डिजिटल अरेस्ट स्कैम,कैसे बचे कहां करे शिकायत...? सरकार दवारा सिम कार्ड निगरानी व्हाट्सएप और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सख्ती

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में अक्सर फर्जी या गलत तरीके से लिए गए सिम कार्ड का इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए सरकार इस कड़ी को सबसे पहले मजबूत करना चाहती है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपनी रिपोर्ट में सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए सख्त नियमों की वकालत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, नए सिम जारी करने से पहले बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही, सिम बेचने वाले विक्रेताओं की जांच भी पहले से ज्यादा कड़ी होगी। दूरसंचार कंपनियों को अपने ग्राहकों की जानकारी सरकारी एजेंसियों के साथ साझा करनी पड़ सकती है, ताकि ठगी के मामलों में तुरंत कार्रवाई हो सके। सरकार ने व्हाट्सएप जैसे इंस्टेंट 
मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के लिए भी नए सुरक्षा उपाय सुझाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि बार-बार ठगी में इस्तेमाल होने वाले डिवाइस को ब्लॉक किया जाए। इसके अलावा, व्हाट्सएप अकाउंट को सिम कार्ड से जोड़ने और संदिग्ध लंबी कॉल्स की पहचान करने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है। जांच एजेंसियों की मदद के लिए डिलीट किए गए अकाउंट का डेटा कुछ समय तक सुरक्षित रखने का प्रस्ताव भी रखा गया है। भारतीय साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर जैसी एजेंसियों के साथ मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को तेजी से कार्रवाई करनी होगी, ताकि ठगी के नेटवर्क को समय रहते तोड़ा जा सके। 
सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की उस नीति का समर्थन किया है, जिसके तहत साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध बैंक खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज किया जा सकता है। केंद्र चाहता है कि यह व्यवस्था पूरे देश में एक समान लागू हो,अगर आप डिजिटल स्कैम का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। विशेषज्ञों के अनुसार, शिकायत दर्ज करने का पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है।  इसके अलावा, अपने बैंक को तुरंत सूचित करें, ट्रांजैक्शन रुकवाएं और अपने कार्ड को लॉक कर दें।  त्वरित कार्रवाई से आपका पैसा बचाया जा सकता है।
28 April 2026
Posted by achhiduniya

Date of Birth का पुख्ता प्रमाण नहीं आधार कार्ड….

आधार एक 12 अंकों का यूनिक पहचान नंबर है, जो भारत के निवासियों को दिया जाता है। इसे बनवाने के लिए नाम, पता जैसी बेसिक जानकारी के साथ बायोमेट्रिक डेटा (फिंगरप्रिंट और आईरिस) लिया जाता है। एक व्यक्ति को सिर्फ एक ही आधार नंबर जारी किया जाता है, जिससे डुप्लीकेट पहचान की संभावना खत्म हो जाती है। UIDAI ने स्पष्ट किया कि Aadhaar Act 2016 में आधार को पहचान के प्रमाण के रूप में मान्यता दी गई है, लेकिन इसमें जन्मतिथि के प्रमाण के तौर पर कोई प्रावधान नहीं है। अगर आधार में दर्ज जन्मतिथि को लेकर कोई विवाद होता है, तो सही जानकारी साबित करने की जिम्मेदारी आधार धारक की होती है। UIDAI ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि आधार कार्ड केवल पहचान (ID) के रूप में मान्य है, लेकिन इसे जन्मतिथि-Date of Birth का पुख्ता प्रमाण 

नहीं माना जा सकता। यह स्पष्टीकरण इसलिए जारी किया गया है,क्योंकि कई जगहों पर आधार को उम्र साबित करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। UIDAI के मुताबिक, आधार का मुख्य काम किसी व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करना है. इसे ऑथेंटिकेशन सिस्टम के साथ इस्तेमाल करने पर यह व्यक्ति की पहचान स्थापित करता है, लेकिन उम्र या जन्मतिथि की पुष्टि के लिए यह पर्याप्त नहीं है। आधार का इस्तेमाल डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के तहत सब्सिडी और सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने में किया जाता है। इसके अलावा eKYC के जरिए बैंक खाता खोलने, सिम लेने और अन्य सेवाओं में भी तेजी और पारदर्शिता आती है। जहां उम्र या जन्मतिथि साबित करना जरूरी हो जैसे नौकरी, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को अन्य दस्तावेज भी देने होंगे। इसमें जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या 10वीं की मार्कशीट जैसे कागजात शामिल हो सकते हैं।

