मुस्लिम पर्सनल लॉ नाबालिग पत्नी के यौन उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं दिल्ली हाई कोर्ट...

कोर्ट ने ये टिप्पणियां तब कीं जब उसने अपनी नाबालिग पत्नी के यौन उत्पीड़न के आरोपी एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने से इनकार कर दिया। शादी के समय लड़की की उम्र 16 साल तीन महीने थी, जबकि आरोपी की उम्र 28 साल थी। इसके बाद वे साथ रहने लगे और लड़की गर्भवती हो गई। गर्भावस्था के दौरान सरकारी अस्पताल जाने पर उसकी उम्र का पता चला। दरअसल,दिल्ली हाई कोर्ट ने नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने के मामले में मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर छूट देने से इनकार कर दिया। याचिका में जोड़े ने तर्क दिया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत, एक मुस्लिम लड़की बालिग होने पर शादी के लिए योग्य होती है और चूंकि शादी वैध है, इसलिए उसके बाद बने यौन संबंधों से कोई आपराधिक दायित्व नहीं बनता है।  हालांकि, कोर्ट ने कहा कि इस तर्क को स्वीकार नहीं किया जा सकता कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुई शादी के बाद बने यौन संबंध अपने आप 
अपराध की श्रेणी से बाहर हो जाते हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कानूनों के तहत आपराधिक दायित्व से छूट का दावा करने के लिए मुस्लिम पर्सनल लॉ का सहारा नहीं लिया जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि अगर किसी बालिग पुरुष को पर्सनल लॉ के तहत मान्यता प्राप्त मैरिज सर्टिफिकेट दिखाकर 18 साल से कम उम्र की लड़की से जुड़े मामले में जिम्मेदारी से बचने की इजाजत दी जाती है, तो इससे POCSO एक्ट का मकसद खत्म हो जाएगा। इसीलिए POCSO में किसी भी तरह की छूट नहीं मिलेगी और केस दर्ज किया जाएगा। जस्टिस संजीव नरूला ने 23 सितंबर के एक आदेश में ये बातें कहीं,अस्पताल प्रशासन द्वारा पुलिस को मामले की जानकारी देने के बाद व्यक्ति के खिलाफ POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। वहीं, पुलिस को दिए बयान में लड़की ने कहा कि शादी दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और उस पर कोई दबाव या जबरदस्ती नहीं की गई थी। उसने पति की जमानत अर्जी का समर्थन किया था और गर्भावस्था के दौरान उसकी मौजूदगी की इच्छा जताई थी।
27 September 2026
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बच्चो का अपहरण कर भीख मंगवाने के गिरोह का भांडाफोड़...

बच्चे के अपहरण के मामले में रांची पुलिस ने साहिबगंज पुलिस के सहयोग से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी सार्वजनिक स्थानों से छोटे बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करने के बाद उन्हें साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में रखते थे। यहां बच्चों से भीख मंगवाने और अन्य आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। मामला 24 सितंबर की सुबह का है। बच्चे की मां अपने चार वर्षीय बेटे के साथ छत्तीसगढ़ स्थित अपने घर लौट रही थी। ट्रेन बदलने के लिए वह रांची रेलवे स्टेशन पहुंची थी। ट्रेन के इंतजार के दौरान स्टेशन परिसर के बाहर से उसका चार वर्षीय बेटा अचानक 
गायब हो गया। काफी तलाश के बाद बच्चे का पता नहीं चला तो मां ने रांची के चुटिया थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई।  मामला संवेदनशील होने के कारण रांची पुलिस ने बच्चे की तलाश के लिए विशेष टीम का गठन किया। विशेष टीम ने तकनीकी अनुसंधान और ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए बच्चे से जुड़े सुराग जुटाने शुरू किए। जांच के दौरान पुलिस को अपहरण में शामिल एक आरोपी के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद रांची पुलिस ने धनबाद पुलिस के सहयोग से एक आरोपी को धनबाद रेलवे स्टेशन के पास से गिरफ्तार कर लिया। 
पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाया। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर साहिबगंज जिले के तीनपहाड़ इलाके से अपहृत चार वर्षीय बच्चे को भी सकुशल बरामद कर लिया। बच्चे की बरामदगी के बाद चुटिया थाना पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उसे परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में गिरोह के काम करने के तरीके को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसे सार्वजनिक स्थानों के आसपास छोटे बच्चों को बहला-फुसलाकर अगवा करते थे। इसके बाद बच्चों को साहिबगंज के तीनपहाड़ इलाके में अलग-अलग जगहों पर रखा जाता था। आरोप है कि बच्चों को भीख मांगने के लिए तैयार किया जाता था।  पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि बच्चों का इस्तेमाल अन्य आपराधिक गतिविधियों में भी किया जाता था। हालांकि, गिरोह के पूरे नेटवर्क और बच्चों से कराए जाने वाले अपराधों की जानकारी पूछताछ और जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर महाराष्ट्र में SIR की प्रक्रिया पर सवालिया निशान...?

