पहले हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर लोग हंसने थे,राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता बल्कि... संघ प्रमुख मोहन भागवत
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा कैसे चली?
संघ के पास था तो कुछ नहीं।
ना प्रसिद्धि थी, ना सत्ता थी, ना प्रचार था,
ना साधन थे,
ना धन था। डॉक्टर हेडगेवार
को अनुयाई मिले उनकी आयु क्या थी? उनका अनुभव क्या था?
परंतु एक श्रद्धा और
विश्वास ले चले- हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। लोग हंसते थे, वो प्रारंभ के दिन की बात
है नहीं। राम मंदिर बनने तक हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है कहने पर हंसने वाले लोग
थे। आज हंसने वाले लोग ही कह रहे हैं कि हिंदुस्तान हिंदुओं का देश है। हमको कहते
हैं कि आप घोषित करो। हम कहते हैं घोषित करवाने की जरूरत नहीं,
जो है वो है। सूरज पूरब से
उगता है। ये घोषित करना चाहिए क्या? वह पूरब से ही उगता है। वह
जहां से उगता है उसको हम पूरब कहते हैं। तो भारत हिंदू राष्ट्र है। आज सबको मान्य
है। लेकिन उस समय क्या था? उस
समय सब लोग खिल्ली
उड़ाते थे। मोहन भागवत ने कहा कि राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं
होता। प्रजा के कारण भी होता है। श्री राम के गुणों का वर्णन जैसे रामायण में है,
राम राज्य के अधर के नाते
वैसे राम राज्य की प्रजा कैसी थी इसका भी वर्णन है। तो मंदिर निर्माण अयोध्या में जो
होना था हो गया। राम राज्य में ही राम राज्य की प्रजा के आचरण का जो वर्णन है ऐसा
आचरण मेरा बने। मेरे परिवार का बने और हमारे कारण अपने समाज में उस आचरण का प्रचार
प्रसार हो।
प्रत्यक्ष आचरण शुरू हो। हम जहां हैं जिस संस्था में है,
संगठन में है,
व्यक्तिगत कुछ अपना प्रभाव
है, जितना प्रभाव है, अपनी जो कुछ शक्ति है, वह लगाकर इसको करते रहना
छोटे बड़े दायरे में। यह हम करेंगे तो भगवान की इच्छा तो है ही कि दुनिया को धर्म
देने वाला भारत खड़ा होना चाहिए। कितनी जल्दी होगा यह हमको तय करना है। हम सब लोग
लगेंगे तो विश्व में फैले प्रचंड हिंदू समाज की इतनी शक्ति है कि अगर सोच कर शुरू
करेगा तो एक दिन में कर देगा। मोहन भागवत ने कहा कि विश्व
की आज जो आवश्यकता है, वह होना है, वो भारत के द्वारा ही होगा
और भारत का उत्थान भारत की संतान ही करेगी और कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा।
भारत बड़ा होकर सारी दुनिया का उद्धार करेगा। ये विधि लिखित है। उसको पूर्ण करने
में हमारा हाथ लगे तो जल्दी से जल्दी कम से कम नुकसान में हो जाएगा। इतना विचार हम
सब लोग आज के निमित्त करें।
बैंक ने डेथ सर्टिफिकेट मांगा तो शख्स कब्र से बहन की डेड बॉडी निकाल लाया…
मामला क्योंझर जिले के पटना इलाके के दियानाली गांव का है। यहां रहने वाला
जितु मुंडा अपनी बहन की मौत के बाद उसके बैंक खाते से पैसे निकालना चाहता था। उसकी
बहन की करीब दो महीने पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि उसने
अपनी जिंदगी में मवेशी बेचकर करीब 19 हजार रुपये कमाए थे,
जिसे उसने ओडिशा ग्राम्य
बैंक की एक स्थानीय शाखा में जमा किया था। बहन की मौत के बाद जितु मुंडा ही उसका
एकमात्र सहारा और परिवार का सदस्य था। ऐसे में वह कुछ दिन पहले बैंक पहुंचा और
पैसे निकालने की कोशिश की,लेकिन कथित तौर पर बैंक
अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए उससे मृत्यु का प्रमाण पत्र और
अन्य जरूरी
दस्तावेज मांगे। जब जितु मुंडा दस्तावेज
नहीं दे पाया, तो उसने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठा लिया। आरोप है कि
उसने अपनी बहन के दफनाए गए शव को कब्र से बाहर निकाल लिया। इसके बाद वह उसके कंकाल
