कोर्ट ने अंधविश्वास, जादू-टोना, नरभक्षण, सती प्रथा के बारे में क्या कहा….?
कोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस
जॉयमाल्य बागची ने सॉलिसिटर जनरल से महत्वपूर्ण सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि अगर
जादू-टोना को धार्मिक प्रथा का हिस्सा बताया जाए, तो क्या उसे अंधविश्वास
माना जाएगा या नहीं? उन्होंने आगे पूछा कि
यदि ऐसे मामलों में विधायिका चुप रहती है, तो क्या अदालत अछूते
क्षेत्र के सिद्धांत का सहारा लेकर सार्वजनिक व्यवस्था
और नैतिकता के आधार पर ऐसी प्रथाओं पर रोक नहीं लगा सकती? इस पर तुषार मेहता ने जवाब दिया कि अदालत सार्वजनिक व्यवस्था,
नैतिकता
और स्वास्थ्य के आधार पर प्रतिबंध लगा सकती है, लेकिन केवल अंधविश्वास
के
आधार पर नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि अदालतों के पास यह अधिकार नहीं है कि वे तय
करें कि कोई ‘आवश्यक धार्मिक प्रथा’ अंधविश्वास है या नहीं,
चाहे
जज कितने भी विद्वान क्यों न हों। पीठ ने कहा,अदालत को यह तय करने का
अधिकार है कि क्या यह प्रथा अंधविश्वास है। इसके बाद विधायिका को इस पर क्या करना
है,यह तय करना होगा। लेकिन अदालत में आप यह नहीं कह
सकते कि 'अंतिम निर्णय विधायिका का है'। ऐसा नहीं हो
सकता..." पीठ ने अपनी बात को स्पष्ट करने के लिए अन्य अंधविश्वासी प्रथाओं-जादू-टोना,
नरभक्षण
और सती के उदाहरण दिए। केंद्र का कहना है कि अदालतों को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि कोई
आवश्यक धार्मिक प्रथा अंधविश्वास है या नहीं। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का तर्क है कि
अदालतों को, चाहे न्यायाधीश कितने भी विद्वान क्यों न हों,
यह तय
करने का कोई अधिकार या क्षेत्राधिकार नहीं है कि कोई आवश्यक
धार्मिक
प्रथा अंधविश्वास है या नहीं।
सॉलिसिटर जनरल ने न्यायमूर्ति बागची से कहा कि अदालत
को किसी प्रस्ताव का परीक्षण अतिवादी आधार पर नहीं करना चाहिए। न्यायमूर्ति बागची
ने जवाब दिया कि तर्क की तार्किक समझ का आकलन करने के लिए रिडक्टियो एड एब्सर्डम
सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की पीठ ने सबरीमाला
मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव और विभिन्न धर्मों
के पालन की जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और
सीमा से संबंधित याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू कर दी है। कल भी इस मामले की
सुनवाई हुई थी, जिसमें कोर्ट ने कई अहम बातें कही थीं। नौ
जजों की पीठ विशेष रूप से अनुच्छेद 25 और 26
पर
विचार करेगी, जो धर्म और धार्मिक संप्रदाय की स्वतंत्रता से
संबंधित हैं। मंगलवार (7 अप्रैल,
2026) को पिछली सुनवाई में, केंद्र सरकार की ओर से
पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि किसी विशेष आयु वर्ग के किसी खास
जेंडर को पूजा स्थल में
प्रवेश करने से रोकना भेदभाव नहीं है।
बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठिए होने की आशंका,स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की सख्त जांच का फैसला लिया महाराष्ट्र सरकार ने..
