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- क्या है NPR…..? [नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर] जिसे मोदी कैबिनेट की मिली मंजूरी...
Posted by : achhiduniya
24 December 2019
देश में नागरिकता संशोधन कानून [CAA] और NRC पर मचे घमासान के बीच केंद्र सरकार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर [ NPR ] कैबिनेट की बैठक में NRP के नवीनीकरण को हरी झंडी दे दी। पश्चिम बंगाल और केरल सरकार ने NRP का भी विरोध किया है। हालांकि यह NRC से पूरी तरह अलग है। नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर [NPR] के तहत एक अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार करने के लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की तैयारी है। कैबिनेट की मीटिंग NPR यानी नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के अपडेट पर मुहर लग चुकी है। पॉपुलेशन रजिस्टर का मकसद देश के नागरिकों की व्यापक पहचान का डेटाबेस तैयार करना है। इसमें लोगों की संख्या गिनने के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी।
2010 में
मनमोहन सिंह सरकार में NPR बनाने की पहल शुरू हुई थी।
एनपीआर का पूरा नाम नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर है।
देश के सामान्य निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इसका मुख्य
लक्ष्य है। इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली
संप्रग सरकार में 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू हुई थी। तब 2011 में जनगणना
के पहले इस पर काम शुरू हुआ था। NRC के पीछे जहां देश में अवैध
नागरिकों की पहचान का मकसद छुपा है, वहीं
इसमें छह महीने या उससे अधिक समय से स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी
को NPR में आवश्यक रूप से पंजीकरण करना होता है। बाहरी व्यक्ति भी अगर
देश के किसी हिस्से में छह महीने से रह रहा है तो उसे भी NPR में दर्ज होना है। NPR के जरिए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा तैयार कर सरकारी योजनाओं की
पहुंच असली लाभार्थियों तक पहुंचाने का भी मकसद है।

