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पूर्व जज,पूर्व ब्यूरोक्रेट,पूर्व आर्मी अधिकारी सहित 154 लोगों ने राष्ट्रपति को सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट समर्थन में ज्ञापन सौंपा...
Posted by : achhiduniya
25 January 2020
सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट संसद से पारित हो चुका है, उसके बाद एक्ट भी बन चुका है और जब इसे लाया गया था तो इसको लाने से पहले तैयारियां की गईं। इसको ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी के पास भी भेजा गया था। उसके बाद ये संसद के दोनों सदनों में पास हुआ। संविधान के आर्टिकल 14 CAA पर लागू नहीं होता यह कहा गया है। ये संविधान की बाकी धाराओं के भी सम्मत हैं। 11 पूर्व जज, 72 पूर्व ब्यूरोक्रेट, 56 पूर्व आर्मी अधिकारी, और 15 इंटैलैक्चुअल देश के अलग-अलग क्षेत्र के प्रबुद्ध जन ने राष्ट्रपति से मिलकर 154 लोगों उन्हें ज्ञापन सौंपा। ये सब CAA के समर्थन में हैं। NPR और NRC के लिए भी। इन लोगों ने ज्ञापन में लिखा है कि भारत सरकार देश की पुरानी परंपरा वसुधैव कुटुंबकम् और सर्वधर्म समभाव पर बहुत अच्छा काम कर रही है।
कई पुराने थमे हुए मुद्दों पर फैसला हो रहा
है। चाहे धारा 370 हो या अयोध्या मामला हो। राष्ट्रपति से मिलने वालों में शामिल
जस्टिस पी कोहली ने कहा कि आर्टिकल 14 रीजनेबल क्लासिफिकेशन को परमिट करता है, यह पॉजिटिव डिस्क्रिमिनेशन है जिनको जरूरत है जो जरूरतमंद है, उनको दिया जाना चाहिए वरना वह समाज पिछड़ जाएंगे, इसी तरह वो लोग जो आएंगे उनको नागरिकता देना पॉसिबल है। यह
संविधान का उल्लंघन नहीं है। जबकि आर्टिकल 25 कहता है कि हर धर्म को अपने हिसाब से
पूजा पद्धति अपनाने और बढ़ाने का अधिकार है। इस कानून से किसी की आजादी तो छीनी
नहीं जा रही है। किसी का पूजा का अधिकार छीना नहीं जा रहा है। यह सड़कों पर निर्णय
नहीं हो सकता कि यह उल्लंघन है या नहीं है। दूसरा कानूनी पहलू है जिसमें जिसमें
प्रक्रिया का पालन किया गया है या नहीं किया गया है। इसे संसद में दोनों सदनों ने
पास किया है।
संविधान के हिसाब से है तो यह संविधान के सम्मत है। साथ ही उसके
राजनीतिक और सामाजिक अधिकार भी CAA में छीने नहीं जा रहे हैं। पूर्व
IFS ऑफिसर ए के मल्होत्रा कहते हैं कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ के पब्लिक
के मन में शंका पैदा करेंगे। गुमराह करके सब कराया जा रहा है। सरकारी संपत्ति को
नुकसान पहुंचाना एक षड्यंत्र के तहत हो रहा है। इसमें विदेशी ताकतों का भी हाथ हो
सकता है। जो हिंदुस्तान को हमारे प्रधानमंत्री के नेतृत्व में फलना फूलना और
तरक्की देखना नहीं चाहते। ज्ञापन में NPR के बारे
में कहा गया है कि ये कानूनी बाध्यता है कि इसे 2021 के पहले कन्डक्ट कराया जाए। देश
की सुरक्षा के लिए NRC जरूरी है। बांग्लादेश और
पाकिस्तान के पास भी NRC है। NRC का लेना
देना जाति,
धर्म भाषा क्षेत्र रंग से नहीं है।