बीजेपी नेता किरिट सोमैया ने आरोप लगाया कि गिग वर्क सेक्टर में बड़ी
संख्या में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठिए काम कर रहे हैं । कुछ लोग अवैध
तरीके से रह रहे हैं और आपराधिक गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। इसलिए सोमैया ने
सरकार से गिग वर्कर्स की पासपोर्ट जैसी कड़ी वेरिफिकेशन की मांग की। जानकारी के
मुताबिक, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सरकार ने इस
पर सहमति जताई है। कल ही गृह विभाग और श्रम विभाग की बैठक हुई। निर्णय लिया गया कि
कड़ी जांच और वेरिफिकेशन होगा। अवैध रूप से रह रहे लोगों पर कार्रवाई की जाएगी।
एसओपी महीने भर में तैनात की जाएगी।दरअसल, महाराष्ट्र में गिग
वर्कर्स की जांच को लेकर सियासत
तेज हो गई है। यह पूरा विवाद सुरक्षा,
अवैध
घुसपैठ और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के इर्द-गिर्द घूम रहा है। महाराष्ट्र सरकार
ने स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट जैसी कंपनियों से जुड़े
गिग वर्कर्स (डिलीवरी बॉय) की सख्त जांच का फैसला लिया है। सरकार जल्द ही इसके लिए
एक SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) लाने वाली है। ग्राउंड पर मिली-जुली
प्रतिक्रिया सामने आई है। कुछ गिग वर्कर्स का कहना है की कड़ी जाँच ज़रूरी है
क्यूँकि थर्ड-पार्टी वेरिफिकेशन
कमजोर है बाहरी लोगों की घुसपैठ संभव है और कहा
की
कइयों बांग्लादेशी रोहिंग्या की घुसपैठ इस क्षेत्र में हुई है ।
गलत लोगों की वजह
से बाकी कर्मचारियों पर शक होता है। हमे ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ता है । इसलिए वे
कड़ी जांच के पक्ष में हैं। वहीं, कुछ गिग वर्कर्स ने
चिंता जतायी है ।उनका कहना सरकार बांग्लादेशी रोहिंग्या के नाम पर
मुसलमानों को
बाहर करने की साजिश ना करे ।हमारे पास आधार ,पैन कार्ड है ,हम बाहरी नहीं यही के
है । सरकार की जांच भेदभावपूर्ण न हो। धर्म के आधार पर कार्रवाई न हो। निष्पक्ष
वेरिफिकेशन जरूरी है। समाजवादी पार्टी नेता अबु आजमी,
AIMIM और कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार मुसलमानों को टारगेट कर रही है। रोजगार
छीनने की साजिश हो रही है। यह सुरक्षा नहीं बल्कि राजनीतिक
एजेंडा है। विपक्ष का कहना है कि अगर घुसपैठ हुई है, तो यह सरकार की नाकामी
है, आम लोगों को परेशान न किया जाए।
1 साल पहले दफनाए गए शव को बाहर निकालकर पोस्टमार्टम..जाने क्या है मामला...?
जानकारी के मुताबिक, गयासुद्दीन कुरैशी की 27
मार्च
2025 को हुई मौत के बाद उनके भाई कासिमुद्दीन कुरैशी ने
शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई थी। उनका दावा था कि अस्पताल की डिस्चार्ज समरी
में सीने पर चोट के निशान का उल्लेख है, जो सामान्य मौत की ओर
इशारा नहीं करता। इस संबंध में उन्होंने नवंबर 2025
में
नरसिंहपुर पुलिस अधीक्षक से शिकायत भी की थी, लेकिन अपेक्षित
कार्रवाई नहीं होने पर मामला हाई कोर्ट तक पहुंचा। मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर
जिले में एक साल पहले दफनाए गए
शव को हाई कोर्ट के आदेश पर बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराने का सामने आया है,
जिसने
पूरे घटनाक्रम को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
इस पूरे मामले में एक जटिल
मोड़ तब आया जब मृतक की पत्नी ने ही कासिमुद्दीन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराते हुए
उन पर ही अपने पति की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के
बीच वर्ष 2015 से चल रहे पारिवारिक
विवाद ने पूरे मामले को और उलझा दिया। हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने 22
जनवरी
2026 को याचिका खारिज करते हुए कहा था कि कब्र से शव
निकालना एक असाधारण प्रक्रिया है, जिसे ठोस और स्पष्ट
साक्ष्यों के अभाव में अनुमति नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब
याचिकाकर्ता स्वयं आरोपों के घेरे में हो।
हालांकि, सिंगल बेंच के फैसले के
खिलाफ दायर अपील पर डिवीजन बेंच ने 7 अप्रैल 2026
को
सुनवाई करते हुए प्रशासन को शव निकालकर पोस्टमार्टम कराने का निर्देश दिया और
याचिकाकर्ता को एसडीएम अधारताल के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया। इसके बाद 8
अप्रैल
2026 को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कब्र खोदकर शव
निकाला गया और मेडिकल कॉलेज जबलपुर भेजा गया। अब पूरे मामले की सच्चाई पोस्टमार्टम
रिपोर्ट पर निर्भर है, जो यह तय करेगी कि यह
मौत स्वाभाविक थी या फिर किसी साजिश का परिणाम।
साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा ऑपरेशन “CyHawk 4.0” के तहत….
