पति वही होगा, धारा 80 और 85 के तहत जिसने महिला से….

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने फैसला सुनाया मामला भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 (दहेज हत्या) और धारा 85 (क्रूरता) से जुड़ा था। फैसला सुनाते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि धारा 80 और 85 के तहत पति वही होगा, जिसने महिला से कानूनी रूप से शादी की हो, न कि वह व्यक्ति जिसकी महिला के साथ शादी ही अमान्य है। आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब हुआ कि जिस व्यक्ति की दूसरी शादी पहली शादी के कायम रहने की वजह से अमान्य है, उसे आमतौर पर पति नहीं माना जा सकता यानी, पहली पत्नी जिंदा है और तलाक नहीं हुआ है तो दूसरी शादी अपने आप में अमान्य है और ऐसे मामले में व्यक्ति को दूसरी शादी में पति का दर्जा नहीं मिल सकता। लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनील कुमार नाम के शख्स की पहली पत्नी जिंदा थी। इसके बावजूद 
उसने तलाक दिए बगैर दूसरी शादी कर ली,लेकिन दूसरी पत्नी ने आत्महत्या कर ली और सुनील कुमार पर BNS की धारा 80, 85 और दहेज कानून के तहत आरोप लगे। आरोपी ने कोर्ट में दलील दी कि महिला उसकी दूसरी पत्नी थी, क्योंकि यह शादी तब हुई थी जब उसकी पहली शादी कायम थी, इसलिए दूसरी शादी अमान्य थी और उसे पति नहीं माना जा सकता। इससे सवाल खड़ा हुआ कि अगर किसी व्यक्ति ने पहली पत्नी के जीवित रहते हुए दूसरी शादी की है तो क्या वह धारा 80 और 85 के तहत दूसरी पत्नी का पति माना जाएगा? 
जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने माना कि पहली पत्नी के रहते हुए दूसरे शादी करने वाले व्यक्ति को पति नहीं माना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने उन दो अपवादों का भी जिक्र किया, जहां यह नियम लागू होगा। कोर्ट ने साफ किया कि दो परिस्थितियों में दूसरी शादी के मामले में भी व्यक्ति को पति माना जाएगा:- अगर पहली शादी को लेकर कोई संदेह हो तो दूसरी शादी में पति के तौर पर रह रहे व्यक्ति को धारा 80 और 85 के तहत पति की परिभाषा में शामिल किया जाएगा- अगर कोई व्यक्ति पहली पत्नी के होते हुए अपनी शादी को छिपाकर दूसरी महिला से शादी करता है और दूसरी पत्नी के साथ पति के तौर पर रहता है तो ऐसी स्थिति में भी उसे पति माना जाएगा नहीं। कोर्ट ने आगे साफ किया कि पहली शादी के रहते हुए की गई दूसरी शादी स्पेशल मैरिज एक्ट, फॉरेन मैरिज एक्ट, क्रिश्चियन मैरिज एक्ट, पारसी मैरिज एंड डिवोर्ट एक्ट और हिंदू मैरिज एक्ट के तहत अमान्य होती है। हालांकि, कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत होने वाली शादियों को इससे अलग माना। कोर्ट ने कहा कि अगर शादी शरिया कानून से हुई है तो दूसरी, तीसरी और चौथी शादी भी मान्य होगी और ऐसे मामलों में मुस्लिम व्यक्ति को धारा 80 और 85 के तहत पति माना जाएगा।
23 July 2026
Posted by achhiduniya

कब कर सकती है पुलिस लाठीचार्ज क्या है कानून....?