महाराष्ट्र के रहने वाले तीन लोगों ने याचिका कोर्ट में दायर की है। इसमें दावा किया गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां वोटरों के नाम हटाने, ऐड करने, इलेक्टोरल रोल डेटाबेस आदि को लेकर है। याचिकाकर्ता का कहना है मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2023 के कानून के सेक्शन 18 के तहत अपना काम नहीं किया है। उन्होंने 14 फैसलों को रद्द करने, महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया रोके जाने की मांग की है। साथ ही, जिन लोगों के नाम एसआईआर प्रोसेस में काट दिए गए हैं, उन्हें दोबारा जोड़ने की मांग की है। दरअसल,बॉम्बे हाई कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर की गई है। हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच में याचिका दायर करके याचिकार्ता ने मांग की है कि महाराष्ट्र में हाल ही में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से हटाए गए 

हर मतदाता को वापस लाया जाए. साथ ही, ज्ञानेश कुमार के आदेशों को भी रद्द करने की मांग की गई है। दरअसल याचिका में महाराष्ट्र में हालिया SIR (Special Intensive Revision) के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है। साथ ही ECI और CEC ज्ञानेश कुमार द्वारा पिछले करीब 10 महीनों में जारी 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है। साथ ही महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई। विभिन्न राज्यों में चल रही एसआईआर प्रक्रिया भी ज्ञानेश कुमार और अन्य चुनाव आयुक्तों की देखरेख में हो रहा है। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्ष जमकर विरोध कर चुका है। राहुल गांधी, ममता बनर्जी समेत तमाम विपक्षी नेता इस प्रक्रिया के खिलाफ हैं और आरोप लगाते रहे हैं कि यह विपक्षी दलों के वोटों को काटने की प्रक्रिया है। 




हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है। SIR वाले राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को तब तक टालने की मांग की गई है,जब तक नए और कानून के अनुरूप इलेक्टोरल रोल तैयार न हो जाएं। हालिया SIR में कथित डाटा डिटेक्शन और सॉफ्टवेयर ब्लॉकेज की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र न्यायिक समिति बनाने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने कहा है, ‘पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग और CEC ज्ञानेश कुमार ने जिन 14 प्रशासनिक आदेशों को पारित किया है, उन्हें रद्द किए जाएं। इसके बारे में इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने इन आदेशों पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग के अलग-अलग फैसलों और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस को लेकर कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई थी। 
25 September 2026
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कहां होनी थी सप्लाई 10 हजार से अधिक गर्भपात किट बरामद....

जानकारी के अनुसार औषधि नियंत्रक विभाग को सूचना मिली थी कि धार कोठी क्षेत्र स्थित एक मकान के गोदाम में बड़ी मात्रा में ऐसी दवाइयों और किट का भंडारण किया गया है, जिनका इस्तेमाल गर्भपात के लिए किया जाता है। सूचना के सत्यापन के बाद विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर गोदाम की जांच की। बताया जा रहा है कि कार्रवाई जिला कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में की गई।  छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में किट मिलने के बाद अधिकारियों ने सामग्री को अपने कब्जे में ले लिया और दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी। दरअसल,मध्य प्रदेश के इंदौर में औषधि नियंत्रक विभाग ने धार कोठी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक मकान में बने गोदाम 
पर छापा मारा। विभाग की टीम ने यहां से 10 हजार से अधिक गर्भपात किट बरामद किए जाने का दावा किया है। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 52 लाख रुपये बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद विभाग ने बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बरामद किट कहां से खरीदी या मंगाई गई थीं और इन्हें किन लोगों या संस्थानों तक पहुंचाया जाना था। इसके लिए सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों और अन्य रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।




अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि बरामद सामग्री की कानूनी स्थिति क्या है और इसके भंडारण या सप्लाई में किन लोगों की भूमिका रही है। संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, बरामद सामग्री की संख्या, दवाइयों की वैधता, बैच नंबर और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इतनी बड़ी मात्रा में गर्भपात किट गोदाम तक कैसे पहुंचीं और इन्हें कहां सप्लाई किया जाना था। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि जिस मकान में गोदाम संचालित हो रहा था, वह किसके नाम पर है। विभाग की टीम गोदाम के मालिक और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल औषधि नियंत्रक विभाग की कार्रवाई जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार है। कलेक्टर शिवम वर्मा की ओर से भी मामले में विभागीय जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी।
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पेपर लीक,युवाओं को रोजगार क्यों नहीं..?सिस्टम को अंधभक्त चाहिए…छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में राहुल गांधी