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विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर विपक्ष पर बिफरी DL-CM रेखा गुप्ता

दिल्ली मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा-पूरे देश में लगभग 15 लाख ऐसी महिलाएं हैं जो पंचायत स्तर पर, निगम के स्तर पर चुनकर आती हैं। पर विधान सभा जाते-जाते, विधान सभा तक पहुंचते-पहुंचते, मैं आपको बताना चाहूंगी कि 4600 सदस्य पूरे देश में विधानसभा सदस्य हैं, पर उसमें से मात्र 10% महिलाएं ही विधान सभा तक पहुंच पाती हैं और इसी तरह लोकसभा तक पहुंचते-पहुंचते वह संख्या इसी तरह कम रहती है। 13 से 14% आज की वर्तमान लोकसभा में, राज्यसभा में भी इतनी महिलाएं हैं। जब संविधान बना, तो संविधान सभा की सदस्य 15 महिलाएं भी थीं। जब संविधान लिखा गया तो बहुत सारी समानता का अधिकार दे दिया। वोट का अधिकार दे दिया, चुनाव लड़ने का अधिकार दे दिया। उन्हें लगा कि बस इतने से आजाद भारत में महिलाएं तरक्की कर जाएंगी, पर उन्हें नहीं मालूम था कि आजाद भारत के यह राजनैतिक दल महिलाओं को कभी आगे आने ही नहीं देंगे। कभी नहीं आगे आने देंगे। वह समानता का अधिकार केवल काफी नहीं था। महिलाएं आज भी उस हकीकत का सामना कर रही हैं जिसमें उन्हें वह मौके नहीं दिए जाते। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता 
ने मंगलवार को विधानसभा में महिला आरक्षण के मुद्दे पर अपनी बात रखने के साथ ही दिल्ली विधानसभा में लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के पारित न होने को लेकर विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव भी पारित किया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक के पास न होने की घटना को भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय बताया है। सीएम रेखा गुप्ता ने अपने संबोधन के दौरान कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने तय कर के रखा था कि ये बिल पास नहीं होना चाहिए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा-क्यों जरूरत पड़ी इस महिला आरक्षण की? यह एक बहुत बड़ा प्रश्न हमारे समाज के आगे बार-बार आता है। 
हमारे भारत देश में महिला और पुरुष की परिस्थितियां दोनों बहुत अलग-अलग हैं। एक महिला समाज की अपेक्षाओं को अपने ऊपर रखकर जब चलती है तो वह उस स्पीड में, उस गति में आगे नहीं बढ़ पाती जिससे कि एक पुरुष आगे बढ़ पाता है। वह अगर घर से बाहर निकलती है तो उसको सैकड़ों सवालों के जवाब देने पड़ते हैं। ऐसे में जब संविधान हमें जमीन देता है, पार्टी हमें मौका देती है और जनता अपना आशीर्वाद देती है, तब जा करके कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है। तब जा करके कोई व्यक्ति जनप्रतिनिधि बनता है। संगठन में पार्टी ने हमें मौका दिया। संविधान ने निगम में जो रिजर्वेशन की जमीन दी, जनता ने आशीर्वाद दिया। तब जन सेवा की इस दहलीज पे मेरे जैसी दिल्ली की एक साधारण परिवार की बेटी ने कदम रखा। इसमें हमारे नेतृत्व का प्रधानमंत्री का बहुत बड़ा आशीर्वाद हमें मिला। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- “यदि कोई एक व्यक्ति महिलाओं के हित में सोचने वाला, साहस के साथ उनके साथ खड़े रहने वाला मिला, तो वह देश के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी। 2014 के बाद जब भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी, मोदी प्रधानमंत्री बने। तब से ही इस देश में महिलाओं की स्थिति में सुधार आना शुरू हुआ। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 लेकर आए। सबको निवेदन करके, सबसे बातचीत करते हुए उन्होंने इसे सदन पटल पर पास करवाया। परंतु फिर यह ध्यान में आया कि जिस गति से या जो जितनी इसमें टेक्निकल फॉर्मेलिटीज हैं, परिसीमन की, डीलिमिटेशन की और उसके बाद यह शायद 2034 तक भी महिलाओं को रिजर्वेशन मिलना आसान नहीं दिख रहा है। और इसीलिए मोदी जी ने एक अमेंडमेंट के साथ में फिर से इसको प्रस्तुत किया कि बहनों को 2029 तक उस लोकसभा चुनाव में 33% आरक्षण दे दिया जाए। इसके लिए कुछ संशोधन जरूरी हैं और उन्होंने वह संशोधन रखे। पर यह विपक्षी तो पहले से ही तय करके बैठे थे कि हम तो इसे पास होने ही नहीं देंगे और इसीलिए उन्होंने अनेक-अनेक अड़ंगे लगाए।
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कांग्रेस नेता के खिलाफ नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट और यौन दुराचार....

