पेट्रोल, डीजल और जेट फ्यूल के एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में कटौती….
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (जेट
फ्यूल) के एक्सपोर्ट पर लगाए जाने वाले विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स में कटौती कर दी है।
ये बदलाव 1 जून से लागू होगा। हालांकि,
घरेलू
खपत वाले ईंधन पर टैक्स की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय
की तरफ से जारी एक नोटिफिकेशन के मुताबिक, पेट्रोल के एक्सपोर्ट
पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) को 3
रुपये
प्रति लीटर से घटाकर 1.5 रुपये प्रति लीटर कर
दिया गया है। इसी तरह, डीजल के एक्सपोर्ट पर
लगाए जाने वाले टैक्स को 16.5 रुपये प्रति
लीटर से
घटाकर 13.5 रुपये प्रति लीटर कर
दिया गया है। पेट्रोल और डीजल के
अलावा, सरकार ने हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले
फ्यूल एटीएफ पर लगने वाले टैक्स को 16 रुपये प्रति लीटर से
घटाकर 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया है। टैक्स की ये नई
दरें 1 जून से लागू होंगी। मंत्रालय ने ये भी स्पष्ट
किया है कि पेट्रोल और डीजल के घरेलू इस्तेमाल पर लागू सड़क एवं अवसंरचना उपकर
शून्य रहेगा और इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार ने हाल के महीनों में
जरूरत के हिसाब से अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स) व्यवस्था में कई
बार बदलाव किया है। ये कदम कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों और भू-राजनीतिक
परिस्थितियों में उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखकर किया गया है।
मौसम की खराबी-भूस्खलन,रोकी गई केदारनाथ यात्रा
रुद्रप्रयाग के स्थानीय प्रशासन ने फिलहाल केदारनाथ यात्रा को अस्थाई रूप
से रोक दिया है। स्थानीय पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए एक्स पर लिखा है,केदारनाथ
यात्रा अस्थाई रूप से रोकी गई। जनपद रुद्रप्रयाग में भारी बारिश के ऑरेंज अलर्ट के
चलते श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु केदारनाथ यात्रा को अस्थाई तौर पर रोका गया है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन भी जारी किए हैं। किसी भी
समस्या के समाधान के लिए श्रद्धालु 8958757335 और 8218326386
पर
संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा डायल 112 के जरिये भी मदद ली जा
सकती है। प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील की है। वहीं दूसरी तरफ जोशीमठ
के पास
बद्रीनाथ नेशनल हाइवे (NH-7) पर भीषण जाम लगा हुआ
है। यहां वाहनों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने जाम
खत्म करने के लिए कर्मियों को तैनात किया है। वहीं भारी जाम को हटाने के लिए 30
मिनट
के अंतराल पर एकतरफा यातायात को नियंत्रित करने के लिए आपातकालीन टोकन-आधारित गेट
प्रणाली को सक्रिय किया गया है। उत्तराखंड में बीते कुछ दिनों से
मौसम का मिजाज बदल गया है। इस बीच यहां केदारनाथ यात्रा को रोकना पड़ा है। बारिश
और जगह-जगह हुए भूस्खलन की वजह से यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़
रहा है। इस बीच स्थानीय प्रशासन ने केदारनाथ यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने
का
फैसला लिया है। बता दें कि बारिश की वजह से लोग जगह-जगह रुके हुए हैं,
जिस
वजह से कई जगहों पर जाम की स्थिति भी देखी जा रही है। वहीं मौसम विभाग ने
उत्तराखंड में बारिश को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। चमोली के पुलिस अधीक्षक
सुरजीत सिंह पंवार ने कहा,लगभग 30,000