सिस्टम स्टूडेंट से डरता है क्यूंकि स्टूडेंट्स पूछते हैं कि दो लोगों ने पूरे सिस्टम को कैसे कैप्चर कर लिया। अंध भक्त नफरत से बात करता है और नफरत फैलाता है। स्टूडेंट ईमानदार होता है और अंधभक्त झूठा होता है। राहुल ने कहा, सबसे बड़ी बात यह कि ये अपने बच्चों को अंधभक्त नहीं बनाते, इनके बच्चे अंग्रेजी स्कूल में पढ़ते हैं। दरअसल,मध्य प्रदेश के इंदौर में आज छात्रों की गूंज कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों को संबोधित करते हुए सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस सिस्टम को स्टूडेंट नहीं चाहिए, अंधभक्त चाहिए। उनके सवाल हैं और यही वजह है कि इस सिस्टम को छात्रों से खतरा लगता है। राहुल ने कहा, स्टूडेंट के अंदर अलग-अलग कैरेक्टरिस्टिक्स होते हैं और वो नेचुरली सवाल पूछते हैं, वे क्यूरियस होते हैं। वे लड़ते नहीं हैं, धमकाते नहीं हैं, डराते नहीं हैं और लास्ट क्वालिटी और बहुत 

इंपॉर्टेंट क्वालिटी, स्टूडेंट ईमानदार होते हैं, ईमानदारी से काम करते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि छात्र किसी बात को सिर्फ इसलिए नहीं मानता, क्योंकि उसे ऐसा बताया जाता है। छात्र उसकी वजह जानना चाहता है। राहुल ने कहा, सिस्टम ऐसे लोगों को बढ़ावा देता है जो जवाब मांगने की जगह हर बात को मान लेते हैं। आज का स्टूडेंट पूछता है कि स्कूल-कॉलेजों की हालत ऐसी क्यों है, पेपर लीक क्यों हो रहे हैं, युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा। उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्र भारत का भविष्य हैं, उनके बिना कोई भी देश मजबूत नहीं बन सकता। छात्रों की गूंज कार्यक्रम में एक छात्रा ने राहुल गांधी को बताया कि मध्य प्रदेश में सरकारी परीक्षाएं पास करने के बावजूद उनके जैसे कई अभ्यर्थी परेशान हैं, क्योंकि 13 प्रतिशत नियुक्तियां कानूनी विवाद के चलते रोक दी गई हैं। वहीं, मध्य प्रदेश के ही देवास के एक छात्र ने राहुल गांधी से कहा कि एमपीपीएससी में अनियमितताओं को उजागर करने पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करके उन्हें जेल भेज दिया गया था। इंदौर में  छात्रों की गूंज अभियान का ये पांचवां संस्करण है। बता दें कि इसकी शुरुआत राहुल गांधी ने कोटा से की थी, राहुल इससे पहले देहरादून, दिल्ली, प्रयागराज और पुणे में भी छात्रों की गूंज कार्यक्रम कर चुके हैं। 

20 September 2026
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नागपुर के 2 बड़े सरकारी अस्पतालों में पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाएं जांच में फेल...

FDA की जांच में केवल पैरासिटामोल ही सवालों के घेरे में नहीं आई। उच्च रक्तचाप यानी ब्लड प्रेशर के मरीजों को दी जाने वाली एक दवा का नमूना भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। बुखार और शरीर में दर्द के लिए आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली पैरासिटामोल की जांच में उसके बाहरी स्वरूप से जुड़ी खामी सामने आई। वहीं ब्लड प्रेशर की दवा के नमूने को भी निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट सामने आने के बाद मेडिकल प्रशासन ने दोनों तरह की दवाओं के वितरण पर तत्काल रोक लगा दी। अन्न एवं औषधि प्रशासन की ओर से सरकारी अस्पतालों में दवाओं की नियमित जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के तहत 
अगस्त महीने में पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाओं के नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला जांच के बाद इन नमूनों की रिपोर्ट निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं आई। इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित सरकारी अस्पतालों को इन दवाओं का वितरण तुरंत रोकने और उपलब्ध स्टॉक वापस लेने के निर्देश दिए गए। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में नागपुर के दो बड़े सरकारी अस्पतालों में सरकारी सप्लाई से पहुंची दवाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 
गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में इस्तेमाल के लिए भेजी गई पैरासिटामोल और ब्लड प्रेशर की दवाएं जांच में निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरीं। अन्न एवं औषधि प्रशासन यानी कि FDA की लैब जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों अस्पतालों को इन दवाओं का वितरण और इस्तेमाल तत्काल रोकने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही अस्पतालों में मौजूद पूरा स्टॉक वापस लेने को कहा गया है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट डॉ.अविनाश गावंडे ने बताया कि FDA का पत्र मिलते ही अस्पताल प्रशासन ने करीब सवा लाख पैरासिटामोल की गोलियां वापस ले ली गई हैं। अब इन गोलियों का वितरण नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में दूसरी कंपनियों की करीब ढाई लाख पैरासिटामोल की गोलियां पहले से मौजूद हैं। इसलिए मरीजों को पैरासिटामोल की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और दूसरी कंपनियों की दवाओं का वितरण जारी है।डॉ.अविनाश गावंडे के मुताबिक, FDA की जांच रिपोर्ट में पैरासिटामोल की गोलियों के रंग को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। इसी आधार पर जांच में लिए गए नमूने को निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं माना गया। उन्होंने बताया कि यह दवा जुलाई महीने में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज में पहुंची थी। FDA का पत्र मिलने के बाद इसका वितरण रोककर उपलब्ध स्टॉक वापस मंगा लिया गया।डॉ.गावंडे ने बताया कि अस्पताल में दवाओं की खरीद के लिए अलग ड्रग परचेज डिपार्टमेंट है और फार्माकोलॉजी विभाग के HOD ड्रग खरीद से जुड़ी व्यवस्था देखते हैं। उन्होंने बताया कि बाबासाहेब आंबेडकर अस्पताल में कुछ दवाएं धीमी गति से इस्तेमाल हो रही थीं, इसलिए वहां से ये दवाएं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नागपुर और इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल नागपुर को भेजी गई थीं।
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दूसरे व्यक्ति से महिला का निकाह हलाला- तलाक के बाद दोबारा निकाह करने से पहले पति का इनकार