भारतीय अदालतों ने कई फैसलों में साफ कहा है कि पुलिस केवल न्यूनतम और उचित बल का ही इस्तेमाल कर सकती है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि बल प्रयोग से पहले तीन बातें जांचना जरूरी हैं। पहला, जमावड़ा गैरकानूनी हो। दूसरा, भीड़ को पहले हटने का आदेश देना होगा और तीसरा, आदेश के बावजूद भीड़ न हटे। इन तीनों शर्तों के बगैर पुलिस बल का प्रयोग उचित नहीं माना जाएगा। ऐसा ही दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक मामले में निर्देश दिया था। कोर्ट का कहना था कि पुलिस केवल उतना ही बल इस्तेमाल कर सकती है, जितना स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जरूरी हो। अदालत ने यह भी याद दिलाया कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपनी बात रखने का अधिकार देता है। इस मामले में जस्टिस एके सिकरी ने कहा था कि अगर पुलिस का उद्देश्य शांति बहाल करने के बजाय लोगों को सजा देना या डराना हो, तो ऐसा बल प्रयोग कानून के खिलाफ होगा। सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और अनुच्छेद 19(1)(बी) के तहत अपने अधिकारों का शांतिपूर्ण तरीके से इस्तेमाल कर रहे नागरिकों के खिलाफ हिंसा करना असंवैधानिक है। भारतीय कानून के मुताबिक, अगर 5 या उससे 
ज्यादा लोग किसी ऐसे मकसद से इकट्ठा हों जिससे सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक बल का इस्तेमाल हो। कानून के पालन में बाधा डाली जाए। दंगा, हिंसा या गंभीर उपद्रव की आशंका हो। ऐसे मौजूदगी को गैरकानूनी जमावड़ा माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में इकट्ठा लोगों को प्रशासन हटाने का आदेश दे सकता है। कानून के मुताबिक आमतौर पर मजिस्ट्रेट या थाने का प्रभारी अधिकारी भीड़ को हटाने का आदेश दे सकते हैं,अगर आदेश के बाद भी लोग नहीं हटते, तभी पुलिस बल प्रयोग पर विचार कर सकती है। देश का कानून बिल्कुल स्पष्ट है कि भले ही कभी-कभी सीमित बल का इस्तेमाल जरूरी हो सकता है,
लेकिन जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा यानी कानून कहीं भी यह नहीं बताता कि कितनी लाठी चल सकती है या कितनी ताकत इस्तेमाल की जा सकती है,लेकिन अदालतों ने बार-बार कहा है कि जितनी जरूरत हो, सिर्फ उतना ही बल इस्तेमाल किया जाए। लोगों को सजा देने के लिए बल प्रयोग नहीं किया जा सकता और स्थिति सामान्य होते ही बल प्रयोग रोक देना चाहिए। अनिता ठाकुर बनाम जम्मू-कश्मीर सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारी हिंसक भी हो जाएं, तब भी पुलिस जरूरत से ज्यादा बल नहीं इस्तेमाल कर सकती साथ ही यह भी कहा गया था कि एक बार स्थिति नियंत्रण में आ जाए तो पुलिस को बल प्रयोग तुरंत रोक देना चाहिए। अदालत ने कहा कि जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग मानवाधिकार और मानव गरिमा का उल्लंघन है। कुछ राज्यों के पुलिस मैनुअल में लाठीचार्ज के नियम भी दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, केरल पुलिस मैनुअल कहता है कि पहले लोगों को पर्याप्त चेतावनी दी जाए। न्यूनतम बल का इस्तेमाल किया जाए। लाठी शरीर के मुलायम हिस्सों पर मारी जाए। सिर और गर्दन जैसे संवेदनशील हिस्सों पर वार करने से बचा जाए। संयुक्त राष्ट्र के बेसिक प्रिंसिपल ऑन द यूज ऑफ फोर्स ऐंड फायरआर्म्स (1990) के मुताबिक अगर प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, तो पुलिस को बल प्रयोग से बचना चाहिए,अगर बल प्रयोग जरूरी हो, तो वह न्यूनतम होना चाहिए। जानलेवा हथियारों का इस्तेमाल केवल बेहद गंभीर और अंतिम स्थिति में ही किया जा सकता है। कुल मिलाकर भारत के कानून में लाठीचार्ज शब्द नहीं लिखा है। हालांकि पुलिस को केवल जरूरी और सीमित बल इस्तेमाल करने की अनुमति है,लेकिन इससे पहले चेतावनी देना और भीड़ को हटने का मौका देना जरूरी है। यहां तक कि हिंसक प्रदर्शन भी हो, तो जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग अदालतों की नजर में गैरकानूनी हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों कई मामलों में कह चुके हैं कि पुलिस का उद्देश्य व्यवस्था बहाल करना होना चाहिए, लोगों को दंड देना नहीं। पुलिस हर तरह के प्रदर्शन पर लाठीचार्ज नहीं कर सकती। इसके लिए कुछ कानूनी शर्तें पूरी होना जरूरी हैं। पुलिस तभी बल प्रयोग कर सकती है जब भीड़ को कानून के मुताबिक गैरकानूनी जमावड़ा माना गया हो। सक्षम अधिकारी ने भीड़ को हटने का आदेश दिया हो। लोगों को पहले चेतावनी दी गई हो। चेतावनी के बावजूद भीड़ वहां से न हटे और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए बल प्रयोग जरूरी हो यानी बिना चेतावनी या बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए सीधे बल प्रयोग करना कानून के खिलाफ माना गया है।
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ड्राइविंग लाइसेंस होंगे रद्द अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालको ने मराठी भाषा परीक्षा पास न की...