से 35,000
तीर्थयात्री
प्रतिदिन श्री बद्रीनाथ धाम की यात्रा कर रहे हैं। वहीं 5,000
से 10,000
श्रद्धालु
हेमकुंड साहिब जा रहे हैं। तीर्थयात्रियों की इस भारी भीड़ के कारण हमारे मौजूदा
राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दबाव काफी बढ़ गया है। विशेष रूप से,
जोशीमठ-मारवाड़ी-विष्णुप्रयाग
मार्ग पर लगभग 10 किलोमीटर का सड़क खंड बेहद खराब स्थिति में
है। कुछ वर्ष पूर्व जोशीमठ क्षेत्र में हुए प्राकृतिक भू-धंसाव ने वहां के सड़क
ढांचे को बुरी तरह प्रभावित किया है।
पश्चिम बंगाल आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आएंगे 1.36 करोड़ से ज्यादा परिवार
पश्चिम बंगाल शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता में स्वास्थ्य
विभाग के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बंगाल में 1.36
करोड़
से ज्यादा परिवारों को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा,
इससे
ये सुनिश्चित होगा कि राज्य की बड़ी आबादी को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का
लाभ मिले। बताते चलें कि आयुष्मान भारत योजना,
भारत
सरकार की एक प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है। इस योजना के तहत पात्र परिवारों को
हर साल सरकारी और कुछ प्राइवेट अस्पतालों में 5 लाख तक का फ्री
(कैशलेस) इलाज मिलता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में 467
प्रधानमंत्री
जनऔषधि केंद्र संचालित किए जाएंगे और कैंसर सहित गंभीर बीमारियों की दवाएं जल्द ही
30 प्रतिशत सब्सिडी पर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री
ने अलीपुरद्वार, कलिम्पोंग, दक्षिण दिनाजपुर और
पश्चिम बर्द्धमान जिलों में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की भी घोषणा की। उन्होंने
कहा,कोई भी जिला मेडिकल कॉलेज के लाभ से वंचित
नहीं रहना
चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग अस्पतालों में कथित बिचौलियों और मरीजों
को अनावश्यक रूप से रेफर किए जाने के खिलाफ कतई बर्दाश्त नहीं करने
की
नीति अपनाएगा। शुभेंदु ने कहा कि जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की चौबीसों
घंटे निगरानी के लिए स्वास्थ्य भवन में एक केंद्रीय
नियंत्रण कक्ष स्थापित किया जा रहा है। शुभेंदु अधिकारी ने कहा
कि केंद्र ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के लिए 2103
करोड़
रुपये मंजूर किए हैं, जिनमें से 527
करोड़
रुपये मिल भी चुके हैं। इन फंड्स से पूरे राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर
बनाने में मदद मिलेगी।
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य विभाग का प्रभार भी संभाल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत लाभार्थियों को निर्धारित सरकारी
अस्पतालों में 5 लाख रुपये तक का फ्री स्वास्थ्य बीमा कवर
मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत के अन्य हिस्सों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिक
भी इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। शुभेंदु ने कहा, ''राज्य के सरकारी
अस्पताल अब 'आयुष्मान मंदिर' के नाम से जाने जाएंगे।
अगर कोई मरीज दवाओं पर महीने में 1000 रुपये खर्च करता है,
तो
उसे वही दवाएं इन अस्पतालों में 100 रुपये में उपलब्ध
होंगी। नियंत्रण कक्ष सरकारी
स्वास्थ्य सुविधाओं में स्वच्छता, सेवा वितरण और
प्रशासनिक कामकाज की भी निगरानी करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता मेडिकल
कॉलेज के एक डॉक्टर के खिलाफ गंभीर रूप से बीमार मरीज को रेफर करने के मामले में