मामला गिरिडीह जिले के धनवार थाना क्षेत्र से जुड़ा है। जानकारी के मुताबिक, मुस्लिम दंपति के बीच वर्ष 2020 में विवाद के बाद तलाक हो गया था। विवाद के बाद मामला थाने तक पहुंचा और महिला की ओर से पति के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई थी। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। झारखंड में रांची हाईकोर्ट जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने कहा कि अगर तलाक के बाद महिला दूसरे व्यक्ति से निकाह करती है और बाद में हलाला की प्रक्रिया के बाद पूर्व पति से दोबारा निकाह करना चाहती है, तो पूर्व पति का दोबारा शादी से इनकार करना अपने आप में कोई संज्ञेय अपराध नहीं है। अदालत ने इसी मामले में आरोपी 
पूर्व पति को अग्रिम जमानत भी प्रदान की है। इसके बाद तलाकशुदा महिला ने दूसरे व्यक्ति से निकाह किया। बाद में हलाला की प्रक्रिया के बाद उसने अपने पहले पति से दोबारा निकाह करने की इच्छा जताई। आरोप है कि पूर्व पति ने उससे दोबारा निकाह करने से इनकार कर दिया। इसके बाद महिला की ओर से पूर्व पति के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया गया। मामले में आरोपी पूर्व पति ने गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया और अग्रिम जमानत की मांग की,सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने मामले के तथ्यों पर विचार किया। 

अदालत ने कहा कि तलाक के बाद महिला का किसी दूसरे पुरुष से निकाह होने के बाद पूर्व पति पर दोबारा उससे निकाह करने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है। केवल इस आधार पर कि पूर्व पति ने अपनी तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने से इनकार कर दिया, इसे अपने आप में अपराध नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सामान्य आपराधिक कानून या मुस्लिम पर्सनल लॉ किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध किसी अन्य व्यक्ति से दोबारा निकाह करने के लिए बाध्य नहीं करता यानी किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उससे विवाह करने के लिए कानूनी तौर पर मजबूर नहीं किया जा सकता। इस मामले में हाईकोर्ट ने आरोपी पूर्व पति को राहत देते हुए 25-25 हजार रुपये के दो निजी मुचलकों पर अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान की। अदालत के इस आदेश को तलाक के बाद दोबारा निकाह से इनकार के मामले में महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणी के तौर पर देखा जा रहा है।
11 September 2026
Posted by achhiduniya

कहां ली अंतिम श्वास कैंची धाम के नीम करोली बाबा उर्फ लक्ष्मी नारायण शर्मा ने....?

