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- “सर्जरी गोंद” बिना टांके और स्टेपल के ही घांवों को 1 मिनट में सील करने में सक्षम…..
Posted by : achhiduniya
17 August 2018
वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपने नए अध्ययन में अत्यधिक लचीला और चिपकने वाला सर्जरी गोंद विकसित किया है,जो कि बिना टांके और स्टेपल के ही घांवों को 60 सेकेंड में सील करने में सक्षम है। शोधकर्ताओं की अंतरराष्ट्रीय टीम ने इस जीवन-रक्षक सर्जरी गोंद को विकसित किया हैजिसे मीट्रो नाम दिया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक गोंद का अत्यधिक लचीला होना ही घावों को सील करने में ज्यादा मददगार बनाया है जो कि लगातार फैलते हैं जैसे कि फेफड़े, हृदय और धमनियां आदि, इनके दोबारा खुलने का खतरा बना रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह सर्जिकल गोंद शरीर के अंदर के घावों पर भी काम कर सकता है, जहां कि डॉक्टरों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। शोधकर्ता टीम मेंबर और हावर्ड मेडिकल स्कूल के अली खदेहोशईन ने कहा है कि अगले कुछ सालों में यह साफ हो जाएगा कि इस जेल का उपयोग कैसे किया जाए।
इस जेल का परीक्षण अभी तक केवल जानवरों पर ही किया गया है, मनुष्यों पर नहीं। शोधकर्ताओं ने उम्मदी जताई है कि जल्दी ही इसका यूज क्लीनिक में शुरू हो जाएगा। बोस्टन में पूर्वोत्तर विश्वविद्यालय के और अध्ययन के प्रमुख नसीम अन्नबी के मुताबिक मीट्रो की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये जैसे ही घाव के सतह के संपर्क में आएगा यह जेल की तरह उस स्थान को ठोस बना देता है। रिसर्चर ने कहा है कि मीट्रो यूवी लाइट के साथ केवल 60 सेकेंड में घाव को जोड़ सकता है। शोधकर्ताओं ने कहा कि फिलहाल यह प्रौद्योगिकी के लिए अपमाजनक एंजाइम है लेकिन इसे संशोधित किया जा सकता है जिससे की यह पता चल सके कि यह घावों को कब तक सील करके रखता है। घंटे भर के लिए या फिर महीनों तक या फिर पर्याप्त समय तक घावों को ठीक करने के लिए।
दूसरी खबर:-
लिव्हर यानि यक्र्त पर “ए टू झेड ऑफ लिव्हर ट्रांसप्लांट” परिचर्चा का आयोजन....
नागपुर:- ऍकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस नागपुर की तरफ से 19 अगस्त 2018 सुबह 9:00 बजे से सेंटर पॉइंट हॉटल रामदासपेट नागपुर मे “ए टू झेड ऑफ लिव्हर ट्रांसप्लांट” परिचर्चा का आयोजन किया गया है। आम जनता के लिए दोपहर 3:00 बजे परिचर्चा का आयोजन किया गया है। जिसके माघ्यम से आम नागरिकों को लिव्हर यानि यक्र्त के प्रत्यारोपन की विस्तृत जानकारी देकर लोगो के बीच फैली भ्रांतियों को दूर कर उन्हे इसके बारे मे पूरी तरह से समझाने का प्रयास किया जाएगा। पहले इस प्रकार का प्रत्यारोपन दिल्ली और मुंबई जैसे मेट्रो सिटी मे ही संभव था,लेकिन अब यह नागपुर मे भी संभव है इसकी जानकारी पत्र परिषद के माघ्यम से ऍकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस के अध्यक्ष डॉ हरीश वरभे ने दी।
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| [ऍकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस के अध्यक्ष डॉ हरीश वरभे] |
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| [ऍकेडमी ऑफ मेडिकल साइंस के सह सचिव डॉ प्रशांत रहाटे] |