को अपने कंधे पर रखकर करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर बैंक
पहुंच गया। बैंक के बाहर पहुंचकर उसने कंकाल को सामने रख दिया और वहीं धरने पर बैठ
गया। वह कई घंटों तक वहीं बैठा रहा और बैंक से तुरंत पैसे देने की मांग करता रहा।
यह दृश्य देखकर आसपास के लोग भी दंग रह गए और मौके पर भीड़ जुट गई।
मामले की सूचना मिलते ही
पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी समझाइश के बाद जितु मुंडा को वहां से हटाया
और स्थिति को शांत कराया। इसके बाद प्रशासन की ओर से कंकाल को दोबारा सम्मानपूर्वक
दफनाने की व्यवस्था भी की गई। यह घटना न केवल हैरान करने वाली है,
बल्कि यह भी दिखाती है कि
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग प्रक्रियाओं और जरूरी दस्तावेजों को लेकर लोगों में
कितनी जागरूकता की कमी है। वहीं, यह मामला संवेदनशीलता और
व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।
पैसे दो, वरना माल रिजेक्ट कर दूंगा,सर्वेयर द्वारा हर किसान से अवैध वसूली,एफआईआर और सख्त कार्यवाही की मांग
भ्रष्टाचार के इस खेल का खुलासा ग्राम पूनमखेड़ी के किसान सुरेंद्र धाकड़ ने
किया है। सुरेंद्र धाकड़ ने साक्ष्यों के साथ बताया कि केंद्र पर तैनात सर्वेयर
वीरेंद्र यादव द्वारा प्रत्येक मसूर की ट्रॉली से 2,000 रुपये से लेकर 6,000
रुपये तक की अवैध वसूली की
जा रही है। सर्वेयर किसानों को स्पष्ट धमकी देता है कि पैसे दो,
नहीं तो तुम्हारा माल
रिजेक्ट कर दूंगा। जो किसान रिश्वत दे देते हैं, उनका खराब माल भी पास कर
दिया जाता है, लेकिन जो ईमानदारी से अपनी उपज लाते हैं,
उन्हें रिजेक्शन का डर
दिखाकर मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। दरअसल,मध्य प्रदेश के गुना में फसल खरीद केंद्र पर किसानों से रिश्वत लेने का वीडियो
सामने आया है। वीडियो शेयर करने वाले किसान ने आरोप लगाया है कि सर्वेयर हर किसान
से 2000 से लेकर 6000 रुपये तक वसूल रहा है। वीडियो में भी आरोपी सर्वेयर 700
रुपये की रिश्वत लेता नजर आ
रहा है। किसान ने बताया कि वह 65 क्विंटल मसूर लेकर आया था
और इसे पास कराने के लिए उसे 3000 रुपये की रिश्वत देनी पड़ी।
घटना पगारा सेवा सहकारी समिति मर्यादित खरीदी केंद्र (बिलोनिया वेयरहाउस)
की है। यहां समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने आए किसानों से सर्वेयर द्वारा
खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है। माल पास करने के नाम पर हजारों रुपयों की मांग की
जा रही है, जिससे आक्रोशित किसानों ने
अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान सुरेंद्र धाकड़ ने इस लूट का
वीडियो भी बनाया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में
कथित तौर पर सर्वेयर को पैसे लेते हुए देखा जा सकता है। सुरेंद्र के अनुसार,
उनके 65
क्विंटल माल को पास कराने
के बदले उनसे 3,000 रुपये की रिश्वत ली गई। किसान का कहना है कि यह केवल एक
व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि केंद्र पर आने वाले
हर अन्नदाता को इस संगठित लूट का शिकार बनाया जा रहा है। पीड़ित किसानों ने
कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और एसपी से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से दोषी
सर्वेयर वीरेंद्र यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उसे सेवा से पृथक किया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर शिकंजा नहीं कसा गया और अवैध
वसूली बंद नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और सडक़ों पर उतरकर अपनी आवाज
बुलंद करेंगे।
मराठी की अनिवार्यता पर रोक-मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने….