नीम करोली बाबा का संदेश बहुत सरल था। वह प्रेम को सबसे बड़ी शक्ति मानते थे। वह लोगों से कहते थे कि भगवान का नाम लो और दूसरों की सेवा करो। वे कहते थे सभी लोगों से प्रेम करें।  जरूरतमंद की सहायता करें। भोजन का सम्मान करें। अहंकार से दूर रहें। हनुमान जी की भक्ति करें।  कठिन समय में धैर्य रखें। सेवा को जीवन का हिस्सा बनाएं। लक्ष्मी नारायण शर्मा से नीम करोली बाबा बनने की यात्रा केवल एक व्यक्ति के संत बनने की कहानी नहीं है। यह गृहस्थ जीवन, वैराग्य, सेवा और भक्ति के बीच संतुलन की कहानी भी है। उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाएं आस्था पर आधारित हैं। लक्ष्मी नारायण शर्मा का मन बचपन से ही धार्मिक कार्यों में लगता था। वे पूजा-पाठ करते,हनुमान जी के प्रति उनकी गहरी आस्था थी। किशोरावस्था में ही उन्हें संसार की मोह माया से दूरी महसूस होने लगी थी। करीब 11 वर्ष की उम्र में उनका विवाह राम बेटी देवी से कर दिया गया। विवाह के बाद भी उनका मन पूरी तरह गृहस्थ जीवन में नहीं लगा। वह साधु जीवन और आध्यात्मिक साधना की ओर आकर्षित होते रहे। प्रचलित कथाओं के अनुसार, करीब 17 वर्ष की आयु में 
उन्हें आध्यात्मिक अनुभव हुआ। इसके बाद उनका झुकाव साधना की ओर और बढ़ गया। वह घर छोड़कर अलग-अलग स्थानों पर घूमने लगे। इस दौरान उन्होंने कई जगहों पर तपस्या की। गुजरात के बवानिया मोरबी क्षेत्र में भी उन्होंने साधना की,वहां लोग उन्हें तलइया बाबा के नाम से जानने लगे। आगे चलकर उन्हें लक्ष्मण दास, हांडी वाले बाबा और तिकोनिया वाले बाबा जैसे नामों से भी पुकारा गया। उनका जीवन किसी एक स्थान तक सीमित नहीं रहा। वह गांवों, कस्बों और धार्मिक स्थानों पर जाते थे। लोगों की समस्याएं सुनते थे। जरूरतमंदों की सहायता करते। उनके लिए सेवा ही साधना का एक महत्वपूर्ण रूप थी। कई वर्षों तक घर से दूर रहने के बाद पिता को पता चला कि फर्रुखाबाद जिले के नीब करौरी गांव में उनके जैसे दिखने वाला एक साधु रह रहा है। उनके पिता वहां पहुंचे। उन्होंने लक्ष्मी नारायण शर्मा को पहचान लिया। पिता के आग्रह पर उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। इसके बाद उन्होंने कुछ समय गृहस्थ जीवन बिताया। उनके दो पुत्र और एक पुत्री हुए।
हालांकि, उनका मन हमेशा आध्यात्मिक कार्यों में लगा रहा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाने के साथ-साथ वह लोगों की सहायता भी करते थे। स्थानीय लोगों के बीच उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती गई। कई कथाओं में उन्हें लंबे समय तक गांव का निर्विरोध प्रधान भी बताया गया है। नीम करोली बाबा के नाम से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कथा ट्रेन की है,कहा जाता है कि एक बार वह ट्रेन से यात्रा कर रहे थे। उनके पास टिकट नहीं था। टिकट जांचने वाले कर्मचारी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद क्षेत्र में स्थित नीब करौरी स्टेशन के पास ट्रेन से उतार दिया। बाबा ट्रेन से उतरकर एक स्थान पर बैठ गए। इसके बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। रेलवे कर्मचारियों ने ट्रेन को चलाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। स्थानीय लोगों ने इसे बाबा की आध्यात्मिक शक्ति से जोड़कर देखा।  कहा जाता है कि अधिकारियों और यात्रियों ने बाबा से दोबारा ट्रेन में बैठने का अनुरोध किया। बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी। इसी घटना के बाद लोग उन्हें नीम करौरी बाबा कहने लगे। समय के साथ यही नाम बदलकर नीम करोली बाबा के रूप में प्रसिद्ध हो गया। कैंची धाम धीरे-धीरे बाबा के प्रमुख आश्रम के रूप में प्रसिद्ध हो गया। बाबा यहां आने वाले लोगों से मिलते थे। वह उनकी बातें सुनते थे। लोगों को प्रेम, ईमानदारी और सेवा का संदेश देते थे। बाबा का मानना था कि भगवान की भक्ति केवल पूजा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। भूखे को भोजन देना, दुखी की सहायता करना और जरूरतमंद की मदद करना भी भक्ति का हिस्सा है। कैंची धाम में हर वर्ष 15 जून को स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं। प्रसाद बांटा जाता है। पूरे परिसर में भक्ति और सेवा का वातावरण दिखाई देता है। नीम करोली बाबा ने अपने जीवन का अंतिम समय वृंदावन में बिताया। बताया जाता है कि 11 सितंबर 1973 को उन्होंने शरीर त्याग दिया। उनके निधन के बाद भी उनकी शिक्षाएं और स्मृतियां लोगों के बीच जीवित रहीं। कैंची धाम आज भी उनके भक्तों के लिए प्रमुख तीर्थस्थल है। भारत और विदेशों में उनके नाम से कई आश्रम और सेवा केंद्र चलाए जाते हैं।
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1,158 LPG रेगुलेटर 730 हेलमेट,नकली ISI मार्क वाले गिरोह का भंडाफोड़....

