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- कैब में कॉन्डम न रखने पर हुआ चालान....ड्राइवर धर्मेंद्र ने बताई आप बीती
Posted by : achhiduniya
20 September 2019
दिल्ली में बड़ी संख्या में ऐसे कैब ड्राइवर हैं, जो फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम रखकर चलते हैं। उनका मानना है कि
यदि वह ऐसा नहीं करते हैं तो इसके लिए भी उनका चालान कट सकता है। दिल्ली की
सर्वोदय ड्राइवर असोसिएशन के प्रेजिडेंट कमलजीत गिल ने बताया, सभी सार्वजनिक वाहनों के लिए हर समय कम से कम तीन कॉन्डम लेकर
चलना जरूरी है। जेएनयू से नेल्सन मंडेला मार्ग पर मुड़ते ही कैब ड्राइवर धर्मेंद्र
को ट्रैफिक पुलिस रोकती है। धर्मेंद्र ने सीट बेल्ट लगा रखी है और अपनी नीली वर्दी
भी पहनी है। पूछताछ में बताते हैं कि मेरे पास तो फर्स्ट ऐड बॉक्स में कॉन्डम भी
रखे हुए हैं।
वह बॉक्स खोलकर दिखाते हैं, जिसमें
डिटॉल, पैरासिटामॉल टैबलेट्स, बैंडेज
और कॉन्डम रखे थे। धर्मेंद्र बताते हैं कि हाल ही में उनका चालान कॉन्डम न रखने के
लिए भी हुआ था, तब से वह काफी सतर्क रहते हैं। हालांकि उन्हें
चालान की जो रसीद दी गई थी, वह ओवरस्पीड के लिए थी। ड्रावइरों
को यह आइडिया नहीं है कि आखिर इनका इस्तेमाल क्या है। हालांकि खुद कमलजीत गिल
बताते हैं कि इसका इस्तेमाल किसी की हड्डी में चोट आने या फिर कट लगने पर किया जा
सकता है। वह बताते हैं, यदि किसी व्यक्ति को ब्लीडिंग
होने लगती है तो कॉन्डम के जरिए इसे रोका जा सकता है।
इसी तरह फ्रैक्चर होने की
स्थिति में उस जगह पर अस्पताल पहुंचने तक कॉन्डम बांधा जा सकता है। कैब ड्राइवर
रमेश कहते हैं कि मैंने सभी से ऐसा सुना है कि कॉन्डम रखना जरूरी है। इसलिए मैं कम
से कम एक तो हमेशा ही रखता हूं। वह कहते हैं कि आज तक ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की ओर
से इस बारे में नहीं पूछा गया। हालांकि फिटनेस टेस्ट के दौरान कई बार पूछा गया है
कि गाड़ी में उनके पास कॉन्डम रखे हैं या नहीं। ट्रैफिक पुलिस के एक अधिकारी ने
बताया कि ऐसा कोई नियम नहीं है। फिटनेस टेस्ट के दौरान भी ऐसी कोई पड़ताल नहीं की
जाती।
यही नहीं पुलिस अधिकारी ने कहा कि यदि कॉन्डम न रखने पर चालान होता है तो
कैब ड्राइवरों को अथॉरिटीज से संपर्क करना चाहिए। उनका कहना था कि कई बार एनजीओ
वर्कर ड्राइवरों को सेफ सेक्स के बारे में बताते हैं। शायद इसी की वजह से वे रखते
हों। दिल्ली मोटर वीइकल रूल्स, 1993 और
सेंट्रल मोटर वीइकल रूल्स, 1989 में भी
इसका कोई जिक्र नहीं है।



