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- सिर्फ 2,500 रुपये के सॉफ्टवेयर से हैक किया जा सकता है आधार का डाटा....जाने सच्चाई....
Posted by : achhiduniya
11 September 2018
हफ़पोस्ट डॉट इन ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक किया जा चुका है और भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी दांव पर लगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर एक लूपहोल (गड़बड़ी) है जिसकी मदद से एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है। इस सॉफ्टवेयर की कीमत सिर्फ 2,500 रुपये है। हफ़पोस्ट डॉट इन का दावा कि उसने तीन महीने की जांच के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में दुनियाभर के 5 एक्सपर्ट की मदद ली गई है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अभी भी इस सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल इस सॉफ्टवेयर की मदद से आधार की सिक्योरिटी फीचर को बंद किया जा सकता है और नया आधार तैयार किया जा सकता है। आधार कार्ड हैक करने वाला यह सॉफ्टवेयर 2,500 रुपये में व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है। साथ ही यूट्यूब पर भी कई वीडियो मौजूद हैं जिनमें एक कोड के जरिए किसी के भी आधार कार्ड से छेड़छाड़ हो सकती है और नया आधार कार्ड बनाया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान द्वारा आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर के हैकिंग के दावों का खंडन करते हुए आधार कार्ड बनाने वाली संस्था UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने कहा है कि कोई ऑपरेटर आधार कार्ड में बदलाव नहीं कर सकता जब तक कि कार्ड धारक खुद ही उसे अपना बॉयोमेट्रिक डेटा न दे। UIDAI की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि बॉयोमेट्रिक सूचना से पुष्टि किये जाने के बाद ही उसके आधार कार्ड में बदलाव किया जा सकता है या आधार कार्ड की दूसरी प्रति बनायी जा सकती है। UIDAI (यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया) ने आधार पंजीकरण सॉफ्टवेयर के हैक किये जा सकने के दावों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। हफ़पोस्ट के अनुसार ये साफ़्टवेयर कई कोडों का संग्रह है जो सॉफ्टवेयर प्रोग्राम में बदलाव कर देता है। सॉफ्टवेयर कंपनियां ऐसे पैचेज का इस्तेमाल अपने सॉफ्टवेयर में मामूली बदलाव करने के लिए करती हैं। लेकिन कई बार ऐसे पैचेज का इस्तेमाल हैकर दूसरे के सिस्टम को नुकसान पहुँचाने के लिए भी करते हैं।
हफ़पोस्ट इंडिया के अनुसार ये सॉफ्टवेयर पैच उनके पास मौजूद है और उसने तीन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को और दो भारतीय विश्लेषकों से इसका विश्लेषण कराया है। इस पैच की मदद से हैकर आधार कार्ड के सिक्योरिटी फीच़र्स को धोखा दे देते हैं। इस पैच की मदद से हैकरों ने बॉयोमेट्रिक अथेंटिकेशन के सुरक्षा कवच को भेदकर यूनिक आधार संख्या बना लेते हैं। इस पैच की मदद से आधार पंजीकरण केंद्रों को चिह्नित करने वाले जीपीएस सिक्योरिटी फीचर्स को डिसेबल भी किया जा सकता है। यानी दुनिया के किसी भी देश से बैठकर भारतीय आधार संख्या तैयार की जा सकती है। अभी तक भारत सरकार की तरफ से इस हैकिंग की न्यूज पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आयी है।