गाजियाबाद शाखा कार्यालय [GZBO] ने गाजियाबाद में ISI मार्क के दुरुपयोग के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद के दो अलग अलग संस्थानों पर प्रवर्तन कार्रवाई की। इन कार्रवाइयों में हेलमेट और LPG रेगुलेटर से संबंधित इकाइयों की जांच की गई। दोनों कार्रवाइयों के दौरान BIS अधिकारियों ने लगभग 730 हेलमेट, 4,646 हेलमेट पैकेजिंग सामग्री पर रद्द BIS लाइसेंस नंबर अंकित था। 1,158 LPG रेगुलेटर जब्त किए। यह तलाशी एवं जब्ती कार्रवाई BIS अधिनियम, 2016 की धारा 28 के तहत की गई। गाजियाबाद स्थित एक हेलमेट निर्माण इकाई पर तलाशी ली। कार्रवाई के दौरान 730 हेलमेट और 4,646 पैकेजिंग सामग्री जब्त की गई, जिन पर रद्द किए गए BIS लाइसेंस नंबर का इस्तेमाल किया गया था। प्रारंभिक जांच में रद्द BIS लाइसेंस के बावजूद ISI मार्क वाले हेलमेट के भंडारण/निर्माण से संबंधित मामला सामने आया। BIS टीम ने आनंद इंडस्ट्रियल एस्टेट, मोहन नगर, गाजियाबाद स्थित एक इकाई की 

तलाशी ली। इस कार्रवाई में 1,158 LPG रेगुलेटर जब्त किए गए। यह कार्रवाई BIS अधिनियम, 2016 के प्रावधानों के उल्लंघन के संबंध में की गई। जब्त किए गए सभी उत्पादों को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए BIS के कब्जे में ले लिया गया है। BIS ने कहा कि संबंधित फर्मों के खिलाफ BIS अधिनियम, 2016 के प्रावधानों क तहत आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि BIS अधिनियम, 2016 की धारा 29 के तहत पहली बार किए गए उल्लंघन पर दो वर्ष तक की सजा या कम से कम ₹2 लाख का जुर्माना, जो संबंधित माल की कीमत के दस गुना तक बढ़ सकता है, या दोनों का प्रावधान है। BIS ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे कोई भी ISI मार्क वाला उत्पाद खरीदने से पहले उसकी BIS प्रमाणिकता और लाइसेंस की जानकारी BIS CARE App के माध्यम से जरूर जांचें। यदि किसी उत्पाद पर ISI मार्क के गलत इस्तेमाल का संदेह हो, तो इसकी शिकायत BIS CARE App या [gzbo@bis.gov.in] पर की जा सकती है। शिकायतकर्ता की पहचान को गोपनीय रखा जाएगा।

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12वीं कक्षा तक पढ़ाई मेडिकल लाइसेंस नहीं,5 फर्जी डॉक्टरों पर कार्रवाई

मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच की यूनिट 6 और 8 ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका के चिकित्सा अधिकारियों के साथ मिलकर शहर में फर्जी तरीके से प्रैक्टिस कर रहे पांच डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की है। पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और फिर जिनके पास BHMS डिग्री थी, उन्हें नोटिस देकर छोड़ दिया, उनके क्लीनिक से एलोपैथिक दवाइयां भी सीज कर ली। इनमें चार क्लीनिक देवनार के जाकिर हुसैन नगर और गोवंडी इलाके में, जबकि एक क्लीनिक नौपाड़ा-बांद्रा पूर्व इलाके में स्थित थी। पुलिस के मुताबिक, ये कथित डॉक्टर बिना आवश्यक मेडिकल योग्यता और लाइसेंस के मरीजों की जांच और उनका इलाज कर रहे थे। इनमें से कोई भी महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत नहीं था। पुलिस के अनुसार, सभी क्लीनिक सामान्य मेडिकल सेंटर की तरह संचालित किए जा रहे थे। गोवंडी स्थित आयशा क्लीनिक के बोर्ड पर डॉ. मेहमूद आलम को BHMS (बैचलर ऑफ होम्योपैथिक मेडिसिन एंड सर्जरी) बताया गया था। बोर्ड पर अन्य योग्यताएं और रजिस्ट्रेशन नंबर भी दर्ज था। गोवंडी के ही गायत्री क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड पर डॉ. ए.के. दुबे को 
BHMS फैमिली फिजिशियन बताया गया था। बोर्ड पर सुबह और शाम मरीजों को देखने का समय भी लिखा हुआ था। इन्हीं दो डॉक्टरों को नोटिस देकर पुलिस ने छोड़ा और आगे से केवल होम्योपैथिक दवाएं ही रखने की हिदायत दी। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1,19,324 रुपये कीमत की विभिन्न दवाएं और मेडिकल सामग्री जब्त की। इसमें अलग-अलग प्रकार के इंजेक्शन की बोतलें, सिरिंज, एंटीबायोटिक टैबलेट, ब्लड प्रेशर मॉनिटर, स्टेथोस्कोप, ब्लड शुगर जांच मशीन, नेब्युलाइजर और अन्य मेडिकल सामान शामिल हैं। सगीर अहमद अब्दुल माजिद हाशमी (39) - डॉ. सगीर क्लीनिक (गिरफ्तार) अखिलेश कुमार देवेंद्र कुमार दुबे (47) - गायत्री क्लीनिक (नोटिस) मेहमूद आलम मोहम्मद शरीफ शेख (36) - आयशा क्लीनिक (नोटिस) केशव प्रसाद कुद्दूर पटेल (56) - पटेल क्लीनिक (गिरफ्तार ) मोहम्मद आफताब शौकत खान (56) - आफताब खान क्लीनिक इस पर सबसे गंभीर आरोप सबसे गंभीर आरोप बांद्रा पूर्व में मोहम्मद आफताब शौकत खान (56) द्वारा संचालित क्लीनिक को लेकर सामने आए हैं। पुलिस ने जिस वक्त क्लीनिक पर छापा मारा। उस समय चार मरीज इलाज के लिए इंतजार कर रहे थे। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान खान ने बताया कि उसने केवल 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और उसके पास कोई मेडिकल योग्यता नहीं है। पुलिस ने बताया कि उसने महाराष्ट्र काउंसिल ऑफ इंडियन मेडिसिन और ऑल इंडिया आयुर्वेद विद्यापीठ द्वारा जारी होने का दावा करने वाले कुछ मेडिकल प्रमाणपत्र पेश किए। पुलिस को इन प्रमाणपत्रों के फर्जी होने का संदेह है। पुलिस ने बताया कि पांचों आरोपियों के खिलाफ देवनार और निर्मल नगर पुलिस थानों में मामले दर्ज किए गए हैं
16 August 2026
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लगातार 150 थप्पड़ मारकर बचाई छोटे भाई की जान जाने क्या है पूरा मामला...?