 

महाराष्ट्र परिवहन विभाग ने सभी गैर-मराठी ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा सीखने की समय सीमा 15 अगस्त निर्धारित की थी। विधान भवन परिसर में पत्रकारों से बात करते हुए परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा कि लगभग 450 शिक्षकों को चालकों को कार्यात्मक मराठी सिखाने के लिए नियुक्त किया गया है और सरकार ने उन्हें भाषा सीखने के लिए 16 अगस्त तक का समय दिया है। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को एक बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालक कार्यात्मक (Functional) मराठी भाषा परीक्षा उत्तीर्ण करने में विफल रहते हैं, तो 16 अगस्त से उनके ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर 
दिए जाएंगे। मोटर वाहन नियमों का हवाला देते हुए परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 4, 22 और 85 के तहत चालकों को कार्यात्मक मराठी सीखने के लिए समय दिया गया था। इस अवधि के बीत जाने के बाद बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ किया कि यदि कोई वाहन चालक इस निर्धारित मराठी परीक्षा में असफल साबित होता है, तो क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) को उस चालक का लाइसेंस रद्द करने का पूरा अधिकार दे दिया गया है। परिवहन मंत्री ने कहा कि उल्लंघनों के लिए पहले 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाता था, लेकिन संशोधित प्रावधानों के तहत अब मराठी भाषा परीक्षा में असफल होने वालों का लाइसेंस रद्द करने की अनुमति दी गई है। 
बाइक टैक्सी संचालकों के लिए अधिवास प्रमाणपत्र अनिवार्य किए जाने के सवाल का जवाब देते हुए सरनाईक ने कहा कि महाराष्ट्र में दोपहिया टैक्सी सेवा आधिकारिक रूप से एक अगस्त से शुरू होगी। इस नई सेवा के साथ ही चालकों के सामाजिक कल्याण का भी ध्यान रखा गया है। इसके तहत प्रत्येक बाइक टैक्सी पर प्रतिदिन 5 रुपये का कल्याण उपकर (Welfare Cess) और प्रत्येक किराये पर अतिरिक्त 2 प्रतिशत शुल्क वसूला जाएगा। इस राशि का उपयोग विशेष रूप से बाइक टैक्सी संचालकों के कल्याणकारी कार्यों के लिए किया जाएगा। अंत में मंत्री ने यह भी दोहराया कि महाराष्ट्र सरकार पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का स्वागत करती है और राज्यभर में इनके व्यापक उपयोग को लगातार बढ़ावा देती रहेगी।
08 July 2026
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LoC खोल हमें राशन-पानी दे भारत JAAC नेता सरदार अमन खान

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेता सरदार अमन खान ने कहा कि पीओके में लोग भोजन और आवश्यक आपूर्ति की कमी के कारण संघर्ष कर रहे हैं, और उन्होंने नई दिल्ली से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। हमें भारत की मदद चाहिए। राशन की कमी है। हमें आपके मदद की जरूरत है। रावलकोट के ईदगाह मैदान में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए खान ने नियंत्रण रेखा (LoC) को खोलने की मांग की और कहा कि अगर स्थिति बिगड़ती है तो नागरिकों के पास भारत में प्रवेश करने का विकल्प होना चाहिए। उन्होंने भीड़ से पूछा कि क्या उन्हें एलओसी की ओर मार्च करना चाहिए, जिस पर लोगों ने बार-बार जवाब दिया,उसकी ओर बढ़ो। सरदार अमन खान ने पुंछ और डोडा सेक्टरों में नियंत्रण रेखा खोलने की भी अपील की, उनका तर्क था कि पाकिस्तान की कार्रवाइयों ने आम नागरिकों का जीवन और भी कठिन बना 
दिया है।  अमन खान ने भारत से मानवीय सहायता की अपील करते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान की दमनकारी कार्रवाई ने इस क्षेत्र को एक गंभीर संकट में धकेल दिया है। उन्होंने अधिकारियों को बल प्रयोग न करने की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि लोगों की मांगों का जवाब गोलियों से दिया गया, तो हमारे पास अन्य रास्ते भी हैं। एक दिन बाद जारी एक अलग वीडियो संदेश में खान ने श्रीनगर, बारामूला, पुंछ, राजौरी, जम्मू, लद्दाख, कारगिल और गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र के लोगों से अपनी अपील का विस्तार किया। 
प्रदर्शन के 26वें दिन, प्रोटेस्ट के मुख्य लीडर्स में से एक सरदार अमन खान ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पार के लोगों और इंडिया से मदद की अपील की। ​​उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने पिछले तीन हफ्तों से पाकिस्तान के कब्ज वाले जम्मू-कश्मीर में खाने और दवा की सप्लाई रोक दी है, जिससे गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। हाल के हफ्तों में प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों, सुरक्षा अभियानों और गिरफ्तारियों की खबरों के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों द्वारा 5 जून को संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी पर प्रतिबंध लगाने और इस जमीनी संगठन को आतंकवादी समूह घोषित करने के बाद अशांति और बढ़ गई। इसके बाद सुरक्षा बलों ने कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों पर व्यापक कार्रवाई शुरू कर दी है, एक ऐसा कदम जिसके बारे में आलोचकों का कहना है कि इसने स्थिति को नियंत्रण में लाने के बजाय जनता के गुस्से को और भड़का दिया है। जानकारों के अनुसार, इस संकट ने पीओके के लोगों और क्षेत्र के राजनीतिक प्रशासन के बीच बढ़ती खाई को उजागर कर दिया है, जिस पर लंबे समय से इस्लामाबाद के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया जाता रहा है।
06 July 2026
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वक्फ बोर्ड में दो हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया..

