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- जाने विवादित भारतीय कानून के बारे मे....?
Posted by : achhiduniya
26 January 2018
भारत देश के एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के
बाद देश में कानून व्यवस्था और लौकतांत्रिक राज की स्थापना करने के लिए 29 नवम्बर 1949 को डॉ भीमराव अम्बेडकर की अध्यक्षता में भारतीय संविधान सभा ने दुनिया के
सबसे बड़ें संविधान की निर्माण किया। इसे पूर्णतया 26 जनवरी 1950
को एक लोकतांत्रिक सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था। आज देश 69वां गणतंत्र दिवस मना रहा है और ये एक गौरवशाली इतिहास ही है, जिसने विविधता में एकता वाले इस देश को एक संविधान के धागे में पिरोयां
हुआ है। आज भी इन संविधान की कुछ विवादित धाराओं की वजह से हम समय विवाद और बवाल
खड़ा हो जाता है। ये विवादित कानून देश में एक मधुमक्खी के छत्ते समान बन चुके है
और हर समय कुछ ना कुछ कारणो से विवादो में बने रहते है। आज भी देश को इन विवादित
कानून और धाराओं में बदलाव और समीक्षा करने की जरूरत है और कुछ सुधार होना बहुत
आवश्यक है।
भूमि अधिग्रहण मोटे मोटे शब्दों में कहें तो यह कानून सरकार को किसानों से जमीन लेने का अधिकार देता है, 1894 में बनाए गए इस कानून में 2014 में कुछ सुधार हुए थे, लेकिन सरकार का जमीन लेने का अधिकार बना हुआ है, हालांकि नया कानून किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण की इजाजत नहीं देता। लेकिन फिर भी कई ऐसे राजनीतिक और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोग इस कानून में और बदलाव चाहते हैं। यही इस कानून के विवादों का कारण बना हुआ है। देश में कई ऐसे छोटे-बड़ें कानून और धाराएं है जिन पर अभी भी काफी संशोधन होना अनिवार्य है और इस धाराओं और कानून में भी सुधार की मांग समय-समय पर तेज होती रही है जिसके कारण भी देश में इन विवादित कानूनो को लेकर कई प्रकार के विरोध, अनशन आदि होते रहें है। 69 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर शायद देश में ऐसे विवादित कानूनो में कुछ बदलाव लाने की देश और देश की जनता कामना करती है जिससे देश में एक बार फिर से शांति कायम हो सके।
भूमि अधिग्रहण मोटे मोटे शब्दों में कहें तो यह कानून सरकार को किसानों से जमीन लेने का अधिकार देता है, 1894 में बनाए गए इस कानून में 2014 में कुछ सुधार हुए थे, लेकिन सरकार का जमीन लेने का अधिकार बना हुआ है, हालांकि नया कानून किसानों की जमीन के जबरन अधिग्रहण की इजाजत नहीं देता। लेकिन फिर भी कई ऐसे राजनीतिक और किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले लोग इस कानून में और बदलाव चाहते हैं। यही इस कानून के विवादों का कारण बना हुआ है। देश में कई ऐसे छोटे-बड़ें कानून और धाराएं है जिन पर अभी भी काफी संशोधन होना अनिवार्य है और इस धाराओं और कानून में भी सुधार की मांग समय-समय पर तेज होती रही है जिसके कारण भी देश में इन विवादित कानूनो को लेकर कई प्रकार के विरोध, अनशन आदि होते रहें है। 69 वें गणतंत्र दिवस के मौके पर शायद देश में ऐसे विवादित कानूनो में कुछ बदलाव लाने की देश और देश की जनता कामना करती है जिससे देश में एक बार फिर से शांति कायम हो सके।