आरोपी की पहचान आनंद नायडू के रूप में हुई है, कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में कांग्रेस के स्थानीय नेता के खिलाफ एक गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। उन पर नाबालिग बच्चों के साथ मारपीट और यौन दुराचार के आरोप लगे हैं। अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस ने POCSO एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है। ये भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि इन बच्चों की मां भी इस अपराध में शामिल हैं, पुलिस संपत्ति से जुड़े एंगल पर भी जांच कर रही है। आइए जानते हैं कि इस मामले में अब तक क्या जानकारी सामने आई है। इस मामले में मिली शिकायत के अनुसार, आनंद नायडू पर शिकायतकर्ता की पत्नी के साथ कथित तौर पर अवैध संबंध रखने का आरोप है। बताया जा रहा है कि स्थिति तब और बिगड़ गई जब नाबालिग बच्चों ने इस रिश्ते पर सवाल उठाए। आरोप है कि नायडू ने बच्चों पर एक 
रॉड से हमला किया और मारपीट के दौरान उन्हें काटा भी। घायल नाबालिगों ने बाद में पुलिस के सामने पेश होकर अपने बयान दर्ज कराए, जिसमें उन्होंने घटना का पूरा ब्योरा दिया। उनके बयानों और आरोपों की गंभीरता के आधार पर, यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने बताया है कि इस मामले में शारीरिक हमले और यौन शोषण, दोनों के आरोप शामिल हैं, जो नाबालिगों के प्रति क्रूरता का संकेत देते हैं। इसके बाद, एक FIR दर्ज की गई और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया। यह घटना अन्नपूर्णेश्वरी नगर पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती है, जो फिलहाल इस मामले की जांच कर रही है। अधिकारी मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं। हमले और दुराचार के आरोपों के अलावा, शिकायत में यह आरोप भी शामिल है कि शिकायतकर्ता की पत्नी और आनंद नायडू ने मिलकर संपत्ति अपने नाम पर ट्रांसफर कर ली थी। पुलिस के द्वारा मामले में इस पहलू की भी जांच की जा रही है।
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चुनावों में NIA की तैनाती पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान

पहली बार किसी चुनाव में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को भी लगाया गया है। पूरी निगरानी कोलकाता के सेंट्रल कंट्रोल रूम से की जाएगी, जिसे 7 क्लस्टर में बांटा गया है और हर क्लस्टर की जिम्मेदारी एक नोडल अधिकारी को दी गई है। हर पोलिंग स्टेशन के आसपास CCTV कैमरों से नजर रखी जा रही है और लाइव फीड सीधे कंट्रोल रूम तक पहुंच रही है। CAPF का कंट्रोल रूम राज्य और जिला स्तर के चुनाव अधिकारियों से जुड़ा हुआ है। सुरक्षा के लिए 6 हजार से ज्यादा 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' बनाई गई हैं, जबकि संवेदनशील इलाकों में बख्तरबंद गाड़ियों से गश्त जारी है।दरअसल,पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के तहत बुधवार को 
142 सीटों पर मतदान होना है। चुनाव आयोग ने इसके लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की है। राज्य के 7 जिलों में होने वाली इस वोटिंग के लिए केंद्रीय बलों के 3.5 लाख से ज्यादा जवान तैनात किए गए हैं। इनमें CRPF, SSB, RPF, ITBP और CISF के जवान शामिल हैं। सिर्फ कोलकाता में ही करीब 35 हजार जवान तैनात हैं, जबकि 2550 कंपनियां पूरे राज्य में सुरक्षा संभाल रही हैं। चुनाव आयोग ने 142 जनरल ऑब्जर्वर और 95 पुलिस ऑब्जर्वर भी तैनात किए हैं।
चुनाव आयोग ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं, ताकि किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत दी जा सके। 23 अप्रैल को पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान हो चुका है और अब सबकी नजर दूसरे चरण पर है। दूसरे चरण में कुल 3 करोड़ 21 लाख 73 हजार 837 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस चरण में SIR बड़ा मुद्दा बना हुआ है, क्योंकि कई जिलों में बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम कटे हैं। नॉर्थ 24 परगना में 12.5 लाख, साउथ 24 परगना में करीब 11 लाख, हावड़ा में 6 लाख, हुगली में 4.5 लाख और नदिया में लगभग 4.85 लाख वोट कम हुए हैं। करीब 25 सीटें ऐसी हैं, जहां कटे हुए वोट जीत-हार का अंतर तय कर सकते हैं।
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तेल कुओं को स्थायी नुकसान,इकॉनॉमिक फ्यूरी …