संशोधित वक्फ कानून 2025 के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन चुका है और मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव को बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल करना वक्फ बोर्ड के इतिहास में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर मध्यप्रदेश में नए कानून के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन किया गया है और ये पहली बार है जब किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियक्ति की गई है। जी हां, राज्य के पुनर्गठित वक्फ बोर्ड में दो हिंदुओं को भी सदस्य बनाया गया है। मध्यप्रदेश सरकार ने बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए दो हिंदू सदस्यों की नियुक्ति की है। इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को वक्फ बोर्ड में बतौर सदस्य शामिल किया गया है और राज्य सरकार की ओर से इसका अधिसूचना राजपत्र भी जारी कर दिया गया है, जिसके अनुसार सनवर पटेल बोर्ड के अक्ष्यक्ष होंगे। इसी के साथ मध्यप्रदेश वक्फ अधिनियम 1995 
(संशोधित 2025) की धारा 13 और धारा 14 के प्रावधानों के तहत नए वक्फ बोर्ड का गठन करने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है। राज्य के नवगठित वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष की बात करें तो सनवर पटेल इसके अध्यक्ष होंगे, जो पिछले बोर्ड के भी अध्यक्ष रह चुके हैं। बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल किए गए हैं, जिनमें पहली बार दो हिंदुओं को सदस्य बनाया गया है। पुनर्गठित वक्फ बोर्ड की बात करें तो विधायक आतिफ अकील (भोपाल उत्तर), फैजान खान (उज्जैन), नजमा हेपतुल्ला (नई दिल्ली), शाइस्ता सुल्तान (पार्षद, बैरसिया), बहन फातेमा चौधरी (इंदौर) शबाना खान  (पार्षद, रतलाम), मनोज मालपानी (इंदौर), अनिमेष भार्गव (राघौगढ़, गुना) और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के आयुक्त को बोर्ड का सदस्य बनाया गया है. राज्य सरकार द्वारा जारी अधिसूचना राजपत्र में साफ किया गया है कि नजमा हेपतुल्ला का कार्यकाल अभी जारी रहेगा। उनका चयन साल 2023 में वक्फ अधिनियम के तहत हुआ था और 18 अप्रैल 2028 तक उनका कार्यकाल जारी रहेगा। यही वजह है कि उन्हें बचे हुए कार्यकाल के लिए नए बोर्ड में भी शामिल किया गया है।
05 July 2026
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चढ़ावा चोरी पर क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत....?

राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान सामने आया है.सन्मार्ग माइंड वेलनेस के उद्घाटन समारोह के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने इस मामले पर कोई और टिप्पणी करने से परहेज किया और इसके बजाय एक दिन पहले जारी किए गए RSS के बयान का ज़िक्र किया। मोहन भागवत ने इस विवाद पर RSS महासचिव दतात्रेय होसवोले के बयान का सर्मथन किया है। RSS के प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान में हेराफेरी के आरोपों पर संगठन के आधिकारिक रुख का ज़िक्र किया। मोहन भागवत ने दत्तात्रेय होसबोले के बयान का जिक्र किया उन्होंने संगठन के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले के बयान की ओर ध्यान दिलाया, जिसमें इस घटना को बेहद निंदनीय 
बताया गया था और दोषियों के लिए कड़ी सज़ा की मांग की गई थी। मालूम हो कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में RSS की ओर से दत्तात्रेय होसबोले ने शुक्रवार को जारी एक विस्तृत बयान में कहा कि श्री राम लला मंदिर में दान पेटियों से कथित चोरी ने देश भर के भक्तों की भावनाओं को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चल रही जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। होसबोले ने कहा,कई पीढ़ियों के संघर्ष और करोड़ों राम भक्तों के समर्पण, त्याग और शहादत की वजह से श्री राम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पूरे हिंदू समाज के लिए श्रद्धा, आस्था और भक्ति का केंद्र बन गया है। 
अयोध्या में श्री राम लला मंदिर में रखी दान पेटियों से चोरी की दुर्भाग्यपूर्ण घटना ने पूरे समाज और राम भक्तों की भावनाओं और श्रद्धा को आहत किया है और हम सभी इस घटना से दुखी हैं। होसबोले ने ट्रस्ट से यह भी आग्रह किया कि वे इस घटना को एक असाधारण मामला मानें और वित्तीय प्रबंधन तथा प्रशासनिक प्रणालियों में किसी भी कमी को दूर करें।  उन्होंने कहा,राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत पूरे हिंदू समाज को उम्मीद है कि ट्रस्ट इस बेहद निंदनीय घटना को एक असाधारण मामला मानेगा और मैनेजमेंट और कामकाज में मौजूद सभी कमियों को दूर करने के लिए असरदार और गंभीर कदम उठाएगा यह इसलिए ज़रूरी है ताकि अयोध्या मंदिर में लाखों राम भक्तों की आस्था और श्रद्धा अटूट और मज़बूत बनी रहे। कथित हेराफेरी को बेहद निंदनीय घटना बताते हुए होसबोले ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और उसकी सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की है। होसबोले ने कहा,यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसे कड़ी सज़ा मिले।
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भारतीय नागरिकता मुग़ल काल में क्या थी प्रामाणिकता...?

