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- प्रबंधन से लेकर इंजीनियरिंग तक मे बनाए अपना करियर......पेट्रो केमिकल सेक्टर में..
Posted by : achhiduniya
04 April 2016
पेट्रोलियम
पदार्थो की दिनों-दिन बढती उपयोगिता को देखते हुए इस क्षेत्र में करियर की
संभावनाएं भी उतनी ही ज्यादा हैं। पहले इस क्षेत्र में जियॉलॉजिस्ट की काफी मांग
थी,
समय बदलने के साथ मेकैनिकल क्षेत्र के विशेषज्ञों ने इस इंडस्ट्री
में अपनी धाक जमाई। इंडियन ऑइल, भारत पेट्रोलियम, ओएनजीसी जैसी कई बडी कंपनियां पेट्रो प्रोफेशनल्स को शानदार सैलरी पैकेज
पर नौकरियों के ऑफर दे रही हैं। इस क्षेत्र में यूरोप के साथ ही खाडी देशों के भी
दरवाजे खुले हैं। करियर की अनेक संभावनाओं को देखते हुए पेट्रो केमिकल सेक्टर में
प्रबंधन से लेकर इंजीनियरिंग तक के कोर्स शुरू हुए हैं।खास बात यह है कि प्रोफेशनल्स
की मांग हमेशा बनी रहती है। विशिष्ट क्षेत्र होने और प्रोफेशनल्स की मांग के
मुकाबले उपलब्धता कम होने से इस सेक्टर में सैलरी भी काफी आकर्षक दी जाती है।
इस कोर्स के लिए योग्यता 12 वीं की परीक्षा भौतिक विज्ञान, गणित और रसायन विज्ञान से 50 प्रतिशत अंकों से पास करने के बाद आप पेट्रोलियम से जुडे कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। पेट्रोलियम टेक्नॉलॉजी संबंधी एमएससी कोर्स में एडमिशन के लिए जिऑलॉजी (भूगर्भ विज्ञान), पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, केमिकल, मैकेनिकल, पॉलिमर साइंस आदि में ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहिए। पेट्रोलियम से जुडे कोर्स में एडमिशन आमतौर पर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होते हैं। जियोफिजिसिस्ट - इनका काम धरती की आंतरिक और बाहरी संरचना का अध्ययन करना है। इस पद पर काम करने के लिए जिऑलॉजी, फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री का बैकग्राउंड होना चाहिए। ऑइल वेल लॉग एनालिस्ट- इनका काम ऑइल फील्ड्स से नमूने लेना, खुदाई के दौरान विभिन्न मापों का ध्यान रखना और काम पूरा होने पर माप और नमूनों की जांच करना होता है। ऑइल ड्रिलिंग इंजीनियर- इनका काम तेल के कुओं की खुदाई के लिए योजना बनाना होता है। इंजीनियर यह भी कोशिश करते हैं कि यह काम कम से कम खर्च में पूरा किया जा सके।
प्रॉडक्शन इंजीनियर- तेल के कुओं की खुदाई का काम पूरा होने के बाद प्रॉडक्शन इंजीनियर जिम्मेदारी संभालते हैं। ईंधन को सतह तक लाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका क्या है, इसका फैसला प्रॉडक्शन इंजीनियर ही करते हैं।ऑइल रिजरवॉयर इंजीनियर -इंजीनियर रिजरवॉयर प्रेशर निर्धारित करने के लिए जटिल कंप्यूटर मॉडल्स और गणित के फॉर्मूलों का प्रयोग करते हैं। ऑइल फैसिलिटी इंजीनियर- ईंधन के सतह पर आने के बाद इसे अलग करने, प्रोसेसिंग और दूसरी जगहों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ऑइल फैसिलिटी इंजीनियर के कंधों पर होती है। कोर्स:- पेट्रोलियम युनिवर्सिटी ने बीबीए , एमबीए, एमटेक, बीटेक, एमएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। इसके अलावा देश के चुनिंदा संस्थानों ने पेट्रोलियम के क्षेत्र में बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, एमएससी और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। ये सभी कोर्स पेट्रो केमिकल इंजीनियरिंग, पेट्रो टेक्नोलॉजी, गैस इंजीनियरिंग, पेट्रो मार्केटिंग आदि में शुरू किए हैं। स्टडी कोर्स:- पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में छात्र पेट्रोलियम की रिकवरी, डेवलपमेंट और प्रोसेसिंग के बारे में जानते हैं। इसके अलावा ड्रिलिंग, मेकैनिक्स, पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोलियम जैसे विषयों पर छात्रों की पकड बनाई जाती है। पेट्रोलियम इंडस्ट्री को मुख्य तौर पर दो भागों में बांट कर देख सकते हैं- अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम सेक्टर। अप स्ट्रीम सेक्टर में खोज, उत्पादन व तेल और प्राकृतिक गैसों का दोहन कैसे किया जाए , इसकी शिक्षा व ट्रेनिंग दी जाती है। डाउन स्ट्रीम सेक्टर में रिफाइनिंग, मार्केटिंग और वितरण से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है। इंस्टिट्यूट्स:- # राजीव गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली। # लखनऊ युनिवर्सिटी, लखनऊ।