ऑपरेशन CyHawk 4.0 के तहत रेड में प्रमुख
रूप से साइबर धोखाधड़ी गिरोहों की फाइनेंशियल बैकबोन को निशाना बनाया गया। साइबर
ठगी से मिली धनराशि को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले फर्जी बैंक
अकाउंट्स, कैश निकालने वाले एजेंट और घोटालों को अंजाम
देने वाले अवैध कॉल सेंटर पर कार्रवाई हुई। इनमें फर्जी नौकरी के प्रपोजल,
डिजिटल
अरेस्ट की धमकियां, टेलीमार्केटिंग
धोखाधड़ी और फर्जी तकनीकी सहायता भी योजनाएं शामिल थीं। गौरतलब है की दिल्ली पुलिस ने ऑपरेशन 'CyHawk
4.0' के तहत साइबर ठगों पर कड़ा एक्शन लिया है। पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा की तरफ
से निर्देशित इस ऑपरेशन ने पूरे साइबर क्राइम इकोसिस्टम को ध्वस्त करने की दिशा
में बड़ा कदम उठाया। इसमें एक महीने तक खुफिया जानकारी जुटाने का चरण चला,
जिसे गृह मंत्रालय के भारतीय
साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) का भरपूर समर्थन मिला
हुआ था। बता दें कि ऑपरेशन 'CyHawk
4.0' के तहत कई जिलों में 8 हजार 371
से
ज्यादा संदिग्धों से पूछताछ की गई, जिनमें से 1
हजार 429
लोगों
को ठोस तकनीकी और वित्तीय सबूतों के आधार पर अरेस्ट किया गया या फिर बेल पर रिहा
किया गया, जबकि वित्तीय लेन-देन से जुड़े लोगों को 2,203
औपचारिक
नोटिस जारी किए गए। दिल्ली पुलिस ने 499
नई
एफआईआर दर्ज कीं और 324 लंबित साइबर क्राइम
मामलों में कामयाबी हासिल की, जिसमें राष्ट्रीय साइबर
अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त 3
हजार 564
शिकायतों
को विशिष्ट खातों और मोबाइल नंबरों से कामयाबी से जोड़ा गया। जांचकर्ताओं ने इन
संगठित नेटवर्कों से जुड़े बैंक अकाउंट्स में 519 करोड़ रुपये से ज्यादा
की धोखाधड़ी की राशि का पता लगाया, चल रहे और भविष्य के
स्कैम को रोकने के लिए कई अवैध कॉल सेंटरों को इनएक्टिव किया और सैकड़ों मोबाइल
फोन, लैपटॉप, हार्ड ड्राइव,
सिम
कार्ड, डेबिट/क्रेडिट कार्ड, वित्तीय बहीखाते और
अन्य उपकरण बरामद किए, जिनकी अब फोरेंसिक जांच
की जा रही है।
Artificial Intelligence-'ChatGPT-Gemini' और कोपायलट जैसे टूल्स के इस्तेमाल पर कोर्ट ने लगाई रोक
हाई कोर्ट के महापंजीयक (रजिस्ट्रार-जनरल) द्वारा सोमवार को पंजाब,
हरियाणा
और चंडीगढ़ के सभी जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को जारी किए गए पत्र के अनुसार,
मुख्य
न्यायाधीश ने उन्हें अपने अधीन कार्यरत न्यायिक अधिकारियों को यह निर्देश देने को
कहा है कि वे फैसला लिखने और कानूनी शोध के लिए चैटजीपीटी, जेमिनी,
कोपायलट,
मेटा
आदि सहित किसी भी एआई उपकरण का उपयोग न करें। पत्र में स्पष्ट किया
गया है कि इन निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा। इससे पहले,
गुजरात
हाई कोर्ट ने किसी भी प्रकार
के निर्णय लेने, न्यायिक तर्क,
आदेश
का प्रारूप तैयार करने, जमानत संबंधी सजा पर
विचार करने या किसी भी महत्वपूर्ण न्यायिक प्रक्रिया में एआई के उपयोग पर रोक लगा
दी थी। गुजरात हाई कोर्ट की
एआई नीति के अनुसार, एआई का उपयोग केवल
न्याय वितरण की गति और गुणवत्ता में सुधार के लिए किया जाना चाहिए ना कि न्यायिक
तर्क की जगह लेने के लिए।दरअसल, स्मार्ट फोन के जमाने
में आर्टिफीशिएल इंटेलीजेंस का इस्तेमाल खूब हो रहा है। पंजाब और हरियाणा हाई