महाराष्ट्र सरकार ने पहले ऐलान किया था कि मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने
वाले सभी लोगों के लिए 1 मई से मराठी बोलना जरूरी होगा। हालांकि, विरोध के बाद इस फैसले को 6
महीने के लिए टाल दिया गया
है। हालांकि, इस दौरान मराठी बोलने वाले और गैर मराठी ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों का
वेरिफिकेशन जारी रहेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि मुंबई में रिक्शा चालकों के लिए
मराठी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि रिक्शा
चालकों को मराठी नहीं आती, तो उनके परमिट रद्द कर दिए
जाएंगे। इसके बाद मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद दोबारा उभर गया
था। इस मुद्दे पर कई नेताओं ने विवादित
बयान भी दिए थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी इनमें से एक
थे। अमित ठाकरे ने कहा था कि जो मराठी भाषा अनिवार्य करने का विरोध कर रहे हैं।
अगर उनके आंदोलन से किसी मराठी व्यक्ति को परेशानी हुई तो
उसे सड़क पर ही पीटेंगे।
गैर मराठीभाषी लोगों के अलावा विपक्ष के नेताओं ने भी मराठी के नाम पर गुंडागर्दी
का विरोध किया था। एआईएमआईएम के नेता इम्तियाज जलील ने कहा था कि महाराष्ट्र में
रहने वाले सभी लोगों को मराठी बोलनी चाहिए। जिन लोगों को नहीं आती है,
उन्हें मराठी सिखाई जानी
चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने
कहा था कि लोगों को मराठी सिखाने का बेहतर तरीका अपनाया जाना चाहिए। अब संभवतः
महाराष्ट्र सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट
मिनिस्टर ने कहा, "मुंबई मराठी साहित्य संघ ने राज्य भर में अपनी
अलग-अलग ब्रांच में ऑटो रिक्शा ड्राइवरों और टैक्सी ड्राइवरों
को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी ली है। इससे मराठी को बढ़ावा
मिलेगा। कोंकण मराठी साहित्य परिषद भी मिलकर कोंकण इलाके में मराठी सिखाएगी।
परिवहन मंत्री सरनाईक ने
कहा था कि सरकार ने महाराष्ट्र दिवस (एक मई) से इस निर्णय को प्रभावी
ढंग से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिसके तहत ऑटो, टैक्सी और ओला, उबर तथा ई-बाइक जैसी
ऐप आधारित सेवाओं के चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करना अनिवार्य
होगा। उन्होंने कहा था कि इस पहल के तहत गैर-मराठी चालकों को भाषा
सिखाने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि ऑटो-रिक्शा चलाने वाले लोगों को
मराठी में पढ़ना या लिखना जरूरी नहीं है, उन्हें सिर्फ आम बोलचाल की भाषा सीखने की जरूरत है। परिवहन मंत्री प्रताप
सरनाईक ने बताया कि सरकार राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के लिए
एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगी। वहीं, मनसे कार्यकर्ताओं ने पहले
ही उन ऑटो-रिक्शा पर स्टीकर लगाने
शुरू कर दिए हैं, जिनके चालकों को मराठी आती
है।
परीक्षा केंद्र में छत्राओं द्वारा नथ पहनकर एंट्री पर बवाल …
चिकमगलूर के MES कॉलेज में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट देने आईं कई
छात्राएं अपनी नथ के कारण परीक्षा के सख्त नियमों के आड़े आ गईं। कॉमन एंट्रेंस
टेस्ट में जनेऊ की मनाही के बाद उठा बवाल अभी थमा नहीं था कि अब छात्राओं के नथ
पहनने से भी परेशानी खड़ी हो गई। हालांकि, छात्राओं को अपनी नथ (Nose
Stud) उतारने को नहीं कहा
गया, बल्कि उस पर एडहेसिव टेप लगा दिया गया। यह कदम तब उठाया गया जब कई छात्राओं ने
परीक्षा केंद्र में नथ पहनकर एंट्री ली। CET के आयोजकों ने स्पष्ट किया
था कि परीक्षा हॉल में किसी भी तरह की धातु की वस्तु या गहने पहनकर आना मना है। यह
नियम सुरक्षा कारणों से लागू किया गया है और यह छात्रों को पहले से सूचित किया गया
था। हालांकि, कई छात्राओं के लिए यह नियम एक परेशानी बन गया,
क्योंकि वे नथ पहनकर आईं
थीं और उन्हें
हटाने का विकल्प नहीं दिया गया। इस बीच,
परीक्षा केंद्र के स्टाफ ने
छात्राओं के लिए एक अस्थायी समाधान निकाला। गहनों को उतारने की बजाय,
छात्राओं की नथ पर बस
एडहेसिव टेप लगा दिया गया, जिससे सुरक्षा नियमों का
