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- दवाई खाते ही डॉक्टर को मोबाइल पर मिलेगा मैसेज....
Posted by : achhiduniya
02 January 2018
अमेरिकी खाद्य और औषधि प्रशासन के अमेरिकी नियामक ने
डिजिटल ट्रैकिंग उपकरण से युक्त एक ऐसे टैबलेट को मंजूरी दे दी है जिसकी मदद से
डॉक्टर यह निगरानी कर सकेंगे कि मरीज वक्त पर दवाएं ले रहा है या नहीं। खाद्य और
औषधि प्रशासन के अनुसार, एबिलिफाई
माईसाइट नामक इस टैबलेट को खास तौर से शिजोफ्रेनिया,
बायपोलर डिसआर्डर और अवसाद से ग्रस्त मरीजों के लिए तैयार किया गया
है। मरीज द्वारा गोली को निगले जाने के बाद पेट के एंजाइम के संपर्क में आकर यह
टैबलेट सक्रिय हो जाएगा और दवाओं से जुड़ा संदेश भेजता
रहेगा। टैबलेट यह संदेश एक पैच पर भेजेगा, जहां से वह मोबाइल
फोन पर जाएगा।
मरीज के डॉक्टर, परिवार और रिश्तेदारों को इसकी पूरी जानकारी एक वेब पोर्टल के जरिए मिला करेगी। इससे सभी के लिए मरीज की निगरानी करना आसान हो जाएगा। आपको बता दें कि इसका सेंसर अनाज से ही बना है। इसका साइज बालू के कण के बराबर है। जैसे ही यह लिक्विड के संपर्क में आता है, सेंसर एक्टिविट हो जाता है। काम करने के बाद सेंसर का अवशेष इंसान के शरीर से बाहर आ जाता है। इस सेंसर की खास बात ये है कि यह डेट और टाइम रिकॉर्ड करता है।
इसके साथ-साथ यह पेशेंट की एक्टिविटी भी नोट करता है। अगर पेशेंट इजाजत देता है तो MyCite App के जरिए उसके मूड से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड की जा सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस दवा के सही उपयोग से काफी फायदा हो सकता है। एफडीए का कहना है कि दिमागी बीमारी से पीड़ित मरीजों को दवाई देने के संबंध में यह बेहतर साबित हो सकता है।
मरीज के डॉक्टर, परिवार और रिश्तेदारों को इसकी पूरी जानकारी एक वेब पोर्टल के जरिए मिला करेगी। इससे सभी के लिए मरीज की निगरानी करना आसान हो जाएगा। आपको बता दें कि इसका सेंसर अनाज से ही बना है। इसका साइज बालू के कण के बराबर है। जैसे ही यह लिक्विड के संपर्क में आता है, सेंसर एक्टिविट हो जाता है। काम करने के बाद सेंसर का अवशेष इंसान के शरीर से बाहर आ जाता है। इस सेंसर की खास बात ये है कि यह डेट और टाइम रिकॉर्ड करता है।
इसके साथ-साथ यह पेशेंट की एक्टिविटी भी नोट करता है। अगर पेशेंट इजाजत देता है तो MyCite App के जरिए उसके मूड से जुड़ी जानकारी भी रिकॉर्ड की जा सकती है। एक्सपर्ट का कहना है कि इस दवा के सही उपयोग से काफी फायदा हो सकता है। एफडीए का कहना है कि दिमागी बीमारी से पीड़ित मरीजों को दवाई देने के संबंध में यह बेहतर साबित हो सकता है।