पहले ही कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शुभेंदु ने उन प्राइवेट अस्पतालों से संबंधित
नीतिगत फैसले की भी घोषणा की, जिन्हें सरकार से एक
रुपये की नाममात्र दर पर जमीन मिली थी। ऐसे अस्पतालों को सरकारी स्वास्थ्य
केंद्रों से भेजे गए आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए 15 प्रतिशत तक बिस्तर
आरक्षित रखने होंगे। उन्होंने कहा,अगर सरकारी अस्पतालों
पर ज्यादा दबाव है और मरीजों को इन प्राइवेट अस्पतालों में भेजा जाता है,
तो
उन्हें मरीजों को भर्ती करना होगा। हमने यह भी फैसला किया है कि ऐसे मरीजों का
इलाज फ्री किया जाना चाहिए।
अर्थव्यवस्था को बूस्टर,आरबीआई देगा सरकार को ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड
आरबीआई के अनुसार, 2025-26 में उसका नेट इनकम
बढ़कर करीब ₹3.96 लाख करोड़ पहुंच गया,
जबकि
पिछले साल यह ₹3.13 लाख करोड़ था। इसके
अलावा केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट भी 20% से ज्यादा बढ़कर लगभग ₹92
लाख
करोड़ तक पहुंच गई है। यह दिखाता है कि RBI की वित्तीय स्थिति काफी
मजबूत हुई है। भारतीय रिजर्व बैंक ने केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 2025-26
के
लिए रिकॉर्ड ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड
देने का ऐलान किया है। यह अब तक का सबसे बड़ा सरप्लस ट्रांसफर माना जा रहा है। इस
फैसले से सरकार को ऐसे समय में बड़ी आर्थिक ताकत मिलेगी, जब दुनिया भर में
भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता बनी हुई है।
आरबीआई का यह फैसला गवर्नर
संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय निदेशक मंडल की 623वीं बैठक में लिया गया।
आरबीआई ने पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में सरकार को ₹2.69
लाख
करोड़ का डिविडेंड दिया था। उससे पहले 2023-24 में यह आंकड़ा ₹2.1
लाख
करोड़ था। इस बार डिविडेंड में बड़ी बढ़ोतरी ने सरकार की वित्तीय स्थिति को और
मजबूत कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस रकम का इस्तेमाल सरकार
इंफ्रास्ट्रक्चर, सामाजिक योजनाओं और
आर्थिक विकास परियोजनाओं में कर सकती है।
सरकार को मिलने वाला यह
बड़ा डिविडेंड देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक माना जा रहा है। इससे सरकार
पर कर्ज का दबाव कम हो सकता है और विकास कार्यों में खर्च बढ़ाया जा सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि इससे वित्तीय घाटा कंट्रोल रखने में मदद मिल सकती
है। साथ ही सरकार को टैक्स बढ़ाए बिना खर्च करने की एक्स्ट्रा ताकत मिलेगी।
मदरसों में भी वंदे मातरम् अनिवार्य
13 मई की शाम को पश्चिम बंगाल शिक्षा विभाग ने भी
राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में ‘वंदे मातरम्’
गाना
अनिवार्य करने संबंधी अधिसूचना जारी की थी। राज्य के नए और 9वें मुख्यमंत्री
शुभेंदु अधिकारी ने 14 मई को अपने आधिकारिक
सोशल मीडिया अकाउंट पर शिक्षा विभाग की अधिसूचना शेयर की थी। बता दें कि इसी साल
फरवरी 2026 में केंद्र सरकार ने
वंदे मातरम् को राष्ट्रगान (जन गण मन) के बराबर का दर्जा दिया था। दरअसल,पश्चिम बंगाल की नई
नवेली सरकार ताबड़तोड़ फैसले ले रही है। राज्य के सभी सरकारी और सरकारी सहायता
प्राप्त स्कूलों में वंदे मातरम् अनिवार्य कर दिया है।
वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के सभी
मदरसों में भी इस राष्ट्रीय गीत का गायन पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। बंगाल
सरकार के मदरसा शिक्षा निदेशायल ने एक आदेश जारी कर यह
