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भोपाल से कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को राजनीत में टक्कर देने वाली बीजेपी की प्रत्याशी कौन है साध्वी प्रज्ञा ठाकुर....?
Posted by : achhiduniya
17 April 2019
हाल ही में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुई साध्वी प्रज्ञा
ठाकुर और दिग्विजय का मुकाबला दिलचस्प होने वाला है क्योंकि दिग्विजय 16 साल बाद
चुनाव लड़ने जा रहे हैं। 1993 से 2003 तक लगातार 10 सालों तक मध्य प्रदेश के
मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह 2003 के बाद से अबतक किसी भी लोकसभा या विधानसभा
चुनाव में नहीं लड़े हैं। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और दिग्विजय सिंह को एक दूसरे का
धुर विरोधी माना जाता है। दिग्विजय सिंह कांग्रेस के उन चुनिंदा नेताओं में से एक
हैं, जिन्होंने यूपीए सरकार के दौर में भगवा
आतंकवाद के मुद्दे को जोर-शोर से उठाया।
शायद यही वजह है कि साध्वी प्रज्ञा चुनावी
बिसात पर दिग्विजय सिंह को चुनौती देना चाहती हैं। साध्वी प्रज्ञा मध्य प्रदेश के
चंबल इलाके के भिंड में पली बढ़ीं। उनके पिता आरएसएस के स्वयंसेवक और पेशे से
आयुर्वेदिक डॉक्टर थे। आरएसएस से उनका झुकाव बचपन से ही रहा। साध्वी प्रज्ञा आरएसएस की छात्र इकाई अखिल
भारतीय विद्यार्थी परिषद की सक्रिय सदस्य रहीं। विश्व हिन्दू परिषद की वह महिला
विंग दुर्गा वाहिनी से भी जुड़ीं। 2002 में साध्वी प्रज्ञा ने जय वंदे मातरम जन
कल्याण समिति बनाई।
वहीं, स्वामी अवधेशानंद से प्रभावित होकर
उन्होंने संन्यास ले लिया। स्वामी अवधेशानंद का राजनीति में काफी नाम था, इनसे जुड़ने के बाद साध्वी प्रज्ञा भी राजनीति
में आईं। साध्वी प्रज्ञा की जिंदगी तब एकदम बदल गई जब उनका नाम मालेगांव ब्लास्ट
में सामने आया। उन्हें बम ब्लास्ट में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया
गया। साध्वी के अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को भी इस मामले
में गिरफ्तार किया गया था। साध्वी
प्रज्ञा 2007 के आरएसएस प्रचारक सुनील जोशी हत्याकांड में भी आरोपी थीं, लेकिन कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर
दिया।
हिस्ट्री में पोस्ट ग्रैजुएट प्रज्ञा का शुरुआत से ही राष्ट्रवादी संगठनों
की तरफ रुझान था। साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पहली बार तब चर्चा में आईं, जब 2008 के मालेगांव ब्लास्ट केस में उन्हें
गिरफ्तार किया गया। वह 9 सालों तक जेल में रहीं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं।
जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें लगातार 23 दिनों तक यातना दी
गई थी।