कोर्ट ने न्यायिक अधिकारियों को फैसला लिखने और कानूनी शोध के लिए ChatGPT,
Gemini और कोपायलट जैसे Artificial Intelligence प्लेटफॉर्म का उपयोग न
करने का निर्देश दिया है।
सोने के कैप्सूल और बिस्किट की तस्करी प्राइवेट पार्ट्स दवारा..
एयरपोर्ट से सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस तस्करी के
पीछे के बड़े नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। एयरपोर्ट में पहले
भी कई बार सोना तस्करी में शामिल आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। डीआरआई और
पुलिस की टीम इन सभी मामलों की जांच कर रही है।दरअसल,कर्नाटक की राजधानी
बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के खिलाफ बड़ी
कार्रवाई सामने आई है। राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI)
के
अधिकारियों ने एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़
करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किए
हैं। इनके पास से करीब 5 करोड़ की कीमत के सोने
के कैप्सूल और बिस्किट जब्त किए गए, जो कि प्राइवेट पार्ट्स
में छिपाए गए थे। पकड़े गए लोगों पर आरोप
है कि उन्होंने बांग्लादेश के रास्ते शहर में यह खेप तस्करी करके लाई थी।
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों ने सोने को
कैप्सूल और पेस्ट के रूप में छिपा रखा था। पकड़े जाने से बचने के लिए इसे अपने
शरीर के प्राइवेट पार्ट्स में छिपाया हुआ था।
अफ्रीकी स्वाइन फीवर से 400 से अधिल सूअरों की मौत,संक्रमण रोकने प्रशासन ने चलाया किलिंग ऑपरेशन…
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम मुड़पार-नारधा स्थित एक सूअर फार्म में अफ्रीकी स्वाइन फीवर ने इस घातक बीमारी के चलते अब तक 450 सूअरों की मौत हो चुकी है। इस पूरे मामले में पशुपालन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है और संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, सबसे पहले फार्म में सूअरों की अचानक तबीयत बिगड़ने और मौत होने का सिलसिला शुरू हुआ। जांच के लिए सैंपल भेजे गए, जहां अफ्रीकी स्वाइन फीवर की पुष्टि हुई। इसके बाद प्रशासन और पशुपालन विभाग तुरंत हरकत में आया। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए “किलिंग ऑपरेशन” चलाया गया, जिसके तहत करीब 150 जीवित
सूअरों को जहरीला इंजेक्शन देकर मारना
पड़ा। इसके बाद सभी मृत सूअरों को तय प्रोटोकॉल के तहत गड्ढे में दफनाया गया,
ताकि
वायरस का फैलाव रोका जा सके। इस दौरान डॉक्टरों और कर्मचारियों ने पूरी सावधानी
बरतते हुए PPE किट पहनकर ऑपरेशन को अंजाम दिया। फार्म को
पूरी तरह सील कर दिया गया है और वहां किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक लगा दी गई
है। इस घटना से फार्म संचालक को भारी आर्थिक नुकसान हुआ
है। बताया जा रहा है कि करीब 1 करोड़ 20
लाख
रुपये का व्यवसाय पूरी तरह बर्बाद हो गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि
अफ्रीकी स्वाइन फीवर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता,
लेकिन
यह सूअरों के लिए
बेहद घातक बीमारी है, जिससे तेजी से मौत होती
है। फिलहाल प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है। जानकारी के मुताबिक, अफ्रीकी स्वाइन फीवर से
इंसानों को कोई खतरा नहीं है,
लेकिन