ऐलान किया है। राज्य के अल्पसंख्यक
मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री खुदीराम टुडू ने इस फैसले की पुष्टि की है।
उन्होंने कहा कि जब राज्य के अन्य सरकारी स्कूलों और संथाली भाषा में पढ़ाई कराने
वाले स्कूलों में भी 'वंदे मातरम्'
निवार्य
है, तो मान्यता प्राप्त मदरसों में इसे अनिवार्य क्यों
नहीं किया जा सकता? आधिकारिक आदेश में साफ
कहा गया है कि पुराने सभी नियमों और प्रथाओं को रद्द करते हुए यह नया नियम तत्काल
प्रभाव से लागू किया जा रहा है। इसके दायरे में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा
विभाग के तहत आने वाले सभी सरकारी मॉडल मदरसे (अंग्रेजी माध्यम),
मान्यता
प्राप्त सहायता प्राप्त मदरसे, स्वीकृत मदरसा शिक्षा
केंद्र, शिशु शिक्षा केंद्र और मान्यता प्राप्त
गैर-सहायता प्राप्त मदरसे शामिल होंगे।
महाराष्ट्र के किसान को 600 किलो प्याज बेचने के मिले सिर्फ 301 रुपये
महाराष्ट्र के बीड जिले के धारूर तहसील के अरणवाडी गांव के किसान संतोष
शिनगारे को सोलापुर की मंडी में करीब 600 किलो प्याज बेचने के
बाद सिर्फ 301 रुपये मिले हैं। बाजार में प्याज का सिर्फ 50
पैसे
प्रति किलो का भाव मिला। दरअसल,
बीड
जिले के धारूर तहसील के अरणवाडी गांव के किसान संतोष शिनगारे ने अपने खेत में
प्याज की खेती की थी। फसल अच्छी होने के बाद उन्होंने पहली बार सोलापुर मंडी में 12
बोरियों
में 602 किलो प्याज भेजा था। किसान को ढुलाई और
हमाली (मजदूरी शुल्क) के 1082 रुपये किसान को अपनी
जेब से भरने पड़े। प्याज बेचकर मिलने वाले पैसों से शिनगारे को ट्रैक्टर की किस्त
भरनी थी, लेकिन अब मंडी तक प्याज
पहुंचाने के लिए भी
उन्हें अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। शिनगारे के पास अभी भी
करीब 10 टन प्याज पड़ा हुआ है, जिसे लेकर अब उनके
सामने बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शिनगारे ने सरकार से
प्याज उत्पादक किसानों को मदद देने की मांग की है। वहां प्याज को सिर्फ 50
पैसे
प्रति किलो का भाव मिला, जिससे उन्हें कुल 301
रुपये
प्राप्त हुए, जबकि इस प्याज को मंडी तक पहुंचाने में 1383
रुपये
खर्च हुए। यानी प्याज बिक्री से मिले 301 रुपये काटने के बाद भी
शिनगारे को अपनी जेब से 1082 रुपये देने पड़े। किसानों की ऐसी हालत को
देखते हुए शिनगारे ने सरकार से मदद की मांग की है। शिनगारे ने बताया कि उसे प्याज बिक्री से मिलने
वाले पैसों से ट्रैक्टर की किस्त भरनी थी। सरकार को प्याज की खेती करने वाले
किसानों की मदद करनी चाहिए।
चौबीसों घंटे खुली रहे अदालते आम जनता को जल्दी मिल सके न्याय CJI सूर्यकांत ने की वकालत,समय की बर्बादी रोकने का इकलौता जरिया टेक्नोलॉजी
CJI सूर्यकांत मध्य प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आयोजित एक
कार्यक्रम में बोल रहे थे, जिसका विषय फ्रेगमेंटेशन
टू फ्यूजन, एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल
प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन था। इस अवसर पर उन्होंने हाई कोर्ट के नए विकसित डिजिटल
प्लेटफॉर्म का भी शुभारंभ किया। मुख्य न्यायाधीश ने न्याय का दायरा बढ़ाने और उसमें तेजी लाने के लिए
टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित न्यायिक
ढांचे को मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कहा,भारतीय न्यायपालिका न
केवल 1990 के दशक से चली आ रही
तकनीकी प्रगति का सर्वोत्तम उपयोग करने के लिए प्रतिबद्ध है,
बल्कि
हम आम आदमी के फायदे के लिए नवीनतम एआई (AI) डिजाइनों का उपयोग करने
पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। CJI ने आगे कहा कि
