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- चीन के राष्ट्रपति ने मुसलमानो पर बनाई नई नीति......
Posted by : achhiduniya
09 September 2018
चीन के राष्ट्रपति अपने देश के लिए जो कर रहे है, उसे नाकारा नहीं जा सकता। दुनिया भर में मुस्लिम समुदाय जो भी कर रहा है, चीन में नज़ारे कुछ और ही है। चीन में मुस्लिम आबादी 3 करोड़ से अधिक है, अधिकतर मुस्लिम मुख्य चीन में नहीं बल्कि चीन के पश्चिमी इलाके में रहते है जो की अरबी देशों से जुड़ा हुआ इलाका है, शिनजियांग प्रान्त में ही अधिकतर मुस्लिम रहते है और जब से जिनपिंग चीन के राष्ट्रपति बने है तभी से मुसलमानो के लिए चीन में रहना मुश्किल हो गया है, जिनपिंग ने राष्ट्रपति बनते ही एक खास तरह का मिशन शुरू कर दिया। 16 साल से कम उम्र के बच्चे को मोहम्मद, कुरान, इस्लाम के बारे में बताना और सिखाना बैन है, यहाँ तक की मोहम्मद नाम पर भी बैन लगाया है।
बच्चों को कुरान की शिक्षा नहीं दी जा सकती, मुसलमानो को अपनी दुकान में सुवर का मांस और शराब बेचना ही होगा। हर मस्जिद पर चीनी झंडा, और मस्जिद के लाउड स्पीकर पर पूर्णतः प्रतिबन्ध। रमजान पर रोक, खुले में इस्लाम की बात करने पर रोक, हर तरह के पब्लिक कार्यक्रम बैन, मस्जिदों को तोड़कर अन्य चीजे बनाना। मुसलमानो को पकड़कर स्पेशल तरह के जेल में बंद करना और उन्हें सुवर का मांस और शराब पिलाना शव को दफ़न करने पर रोक, हर तरह के शव का अंतिम संस्कार सिर्फ जलाकर किया जाना। इस्लामिक त्योहारों को सार्वजानिक स्थान पर मानाने पर रोक और तो और अब जिनपिंग ने मुस्लिम बहुल इलाकों में स्पेशल पुलिस भी नियुक्त कर दी है जो मुस्लिम महिलाओं को पकड़कर कैंची से उनके कपडे काटती है, इसके अलावा जिनपिंग ने सुरक्षा एजेंसियों को मुसलमानो की हर हरकत पर नजर रखने का नया आदेश भी दे दिया है।
मुसलमान क्या कर रहा है, क्यों कर रहा है इसकी जानकारी पुलिस को देनी होगी, जिनपिंग लगातार मुसलमानो पर सख्ती बढ़ाते ही जा रहे है और स्तिथि तो ये है की लाखों की संख्या में मुसलमानो ने डर के कारण चीन से तुर्की और अन्य अरबी देशों में पलायन भी किया है। इतना ही नहीं कुछ सैंकड़ो चीनी मुसलमान तो भागकर भारत के कश्मीर में भी आये है, इनका कहना है की अगर ये चीन में रहे तो चीन मुसलमान नहीं रहने देगा। जिस तरह जिनपिंग मुसलमानो को रमजान नहीं मानाने दे रहे, उनको कुरआन नहीं पढ़ने दे रहे, ऐसे में कहा जा सकता है की आने वाले कुछ वर्षों में चीन में मुसलमान नहीं होंगे, या तो वो पलायन कर जायेंगे, और अगर वहीँ रहे तो न उन्हें कुरान का पता होगा न इस्लाम का, ऐसे में वो मुसलमान तो नहीं ही रहेंगे।
चीन की मुसलमानो पर सख्ती को लेकर दुनिया भर के सेक्युलर संगठन आलोचना भी कर चुके है, पर चीन ने किसी भी आलोचना को भाव नहीं दिया है, अपितु चीन की आलोचना होती है वहां चीन कोई और नियम बनाकर जवाब दे देता है। चीन का कहना है की अपने देश की भलाई के नियम कानून बनाने का हक़ सिर्फ उसे है, और वो अपनी मर्जी से अपने देश में जैसे चाहे वैसे कानून बनाएगा।