ईरान को दो मोर्चों पर लड़ाई लड़नी पड़ रही हैपहला मोर्चा रोजमर्रा की जरूरत की चीजों और खाद्य संकट को रोकना है, जबकि दूसरा और सबसे गंभीर मोर्चा युद्ध स्तर पर अपने तेल कुओं को बचाने का है,अगर ईरान तेल प्रोडक्शन बंद करता है, तो उसकी तेल क्षमता को स्थायी नुकसान पहुंच सकता हैअमेरिका की ओर से ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी अब तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है इस नाकाबंदी का नाम अमेरिका ने इकॉनॉमिक फ्यूरी -आर्थिक तूफान रखा है, जिसका मकसद ईरान के तेल उद्योग को पूरी तरह से बर्बाद करना हैजानकारों के मुताबिक होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावनाएं फिलहाल बेहद कम हैं और इस तनाव से पूरे मिडिल ईस्ट में बड़े युद्ध का खतरा कई गुना बढ़ गया हैसी आशंका जताई जा रही है कि इस महासंग्राम (बड़े युद्ध) का केंद्र ओमान की 
खाड़ी बन सकता है, जहां अमेरिकी युद्धपोत पहले से ही तैनात हैंरिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान फिलहाल करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन कर रहा है, लेकिन उसकी कुल भंडारण क्षमता मात्र 12 करोड़ बैरल ही है।  29 अप्रैल तक यह क्षमता पूरी तरह भरने की उम्मीद है। ईरान ने अपने सभी बड़े टैंकरों में भी तेल भरना शुरू कर दिया है, लेकिन वे भी लगभग भर चुके हैं। फारस की खाड़ी में तेल से भरे टैंकर तैर रहे हैं। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक पोस्ट में कहा है, बचे हुए IRGC नेता सीवेज पाइप में फंसे चूहों की तरह दम तोड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी नाकाबंदी से ईरान का तेल उद्योग उत्पादन बंद करने की कगार पर है और वहां जल्द ही पेट्रोल की कमी होने वाली है। 
रान का ज्यादातर तेल सोर क्रूड है। पाइपलाइन में तेल रुकने से यह पानी और गैसों के साथ मिलकर एक एसिड बनाता है, जिससे पाइपलाइन और पंपिंग स्टेशन के पुर्जों में तेजी से जंग लगने और उनके गलने का खतरा बढ़ जाता है। भविष्य में पंप दोबारा शुरू करने पर उनके डैमेज होने का खतरा कई गुना ज्यादा होगा। ईरान के पुराने तेल कुओं में तेल के नीचे पानी की परत होती है। पंपिंग रुकने से नीचे का पानी ऊपर आकर चट्टानों में घुस सकता है, जिससे तेल चट्टानों में हमेशा के लिए फंस जाएगा।  साथ ही, दबाव कम होने से चट्टानें आपस में चिपक या ढह सकती हैं, जिससे भविष्य में तेल निकालना मुश्किल हो जाएगा। अनुमान है कि ऐसा होने पर ईरान अपनी आने वाली उत्पादन क्षमता का 20 से 30 फीसदी हमेशा के लिए खो देगा।
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पहले हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र कहने पर लोग हंसने थे,राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता बल्कि... संघ प्रमुख मोहन भागवत