न्यायपालिका के समय की बर्बादी को रोकने का एकमात्र प्रभावी समाधान टेक्नोलॉजी ही
है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कहा कि अब
समय आ गया है जब
न्यायपालिका को एक ऐसी प्रणाली विकसित करनी होगी,
जिससे
आम आदमी को तुरंत राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रणाली को उन अस्पतालों
की तरह काम करने की जरूरत है, जो चौबीसों घंटे (24x7)
खुले
रहते हैं, ताकि आम आदमी की पीड़ा और आकांक्षाओं का
समाधान किया जा सके। कोविड- 19 महामारी के दौर को याद करते हुए CJI
ने
कहा कि कोविड-19 के बेहद मुश्किल समय में भी अपनी संवैधानिक
जिम्मेदारियों को निभाने के लिए भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक स्तर पर सराहना की
गई थी। उन्होंने बताया,हमने अपने कोर्ट बंद
नहीं किए। संकट के उस दौर में भी टेक्नोलॉजी की मदद से ही अदालतों ने जरूरी और
तत्काल मामलों की सुनवाई पूरी की थी। मध्य
प्रदेश
हाई कोर्ट द्वारा विकसित किए गए डिजिटल प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए सीजेआई ने
कहा कि जैसा कि केंद्रीय कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी
सुझाव दिया है, इन तकनीकी प्रणालियों को पूरे देश के स्तर पर
लागू करने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक
विशेष समिति का गठन किया गया है, जो इस बात का अध्ययन कर
रही है कि मामलों के त्वरित निपटारे के लिए न्यायिक प्रणाली में AI
का
उपयोग कैसे किया जा सकता है।
छोटा हज पैकेज शुरू करने की घोषणा केंद्र सरकार द्वारा
नई व्यवस्था के तहत तीर्थयात्री सामान्य लंबी अवधि के प्रवास के बजाय करीब 20
दिनों
के भीतर हज की रस्में पूरी करके लौट सकेंगे। इस विशेष योजना के तहत लगभग 10,000
तीर्थयात्री
यात्रा करेंगे। तीर्थयात्रियों, विशेष रूप से कामकाजी
पेशेवरों और व्यापारियों से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर जो हज की मुख्य रस्में
पूरी होने पर जल्दी लौटने का विकल्प चाहते थे हज 2026
के
लिए पहली बार एक छोटा हज पैकेज शुरू किया गया है। केंद्र सरकार ने शनिवार को
भारतीय तीर्थयात्रियों, विशेष रूप से पेशेवरों
के लिए इस साल एक छोटा हज पैकेज शुरू करने की घोषणा की। इसका उद्देश्य सभी ज़रूरी
रस्मों को निभाते हुए तीर्थयात्रा की अवधि को कम करना है। केंद्रीय अल्पसंख्यक
मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन के दफ्तर की ओर जारी एक
बयान
में कहा कि यह पहल उन तीर्थयात्रियों के
अनुरोध पर शुरू की गई है जो व्यापार और
पेशेवर क्षेत्रों में काम करते हैं और जिनके लिए काम से 40 से 45
दिन
दूर रहना मुश्किल होता है। बयान में कहा गया कि इस श्रेणी के तहत,
10,000 तीर्थयात्री सऊदी अरब (KSA) में लगभग 20
दिनों
की कम अवधि के साथ हज करेंगे, जबकि सामान्य हज की
अवधि 40-45 दिन होती है। मंत्री के
कार्यालय ने बताया कि पहली उड़ान 17 मई को कोच्चि से रवाना
होने वाली है, जबकि दिल्ली, मुंबई,
बेंगलुरु,
हैदराबाद,
चेन्नई
और अहमदाबाद सहित अन्य प्रमुख शहरों से भी उड़ानें निर्धारित हैं।
छोटा हज पैकेज 17
मई से
5 जून तक चलेगा, जिससे तीर्थयात्री
नियमित तीर्थयात्रा कार्यक्रम की तुलना में कम समय सीमा के भीतर अपनी यात्रा पूरी
करके लौट सकेंगे। मंत्री के कार्यालय ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य कामकाजी
पेशेवरों के लिए तीर्थयात्रा को अधिक सुलभ और प्रबंधनीय बनाना है,
साथ
ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी धार्मिक दायित्व पूरे हों। कोचीन अंतर्राष्ट्रीय
हवाई अड्डे से पहली उड़ान को कुरियन 17 मई को दोपहर 12.30
बजे
