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- जाने अपना अधिकार.....क्या है ज़ीरो FIR……?
Posted by : achhiduniya
04 December 2019
देश के कानुन के अनुसार किसी भी इलाके मे अपराध
होने पर नागरिकों को यह अधिकार दिया गया है कि वे नजदीकी किसी भी पुलिस स्टेशन में अपराध से संबन्धित जानकारी
देकर या एफआईआर दर्ज करवा कर उस अपराध द्वारा होने वाले अत्याचार या दुर्घटना से अपने आप को पुलिस
द्वारा सुरक्षित करवा सकती है। ज़ीरो FIR के पीछे बेसिक कॉन्सेप्ट यह था
कि पुलिसिया आनाकानी में किसी को न्याय से महरूम न होना पड़े। हम अक्सर ऐसे मामले
सुनते/देखते हैं कि दो पुलिस स्टेशनों में विवाद के कारण FIR नहीं दर्ज की जा सकी। इस तरह की खबरें आने पर लोगों के बीच गुस्सा भी
पनपता रहा है। जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी ने ज़ीरो एफआईआर का सुझाव देकर इस मुश्किल
के बेहतर निपटारे की कोशिश की थी।
दरअसल
मकसद सिर्फ इतना था कि किसी भी व्यक्ति तक न्याय पहुंचने में देर न लगे। हर पुलिस
स्टेशन का एक अधिकार क्षेत्र होता है। ज़ीरो एफआईआर यह सुविधा देती है कि अगर आप
अपने इलाके के पुलिस स्टेशन में नहीं पहुंच पा रहे हैं तो ज़ीरो FIR के तहत नजदीकी पुलिस स्टेशन में केस दर्ज करवा सकते हैं। ज़ीरो FIR
दर्ज करने के लिए इस बात से मतलब नहीं होता कि क्राइम कहां हुआ है। इसमें
सबसे पहले रिपोर्ट दर्ज की जाती है। इसके बाद संबंधित थाना जिस क्षेत्र में घटना
हुई है,वहां के ज्युरिडिक्शन वाले पुलिस स्टेशन में FIR
को फॉरवर्ड कर देते हैं। यह प्रावधान सभी के लिए किया गया है। ज़ीरो
FIR की खास बात ये है कि इसके तहत पुलिस भी बिना इस संकोच के
कार्रवाई कर सकती है कि वह इलाका उसके अधिकार क्षेत्र में है या नहीं अगर कोई
पुलिस स्टेशन ज़ीरो FIR लिखने से मना करता है तो पीड़ित
व्यक्ति वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से शिकायत कर सकता है।
खुद सुप्रीम कोर्ट भी निर्देशित
कर चुका है कि अगर कोई पुलिस अधिकारी एफआईआर लिखने से मना करे तो उस पर कार्रवाई
होनी चाहिए। आपको बता दे साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप केस के बाद
देश में कई तरह के कानूनी सुधार हुए थे। उस समय रेप और यौन शोषण के मामलों के
मद्देनजर सजा और अन्य प्रावधानों के लिए जस्टिस जेएस वर्मा की अगुआई में कमेटी
गठित की गई थी। वर्मा कमेटी ने ही पहली ज़ीरो एफआईआर (Zero Fir) का सुझाव दिया था। कमेटी का सुझाव था कि गंभीर अपराध होने पर किसी थाने की
पुलिस दूसरे इलाके की एफआईआर लिख सकती है। ऐसे मामलों में अधिकार क्षेत्र का मामला
आड़े नहीं आएगा।


