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- पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बताई नागरिकता संशोधन कानून [CAA] के विरोध की असली वजह....
Posted by : achhiduniya
21 December 2019
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भारत के किसी भी राज्य से चर्चा नहीं की गई। बिल को सिलेक्ट कमेटी में भेजने की कांग्रेस की मांग थी,लेकिन उसे नहीं भेजा गया। केवल बहुमत के आधार पर लोगों पर दबाव डालकर बिल पास कराया गया, जो अव्यवहारिक है। सिंह ने कहा कि हम देश का विकास चाहते हैं। भारत में सभी धर्मों के लोगों का सम्मान होना चाहिए। उनका भारत के संविधान में विश्वास होना चाहिए। सरकार को विश्वास पैदा करना चाहिए,क्योंकि संविधान में जाति-धर्म के आधार पर भेदभाव की बात नहीं कही गई है। समता मूलक समाज की बात कही गई है, उसका सरकार
को पालन करना चाहिए।
एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने इंदौर पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर कहा कि मामला सीएए का नहीं, सवाल भारतीय संविधान का है। संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन हुआ है। एक बार यदि किसी ने इसकी प्रभुता को चुनौती
दे दी, तो भारतीय संविधान का मूल ही समाप्त हो जाएगा। CAA और NRC का विरोध करने की वजह बताते
हुए पूर्व सीएम ने कहा कि एनआरसी का हम लोग विरोध इसलिए करते हैं कि असम जैसे छोटे राज्य में 11 साल
लगे और 1600 करोड़ रुपए खर्च हुए। अब उस हालात में एनआरसी को कैसे मंजूर कर
लें। जो देश के नागरिकों का हक छीने और नागरिकों से कहे कि तुम प्रमाणित करो कि
तुम देश के नागरिक हो, उसके बारे में क्या कहा जाए।
मध्य
प्रदेश में माफिया पर हो रही कार्रवाई पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसके लिए मैं
मुख्यमंत्री कमलनाथ को बधाई देता हूं। पूरे प्रदेश में जहां-जहां सरकारी जमीनों पर
कब्जे हुए हैं, उनको मुक्त कराना चाहिए। हम इस मुहिम का स्वागत करते
हैं और पूरा समर्थन करते हैं। क्योंकि पिछले 15 साल
में बीजेपी सरकार के दौरान माफियाओं ने न केवल सरकारी जमीनों पर, बल्कि निजी जमीनों पर भी कब्जे किए हैं। राजनैतिक संरक्षण की
वजह से इन पर कार्रवाई भी नहीं की गई है,लेकिन
अब कमलनाथ सरकार इनको छोड़ने वाली नहीं है। ये कांग्रेस सरकार का सराहनीय कदम है।