हरी झंडी दिखाएंगे।
कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम जरूर दें…DL-CM रेखा गुप्ता
पश्चिमी एशिया में जारी तनाव के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतें बढ़ी
हैं। भविष्य में भी कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। इसी वजह
से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी के दाम बढ़ रहे हैं। इनकी खपत
कम करने के लिए सरकार खुद कई उपाय अपना रही है और लोगों से भी ऐसा करने के लिए कह
रही है। दिल्ली सरकार ने सभी
प्राइवेट कंपनियों को सलाह दी है कि सप्ताह में कम से कम दो दिन कर्मचारियों को
वर्क फ्रॉम होम जरूर दें। इसके साथ ही ऑफिस टाइम में बदलाव करने और कर्मचारियों को
कार पूलिंग करने की सलाह दी है। दिल्ली सरकार की तरफ से सभी नागरिकों से पब्लिक
ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करने की अपील की है। दिल्ली सरकार की तरफ से कहा गया है
कि ईंधन बचाने के लिए ये उपाय जरूरी हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने
शुक्रवार से ऑनलाइन बैठकों का सिलसिला शुरू कर
अधिकारियों को सरकार के निर्णयों को
लागू करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने ईंधन बचाने के लिए 90
दिवसीय
मेरा भारत मेरा योगदान नाम से एक अभियान शुरू
किया है, जिसके तहत सरकार की 50 प्रतिशत बैठकें ऑनलाइन
आयोजित की जानी है। सीएम गुप्ता ने इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के
ऊर्जा संरक्षण, संसाधनों की बचत और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने
के आह्वान को ध्यान में रखते हुए प्रशासनिक स्तर पर ऑनलाइन बैठकें शुरू कर दी हैं। गुप्ता
ने सचिवालय में संभागीय आयुक्त, सभी जिलाधिकारियों
(डीएम) और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर सरकार के
निर्णयों को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों
से कहा कि अधिकतम सरकारी बैठकों को ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया जाए ताकि ईंधन,
समय
और संसाधनों की बचत सुनिश्चित हो सके। आम जनता को राहत देने के लिए दिल्ली सरकार ने विमान के ईंधन पर लगने वाले
वैट में बड़ी कटौती की है।
पहले जेट फ्यूल में 25 फीसदी वैट लगता था। अब
इसे कम करके सात फीसदी कर दिया गया है। इससे दिल्ली एयरपोर्ट में फ्यूल भरवाने
वाले विमानों को महंगाई की मार से थोड़ी राहत मिलेगी और लोगों का किराया भी कम हो
सकता है। सरकार ने कहा कि इस फैसले से एयरलाइन कंपनियों और यात्रियों को लाभ मिलने
की उम्मीद है। सीएम ने सभी विभागों को
बिजली की खपत कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाने, कार्यालयों में ऊर्जा
बचत के उपाय अपनाने तथा जिम्मेदार प्रशासनिक कार्यशैली विकसित करने के निर्देश
दिए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी विभाग अपने वाहनों के ईंधन खर्च में कम से
कम 20 प्रतिशत तक कमी सुनिश्चित करें। गुप्ता ने मेट्रो
मंडे पहल को प्राथमिकता देने पर जोर देते हुए कहा
कि अधिकारी और कर्मचारी सप्ताह में एक दिन मेट्रो तथा सार्वजनिक परिवहन का अधिकतम
उपयोग करें, ताकि आमजन के बीच सकारात्मक संदेश जाए। इसके
साथ ही उन्होंने सप्ताह में एक दिन नो व्हीकल डे वाहन रहित दिवस
को भी
प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि अटल कैंटीन,
आरोग्य
मंदिर, अग्निशमन विभाग के कार्यालयों तथा अन्य
जनसुविधाओं से जुड़े केंद्रों का नियमित दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं को दुरुस्त
किया जाए।
IDFC First Bank,590 करोड़ रुपये के कथित बैंकिंग घोटाले ने….