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ की 100 साल की यात्रा कैसे चली? संघ के पास था तो कुछ नहीं। ना प्रसिद्धि थी, ना सत्ता थी, ना प्रचार था, ना साधन थे, ना धन था। डॉक्टर हेडगेवार को अनुयाई मिले उनकी आयु क्या थी? उनका अनुभव क्या था? परंतु एक श्रद्धा और विश्वास ले चले- हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। लोग हंसते थे, वो प्रारंभ के दिन की बात है नहीं। राम मंदिर बनने तक हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है कहने पर हंसने वाले लोग थे। आज हंसने वाले लोग ही कह रहे हैं कि हिंदुस्तान हिंदुओं का देश है। हमको कहते हैं कि आप घोषित करो। हम कहते हैं घोषित करवाने की जरूरत नहीं, जो है वो है। सूरज पूरब से उगता है। ये घोषित करना चाहिए क्या? वह पूरब से ही उगता है। वह जहां से उगता है उसको हम पूरब कहते हैं। तो भारत हिंदू राष्ट्र है। आज सबको मान्य है। लेकिन उस समय क्या था? उस 
समय सब लोग खिल्ली उड़ाते थे। मोहन भागवत ने कहा कि राम राज्य केवल राजा के कारण नहीं होता। प्रजा के कारण भी होता है। श्री राम के गुणों का वर्णन जैसे रामायण में है, राम राज्य के अधर के नाते वैसे राम राज्य की प्रजा कैसी थी इसका भी वर्णन है। तो मंदिर निर्माण अयोध्या में जो होना था हो गया। राम राज्य में ही राम राज्य की प्रजा के आचरण का जो वर्णन है ऐसा आचरण मेरा बने। मेरे परिवार का बने और हमारे कारण अपने समाज में उस आचरण का प्रचार प्रसार हो। 
प्रत्यक्ष आचरण शुरू हो। हम जहां हैं जिस संस्था में है, संगठन में है, व्यक्तिगत कुछ अपना प्रभाव है, जितना प्रभाव है, अपनी जो कुछ शक्ति है, वह लगाकर इसको करते रहना छोटे बड़े दायरे में। यह हम करेंगे तो भगवान की इच्छा तो है ही कि दुनिया को धर्म देने वाला भारत खड़ा होना चाहिए। कितनी जल्दी होगा यह हमको तय करना है। हम सब लोग लगेंगे तो विश्व में फैले प्रचंड हिंदू समाज की इतनी शक्ति है कि अगर सोच कर शुरू करेगा तो एक दिन में कर देगा। मोहन भागवत ने कहा कि विश्व की आज जो आवश्यकता है, वह होना है, वो भारत के द्वारा ही होगा और भारत का उत्थान भारत की संतान ही करेगी और कोई देश भारत का उद्धार नहीं करेगा। भारत बड़ा होकर सारी दुनिया का उद्धार करेगा। ये विधि लिखित है। उसको पूर्ण करने में हमारा हाथ लगे तो जल्दी से जल्दी कम से कम नुकसान में हो जाएगा। इतना विचार हम सब लोग आज के निमित्त करें।
27 April 2026
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बैंक ने डेथ सर्टिफिकेट मांगा तो शख्स कब्र से बहन की डेड बॉडी निकाल लाया…

मामला क्योंझर जिले के पटना इलाके के दियानाली गांव का है। यहां रहने वाला जितु मुंडा अपनी बहन की मौत के बाद उसके बैंक खाते से पैसे निकालना चाहता था। उसकी बहन की करीब दो महीने पहले बीमारी के कारण मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि उसने अपनी जिंदगी में मवेशी बेचकर करीब 19 हजार रुपये कमाए थे, जिसे उसने ओडिशा ग्राम्य बैंक की एक स्थानीय शाखा में जमा किया था। बहन की मौत के बाद जितु मुंडा ही उसका एकमात्र सहारा और परिवार का सदस्य था। ऐसे में वह कुछ दिन पहले बैंक पहुंचा और पैसे निकालने की कोशिश की,लेकिन कथित तौर पर बैंक अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए उससे मृत्यु का  प्रमाण पत्र और 
अन्य जरूरी दस्तावेज मांगे। जब जितु मुंडा दस्तावेज नहीं दे पाया, तो उसने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठा लिया। आरोप है कि उसने अपनी बहन के दफनाए गए शव को कब्र से बाहर निकाल लिया। इसके बाद वह उसके कंकाल को अपने कंधे पर रखकर करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलकर बैंक पहुंच गया। बैंक के बाहर पहुंचकर उसने कंकाल को सामने रख दिया और वहीं धरने पर बैठ गया। वह कई घंटों तक वहीं बैठा रहा और बैंक से तुरंत पैसे देने की मांग करता रहा। यह दृश्य देखकर आसपास के लोग भी दंग रह गए और मौके पर भीड़ जुट गई। मामले की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने काफी समझाइश के बाद जितु मुंडा को वहां से हटाया और स्थिति को शांत कराया। इसके बाद प्रशासन की ओर से कंकाल को दोबारा सम्मानपूर्वक दफनाने की व्यवस्था भी की गई। यह घटना न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग प्रक्रियाओं और जरूरी दस्तावेजों को लेकर लोगों में कितनी जागरूकता की कमी है। वहीं, यह मामला संवेदनशीलता और व्यवस्था दोनों पर सवाल खड़े करता है।
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पैसे दो, वरना माल रिजेक्ट कर दूंगा,सर्वेयर द्वारा हर किसान से अवैध वसूली,एफआईआर और सख्त कार्यवाही की मांग

