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- बेबस लाचार बेचारा पुरुष....
Posted by : achhiduniya
08 February 2018
एक ही गीत में पूरी जिंदगी का सार देखिये। नयनो में सपना *(उम्र 5 से 15)* सपनों में सजनी *(उम्र 15 से 25)* सजनी पे दिल आ गया *(उम्र 25 से 35)* क्यूं सजनी पे दिल आ गया *(उम्र 35 से 40)* बाकी पूरी उम्र : *ता थैया ता थैया..ओ..* बीवी
पर हाथ उठाये तो "बेशर्म चुप रहे तो "डरपोक" घर से बाहर रहे तो "आवारा" घर में रहे तो "नाकारा" बच्चों को डांटे तो"ज़ालिम" ना
डांटे तो "लापरवाह" बीवी को नौकरी करने से
रोके तो "शक्की" बीवी को नौकरी करने दे तो
बीवी की "कमाई खाने वाला" माँ की माने तो"चम्मचा" बीवी की माने तो "जोरु का गुलाम" पूरी
ज़िंदगी समझौता, त्याग और संघर्ष में बिताने के बावजुद वह
अपने लिये कुछ नहीं चाहता इसलिये हर एक पुरुष की हमेशा
इज़्ज़त करें कयोकि हर एक पुरुष मै बेटा, भाई पति, दामाद, पिता हो सकता है, जिसका
जीवन हमेशा मुश्किलों से भरा हुआ है