बादशाह कह दें, वही सही मान लिया जाता था। धर्म, जाति और पेशा पहचान तय करते थे। राज्य कर व्यवस्था में योगदान करने वाले, राज व्यवस्था में भरोसा करने वाले लोगों पर राज तंत्र भी भरोसा करता था। परिवार और कबीला पहचान के पारंपरिक साधन थे। मुग़ल काल में आज की तरह नागरिकता का विचार नहीं था। नागरिकता शब्द आधुनिक है। मुग़ल काल में में लोग राजा के अधीन रहते थे। रिश्तेदार और जमीन से पहचान जुड़ी रहती थी। गांव या मोहल्ला भी पहचान का बड़ा आधार था।  स्थानीय मुखिया या पटवार यानी अधिकारी अक्सर जरूरत पड़ने पर पहचान सिद्ध करते थे। मुगल काल में भले ही आज की तरह व्यवस्था नहीं थी, न ही नागरिकता जैसे टर्म का इस्तेमाल होता था लेकिन कुछ प्रचलित कागजातों के जरिए व्यक्ति की शिनाख्त आसानी से हो जाती थी। ये सारे दस्तावेज बादशाह, दरबार या सरकारी कारिंदे जारी करते थे। इनमें से कुछ निम्नवत हैं। शाही आदेश या शासक का लिखित आदेश क़ानून, कर-माफी, ज़मीन देने या किसी विशेष अधिकार की पुष्टि इसी शाही फरमान से होती थी। यह फ़ारसी में लिखा होता था। शाही मुहर और दरबारी हस्ताक्षर इसे पुख्ता बनाते थे। सनाद-यह अधिकार का लेखा-जोखा को प्रमाणित करता था। यह किसी हक़ या इजाज़त का 
लिखित प्रमाण होता था। ज़मीन का पट्टा, जागीर का दस्तावेज़, सौदों की पुष्टि भी इसी दस्तावेज से होती थी। इसे प्राय-दरबार या स्थानीय अमानतख़ाने जारी करते थे। कई बार यह कागज़ पर लिखा हुआ या ताम्रपत्र पर उकेरा हुआ होता था। किसी तरह के विवाद में प्राथमिक प्रमाण यही माना जाता था। परवाना-यात्रा या व्यापार की अनुमति में परवाना की भूमिका महत्वपूर्ण थी। सहूलियत या छूट देने वाला कागज़ भी यही था। इसका इस्तेमाल कर छूट, सीमा पार यात्रा, व्यापार की स्वतंत्रता आदि में होता था. इसे भी शाही दरबार या जिला अधिकारी जारी करते थे। 
पट्टा- ज़मीन और राजस्व का रेकॉर्ड, जमीन के मालिक या उपयोगकर्ता का प्रमाण। कर जानने और जमीन के हक़ को दिखाने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। स्थानीय पटवारी, अमिल या गांव की चौपाल में रखने की व्यवस्था थी।  यह लिखित रजिस्टर या व्यक्तिगत पत्र के रूप में होता था। किसानों के लिए जीवन भर का प्रमाण यही था। किसी भी तरह के विवाद में गवाहों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती थी। किसी भी दस्तावेज़ का सत्यापन मुहर और गवाहों के जरिए होता था। करप्शन उस जमाने में भी हुआ करता था। दफ्तर से कभी कागज़ गायब हो जाते थे। कभी नकल या फ़र्ज़ी कागज़ भी बनाए जाते थे। ऐसे में मुहर, गवाहों के जरिए मसले को निपटाया जाता था। राजकीय मुहर सबसे बड़ा प्रमाण होती थी। बहुतेरे आदेश इसी से मान्य होते थे। नौकरशाही में भी छोटे अफ़सरों की मुहरें होती थीं। कई बार व्यक्ति के पास अपना सिग्नेचर या चिन्ह होता था। व्यापारी भी अपनी सील या छाप रखते थे। मुगल काल में कई बार बादशाह ताम्र-पत्र के जरिए अपने आदेश जारी करता। इसका उपयोग मंदिरों या जानदार परिवारों को दिए गए उपहारों के हिसाब के रूप में होता था। यह लंबे समय तक सुरक्षित रहते थे। निकाहनामा और धार्मिक रेकॉर्ड- यह दस्तावेज शादी, वक्फ़ या धार्मिक दान के कागज़ को पुख्ता करता था। यह दस्तावेज काज़ी या धर्माधिकारी बनाते थे। पारिवारिक हक़ और धार्मिक संपत्तियों के प्रमाण के लिए इसका इस्तेमाल होता था।वंशावली और शजरा नसब- खासतौर पर कुलीन घराने अपनी वंशावली लिखवाते थे। इससे वंश और सामाजिक दर्जा सिद्ध होता था। मानसब और दरबारी नियुक्ति-पत्र-यह दस्तावेज अधिकारी या फौजी पदों की नियुक्ति का प्रमाण होता था। प्रायः इसे बादशाह की ओर से देने की व्यवस्था थी। इसका उपयोग पद, सैनिक रैंक और तनख़्वाह तय करने के लिए किया जाता था।
28 June 2026
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600 करोड़ हेल्थ स्कैम,दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग….

