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- हम एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी बेकसूर को सजा नहीं मिलनी चाहिए.....सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
03 April 2018
सुप्रीम कोर्ट मे केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर मंगलवार दोपहर सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की दलीलों को सुनते सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'हम एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन किसी बेकसूर को सजा नहीं मिलनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को आदेश दिया था कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अधिनियम के अंतर्गत आरोपी को तत्काल गिरफ्तार करना जरूरी नहीं होगा। प्राथमिक जांच और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चलते एससी/एसटी एक्ट पर शीर्ष अदालत के पूर्व के फैसले के चलते जैसे देश में इमरजेंसी जैसे हालात हैं। हजारों लोग सड़क पर हैं। लिहाजा इस आदेश पर फिलहाल रोक लगाई जाए।
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि सरकार पूरी क्षमता के साथ सर्वोच्च न्यायालय में इस मुद्दे पर बहस करेगी। उन्होंने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के लिए कांग्रेस पर हमला किया। केंद्र ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से एससी/एसटी कानून पर दिए गए अपने हालिया फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया। सरकार का कहना है कि शीर्ष न्यायालय के फैसले से इस समुदाय के संवैधानिक अधिकारों का हनन होगा। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति/जनजाति अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के फैसले में कोई पक्षकार नहीं है और वह इस फैसले के पीछे दिए गए तर्क से 'ससम्मान' असहमत है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस मामले पर एक समग्र पुनर्विचार याचिका भी दायर की है।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार हमेशा से उपेक्षित वर्ग के समर्थन में रही है और भाजपा ने ही देश को दलित राष्ट्रपति दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम को कथित रूप से कमजोर करने वाले अपने हालिया फैसले पर मंगलवार को रोक लगाने से इंकार कर दिया। अदालत ने इस मामले में सभी संबंधित पक्षों से 3 दिन में राय मांगी है। इसके साथ ही मामले की अगली सुनवाई 10 दिन बाद तय की गई है। अदालत ने इस केस में केंद्र की याचिका स्वीकार कर ली।