14 मई को केंद्रीय एजेंसी CBI
ने
हरियाणा के पंचकुला और चंडीगढ़ में कई ठिकानों पर रेड की थी। 14
मई को
हुए इस एक्शन में दफ्तरों,
ज्वेलरी
शोरूम और रिहायशी इलाकों समेत 7 जगहों पर छापेमारी की
गई। इस दौरान, CBI ने कई इलेक्ट्रॉनिक
सबूत और अहम दस्तावेज जुटाए। हरियाणा में IDFC
First Bank से जुड़े 590 करोड़ रुपये के कथित
घोटाले ने बैंकिंग सिस्टम और प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस
केस में अब पड़ताल तेज हो गई है और CBI लगातार बड़े लेवल पर
एक्शन ले रही है। आरोप है कि इसमें सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल किया गया
और फर्जीवाड़े के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। इस पूरे केस में
सरकारी
अफसरों, बैंक कर्मचारियों और कुछ कारोबारियों की
मिलीभगत को लेकर संदेह है। इस बीच, हरियाणा सरकार ने इस
केस में 5 IAS अफसरों के कथित रोल की
जांच के लिए CBI को हरी झंडी दे दी है। हालांकि,
अब यह
मालूम करने में भी जांच एजेंसी जुटी है कि सरकारी फंड को किस प्रकार से डायवर्ट
किया गया और किन लोगों को इसका लाभ हुआ। प्रारंभिक जांच में फर्जी दस्तावेजों के
प्रयोग और संदिग्ध फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन के संकेत मिले हैं। CBI
अब
संदिग्ध खातों, ट्रांजेक्शन हिस्ट्री और बैंक रिकॉर्ड्स की
गहराई से जांच कर रही है। इस केस में अब तक 16 लोगों को अरेस्ट किया
जा चुका है और उनसे लगातार पूछताछ हो रही है। CBI का मानना है कि आने
वाले समय में और भी कई खुलासे हो सकते हैं। वहीं, इस एक्शन के बाद
हरियाणा के बैंकिंग और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
NEET-UG 2026 प्रश्नपत्र लीक,तीन सप्ताह पहले ही सर्कुलेशन में…
नीट-UG 2026 पेपर लीक मामले की सीबीआई जांच कर रही है। 6 लोगों को पकड़ा जा चुका है,कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रश्नपत्र
लीक होने के बाद इसकी पहली डील महाराष्ट्र के पुणे में हुई। यहीं से दलालों और
एजेंटों का नेटवर्क सक्रिय हुआ और पेपर को अलग-अलग राज्यों तक पहुंचाने का काम
शुरू किया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार राजस्थान में सबसे पहले यह पेपर सीकर
पहुंचा, जो
मेडिकल कोचिंग का बड़ा हब माना जाता है। आरोप है कि यहां कई छात्रों को परीक्षा से
पहले यही पेपर उपलब्ध कराया गया। कुछ आरोपियों ने इसे हाई लेवल गेस पेपर बताकर
बेचा,जबकि एक
आरोपी ने अपने बेटे को भी परीक्षा से पहले यही सामग्री दी थी। शुरुआती जांच में
सामने आया है कि इस पूरे मामले की शुरुआत महाराष्ट्र के नासिक
स्थित उस प्रिंटिंग
प्रेस से हुई, जहां NEET-UG
2026 के प्रश्नपत्र छापे
जा रहे थे। सूत्रों का दावा है कि शुभम खैरनार नाम का एक व्यक्ति प्रिंटिंग
प्रक्रिया से जुड़ा हुआ था। आरोप है कि उसने अपनी अंदरूनी पहुंच का फायदा
उठाकर प्रश्नपत्र की कॉपी बाहर निकाली और यहीं से लीक नेटवर्क सक्रिय हो गया। जांच में सामने आया
है कि आरोपियों ने सीधे तौर पर असली पेपर बेचने के बजाय उसे गेस पेपर का नाम दिया। इसके पीछे मकसद यह
था कि अगर सवाल वायरल भी हों तो छात्र, अभिभावक या कोचिंग संस्थान तुरंत इसे असली पेपर मानकर
शिकायत न करें,लेकिन परीक्षा के
बाद जब मिलान किया गया तो पता चला कि वायरल हुए गेस पेपर में 120
से ज्यादा सवाल हूबहू असली प्रश्नपत्र से