पालन भी हो गया और छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल गई।कुछ लोग इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना
है कि यह धातु-मुक्त नीति
पहले से निर्धारित थी, और उन्हें उम्मीद थी कि सभी छात्र इसे जानकर परीक्षा में
शामिल होंगे। इसके बावजूद, कई छात्राओं और उनके
अभिभावकों ने इस कदम को सहज और समझदारीपूर्ण कदम माना, जबकि कुछ ने इसे लेकर
असहमति जताई है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा
व्यवस्था को लेकर पुलिस ने भी कड़ी निगरानी रखी थी, और कॉलेज प्रशासन ने इस
प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से लागू किया।
केजरीवाल की “आप”पार्टी कुछ भ्रष्ट और समझौता….राघव चड्ढा
बीजेपी ज्वाइन करने के बाद पहली बार आम आदमी पार्टी (AAP) छोड़ने के फैसले पर राघव
चड्ढा खुलकर बोले हैं। वीडियो जारी कर राघव चड्ढा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल की
पार्टी के अंदर का माहौल खराब हो चुका था और नेताओं को काम करने से रोका जा रहा
था। चड्ढा ने कहा कि 'एक या दो व्यक्ति गलत हो सकते हैं, लेकिन सभी सात नहीं।
छह अन्य सांसदों के साथ
भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राघव चड्ढा
ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि पिछले तीन दिनों में उन्हें
कई संदेश मिले हैं। उन्होंने कहा कि कुछ संदेशों में लोगों ने उन्हें बधाई दी जबकि
कुछ उनके इस फैसले का कारण जानना चाहते हैं। चड्ढा ने आरोप लगाया,
आज यह राजनीतिक दल कुछ
भ्रष्ट और समझौता किए हुए लोग लोगों के हाथों में फंसा हुआ है। वे देश के लिए नहीं,
बल्कि
अपने निजी लाभ के लिए
काम करते हैं।' उनके इस आरोप पर आम आदमी पार्टी (AAP) की ओर से तत्काल कोई
प्रतिक्रिया नहीं आई। राज्यसभा सदस्य चड्ढा ने कहा कि पिछले कुछ सालों
से उन्हें ऐसा लग रहा था कि वे 'गलत पार्टी में सही व्यक्ति'
हैं और उनके पास केवल तीन
विकल्प बचे थे। राजनीति छोड़ देना, पार्टी में रहकर स्थिति
सुधारने का प्रयास करना या अपनी ऊर्जा और अनुभव को किसी अन्य मंच पर ले जाकर
सकारात्मक राजनीति जारी रखना। उन्होंने कहा,
'मैं राजनीति में
करियर बनाने नहीं आया था।
उन्होंने कहा कि उन्होंने
पार्टी के लिए अपना खून-पसीना बहाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि
हालांकि, पार्टी अब पहले जैसी नहीं रही और पार्टी में माहौल खराब हो
गया है, जहां नेताओं को काम करने से और संसद में बोलने से रोका जाता
है। उन्होंने कहा, 'इसीलिए मैंने अकेले नहीं, बल्कि छह अन्य सांसदों के
साथ मिलकर इस राजनीतिक दल से संबंध तोड़ने का फैसला किया।' चड्ढा ने कहा कि अगर लोगों
को काम करने से रोका जाता है, तो उनकी मेहनत दब जाती है
और उन्हें चुप करा दिया जाता है। ऐसे माहौल को छोड़ देना ही सही निर्णय है।'
इसके साथ ही उन्होंने यह भी
कहा कि वे आम नागरिकों के मुद्दों को और अधिक ऊर्जा और उत्साह के साथ उठाते
रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई की कि नए राजनीतिक मंच पर वे अधिक प्रभावी ढंग से
समाधान खोजकर उन्हें लागू कर सकेंगे।
बरामद रिश्वत के पैसे को चूहों ने खा लिया,दोषी महिला अफसर बरी
एक रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जे. बी. पारदीवाला और जस्टिस
के. वी. विश्वनाथन की बेंच
ने कहा, हमें यह जानकर
हैरानी हुई कि मुद्रा नोट को चूहों ने नष्ट कर दिया। हम सोच रहे हैं कि ऐसे मामलों
में बरामद कितने पैसे इसी तरह नष्ट हो जाते होंगे। यह तो किसी राज्य के लिए राजस्व
का बड़ा नुकसान है। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि नोट नष्ट होने को
लेकर दिया गया स्पष्टीकरण भरोसा नहीं दिलाता। कोर्ट ने भ्रष्टाचार
निवारण अधिनियम के मामले में दोषी ठहराई जा चुकी महिला को
जमानत देते हुए उस दावे को लेकर हैरानी जताई कि इस केस में बरामद रिश्वत के पैसे
को चूहों ने नष्ट कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस प्रकार की स्थिति तो राज्य
के लिए भारी राजस्व
नुकसान की वजह बन सकती है। बता दें कि ये केस
एक महिला अफसर से जुड़ा हुआ है, जो बाल विकास
कार्यक्रम अधिकारी हुआ करती थीं। उनके ऊपर 10 हजार रुपये घूस
डिमांड करने का आरोप था। इस मामले में उन्हें निचली अदालत ने बरी कर दिया था।