21 वर्षीय युवक को होश में रखने के लिए उसके बड़े भाई ने लगातार थप्पड़ मारे, जबकि मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाकर उसे नया जीवन दिया। दरअसल,हरदोई में एक युवक को एक जहरीले सांप ने डस लिया और उसकी हालत बिगड़ने लगी। लेकिन भाई ने  उसे सोने से बचाने के लिए लगातार थप्पड़ मारकर जगाए रखा तो वहीं डॉक्टर उसे एक के बाद एक एंटी वेनम डोज देते। समय पर मिली मदद, डॉक्टरों की सूझबूझ और बड़े भाई के प्रयासों से उसकी जान बचाई जा सकी। घटना देहात कोतवाली क्षेत्र के ज्योति नगर की है। आकाश नामक व्यक्ति डेयरी चलाते हैं। शनिवार दोपहर उनके छोटे भाई अरुण (21) खेत में उनके लिए पानी लेकर गए थे। दोपहर करीब 2 बजे जब अरुण ने घास की बोरी उठाई, तो वहां छिपे एक सांप ने उन्हें डस लिया। अरुण के चीखने पर आकाश तुरंत उन्हें सड़क की ओर लेकर भागे और एंबुलेंस और पुलिस को फोन किया। अरुण की हालत तेजी से बिगड़ रही थी। 
इसी दौरान प्रगति नगर निवासी मेडिकल स्टोर संचालक शिवम शर्मा वहां से गुजर रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शिवम ने दोनों भाइयों को अपनी बाइक पर बैठाया और बिना देर किए उन्हें मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। मेडिकल कॉलेज पहुंचते ही इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (EMO) डॉ. शेर सिंह और उनकी पांच सदस्यीय टीम ने तत्काल इलाज शुरू कर दिया। डॉक्टर ने परिजनों को सख्त हिदायत दी कि मरीज को किसी भी कीमत पर सोने न दिया जाए। डॉक्टर के निर्देश का पालन करते हुए बड़े भाई आकाश ने अरुण को होश में रखने के लिए लगभग 150 थप्पड़ मारे, ताकि वह जागते रहे और उनकी हालत पर नजर रखी जा सके। डॉ. शेर सिंह के मुताबिक आमतौर पर सांप के काटने पर पांच इंजेक्शन दिए जाते हैं, लेकिन अरुण के शरीर में जहर के गंभीर प्रभाव को देखते हुए दो घंटे के भीतर कुल 15 एंटी-वेनम इंजेक्शन लगाए गए। डॉक्टर ने बताया कि सांप के काटने के बाद मरीज का सो जाना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि इससे तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) अवरुद्ध होने और सांस की नली में उल्टी फंसने का खतरा रहता है।
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RSS को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं….