ईडी की दिल्ली जोन-2 टीम ने डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS), दिल्ली सरकार को पत्र भेजकर सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (CPA) और डायरेक्टर जनरल हेल्थ सर्विसेज (DGHS) द्वारा की गई खरीद से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है। बता दें कि ईडी ने विभाग से यह जानकारी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत चल रही जांच के दौरान मांगे है। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग से जुड़े 600 करोड़ रुपये के हेल्थ स्कैम मामले में मेडिकल उपकरणों की खरीद में जांच तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू कर दी है। ईडी ने मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्री की खरीद प्रक्रिया में संभावित 
अनियमितताओं की पड़ताल शुरू करते हुए स्वास्थ्य विभाग से विस्तृत दस्तावेज तलब किए हैं। 600 करोड़ रुपये के हेल्थ स्कैम मामले में जांच के दायरे में पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म रेडियोलॉजिकल इक्विपमेंट, एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS), बेड शीट, लिनेन सामान, सर्जिकल आइटम, ड्रेसिंग, स्यूचर, कैनुला, ग्लव्स और दवाइयों जैसी खरीद शामिल हैं। मेडिकल उपकरणों और स्वास्थ्य सामग्री के टेंडर, भुगतान और सप्लाई से जुड़ा पूरा ब्यौरा विभाग से मांगा गया है। 
ईडी ने टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन, ठेके देने की प्रक्रिया, सामान की सप्लाई, जांच, मंजूरी और पेमेंट रिलीज से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं।इसके अलावा ईडी ने उन कंपनियों, मैन्युफैक्चरर्स, OEM और डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े लेन-देन की जानकारी मांगी है, जिनसे मेडिकल उपकरण खरीदे गए थे। जिन कंपनियों और उपकरणों से जुड़े रिकॉर्ड मांगे गए हैं, उनमें पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, सी-आर्म मशीन और एनेस्थीसिया वर्कस्टेशन बनाने वाली कंपनियां शामिल हैं। इस पूरे मामले में पूछताछ जारी है। ईडी इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मेडिकल सामान की खरीद प्रक्रिया में कोई अनियमितता, वित्तीय गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा मामला तो नहीं है।
25 June 2026
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महाराष्ट्र विवाह निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापना अनिवार्य