स्वाइन फीवर की पुष्टि के बाद भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। 450
सूअरों
की मौत के बाद फार्म को अगले आदेश तक के लिए सील कर दिया गया है। पीपीई किट पहनकर
डॉक्टर मौत के बाड़े में उतरे और सूअरों को प्रोटोकॉल के साथ दफन कर दिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, इस दौरान 1.20
करोड़
रुपये का व्यवसाय बर्बाद हुआ है।
1.4 करोड़ जुर्माने के साथ 9 पुलिसकर्मीयों को कोर्ट ने मृत्युदंड की सजा सुनाई….
तमिलनाडु के मदुरै दरअसल,2020
के एक मामले में कोर्ट ने 9
पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई
है। इसके अलावा सभी पर संयुक्त रूप से 1.40 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दरअसल,
जून 2020 में लॉकडाउन के दौरान पुलिस ने पिता-पुत्र को देर
तक दुकान खोले रखने पर हिरासत में लिया था। इस दौरान दोनों के साथ बेरहमी से
मारपीट की गई, जिससे
पिता-पुत्र की मौत हो गई। इस मामले में 9 पुलिसकर्मी दोषी पाए गए, जिसके बाद कोर्ट ने सभी को मृत्युदंड की सजा
सुनाई है। दरअसल, मदुरै की एक कोर्ट ने सोमवार को 9
पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। इन
सभी पुलिसकर्मियों को तूतीकोरिन के सथानकुलम में हिरासत के दौरान क्रूर यातना देकर
एक पिता-पुत्र की हत्या करने के जुर्म में दोषी पाया गया था। प्रथम अतिरिक्त जिला
एवं सत्र न्यायाधीश जी. मुथुकुमारन
ने इसे दुर्लभतम मामला बताया। उन्होंने सजा
सुनाते हुए कहा कि जनता की रक्षा का जिम्मा संभालने वालों ने ऐसा अपराध किया है,
जिसने समाज की सामूहिक अंतरात्मा को झकझोर
दिया है। कोर्ट ने पी जयराज और उनके बेटे जे बेनिक्स की हत्या के लिए दोषी ठहराए
गए सभी 9 पुलिस
अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई। इसके अलावा सभी दोषियों पर 1.40
करोड़ रुपये का संयुक्त जुर्माना भी लगाया
गया, जो पीड़ितों के
परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाएगा। यह घटना जून 2020 की है, जब देशभर में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर
लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। इसी दौरान जयराज और बेनिक्स को निर्धारित समय से अधिक
समय तक मोबाइल फोन की दुकान खुली रखने के आरोप में पुलिस ने हिरासत में लिया था।
हिरासत में उनके साथ भीषण मारपीट की गई, जिसके परिणामस्वरूप कुछ दिनों के बाद अस्पताल में
उनकी मृत्यु हो गई। इस घटना को लेकर भारी जनाक्रोश भी देखने को मिला था। इसके बाद
मद्रास हाई कोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। मामले की जांच केंद्रीय
अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की।
अस्पताल से 12 लाख रुपये कीमत के 323 इंजेक्शन स्टॉक से गायब…
राजस्थान के
झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ स्थित जिला अस्पताल में महंगे ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन
के गायब होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच समिति की रिपोर्ट ने अस्पताल
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार,
करीब 12 लाख रुपये कीमत के 323 इंजेक्शन स्टॉक से गायब पाए गए हैं,
जिससे चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया
है। जानकारी के मुताबिक,
