़ल काल में आज की तरह नागरिकता का विचार नहीं था। नागरिकता शब्द आधुनिक है। मुग़ल काल में में लोग राजा के अधीन रहते थे। रिश्तेदार और जमीन से पहचान जुड़ी रहती थी। गांव या मोहल्ला भी पहचान का बड़ा आधार था।  स्थानीय मुखिया या पटवार यानी अधिकारी अक्सर जरूरत पड़ने पर पहचान सिद्ध करते थे। मुगल काल में भले ही आज की तरह व्यवस्था नहीं थी, न ही नागरिकता जैसे टर्म का इस्तेमाल होता था लेकिन कुछ प्रचलित कागजातों के जरिए व्यक्ति की शिनाख्त आसानी से हो जाती थी। ये सारे दस्तावेज बादशाह, दरबार या सरकारी कारिंदे जारी करते थे। इनमें से कुछ निम्नवत हैं। शाही आदेश या शासक का लिखित आदेश क़ानून, कर-माफी, ज़मीन देने या किसी विशेष अधिकार की पुष्टि इसी शाही फरमान से होती थी। यह फ़ारसी में लिखा होता था। शाही मुहर और दरबारी हस्ताक्षर इसे पुख्ता बनाते थे। सनाद-यह अधिकार का लेखा-जोखा को प्रमाणित करता था। यह किसी हक़ या इजाज़त का 
लिखित प्रमाण होता था। ज़मीन का पट्टा, जागीर का दस्तावेज़, सौदों की पुष्टि भी इसी दस्तावेज से होती थी। इसे प्राय-दरबार या स्थानीय अमानतख़ाने जारी करते थे। कई बार यह कागज़ पर लिखा हुआ या ताम्रपत्र पर उकेरा हुआ होता था। किसी तरह के विवाद में प्राथमिक प्रमाण यही माना जाता था। परवाना-यात्रा या व्यापार की अनुमति में परवाना की भूमिका महत्वपूर्ण थी। सहूलियत या छूट देने वाला कागज़ भी यही था। इसका इस्तेमाल कर छूट, सीमा पार यात्रा, व्यापार की स्वतंत्रता आदि में होता था. इसे भी शाही दरबार या जिला अधिकारी जारी करते थे। 
पट्टा- ज़मीन और राजस्व का रेकॉर्ड, जमीन के मालिक या उपयोगकर्ता का प्रमाण। कर जानने और जमीन के हक़ को दिखाने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। स्थानीय पटवारी, अमिल या गांव की चौपाल में रखने की व्यवस्था थी।  यह लिखित रजिस्टर या व्यक्तिगत पत्र के रूप में होता था। किसानों के लिए जीवन भर का प्रमाण यही था। किसी भी तरह के विवाद में गवाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती थी। किसी भी दस्तावेज़ का सत्यापन मुहर और गवाहों के जरिए होता था। करप्शन उस जमाने में भी हुआ करता था। दफ्तर से कभी कागज़ गायब हो जाते थे। कभी नकल या फ़र्ज़ी कागज़ भी बनाए जाते थे। ऐसे में मुहर, गवाहों के जरिए मसले को निपटाया जाता था। राजकीय मुहर सबसे बड़ा प्रमाण होती थी। बहुतेरे आदेश इसी से मान्य होते थे। नौकरशाही में भी छोटे अफ़सरों की मुहरें होती थीं। कई बार व्यक्ति के पास अपना सिग्नेचर या चिन्ह होता था। व्यापारी भी अपनी सील या छाप रखते थे। मुगल काल में कई बार बादशाह ताम्र-पत्र के जरिए अपने आदेश जारी करता। इसका उपयोग मंदिरों या जानदार परिवारों को दिए गए उपहारों के हिसाब के रूप में होता था। यह लंबे समय तक सुरक्षित रहते थे। निकाहनामा और धार्मिक रेकॉर्ड- यह दस्तावेज शादी, वक्फ़ या धार्मिक दान के कागज़ को पुख्ता करता था। यह दस्तावेज काज़ी या धर्माधिकारी बनाते थे। पारिवारिक हक़ और धार्मिक संपत्तियों के प्रमाण के लिए इसका इस्तेमाल होता था।वंशावली और शजरा नसब- खासतौर पर कुलीन घराने अपनी वंशावली लिखवाते थे। इससे वंश और सामाजिक दर्जा सिद्ध होता था। मानसब और दरबारी नियुक्ति-पत्र-यह दस्तावेज अधिकारी या फौजी पदों की नियुक्ति का प्रमाण होता था। प्रायः इसे बादशाह की ओर से देने की व्यवस्था थी। इसका उपयोग पद, सैनिक रैंक और तनख़्वाह तय करने के लिए किया जाता था।
28 June 2026
Posted by achhiduniya

Translate

Business Advertise T.B

Commercial Adv T.B.