बेंगलुरु की शिवाजीनगर और चामराजपेट विधानसभा सीटों का जिक्र करते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने कहा कि पिछले दो दशकों में वहां किसी भी राजनीतिक दल का कोई हिंदू उम्मीदवार नहीं जीता है। उन्होंने राजनीतिक दलों को चुनौती दी कि वो अगले चुनाव में ऐसे उम्मीदवार उतारें। उन्होंने कहा,हिंदू बहुमत में क्यों रहें? किसी को हराने के लिए नहीं, हिंदू बहुमत में इसलिए रहने चाहिए, क्योंकि भारत को भारत बने रहना चाहिए। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी.एल. संतोष ने कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने RSS का रजिस्ट्रेशन कराने की बात कही थी। बी.एल.संतोष ने कहा कि RSS को अपना अस्तित्व साबित करने के लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संगठन 
लाखों लोगों के भरोसे के दम पर काम करता रहा है। हिंदू जागरण वेदिके द्वारा आयोजित अखंड भारत संकल्प दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संतोष ने दावा किया कि बंटवारे के समय RSS हिंदुओं के साथ खड़ा रहा और बिना किसी औपचारिक रजिस्ट्रेशन के काम करता रहा। उन्होंने कहा कि उस समय भी RSS रजिस्टर्ड नहीं था और आज भी नहीं है। रजिस्ट्रेशन से इसका अस्तित्व तय नहीं होता, यह लाखों लोगों के भरोसे से चलने वाला संगठन है।
बी.एल.संतोष ने कहा कि देश की आजादी हजारों क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से मिली थी, न कि सिर्फ नमक सत्याग्रह या चरखा चलाने से उन्होंने कहा,हमें आजादी इसलिए मिली, क्योंकि लाखों देशभक्त युवक-युवतियों और सैनिकों ने अपनी जान दांव पर लगाकर लड़ाई लड़ी। मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के 80वें साल का जश्न मनाते समय उनके बलिदानों को याद किया जाना चाहिए। बीजेपी महासचिव ने कहा कि आजादी हमें किसी ने तोहफे में नहीं दी थी, अंग्रेजों ने हमें बस ऐसे ही आजादी नहीं दे दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसी इलाके में हिंदू आबादी घटने से भारत के साथ जुड़ाव की भावना कमजोर हो जाएगी।  उन्होंने आरोप लगाया कि जहां भी हिंदू आबादी घटती है, वहां देश-विरोधी भावना पनपने लगती है।
15 August 2026
Posted by achhiduniya

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Today's IMP News Headline’s {सुर्खियां }

@ राहुल गांधी का दिमाग चोरी हो गया है, चुनाव आयोग के मुद्दे पर मैदान में उतरे भाजपा के 12 मुख्यमंत्री।@ असम में आशुतोष रांका समेत CJP के 30 से ज्यादा कार्यकर्ता हिरासत में, पार्टी ने कहा- CM हिमंता डर गए हैं।@ दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा ने युवक को जड़ा थप्पड़, AAP ने वीडियो शेयर कर कहा- गिरफ्तार करो।@ उत्तराखंड में चारधाम यात्रा रुकी, कड़ाके की ठंड में फंसे 4000 यात्री, रुद्रप्रयाग में लगातार हो रहा लैंडस्लाइड।@ 5th जनरेशन वॉरफेयर से आगे की तैयारी पर जोर, एयर मार्शल तेजपाल सिंह ने बताया भारत का रोडमैप।@ CM मोहन यादव ने खुद तोड़ना शुरू किया अपना पैतृक घर, सड़क चौड़ी होने के लिए टूटने हैं कई मकान।@ मन की बात' में पीएम मोदी ने पोषण माह पर की बात, छत्तीसगढ़ से मिजोरम तक की पहलों को सराहा।@ झारखंड में भीषण बारिश के बीच रेलवे स्टेशन बना 'पावर हाउस'! बिजली गुल होने के बाद फोन चार्ज करने पहुंचे लोग।@ हाइड्रोजन के बाद देश की पहली LNG ट्रेन लॉन्च, पेट्रोल-सीएनजी जैसा सिस्टम, साबरमती से अमित शाह ने दिखाई हरी झंडी।@ दिल्ली से बिहार-झारखंड तक अभी 3 दिन झमाझम बारिश, यूपी के 63 जिलों में बिगड़ा मौसम, मॉनसून की जोरदार वापसी।

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@ हम बहुत व्याकुल,गुस्सैल और आत्मकेंद्रित हो रहे हैं। दूसरों के प्रति सहयोग और जीवन के प्रति आस्था को मजबूत कीजिए। प्रेम,अनुराग और सहृदयता जीवन मूल्य हैं। इनको केवल शब्द समझने से बचना होगा। @जिस किसी चीज से जीवन में प्रेम छूटता जाता है, समय और स्नेह छूटता जाता है। वह बासी होती जाती है। हमारी जिंदगी में बासी होते रिश्ते इसकी गवाही दे रहे हैं। जिंदगी को प्रेम की धूप,थोड़ा इत्मिनान दीजिए।@ ऐसी आंखें जिनके सपने की सीमा सीमित होती है,वह अपने जीवन को विस्तार नहीं दे पातीं। अपने साथ थोड़ा दूसरों के लिए सोचना जिंदगी को सुकून,आनंद और सुख देता है।

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