हालांकि, बाद में जब पटना हाइकोर्ट में मामला पहुंचा तो
उसने निचली अदालत का निर्णय पलट दिया और आरोपी महिला को दोषी ठहराते हुए सजा सुना
दी। पटना हाईकोर्ट ने महिला को भ्रष्टाचार निवारण
अधिनियम की धाराओं में कारावास की सजा दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने
फिलहाल महिला को मिली सजा पर रोक लगाते हुए उसे जमानत पर रिहा करने का ऑर्डर दे
दिया है। बेल की शर्तें ट्रायल कोर्ट की तरफ से तय होंगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस
मामले की सुनवाई के दौरान, हाईकोर्ट के उस
अवलोकन पर भी ध्यान दिया, जिसमें ये कहा गया
था कि सीज की गई रिश्वत की राशि वाला लिफाफा चूहों ने नष्ट किया। हालांकि,
मालखाना रजिस्टर में
उसकी एंट्री थी। पटना हाईकोर्ट ने
इसमें माना था कि सिर्फ रकम का नष्ट हो जाना मामले को कमजोर नहीं करता,
अगर अन्य सबूत दोष
सिद्ध करने के लिए काफी हों। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने
इशारा किया कि इस पहलू की अंतिम सुनवाई के वक्त विस्तार से जांच होगी।
चुनावी रण के बीच 100 देसी बम बरामद रफीकुल इस्लाम तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता के घर से
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के भांगर
में पुलिस ने रविवार को एक व्यक्ति के आवास से लगभग 100 देसी बम बरामद किए,
जो कथित तौर पर
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का कार्यकर्ता है।
विशिष्ट खुफिया सूचनाओं के आधार पर रफीकुल इस्लाम के घर पर तलाशी अभियान के दौरान
विस्फोटक सामग्री जब्त की गई। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है। दरअसल,पश्चिम बंगाल के
भांगुर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां तृणमूल कांग्रेस के
कार्यकर्ता के घर से 100 देसी बम बरामद किए
गए हैं। इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए 23 अप्रैल को वोटिंग हो
चुकी है और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग
होगी। चुनाव के नतीजे 4 मई 2026
को आएंगे। चुनाव
आयोग के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया,कोलकाता के पुलिस आयुक्त, सभी डीसीपी, एसपी और ओसी एवं आईसी रैंक तक के अधिकारियों को कड़ा संदेश जारी किया गया है कि यदि उनके अधिकार क्षेत्र में किसी भी व्यक्ति द्वारा ऐसा कोई विस्फोटक पाया जाता है या धमकी भरी रणनीति का इस्तेमाल किया जाता है, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अधिकारी ने आगे कहा कि संवेदनशील इलाकों में निगरानी और नियंत्रण को बढ़ाया जाएगा ताकि मतदाता बिना किसी डर के अपना वोट डाल सकें। मिली जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल पुलिस को बम बनाने वालों को गिरफ्तार करने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है। अभियान जारी है। बम बनाने से जुड़े मामलों समेत ऐसे सभी मामलों की जांच एनआईए करेगी।
आतंकी वारदत की संभावना जम्मू कश्मीर की सेंट्रल जेल से जम्मू कश्मीर पुलिस ने डिजिटल डिवाइस जब्त…बड़े टेरर नेटवर्क का हो सकता है खुलासा
जम्मू कश्मीर की सेंट्रल जेल से पुलिस ने डिजिटल डिवाइस जब्त की है। पुलिस को
जेल के अंदर डिजिटल सिग्नेचर होने के पुख्ता सबूत मिले थे। इसके बाद जेल परिसर में
तलाशी ली गई और डिजिटल डिवाइस बरामद की गई। जम्मू कश्मीर पुलिस की काउंटर
इंटेलिजेंस कश्मीर ने सेंट्रल जेल श्रीनगर में आतंक से जुड़े एक मामले में तलाशी
ली, जिसमें डिजिटल डिवाइस मिले। यह तलाशी एनआईए एक्ट
के तहत ली गई। श्रीनगर के स्पेशल जज ने तलाशी का वारंट जारी किया था। इस मामले में साल 2023 में यूएपी एक्ट की
धारा 13 और 39 के तहत पुलिस स्टेशन
सीआई कश्मीर में एफआईआर दर्ज हुई थी। सेंट्रल जेल परिसर में संदिग्ध डिजिटल
सिग्नेचर होने के भरोसेमंद
टेक्निकल सुरागों पर कार्रवाई करते हुए,
जेल अधिकारियों के
साथ मिलकर कई ब्लॉक और बैरकों में तलाशी अभियान चलाया गया। इस अभियान के दौरान,
जांच से जुड़े
डिजिटल कम्युनिकेशन डिवाइस के रूप में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई और उसे जब्त