1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच अस्पताल में कुल 894 ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन की सप्लाई हुई थी।
इनमें से 493 इंजेक्शन
मरीजों के इलाज में उपयोग किए गए, जबकि स्टॉक में केवल 78 इंजेक्शन ही मौजूद मिले। इस हिसाब से 323
इंजेक्शन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला,
जिन्हें अब गायब मानते हुए जांच आगे बढ़ाई
जा रही है। जांच में सामने आया है कि अस्पताल की स्टॉक
मॉनिटरिंग प्रणाली बेहद लापरवाह और कमजोर रही, जिसकी वजह से इतनी बड़ी गड़बड़ी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।
प्राथमिक जांच में अस्पताल के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा
रही है, जिससे
मामला और गंभीर हो गया है। हालांकि, ये सब पूरी जांच के बाद ही सामने आ पाएगा। गौरतलब
है कि हाल ही में अस्पताल परिसर में एक संदिग्ध महिला के पास से 8
ह्यूमन एल्ब्यूमिन इंजेक्शन बरामद किए गए
थे। इसी घटना के बाद मामला तूल पकड़ गया और प्रशासन ने जांच समिति का गठन किया।
जांच रिपोर्ट आने के बाद अब पूरे प्रकरण ने बड़ा रूप ले लिया है। अस्पताल के पीएमओ
डॉ. महेंद्र सबलानिया ने कहा कि मामले को बेहद गंभीरता से लिया गया है और दोषियों
के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, अब अस्पताल में अन्य दवाओं के स्टॉक की भी गहन
जांच शुरू कर दी गई है, ताकि किसी और गड़बड़ी का भी खुलासा हो सके।
अल्लाह से अपने लिए दुआ करो,पागल- बास्टर्ड होर्मुज खोल दो, वरना तुम्हें नर्क में पहुंचा देंगे डोनाल्ड ट्रंप..
अमेरिका के
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई धमकी दी है। ट्रंप ने ईरानियों को पागल और
बास्टर्ड भी कहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर ईरान से कहा-होर्मुज खोल
दो, वरना तुम्हें नर्क
में पहुंचा देंगे। ट्रंप ने इस दौरान ईरान के पावर प्लांट और ब्रिज पर हमला करने
का दिन भी बता दिया। उन्होंने मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट और ब्रिज डे एक साथ
मनाने की धमकी दी। ट्रंप की यह धमकी तब सामने आई है, जब ईरान ने अमेरिका पायलट के रेस्क्यू ऑपरेशन के
दौरान उसके 2 सी-130
एयरक्राफ्ट और 2 ब्लैक सी-
हॉक हेलीकॉप्टर को इस्फहान को पास
रविवार को मार गिराया। ट्रंप
ने अपनी पोस्ट में लिखा, " मंगलवार को ईरान में पावर प्लांट डे और ब्रिज डे
एक साथ मनाया जाएगा। हमला ऐसा होगा, जैसा कुछ पहले कभी नहीं देखा गया होगा!!! तुम
पागल बास्टर्ड लोग होर्मुज जलडमरूमध्य खोल दो! वरना तुम नर्क में रहोगे! बस देखते रहो!अल्लाह
से अपने लिए दुआ करो।
संवैधानिक संस्था को कुछ नहीं समझती TMC…PM- मोदी
कोलकाता के ब्रिगेड
ग्राउंड से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में परिवर्तन महाअभियान शुरू किया था। ब्रिगेड
ग्राउंड की वो ऐतिहासिक तस्वीरें और जनसैलाब देखकर पूरा टीएमसी सिंडिकेट घबराया हुआ है। और आज कूचबिहार में मैं देख रहा हूं ब्रिगेड ग्राउंड
में जो बिगुल बजाया था, कूचबिहार ने उस पर अपनी मुहर लगा दी है।
मोदी ने कहा,एक तरफ टीएमसी का डर है और दूसरी तरफ इसका मुकाबला करने के लिए आपके पास बीजेपी का
भरोसा है। एक तरफ टीएमसी के कट मनी और भ्रष्टाचार का डर है, दूसरी तरफ विकास को तेज रफ्तार देने वाली बीजेपी का भरोसा
