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- क्या पहले से ही फिक्स था पवार पॉलिटिकल गेम....?
Posted by : achhiduniya
23 November 2019
पिछली भाजपा सरकार के दौरान वे जिस तरह के विवादों से घिरे पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजित पवार उससे उन पर भ्रष्टाचार की बड़ी तोहमत का डर बना हुआ था। कहा जा रहा है अजित पवार के अज्ञात भय ने भाजपा का काम आसान कर दिया। पवार को लगा अगर शिवसेना के साथ सरकार बनाई जा सकती है तो भाजपा के साथ सरकार बनाने में कोई विचारधारा का संकट नही है। दूसरा बड़ा पक्ष उनके सामने अपनी भविष्य की राजनीति का था अगर वे किसी भ्रष्टाचार सम्बन्धी भूतकाल से उलझते तो उन्हें शिवसेना के साथ सरकार बनाने के बाद भी मुश्किलों से दो चार होना पड़ सकता था। कुछ जानकार मानते हैं कि उन्हें एजेंसियों के ट्रैप मे उलझने का डर था। जिससे वे शिवसेना के साथ डिप्टी सीएम बन भी जाते तो बाद में इस्तीफा देने का दबाव होता।
दूसरी तरफ एक पक्ष ये भी है कि अजित पवार काफी समय से पार्टी में अपनी पकड़ को लेकर
चिंतित थे। उन्हें ये आशंका थी कि कहीं उनकी कीमत पर शरद पवार की बेटी सुप्रिया
सुले को आगे न बढ़ाया जाए। दो दिन पहले संसद में शरद पवार की प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी से मुलाकात हुई उस वक्त अटकलें लगाई जा रही थी,लेकिन किसी को ज्यादा शक इसलिए नही हुआ क्योंकि एनसीपी- कांग्रेस और
शिवसेना के बीच समर्थन पर बातचीत चल रही थी। महाराष्ट्र की सियासत में सबसे बड़े
उलटफेर के बाद पवार का पावर गेम फिर से सुर्खियों में है। अजित पवार को डिप्टी सीएम
बनाकर जिस तरह से सुबह होते ही देवेंद्र फडणवीस ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ
ली है उसे पवार का फिक्स गेम माना जा रहा है।