कर लिया गया। इन डिवाइस की डिटेल्ड फोरेंसिक जांच की जाएगी ताकि संभावित लिंक का
पता लगाया जा सके और एक बड़े टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। इसके साथ ही,
जांच एजेंसी उस साफ
सिक्योरिटी ब्रीच की जांच कर रही है जिससे ऐसे डिवाइस हाई-सिक्योरिटी जेल में
घुसे।
इस काम में शामिल मददगारों और सहयोगियों की भूमिका की पूरी तरह से जांच
की जाएगी और सही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह ऑपरेशन जरूरी
सबूतों को सामने लाने, गैर-कानूनी गतिविधियों
पर रोक लगाने और जेलों सहित सेंसिटिव सिक्योरिटी जोन के अंदर कम्युनिकेशन डिवाइस
के गलत इस्तेमाल को रोकने की लगातार कोशिश का हिस्सा है। इसका मकसद केंद्र
शासित प्रदेश में टेरर इकोसिस्टम को खत्म करना भी है, इसके लिए टेररिस्ट
साथियों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान करके उन पर देश के कानून के मुताबिक
मुकदमा चलाया जाएगा।
आजादी के दशकों बाद पहली बार इस गाँव पहुंची रोशनी जले बल्ब
ईरपानार गांव में विकास राज्य सरकार की नियाद नेल्ला नार आपका अच्छा गांव
योजना के तहत संभव हुआ है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बस्तर के उन दूरदराज और
संवेदनशील इलाकों में बुनियादी सुविधाएं बिजली, सड़क,
पानी,
शिक्षा,
स्वास्थ्य पहुंचाना
है, जो लंबे समय तक नक्सली प्रभाव के कारण विकास से
कटे रहे। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ स्थित ईरपानार गांव में आजादी के दशकों बाद
पहली बार बिजली पहुंची है। माओवाद के गढ़ रहे इस दुर्गम इलाके में जब शुक्रवार को
पहली बार बल्ब की रोशनी फैली, तो व ग्रामीणों की
खुशी का ठिकाना नहीं रहा। ईरपानार गांव के
निवासी दशकों से रात के अंधेरे को दूर करने के लिए लालटेन और लकड़ियों पर निर्भर
थे। प्रशासन के अनुसार, करीब 56.11
लाख रुपये की लागत
से हुए विद्युतीकरण से फिलहाल गांव के 10 परिवारों को सीधा
लाभ मिला है। कठिन रास्तों के कारण कई जगहों पर मशीनों का उपयोग नामुमकिन था। ऐसे
में बिजली विभाग के कर्मचारियों और स्थानीय मजदूरों ने खुद खंभे और अन्य उपकरण
ढोकर वहां पहुंचाए। मानसून और कठिन परिस्थितियों के बावजूद छत्तीसगढ़ राज्य
विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड ने प्राथमिकता के आधार पर इसे पूरा किया। निवासियों ने बताया कि उन्होंने पहली बार बिजली
की रोशनी देखी है, जो उनके लिए किसी ऐतिहासिक क्षण से कम नहीं है।
बिजली आने से अब बच्चे रात में पढ़ाई कर सकेंगे और मोबाइल चार्जिंग जैसी बुनियादी
सुविधाएं घर पर ही मिलेंगी। अधिकारियों के
मुताबिक, हाल ही में पास के हांडावाड़ा गांव में भी बिजली
पहुंचाई गई है। नारायणपुर की जिलाधिकारी
नम्रता जैन ने बताया कि ईरपानार तक बिजली पहुंचाना कोई सामान्य काम नहीं था। इस
प्रोजेक्ट के रास्ते में कई भौगोलिक और तकनीकी बाधाएं थीं। यह गांव जिला मुख्यालय
से 30 किमी दूर है, लेकिन वहां तक
पहुंचने के लिए घने जंगलों और खड़ी चढ़ाइयों को पैदल पार करना पड़ता है।
'F…. Off' जैसे शब्द उचित नहीं हो, लेकिन इसे यौन उत्पीड़न नहीं....पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एवं हरियाणा
हाईकोर्ट ने कहा कि वर्कप्लेस पर शिष्टाचार बनाए रखना जरूरी होता है,
लेकिन किसी एक बार की अभद्र टिप्पणी को,
जिसमें कोई यौन आशय ना हो,
उसे IPC की धारा 354A के तहत अपराध नहीं मान सकते। हाईकोर्ट ने पाया कि
आरोपी की तरफ से इस्तेमाल किए गए शब्दों में यौन प्रकृति जैसा कुछ नहीं था,
इसलिए इस मामले में यह धारा लागू नहीं
होती है। हाईकोर्ट ने एक अहम मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि वर्कप्लेस पर
किसी विवाद के दौरान 'F…. Off' जैसे शब्द का प्रयोग भले ही उचित नहीं हो,
लेकिन इसे यौन उत्पीड़न नहीं मान सकते,
जब तक उसमें यौन मंशा या ऐसा कोई संकेत
नहीं हो। जस्टिस कीर्ति सिंह ने साफ किया कि इस केस में बातचीत का संदर्भ कार्य
संबंधी मतभेद से जुड़ा हुआ है। गौरतलब है कि यह केस एक प्राइवेट कंपनी के Director
से जुड़ा है, जिन्होंने साल 2019 में गुरुग्राम महिला
पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR
को रद्द करने की डिमांड की थी।
शिकायतकर्ता, जो उस