है। एक तरफ घुसपैठ कराकर, विदेशियों को यहां बसाने का डर है, दूसरी तरफ घुसपैठ रोककर सारे घुसपैठियों को पश्चिम बंगाल से
बाहर करने का BJP का
विश्वास है। PM मोदी ने कहा कि हमारा बंगाल
शक्ति पूजा की धरती
है। मैं यहां आए सभी बहनों-बेटियों को, बंगाल की हर बहन-बेटियों से कहूंगा कि बीजेपी
आपके सम्मान और आपकी समृद्धि के लिए मैदान में है। बीजेपी सरकार आएगी तो महिलाओं
के सच्चे सशक्तिकरण का रास्ता खोलेगी और ये हमारा ट्रैक रिकॉर्ड है। कूचबिहार में
प्रधानमंत्री मोदी बोले 'एक तरफ संदेशखाली जैसी बहनों की चीखें और बेटियों पर
होता निर्मम अत्याचार है, दूसरी तरफ नारीशक्ति को सुरक्षा, सम्मान और सशक्तिकरण की मोदी की गारंटी है। मैं
आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस बार विधानसभा चुनाव के बाद इनके पापों का पूरा हिसाब होगा।
चुन-चुनकर हिसाब होगा। 4 मई के बाद कानून अपना काम करेगा। चाहे कोई बड़े
से बड़ा गुंडा क्यों न हो, इस बार न्याय होकर रहेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि यहां की
निर्मम सरकार बंगाल की इस पावन माटी पर हर रोज लोकतंत्र को लहुलूहान कर रही है। ये
निर्मम सरकार अपने आगे किसी संवैधानिक संस्था को कुछ भी नहीं समझती। दो-तीन पहले
पूरे देश ने देखा है कि कैसे मालदा में न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखा गया।
TMC कानून-व्यवस्था का
जनाजा निकालने पर तुली हुई है।
105 लोग घायल, 442 घर प्रभावित.45 लोगों की मौत पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में बारिश ने मचा दी तबाही…
पीडीएमए की रिपोर्ट
के अनुसार, 25 मार्च
से जारी लगातार बारिश के कारण हुए हादसों में मरने वालों में 23
बच्चे, 17 पुरुष और 5 महिलाएं शामिल हैं। वहीं घायलों में 45
पुरुष, 16 महिलाएं और 44 बच्चे हैं। भारी बारिश के चलते कई जिलों में
मकानों की छतें और दीवारें गिर गईं, जिससे बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ। रिपोर्ट
के मुताबिक, 442 घर
प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 382 आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं और 60 पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। ये घर दो दर्जन से
अधिक जिलों में स्थित हैं। पीडीएमए की रिपोर्ट
में आगे कहा गया है कि बचाव और राहत
कार्य जारी हैं और पीडीएमए, रेस्क्यू 1122, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियां मिलकर
काम कर रही हैं। पीडीएमए के महानिदेशक ने चेतावनी दी है कि 9
अप्रैल तक प्रांत के कई हिस्सों में फिर
से बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके मद्देनजर पर्यटकों और स्थानीय लोगों को
संवेदनशील क्षेत्रों में अनावश्यक यात्रा से बचने और सरकारी निर्देशों का सख्ती से
पालन करने की सलाह दी गई है।दरअसल, उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में लगातार हो रही
भारी बारिश ने तबाही मचा दी है। पिछले 10 दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 45
लोगों की मौत हो गई है,
जबकि 105 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी प्रांतीय आपदा
प्रबंधन प्राधिकरण ने रविवार को दी।
सड़क-परिवहन,80 केंद्रीय कानूनों के कुल 784 प्रावधानों में संशोधन प्रस्तावित,717 प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से बाहर....