# पंडित दीनदयाल उपाध्याय युनिवर्सिटी, गांधीनगर। # इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद। # महाराष्ट्र युनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी, पुणे। इन इंस्टिट्यूट मे ट्रेनिग लेकर आप अपना करियर बना सकते है।
इस कोर्स के लिए योग्यता 12 वीं की परीक्षा भौतिक विज्ञान, गणित और रसायन विज्ञान से 50 प्रतिशत अंकों से पास करने के बाद आप पेट्रोलियम से जुडे कोर्स के लिए आवेदन कर सकते हैं। पेट्रोलियम टेक्नॉलॉजी संबंधी एमएससी कोर्स में एडमिशन के लिए जिऑलॉजी (भूगर्भ विज्ञान), पेट्रोलियम, पेट्रोकेमिकल, केमिकल, मैकेनिकल, पॉलिमर साइंस आदि में ग्रेजुएशन डिग्री होनी चाहिए। पेट्रोलियम से जुडे कोर्स में एडमिशन आमतौर पर लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के आधार पर होते हैं। जियोफिजिसिस्ट - इनका काम धरती की आंतरिक और बाहरी संरचना का अध्ययन करना है। इस पद पर काम करने के लिए जिऑलॉजी, फिजिक्स, मैथ्स और केमिस्ट्री का बैकग्राउंड होना चाहिए। ऑइल वेल लॉग एनालिस्ट- इनका काम ऑइल फील्ड्स से नमूने लेना, खुदाई के दौरान विभिन्न मापों का ध्यान रखना और काम पूरा होने पर माप और नमूनों की जांच करना होता है। ऑइल ड्रिलिंग इंजीनियर- इनका काम तेल के कुओं की खुदाई के लिए योजना बनाना होता है। इंजीनियर यह भी कोशिश करते हैं कि यह काम कम से कम खर्च में पूरा किया जा सके।
प्रॉडक्शन इंजीनियर- तेल के कुओं की खुदाई का काम पूरा होने के बाद प्रॉडक्शन इंजीनियर जिम्मेदारी संभालते हैं। ईंधन को सतह तक लाने का सर्वश्रेष्ठ तरीका क्या है, इसका फैसला प्रॉडक्शन इंजीनियर ही करते हैं।ऑइल रिजरवॉयर इंजीनियर -इंजीनियर रिजरवॉयर प्रेशर निर्धारित करने के लिए जटिल कंप्यूटर मॉडल्स और गणित के फॉर्मूलों का प्रयोग करते हैं। ऑइल फैसिलिटी इंजीनियर- ईंधन के सतह पर आने के बाद इसे अलग करने, प्रोसेसिंग और दूसरी जगहों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ऑइल फैसिलिटी इंजीनियर के कंधों पर होती है। कोर्स:- पेट्रोलियम युनिवर्सिटी ने बीबीए , एमबीए, एमटेक, बीटेक, एमएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। इसके अलावा देश के चुनिंदा संस्थानों ने पेट्रोलियम के क्षेत्र में बीई, बीटेक, एमई, एमटेक, एमएससी और बीएससी जैसे कोर्स शुरू किए हैं। ये सभी कोर्स पेट्रो केमिकल इंजीनियरिंग, पेट्रो टेक्नोलॉजी, गैस इंजीनियरिंग, पेट्रो मार्केटिंग आदि में शुरू किए हैं। स्टडी कोर्स:- पेट्रोलियम इंजीनियरिंग में छात्र पेट्रोलियम की रिकवरी, डेवलपमेंट और प्रोसेसिंग के बारे में जानते हैं। इसके अलावा ड्रिलिंग, मेकैनिक्स, पर्यावरण संरक्षण और पेट्रोलियम जैसे विषयों पर छात्रों की पकड बनाई जाती है। पेट्रोलियम इंडस्ट्री को मुख्य तौर पर दो भागों में बांट कर देख सकते हैं- अप स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम सेक्टर। अप स्ट्रीम सेक्टर में खोज, उत्पादन व तेल और प्राकृतिक गैसों का दोहन कैसे किया जाए , इसकी शिक्षा व ट्रेनिंग दी जाती है। डाउन स्ट्रीम सेक्टर में रिफाइनिंग, मार्केटिंग और वितरण से संबंधित पूरी जानकारी दी जाती है। इंस्टिट्यूट्स:- # राजीव गांधी इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी, रायबरेली। # लखनऊ युनिवर्सिटी, लखनऊ।# पंडित दीनदयाल उपाध्याय युनिवर्सिटी, गांधीनगर। # इंडियन स्कूल ऑफ माइंस धनबाद। # महाराष्ट्र युनिवर्सिटी ऑफ टेक्नॉलजी, पुणे। इन इंस्टिट्यूट मे ट्रेनिग लेकर आप अपना करियर बना सकते है।