भ्रष्टाचार के इस खेल का खुलासा ग्राम पूनमखेड़ी के किसान सुरेंद्र धाकड़ ने किया है। सुरेंद्र धाकड़ ने साक्ष्यों के साथ बताया कि केंद्र पर तैनात सर्वेयर वीरेंद्र यादव द्वारा प्रत्येक मसूर की ट्रॉली से 2,000 रुपये से लेकर 6,000 रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। सर्वेयर किसानों को स्पष्ट धमकी देता है कि पैसे दो, नहीं तो तुम्हारा माल रिजेक्ट कर दूंगा। जो किसान रिश्वत दे देते हैं, उनका खराब माल भी पास कर दिया जाता है, लेकिन जो ईमानदारी से अपनी उपज लाते हैं, उन्हें रिजेक्शन का डर दिखाकर मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। दरअसल,मध्य प्रदेश के गुना में फसल खरीद केंद्र पर किसानों से रिश्वत लेने का वीडियो सामने आया है। वीडियो शेयर करने वाले किसान ने आरोप लगाया है कि सर्वेयर हर किसान से 2000 से लेकर 6000 रुपये तक वसूल रहा है। वीडियो में भी आरोपी सर्वेयर 700 रुपये की रिश्वत लेता नजर आ रहा है। किसान ने बताया कि वह 65 क्विंटल मसूर लेकर आया था 
और इसे पास कराने के लिए उसे 3000 रुपये की रिश्वत देनी पड़ी। घटना पगारा सेवा सहकारी समिति मर्यादित खरीदी केंद्र (बिलोनिया वेयरहाउस) की है। यहां समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने आए किसानों से सर्वेयर द्वारा खुलेआम अवैध वसूली की जा रही है। माल पास करने के नाम पर हजारों रुपयों की मांग की जा रही है, जिससे आक्रोशित किसानों ने अब प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। किसान सुरेंद्र धाकड़ ने इस लूट का वीडियो भी बनाया है, जो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर सर्वेयर को पैसे लेते हुए देखा जा सकता है। सुरेंद्र के अनुसार, उनके 65 क्विंटल माल को पास कराने के बदले उनसे 3,000 रुपये की रिश्वत ली गई। किसान का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि केंद्र पर आने वाले हर अन्नदाता को इस संगठित लूट का शिकार बनाया जा रहा है। पीड़ित किसानों ने कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल और एसपी से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से दोषी सर्वेयर वीरेंद्र यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और उसे सेवा से पृथक किया जाए। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही दोषियों पर शिकंजा नहीं कसा गया और अवैध वसूली बंद नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे और सडक़ों पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करेंगे।
 
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मराठी की अनिवार्यता पर रोक-मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने….