Today's IMP News Headline’s {सुर्खियां }

@ धर्म बदलना है तो 60 दिन पहले प्रशासन को बताना होगा, छत्तीसगढ़ में लागू हुआ एंटी-कनवर्जन लॉ।@ जम्मू-कश्मीर के सोपोर में 26 जगहों पर छापेमारी! हालिया आतंकी हमलों को लेकर पुलिस की कार्रवाई।@ मथुरा में संतों संतों का ऐलान, 6 दिसंबर को होगी कारसेवा, राजस्थान से पहुंच रहे पत्थर।@ दिल्ली में 31 दिन का पानी 8 दिन में बरसा, टूट गया 15 सालों का रिकॉर्ड, IMD का नया अपडेट।@ मुंबई में बिछेगा पुलों का जाल, 112 साल पुराने एलफिंस्टन ब्रिज की जगह बनेगा शहर का पहला डबल-डेकर ओवरब्रिज।@ रांची आंदोलन-छात्रों और सरकार के बीच आज दूसरे दौर की बातचीत, डबल गेम का आरोप लगा रहे प्रोटेस्टर्स।@ सड़ी-गली सब्जियां, एक्सपायर्ड दूध,बेंगलुरु के 5-स्टार होटलों में छापेमारी के बाद चौंकाने वाले खुलासे।@ सीलबंद बोतल का पानी पीने के बाद एक ही परिवार के चार लोगों की हालत खराब, गोदाम सील।@ कश्मीर में आतंकवाद की ऑनलाइन वर्कशॉप का भंडाफोड़, सुबह-सुबह ताबड़तोड़ रेड; 5000 लोगों से पूछताछ के बाद एक्शन।@ झारखंड में थम नहीं रहा छात्र आक्रोश! CM आवास घेराव के दौरान पुलिस और ABVP कार्यकर्ताओं में झड़प।@ अमरनाथ यात्रा पर बारिश-लैंडस्लाइड से ब्रेक, उत्तराखंड में रेड अलर्ट, दिल्ली-NCR कई जगह जलभराव।@ हिमाचल के चंबा में बड़ा हादसा, अचानक पहाड़ी से नीचे सड़क पर गिरी बस, 7 लोगों की मौत, 11 घायल।@ हनी ट्रैप में फंसा IAF का विंग कमांडर, पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजी संवेदनशील जानकारी, मचा हड़कंप।@ बुलंदशहर में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्याफ का आरोपी एनकाउंटर में ढेर, 50 हजार का था इनाम।@ बिहार में पारदर्शी परीक्षा के लिए समिति के गठन सहित 4 बड़े शिक्षा सुधारों का ऐलान।

Social Adv C.B.

अन्य खबरों के लिए हमारे सहयोगी मीडिया संस्थान पर विजिट करें। https://aniltvnews.blogspot.com

Advertise Section C.B.

Important....Video

"सिंधी छेज़ नृत्य श्रीराम नवमी शोभायात्रा के दौरान"

होनहार काबिल युवाओ के लिए {JOB Corner} नौकरी विभाग

जल्द ही नए रोजगार की संधि उपलब्ध होगी।

Business Adv M.B.

Common Advertise M.B.

Govt's green signal to CSR fund spending for 'Har Ghar Tiranga' campaign“दुनिया मे भारत की पहचान-आन-बान-शान-जान.....“तिरंगा” “गर्व करे भारतीय होने पर”

जीवन सवारें सुविचार

@ हम बहुत व्याकुल,गुस्सैल और आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। दूसरों के प्रति सहयोग और जीवन के प्रति आस्था को मजबूत कीजिए। प्रेम,अनुराग और सहृदयता जीवन मूल्य हैं। इनको केवल शब्द समझने से बचना होगा। @जिस किसी चीज से जीवन में प्रेम छूटता जाता है, समय और स्नेह छूटता जाता है। वह बासी होती जाती है। हमारी जिंदगी में बासी होते रिश्ते इसकी गवाही दे रहे हैं। जिंदगी को प्रेम की धूप,थोड़ा इत्मिनान दीजिए।@ ऐसी आंखें जिनके सपने की सीमा सीमित होती है,वह अपने जीवन को विस्तार नहीं दे पातीं। अपने साथ थोड़ा दूसरों के लिए सोचना जिंदगी को सुकून,आनंद और सुख देता है।

Common Advertise B.B.

Common Advertise B.B

Flash Back Important News

Request Massage

मित्रो प्रणाम.....यदि आपके पास कोई लेख,प्रेरक कहानियॉ, सकारात्मक विचार,अद्भुत जानकारी या किसी व्यक्ति विशेष की खास उपलब्धि कि जानकारी है,जो आप हमसे और हमारे मित्रो के साथ सांझा करना चाहते हैं,तो क्रप्या उसे अपनी फोटो के साथ हिन्दी में हमे E-mail करें।हमारी Id:- achhiduniya@gmail.com जरूरत के मुताबिक उसमे कुछ परिवर्तन करने या सम्पूर्ण करने की जरूरत पड़ने पर त्रुटी मुक्त करके हम आपके नाम और फोटो के साथ हमारे अच्छी दुनिया न्यूज पोर्टल पर प्रकाशित करेंगे।

- Copyright © AchhiDuniya Online Electronic Media News Portal & E-Paper -KevoxTech- Powered by KevoxTech - Designed by AchhiDuniya -