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- चंद्रयान-2 मिशन की कमान महिलाओं के हाथ..
Posted by : achhiduniya
14 July 2019
यह भारत का दूसरा चांद मिशन है। इससे पहले 2008 में चंद्रयान-1 को
भेजा गया था। जियोसिंक्रोनस लॉन्च व्हीकल यानी जीएसएलवी मार्क 3 एम1 जैसे ही आकाश की ओर बढ़ेगा
भारत और इतिहास रचने के काफी नजदीक होगा। जीएसएलवी भारत में अब तक बना सबसे
शक्तिशाली रॉकेट है इसीलिए इसे बाहुबली रॉकेट भी कहा जाता है।
रितु करिधाल इससे पहले भी कई मिशन में अपनी अहम भूमिका निभा चुकी है। यहां तक कि मंगलयान मिशन में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। जिसमें वे ऑपरेशन्स की डेप्युटी डायरेक्टर थी। इन्हें रॉकेट वुमन कहा जाता है। एयरोस्पेस इंजीनियर के तौर पर उन्होंने अपना कैरियर इसरो में 1997 में शुरू किया था। उन्हें यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड और मंगल मिशन के लिए भी अवॉर्ड से नवाजा गया। मुथैया वनिता जो कि चंद्रयान 2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर है, वह इसरो के इतिहास में पहली प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनी। वनिता डेटा हैंडलिंग में पूरी तरह सक्षम है।
यह रॉकेट चंद्रयान-2 को चंद्रमा की कक्षा तक ले जाएगा। इस मिशन की सबसे खास बात यह
भी है कि इसरो के इतिहास में यह पहली बार होगा जब किसी मिशन की कमान पूरी तरह
महिलाओं के हाथ में है। साथ ही इस पूरे मिशन में 30% महिलाएं हैं। इस पूरे प्रोजेक्ट की डायरेक्टर का नाम मुथैया
वनिता है। उनके कंधों पर मिशन की शुरुआत से लेकर आखिर तक का जिम्मा है। उनके अलावा
मिशन डायरेक्टर रितु करिधाल श्रीवास्तव हैं। वनिता और रितु दोनो ही 20 सालों से इसरो में काम कर रही है।
रितु करिधाल इससे पहले भी कई मिशन में अपनी अहम भूमिका निभा चुकी है। यहां तक कि मंगलयान मिशन में भी उन्होंने बड़ी भूमिका निभाई थी। जिसमें वे ऑपरेशन्स की डेप्युटी डायरेक्टर थी। इन्हें रॉकेट वुमन कहा जाता है। एयरोस्पेस इंजीनियर के तौर पर उन्होंने अपना कैरियर इसरो में 1997 में शुरू किया था। उन्हें यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड और मंगल मिशन के लिए भी अवॉर्ड से नवाजा गया। मुथैया वनिता जो कि चंद्रयान 2 की प्रोजेक्ट डायरेक्टर है, वह इसरो के इतिहास में पहली प्रोजेक्ट डायरेक्टर बनी। वनिता डेटा हैंडलिंग में पूरी तरह सक्षम है।
इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम इंजीनियर हैं। वह डिजिटल सिग्नल प्रोसेसिंग में
माहिर हैं और उन्होंने उपग्रह संचार पर कई पेपर लिखे हैं। उन्होंने मैपिंग के लिए
इस्तेमाल होने वाले पहले भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रह (कार्टोसैट 1), दूसरे महासागर अनुप्रयोग उपग्रह (ओशनसैट 2) और तीसरे उष्णकटिबंधीय में जल चक्र और ऊर्जा विनिमय का अध्ययन
करने के लिए इंडो-फ्रेंच उपग्रह (मेघा-ट्रॉपिक) पर उप परियोजना निदेशक के तौर पर
काम किया है। 2006 में उन्हें एस्ट्रॉनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया ने
सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक पुरस्कार से सम्मानित किया था।
साइंस जर्नल नेचर ने
उनका नाम उन पांच वैज्ञानिकों की श्रेणी में रखा था जिन पर 2019 में नजर रहेगी। इसरो का कहना है कि महिलाओं ने इससे पहले भी
विभिन्न उपग्रह प्रक्षेपणों का नेतृत्व किया है,लेकिन
यह पहली बार है जब इतने बड़े मिशन की डायरेक्टर और प्रोजेक्ट डायरेक्टर दोनो ही
महिलाएं हैं। वनिता को पिछले साल नियुक्त किया गया है। अधिक से अधिक महिलाओं को
नेतृत्व की भूमिकाएं लेते देखना अच्छा है और यह इसरो के भविष्य के मिशन में भी
जारी रहेगा।