मैच कर रहे थे।
यहीं से पूरे मामले ने बड़ा रूप ले लिया। मामले की गंभीरता को
देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी है। मंगलवार रात सीबीआई की टीम
जयपुर पहुंची, जहां
राजस्थान पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) मुख्यालय में जांच को लेकर समन्वय शुरू किया गया।
सूत्रों के मुताबिक अब जांच एजेंसियां प्रिंटिंग प्रेस, डिजिटल चैट, टेलीग्राम चैनल, दलालों और संदिग्ध छात्रों के पूरे नेटवर्क को
खंगाल रही हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की परत-दर-परत जांच कर रही हैं
और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। बताया
जाता है कि इसके बाद डिजिटल नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। पेपर और उससे जुड़े
सवाल टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए तेजी से फैलाए गए। जांच में सामने आया है कि यह
नेटवर्क राजस्थान, दिल्ली, बिहार, आंध्र प्रदेश समेत करीब 10 राज्यों तक पहुंच चुका था। सबसे चौंकाने वाली बात
यह है कि यह सामग्री परीक्षा से लगभग तीन सप्ताह पहले ही सर्कुलेशन में आ चुकी थी।
डीपफेक वीडियो और AI से बनाए हाई-टेक आधार कार्ड फ्रॉड का पर्दाफाश….
बायोमेट्रिक सुरक्षा को अब AI के जरिए धोखा दिया जा सकता
है। पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे UIDAI की वेबसाइट या mAadhaar
ऐप के जरिए अपने आधार कार्ड
में बायोमेट्रिक डेटा को लॉक रखें। जब भी किसी सेवा के लिए उपयोग करना हो,
तो उसे अस्थायी रूप से
अनलॉक करें। दरअसल,अहमदाबाद साइबर क्राइम
ब्रांच ने एक दिन पहले एक बेहद हाई-टेक आधार कार्ड फ्रॉड का
पर्दाफाश किया है, जिसमें डीपफेक वीडियो और AI-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का
उपयोग करके बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को बायपास किया गया। यह अपनी तरह का पहला बड़ा
मामला है। जालसाजों ने पीड़ित की स्थिर फोटो को AI
टूल्स का उपयोग करके एक
एनिमेटेड वीडियो में बदल दिया, जिसमें आंखों की हरकत भी
थी। इस डीपफेक वीडियो का उपयोग आधार के लाइवनेस डिटेक्शन को
धोखा देने के लिए किया
गया। इन लोगों ने आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और
बायोमेट्रिक डेटा को अवैध रूप से बदल दिया और OTP बायपास किया,
यानी मोबाइल नंबर बदलकर,
उन्होंने बैंक OTP
अपने पास मंगवाए,
जिससे पीड़ित को अलर्ट नहीं
मिला। गिरोह ने कॉमन सर्विस सेंटर -CSC के ऑपरेटरों के साथ मिलकर
काम किया और आधार अपडेट किट का अवैध उपयोग किया। इस तकनीक का उपयोग करके
उन्होंने एक व्यवसायी के नाम पर लोन लिया और बैंक खाते खोले। पुलिस ने 4
लोगों को गिरफ्तार किया है।
कनुभाई परमार, आशीष वनंद, मोहम्मद कैफ पटेल और दीप
गुप्ता। इसके मास्टरमाइंड आशीष वनंद, जो पहले UIDAI
की एक निजी एजेंसी में काम
करता था, को आधार सिस्टम की गहरी जानकारी थी। अहमदाबाद के थलतेज के एक
व्यवसायी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उनका आधार लिंक्ड नंबर बदल दिया गया है और
उन्हें OTP नहीं मिल रहे हैं। फ्रॉड करने वालों ने शिकार
के नाम पर 25,000 रुपये का लोन लिया था। साइबर क्राइम ब्रांच ने
तकनीकी निगरानी और मानवीय इंटेलिजेंस के आधार पर सभी चार आरोपियों को पकड़ा।






