कंपनी में बिजनेस मैनेजर थीं, ने अक्टूबर, 2018 में Director से मेडिकल लीव मांगी थी, जिसके बाद ईमेल के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत
हुई। इसी दौरान, आरोपी
ने 'F….. Off' जैसे शब्दों का
प्रयोग किया। फिर, उसी दिन शिकायतकर्ता ने कंपनी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे स्वीकार कर लिया गया था। हालांकि,
बाद में नोटिस पीरियड,
सैलरी और Breach of
Contract को लेकर विवाद बढ़
गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को कानूनी नोटिस भी भेजे।
पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR
को रद्द करने की डिमांड की थी।
शिकायतकर्ता, जो उस
कंपनी में बिजनेस मैनेजर थीं, ने अक्टूबर, 2018 में Director से मेडिकल लीव मांगी थी, जिसके बाद ईमेल के माध्यम से दोनों के बीच बातचीत
हुई। इसी दौरान, आरोपी
ने 'F….. Off' जैसे शब्दों का
प्रयोग किया। फिर, उसी दिन शिकायतकर्ता ने कंपनी में अपने पद से इस्तीफा दे दिया,
जिसे स्वीकार कर लिया गया था। हालांकि,
बाद में नोटिस पीरियड,
सैलरी और Breach of
Contract को लेकर विवाद बढ़
गया और दोनों पक्षों ने एक-दूसरे को कानूनी नोटिस भी भेजे। फिर करीब 4
महीने बाद शिकायतकर्ता ने यौन उत्पीड़न का
आरोप लगाते हुए Director के खिलाफ FIR दर्ज कराई। हाईकोर्ट ने इस मामले में यह भी ध्यान
दिया कि FIR दर्ज
करवाने में शिकायतकर्ता की तरफ से देरी हुई और यह केस पहले से चल रहे कॉन्ट्रैक्ट
विवाद से जुड़ा था। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि जब आरोप में अपराध का
मूल तत्व ही नहीं है, तो कार्यवाही को जारी रखना कानून का दुरुपयोग होगा। हाईकोर्ट ने इसी
आधार पर Director के खिलाफ FIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया।
हालांकि, याचिकाकर्ता
को एक महीने के भीतर PGIMER, चंडीगढ़ के गरीब मरीज कल्याण कोष में 20
हजार रुपये जमा करने का निर्देश दिया गया।
मनसे के 11 लोग गिरफ्तार,नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई
मुंबई पुलिस ने महाराष्ट्र नव निर्माण
सेना नेता नयन कदम,
कुणाल माईणकर और किरण नकाशे समेत कुल 11
लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार सभी आरोपियों को मेडिकल जांच के लिए
शताब्दी अस्पताल ले जाया गया है। मुंबई पुलिस ने मराठी मुद्दे पर हंगामा मचाने के
आरोप में राज ठाकरे की पार्टी मनसे के नेताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक हरीश गवली ने
जानकारी देते हुए बताया कि राम यादव की तरफ से दहिसर में रिक्शा चालकों के लिए एक
संवाद सभा आयोजित की गई थी, जिसमें संजय निरुपम शामिल हुए थे। इस कार्यक्रम
का मनसे की तरफ से विरोध किया गया था। हालांकि, पुलिस ने इस मामले में नयन कदम,
कुणाल माईणकर और किरण नकाशे समेत 11
लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। सभी
आरोपियों को कल बोरिवली कोर्ट में पेश किया जाएगा। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 189(2),
191(3), 191(2), 190, 125,
324(4), 115(2) और महाराष्ट्र पुलिस अधिनियम,
1951 की धारा 135,
37(1)(अ) के तहत मामला
दर्ज किया है।
मुंबई में सभी ऑटो चालकों को मराठी सीखना
अनिवार्य किया गया है जिसपर राज ठाकरे की पार्टी भी समर्थन में सड़क पर उतर आई है।
वहीं, उत्तर
भारतीय नेताओं ने ऑटो वालों की सभाएं कर उन्हें मराठी भाषा की अहमियत समझाने और
मराठी भाषा सीखने के लिए समय देने की मांग उठाई है। इसके कारण मनसे आक्रोशित है।
मनसे का कहना है जिसे मराठी बोलनी नहीं आती वो ऑटो ना चलाए क्योंकि ये परप्रांतीय
ऑटो चालक मराठी ग्राहकों से बदसलूकी करते हैं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय निरुपम
ने कहा था कि महाराष्ट्र का एजेंडा है कि राज्य में मराठी भाषा को बढ़ावा दिया
जाए। हमें मूल एजेंडा से कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन हमारा विरोध उन ऑटो और रिक्शा चालकों के
परमिट रद्द करने की धमकी के खिलाफ है जो मराठी बोलना नहीं जानते। कम से कम उन्हें
सीखने की अनुमति तो दें, यही हमने सरकार से कहा है।
नागपुर NGO का धर्मांतरण दबाव इस्लाम अपनाओ नमाज पढ़ो, रोजा रखो...