महाराष्ट्र सरकार ने पहले ऐलान किया था कि मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने वाले सभी लोगों के लिए 1 मई से मराठी बोलना जरूरी होगा। हालांकि, विरोध के बाद इस फैसले को 6 महीने के लिए टाल दिया गया है। हालांकि, इस दौरान मराठी बोलने वाले और गैर मराठी ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों का वेरिफिकेशन जारी रहेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि मुंबई में रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि रिक्शा चालकों को मराठी नहीं आती, तो उनके परमिट रद्द कर दिए जाएंगे। इसके बाद मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद दोबारा उभर गया था। इस मुद्दे पर कई नेताओं ने विवादित बयान भी दिए थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी इनमें से एक थे। अमित ठाकरे ने कहा था कि जो मराठी भाषा अनिवार्य करने का विरोध कर रहे हैं। अगर उनके आंदोलन से किसी मराठी व्यक्ति को परेशानी हुई तो 
उसे सड़क पर ही पीटेंगे। गैर मराठीभाषी लोगों के अलावा विपक्ष के नेताओं ने भी मराठी के नाम पर गुंडागर्दी का विरोध किया था। एआईएमआईएम के नेता इम्तियाज जलील ने कहा था कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों को मराठी बोलनी चाहिए। जिन लोगों को नहीं आती है, उन्हें मराठी सिखाई जानी चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोगों को मराठी सिखाने का बेहतर तरीका अपनाया जाना चाहिए। अब संभवतः महाराष्ट्र सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।
महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने कहा, "मुंबई मराठी साहित्य संघ ने राज्य भर में अपनी अलग-अलग ब्रांच में ऑटो रिक्शा ड्राइवरों और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी ली है। इससे मराठी को बढ़ावा मिलेगा। कोंकण मराठी साहित्य परिषद भी मिलकर कोंकण इलाके में मराठी सिखाएगी। परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा था कि सरकार ने महाराष्ट्र दिवस (एक मई) से इस निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिसके तहत ऑटो, टैक्सी और ओला, उबर तथा ई-बाइक जैसी ऐप आधारित सेवाओं के चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा था कि इस पहल के तहत गैर-मराठी चालकों को भाषा सिखाने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। महाराष्ट्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि ऑटो-रिक्शा चलाने वाले लोगों को मराठी में पढ़ना या लिखना जरूरी नहीं है, उन्हें सिर्फ आम बोलचाल की भाषा सीखने की जरूरत है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि सरकार राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगी। वहीं, मनसे कार्यकर्ताओं ने पहले ही उन ऑटो-रिक्शा पर स्टीकर लगाने शुरू कर दिए हैं, जिनके चालकों को मराठी आती है। 
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परीक्षा केंद्र में छत्राओं द्वारा नथ पहनकर एंट्री पर बवाल …

चिकमगलूर के MES कॉलेज में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट देने आईं कई छात्राएं अपनी नथ के कारण परीक्षा के सख्त नियमों के आड़े आ गईं। कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में जनेऊ की मनाही के बाद उठा बवाल अभी थमा नहीं था कि अब छात्राओं के नथ पहनने से भी परेशानी खड़ी हो गई। हालांकि, छात्राओं को अपनी नथ (Nose Stud) उतारने को नहीं कहा गया, बल्कि उस पर एडहेसिव टेप लगा दिया गया। यह कदम तब उठाया गया जब कई छात्राओं ने परीक्षा केंद्र में नथ पहनकर एंट्री ली। CET के आयोजकों ने स्पष्ट किया था कि परीक्षा हॉल में किसी भी तरह की धातु की वस्तु या गहने पहनकर आना मना है। यह नियम सुरक्षा कारणों से लागू किया गया है और यह छात्रों को पहले से सूचित किया गया था। हालांकि, कई छात्राओं के लिए यह नियम एक परेशानी बन गया, क्योंकि वे नथ पहनकर आईं थीं और उन्हें 
हटाने का विकल्प नहीं दिया गया। इस बीच, परीक्षा केंद्र के स्टाफ ने छात्राओं के लिए एक अस्थायी समाधान निकाला। गहनों को उतारने की बजाय, छात्राओं की नथ पर बस एडहेसिव टेप लगा दिया गया, जिससे सुरक्षा नियमों का पालन भी हो गया और छात्राओं को परीक्षा में बैठने की अनुमति मिल गई।कुछ लोग इस कदम पर सवाल उठा रहे हैं, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह धातु-मुक्त नीति पहले से निर्धारित थी, और उन्हें उम्मीद थी कि सभी छात्र इसे जानकर परीक्षा में शामिल होंगे। इसके बावजूद, कई छात्राओं और उनके अभिभावकों ने इस कदम को सहज और समझदारीपूर्ण कदम माना, जबकि कुछ ने इसे लेकर असहमति जताई है। परीक्षा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने भी कड़ी निगरानी रखी थी, और कॉलेज प्रशासन ने इस प्रक्रिया को बेहद गंभीरता से लागू किया।
 
Posted by achhiduniya

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