महाराष्ट्र महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे ने विधानसभा में बीजेपी सदस्य अतुल भाटखालकर द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में कहा कि राज्य का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में बाल विवाह की घटनाओं को 10 प्रतिशत से नीचे लाना है। महाराष्ट्र में बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार विवाह निमंत्रण पत्रों पर दूल्हा और दुल्हन की जन्मतिथि छापने के नियम पर विचार कर रही है। मंत्री ने बताया कि महाराष्ट्र ने राजस्थान सरकार को पत्र लिखकर विवाह निमंत्रण पत्रों पर वर-वधू दोनों की जन्मतिथि अंकित करने की उसकी व्यवस्था का अध्ययन किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास विभाग और विधि एवं न्याय विभाग के साथ परामर्श करके 
इस व्यवस्था को लागू करने की व्यवहार्यता पर विचार करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य में बाल विवाह दर 2019-21 के सर्वे के 21.9 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 19.6 प्रतिशत हो गई है, जबकि नवीनतम सर्वेक्षण में राष्ट्रीय औसत लगभग 20.1 प्रतिशत है। मंत्री ने बताया कि 2025-26 में अब तक 1,434 बाल विवाह रोके गए हैं और 136 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2024-25 में 1,495 बाल विवाह रोके गए, जबकि 2023-24 में 1,253 मामले रोके गए और 108 प्राथमिकी दर्ज हुईं। मंत्री ने कहा, "बाल विवाह रोकने के मामलों में वृद्धि को बाल विवाह बढ़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह सरकारी तंत्र की बेहतर पहचान, रिपोर्टिंग और हस्तक्षेप को दर्शाता है।" उन्होंने बताया कि बाल विवाह में शामिल परिवार के सदस्यों के अलावा उन लोगों पर भी कार्रवाई की जा रही है जो इस तरह के आयोजनों को जानबूझकर बढ़ावा देते हैं, जिनमें पुजारी, संगीतकार और अन्य शामिल हैं। मंत्री ने सदन को बताया कि जिला स्तर पर कलेक्टरों की अध्यक्षता में कार्यबल, ग्राम सुरक्षा समितियां तथा तालुका और ग्राम पंचायत स्तर की समितियां सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। 
उन्होंने कहा कि छह जिलों को विशेष तौर पर ध्यान दिए जाने के लिए चिन्हित किया गया है, जहां प्रवासन एक प्रमुख कारण बनकर उभरा है, विशेषकर बीड और मराठवाड़ा क्षेत्र के अन्य जिलों में, जहां परिवार गन्ना कटाई के काम के लिए पलायन करते हैं। उन्होंने कहा कि समस्या से निपटने के लिए प्रवासी श्रमिकों के बीच लक्षित जागरूकता अभियान चलाने और बच्चों को सुरक्षित वातावरण में रखने के लिए बाल देखभाल केंद्रों एवं आवासीय सुविधाओं के विस्तार की योजना है।
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अंडरगारमेंट्स में NEET प्रश्नपत्र और ग्लू को छुपा ....

वाराणसी में रिश्चंद्र परास्नातक महाविद्यालय में परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से पहले संदेह होने पर पकड़े गए अभ्यर्थी की गहनता से तलाशी ली गई तो उसके अंडरगारमेंट्स पाई गई चीजों के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। कड़े गये छात्र की पहचान बलिया जिले के निवासी प्रिंस दुबे के रूप में हुई है, जिसमें उसने पूछताछ में बताया कि वह मध्य प्रदेश के जबलपुर में रहकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहा था और नीट की परीक्षा देने के लिये वाराणसी आया था। वहीं सूत्रों ने बताया कि पकड़े गए छात्र प्रिंस दुबे से पूछताछ करके अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने जब्त की गई सभी वस्तुओं को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। वाराणसी के मैदागिन स्थित श्री हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र पर एक अभ्यर्थी को जांच के बाद हिरासत में ले लिया गया। दरअसल इस छात्र ने 
अपने अंडरगारमेंट्स में मोबाइल, सिम, पुराना NEET प्रश्नपत्र और ग्लू को छुपा रखा था। नीट की दोबार हुई परीक्षा में कुल 22 लाख छात्र-छात्राएं ने एग्जाम दिया। इसको लेकर इस बार NTA ने परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी रोकने के लिए बड़े स्तर पर निगरानी व्यवस्था तैयार की थी। परीक्षा केंद्रों में प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों का बायोमेट्रिक सत्यापन किया जा रहा था तो वहीं सभी एग्जाम सेंटर्स पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए थे, जिसमें इनकी लाइव मॉनिटरिंग भी की जा रही थी। वहीं हर सिस्टम को शुरू से अंत तक परखने के लिए 20 जून को देशभर में मॉक ड्रिल की गई थी। इस एग्जाम के लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए पहली बार भारतीय वायुसेना की मदद ली थी, जिसमें एयरफोर्स के हेलिकॉप्टरों और विमानों ने मदद से एग्जाम के पेपर देश के विभिन्न स्ट्रॉन्ग रूम और सेंटर्स तक सुरक्षित पहुंचाए गए थे।
21 June 2026
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हार्ट सर्जरी घोटाला बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला..

जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने बताया कि जांच में फर्जी बीमा दावे, मरीजों का शोषण और स्वस्थ मरीजों की अनावश्यक सर्जरी किए जाने के मामले सामने आए हैं। दरअसल,जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का गंभीर मामला सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि जिन मरीजों की दिल की सर्जरी की गई, उनमें से लगभग 50 प्रतिशत को वास्तव में इसकी जरूरत ही नहीं थी। मामले के सामने आने के बाद शनिवार को एक सीनियर डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, स्वतंत्र जांच में यह सामने आया कि जिन 55 मरीजों की 'लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंगसर्जरी की गई, उनमें से 27 मरीजों (49 प्रतिशत) को इसकी जरूरत नहीं थी। डॉक्टर के खिलाफ आरोपों में रिकॉर्ड में हेरफेर, सिस्टम स्तर पर धोखाधड़ी, मरीजों का शोषण, विक्रेताओं के साथ मिलीभगत और बिना इजाजत सर्जरी करना शामिल है। जांच में कहा 
गया कि यह मामला व्यक्तिगत लाभ के लिए मरीजों की सुरक्षा और पेशेवर नैतिकता की अनदेखी को दर्शाता है। विभाग ने अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. सैयद मकबूल का नाम लेते हुए उन पर बड़े पैमाने पर प्रक्रियागत अनियमितताओं और आधिकारिक मेडिकल रिकॉर्ड में हेरफेर करने के आरोप लगाए हैं। यह मामला कथित पेसमेकर घोटाले से जुड़ा है, जिसमें कुल 103 हृदय रोगी शामिल हैं। विशेषज्ञों की जांच में पाया गया कि जिन 55 मरीजों का पेसमेकर लगाया गया था, उनमें से 27 का हृदय सामान्य था और उन्हें पेसमेकर लगाने की कोई जरूरत नहीं थी। 
दिसंबर 2025 में राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा 'लेफ्ट बंडल ब्रांच एरिया पेसिंग' से जुड़े दावों में असामान्य वृद्धि देखे जाने के बाद इस मामले की एक्सपर्ट जांच कराई गई थी। जांच में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना-सेहत योजना के लाभार्थियों के आर्थिक शोषण के भी आरोप सामने आए हैं। एक मामले में कहा गया कि मरीज को एक प्राइवेट कंपनी को 70,000 रुपये देने के लिए मजबूर किया गया। रिपोर्ट में कहा गया,लाभार्थियों का यह आर्थिक शोषण गंभीर आपराधिक कदाचार है।' जांच में यह भी सामने आया कि अनिवार्य मंजूरियों, गुणवत्ता नियंत्रण से जुड़े सुरक्षा उपायों और खरीद प्रक्रिया के नियमों की अनदेखी की गई। स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू ने कहा कि इस मामले में कई शिकायतों के बाद जांच शुरू की गई थी। उन्होंने कहा,सरकार ने कई शिकायतें मिलने के बाद तथ्यों का पता लगाने के लिए जांच शुरू की थी। जांच के बाद जब कुछ निष्कर्ष सामने आए, तो हमने उन्हें (डॉक्टर को) निलंबित कर दिया। हमने उनसे अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। आज (शनिवार को) निलंबन का आदेश जारी किया गया है।
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Today's IMP News Headline’s {सुर्खियां }

@ जंतर-मंतर के 1.5 KM के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद, दिल्ली। पुलिस ने कहा- नहीं लेंगे कोई सख्तं एक्शsन। @ NEET 2024 के पेपर की चोरी या वितरण में संजीव मुखिया की भूमिका का कोई सबूत नहीं-CBI @ छात्रों के प्रदर्शन से गरमाई बिहार की राजनीति,विधानसभा में जमकर हंगामा।@ नेपाल तक बन रहा सुपरफास्ट हाइवे, दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार तक मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी।@ NEET पेपर लीक केस- 4 राज्यों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनेंगी, नकल विरोधी कानून कसेगा आरोपियों पर नकेल।@ कश्मीर में 2,000 से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में, घरों पर कार्रवाई के बीच उमर अब्दुल्ला बोले- हालात और बिगड़ेंगे।@ Google पर EU ने लिया कड़ा एक्शन, लगाया 1 अरब डॉलर का जुर्माना।@ राजस्थान के मकराना में मार्बल की एक दर्जन खदानें ढहीं, जाखली मार्ग का एक हिस्सा भी समाया।@ उत्तराखंड के चंपावत में विराजमान है श्री गोलू देवता, जहां न्याय की आस लेकर पहुंचते हैं लाखों श्रद्धालु।@ आपस में भिड़े कांग्रेसी, विधायक समर्थकों ने कांग्रेस कार्यकर्ता की पीटा, बीजेपी ऑफिस मार्च से पहले चले लात-घूंसे।@ MP पुलिस में 9,662 पदों पर नई भर्ती- CM यादव ने किया ऐलान, सिंहस्थ 2028 की तैयारी के लिए फैसला।@ सरकारी स्कूलों में 7 लाख बच्चे घटे, प्राइवेट में बढ़ गए 9 लाख; इस राज्य ने जारी किए बदहाली के आंकड़े।@ ग्रेटर नोएडा में पांच कोचिंग संस्थान सील, अग्निशमन उपकरण न मिलने पर प्राधिकरण और फायर विभाग ने की कार्रवाई।

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