मामला यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी, फिक्र और हम पढ़ें हम पढ़ाएं नामक एनजीओ से जुड़ा है, जहां संस्था के संचालक रियाज फाजिल काज़ी पर महिला कर्मचारियों ने गंभीर
आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, एनजीओ में काम करने वाली 23 वर्षीय एचआर और एडमिन हेड समेत चार युवतियों ने काज़ी पर
मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना का आरोप लगाया है। दरअसल,नागपुर के मानकापुर थाना क्षेत्र में चल रहे एनजीओ
प्रताड़ना मामले ने अब गंभीर मोड़ ले लिया है। महिलाओं के यौन शोषण और कथित जबरन
धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ता (ATS) भी मामले में शामिल हो गया है। एटीएस यह पड़ताल
करेगा कि क्या इस केस का संबंध नाशिक के चर्चित TCS धर्मांतरण मामले से है या फिर इसके पीछे किसी
संगठित और समान मॉड्यूल की भूमिका है। पीड़िताओं का आरोप है कि आरोपी उन्हें नमाज
पढ़ने, रोजा
रखने और धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए दबाव डालता था। साथ ही, उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता था।
जांच एजेंसियों को शक है कि यह पैटर्न नाशिक के TCS मामले से मिलता‑जुलता है, जहां इसी तरह महिलाओं को निशाना बनाए जाने के आरोप
सामने आए थे। एटीएस अब इस बात की जांच
कर रही है कि एनजीओ को मिलने वाली फंडिंग का
स्रोत क्या है और उसका वास्तविक उद्देश्य क्या था। यह भी देखा जा रहा है कि क्या
इसके पीछे कोई संगठित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क सक्रिय है। सूत्रों के
मुताबिक, एजेंसियां
यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं एनजीओ की गतिविधियां किसी बड़े रैकेट से तो
नहीं जुड़ी हैं। मानकापुर पुलिस ने झिंगाबाई टाकली स्थित एनजीओ कार्यालय से जुलाई 2025 से अब तक के सीसीटीवी फुटेज जब्त किए हैं। पीड़िताओं
का दावा है कि आरोपी अक्सर अपने केबिन में महिलाओं को बुलाने से पहले कैमरे बंद कर
देता था और बाद में दोबारा चालू कर देता था। एक साल के फुटेज की जांच से इन आरोपों
की पुष्टि की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा यह भी सामने आया है कि आरोपी
इंस्टाग्राम पर फर्जी अकाउंट बनाकर महिला कर्मचारियों पर नजर रखता था। आरोप है कि
उसकी बात न मानने पर वह सोशल मीडिया के जरिए बदनाम करने की धमकी देता और मानसिक
दबाव बनाता था। मानकापुर पुलिस ने आरोपी रियाज काजी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया
है और वह फिलहाल पुलिस हिरासत में है। पुलिस के साथ‑साथ अब एटीएस भी डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच
कर रही है। एटीएस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त जांच से आने वाले दिनों में यह
स्पष्ट होने की उम्मीद है कि इस मामले में और कितने लोग शामिल हैं और क्या इसके
तार किसी बड़े संगठित नेटवर्क से जुड़े हैं।





