केंद्र सरकार
के जन विश्वास बिल 2026 में National
Highways Act, 1956 और Motor
Vehicles Act, 1988 में भी संशोधन
किया गया है,जिससे तहत सजा को खत्म कर दिया गया और सिर्फ जुर्माना लगाया गया।
सरकार का मानना है कि इससे आम नागरिकों और व्यवसायों पर अनावश्यक कानूनी दबाव कम
होगा और छोटी-छोटी गलतियों के लिए जेल जाने का डर खत्म होगा। केंद्र सरकार ने शासन
प्रणाली को सरल, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया है। इस विधेयक का मूल उद्देश्य
छोटे और प्रक्रियात्मक उल्लंघनों के लिए जेल की सज़ा को खत्म कर उसकी जगह सिविल
पेनल्टी यानी जुर्माने का प्रावधान लागू करना है, ताकि डर आधारित शासन
से भरोसे आधारित
शासन की ओर बढ़ा जा सके। इस विधेयक के तहत 80 केंद्रीय कानूनों के कुल 784
प्रावधानों में
संशोधन प्रस्तावित है। इनमें से 717 प्रावधानों को आपराधिक श्रेणी से
बाहर कर
दिया जाएगा,जबकि बाकी बदलाव प्रशासनिक प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए किए जा रहे
हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करना गैर कानूनी है। इसके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग
अधिनियम बना हुआ है। इस अधिनियम के धारा 8-बी में प्रदर्शनकारियों को जुर्माने के
साथ-साथ 5 साल तक की सजा हो सकती थी, क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के
धारा 8-बी में कई ऐसी धाराएं हैं, जिसके तहत प्रदर्शन कर रहे लोगों पर
कार्रवाई हो सकती है और एफआईआर भी दर्ज हो सकता है, लेकिन अब नए बदलाव के अनुसार,
राष्ट्रीय राजमार्ग
पर जाम लगाने जैसे मामलों में जेल का प्रावधान खत्म कर दिया गया है और इसे
जुर्माने तक सीमित कर दिया गया है।
भारतीय मोटर वाहन अधिनियम सभी परिवहन वाहनों के लिए
नियमों और विनियमों का एक सेट है, जिसे 1988 में पारित
किया गया था।
इस अधिनियम में परिवहन के लगभग हर हिस्से को शामिल किया गया है,जिसमें सड़क परिवहन
वाहनों का स्वामित्व और उपयोग, कंडक्टरों और ड्राइवरों
का लाइसेंस, यातायात नियम, परमिट के प्रावधान आदि शामिल हैं। मोटर वाहन अधिनियम Motor Vehicles Act, 2019 के तहत ट्रैफिक नियमों
के उल्लंघन पर जुर्माने और सजा में भारी वृद्धि की गई थी। मुख्य सजाओं में 1,000 से
25,000 रुपये
तक का जुर्माना, 6 महीने से 3 साल तक की जेल, ड्राइविंग लाइसेंस का
निलंबन या जुर्माना और
जेल दोनों शामिल हैं।
अब नए नियम के तहत सिर्फ जुर्माना किया जाएगा।






























