- Back to Home »
- Knowledge / Science »
- हार्ट अटैक आने पर 14430 नंबर डायल करने से फर्स्ट रिस्पांसर एम्स के ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स टिम इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने पहुँचेंगी आपके घर....
हार्ट अटैक आने पर 14430 नंबर डायल करने से फर्स्ट रिस्पांसर एम्स के ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स टिम इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने पहुँचेंगी आपके घर....
Posted by : achhiduniya
10 May 2019
ICMR
की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर दूसरे हार्ट अटैक के मरीज को अस्पताल पहुंचने में
400 मिनट लगते हैं, जो कि ज़्यादा से ज़्यादा 30 मिनट होना चाहिए. 180
मिनट के बाद दिल की मांसपेशियों में नुकसान इतना हो जाता है कि उसे बचाया नही जा
सकता। समय पर क्लॉट बस्टर दवाई न दिए जाने पर मरीज को बचाना बहुत मुश्किल है।
दिल्ली में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए और हार्ट अटैक की प्रॉब्लम को गंभीरता
को समझते हुए एम्स ने ऐसे मरीजों को बचाने का पूरा इंतजाम किया है। इसको ध्यान में रखते हुए देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स ने खास मिशन दिल्ली की
शुरुआत की है। इसके तहत किसी शख्स को हार्ट अटैक आने पर अब एम्स के ट्रेन्ड प्रोफेशनल्स
बाइक से मरीज के पास पहुंचेंगे।
इसके लिए एम्स ने सर्टिफाइड नर्स की एक टीम तैयार
की है, जो खास तौर पर हार्ट अटैक के मरीजों को इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने
के लिए ट्रेंड किए गए हैं। इन्हें फर्स्ट रिस्पांडर कहते हैं। इस टीम को बुलाने के
लिए 14430 नंबर डायल करना होगा। इस पर कॉल करके हार्ट अटैक के मरीज या उनके परिवार
का कोई सदस्य फर्स्ट रिस्पांसर को बुला सकता है। ये प्रोजेक्ट एम्स के 3 किमी के
रेडियस में इमरजेंसी सेवा दे सकता है। इसका एक कारण ये भी है कि हार्ट अटैक के केस
में 10 मिनट के अंदर ही मरीज तक पहुंचना होता है। 3 किमी से ज़्यादा की दूरी पर 10
मिनट तक पहुंचना मुश्किल है। अगर ये
प्रोजेक्ट कामयाब होता है तो और भी इलाकों में इसे चलाने की कोशिश की जाएगी। इस मिशन के लिए 24 घंटे 2 लोग कॉल्स लेने के लिए
मौजूद रहते हैं।
जैसे ही किसी की कॉल आती है। यहां बैठे ऑपरेटर पेशेंट की डिटेल्स
लेते हैं। उनकी लोकेशन वेरीफाई करते ही 2 फर्स्ट रेपोंडर्स इमरजेंसी किट के साथ
बिना वक़्त गंवाए बाइक पर सवार होकर निकल जाते हैं। ऑन कॉल ऑपरेटर्स यहां लगे
सिस्टम में जीपीएस की मदद से फर्स्ट रिस्पांडर की लोकेशन ट्रेस करते रहते हैं। इसके साथ ही एक कैट्स एम्बुलेंस मरीज के लोकेशन
के लिए रवाना कर दी जाती है।ऑन कॉल नर्स नीतीश भसीन ने बताया कि कॉल आते ही हम
पेशेंट की डिटेल्स लेते हैं जैसे नाम, पता, क्या तकलीफ है। ये डिटेल्स सिस्टम में डालकर फर्स्ट रेस्पांडर्स
को एड्रेस दे दिया जाता है और वो वहां के लिए निकल जाते हैं। मरीज के पास पहुंचते ही ये पैरामेडिक
नर्स पेशेंट का इमरजेंसी ट्रीटमेंट करते हैं और ईसीजी करते हैं।
इस दौरान ये नर्स
लगातार हॉस्पिटल में मौजूद डॉक्टर के संपर्क में रहते हैं। इसके लिए इन्हें खास
तौर पर एक टेबलेट दी गई है। इसमें एम्स की ऐप के जरिये मरीज की बेसिक जानकारी
डॉक्टर्स के पास पहुंच जाती है। अगर मरीज की ईसीजी रिपोर्ट नॉर्मल है तो उनको
बेसिक ट्रीटमेंट दे दिया जाता है और अगर कंडीशन ज़्यादा क्रिटिकल है तो कैट एम्बुलेंस
से अस्पताल ले जाया जाता है। इस फर्स्ट रिस्पांस टीम के पास क्लॉट बस्टर दवाई भी
होती है, जिसकी कीमत बाजार में 3000 रुपये से ज़्यादा है, लेकिन इस मिशन में ज़रूरत पड़ने पर मरीज को ये फ्री में दी जाती
है।



