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एसिड फेंकने वाले का नाम नदीम खान से बदलकर राजेश क्यों किया? सोशल मीडिया पर फिल्म “छपाक” से छिड़ी जंग...
Posted by : achhiduniya
08 January 2020
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पोस्ट के जरिए
एसिड
एटैक की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल ने लिखा, बीते 22 अप्रैल 2005 को दिल्ली के खान मार्केट से गुजर रही थीं तभी नदीम
खान ने उन्हें गिरा दिया और चेहरे पर तेजाब फेंक दिया। उस समय लक्ष्मी की उम्र महज
15 साल थी और नदीम ने शादी के लिए प्रपोज किया था, जिसे लक्ष्मी ने ठुकरा दिया था। लक्ष्मी ने उस वाकये को याद करते हुए कहा
था, जिस तरह से कोई प्लास्टिक पिघलता है,उसी तरह से मेरी चमड़ी पिघल रही थी। मैं सड़क पर चलती हुई गाड़ियों से टकरा
रही थी। मुझे अस्पताल ले जाया गया,जहां मैं अपने पिता से
लिपट कर रोनी लगी।
मेरे गले लगने की वजह से मेरे पिता की शर्ट जल गई थी। मुझे तो
पता भी नहीं था मेरे साथ क्या हुआ है। डॉक्टर मेरी आंखें सिल रहे थे,जबकि मैं होश में ही थी। मैं दो महीने तक हॉस्पिटल में थी। जब घर आकर
मैंने अपना चेहरा देखा तो मुझे लगा की मेरी जिंदगी खत्म हो चुकी है। लक्ष्मी ने
पिछले साल 22 अप्रैल को लिखा था,आज मेरे अटैक को 14 साल हो
गए हैं। इन 14 सालों में बहुत कुछ बदला है,बहुत सारी चीजें
अच्छी हुईं, बहुत सारी चीज़ें बुरी जिसके बारे में सोच कर भी
डर लगता है। लोगों को लगता है एसिड अटैक हुआ है, यह सबसे
बड़ा दुख है,सबको यही दिखता है। जब कोई भी अटैक होता है ना
सिर्फ हमारे पूरे परिवार की जिंदगी बदल जाती है बल्कि अचानक से एक नया मोड़ आ जाता
है क्योंकि वह इंसान एक बार अटैक करता है,सोसाइटी बार-बार
अटैक करती है।
जीने नहीं देती, जिससे ऊपर क्राइम हुआ है वह
या परिवार का कोई व्यक्ति आत्महत्या कर लेता है। उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा है,मुझे पता है कि हर साल यह तारीख मेरे जीवन में आएगी और आज का दिन उस दिन
जैसा ही तकलीफ़ भरा होता है। उस वक्त तो पापा भाई भी थे पर आज वह भी नही हैं,
हर 22 अप्रैल मुझे कुछ नई तकलीफ देता है,जिसके
बारे में सोच कर भी डर जाती हूं,आख़िर मैं भी इंसान हूं।
मुझे भी तकलीफ़ होती है,मैं कभी नहीं चाहती जो मेरे साथ हुआ
है वह किसी और के साथ हो,जब मैं 15 साल की थी तो अपने
पापा-म्मी से कुछ नहीं बोल सकी मन में डर था कहीं ना कहीं कि अगर कहा तो मुझे ही
गलत बोलेंगे और उस चुप्पी की वजह से क्रिमिनल ने फायदा उठाया।
लक्ष्मी ने कहा,आज इस पोस्ट को हर कोई पढ़ेगा और मैं चाहती हूं इस पोस्ट से आप लोग एक सबक
लें। जो मां-बाप हैं, वे अपने बच्चों के साथ दोस्ती करें
ताकि वह अपने मन की बात आपको बता सकें क्योंकि जब भी कोई परेशानी होती है तो
मां-बाप को ही ज़्यादा परेशान होना पड़ता है। जो बच्चे हैं, वे
भी अपने मम्मी पापा के साथ दोस्ती करें। अपने मन की बात उन्हें बताएं ताकि जो भी
दिक्कत हो वे साथ मिलकर ठीक कर सकें। याद रहे अटैक सिर्फ एक शख्स पर नहीं पूरे
परिवार पर होता है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंसा पीड़ित वाम समर्थक छात्रों से मिलने
के लिए दीपिका पादुकोण का पहुंचना सोशल मीडिया पर तूफान का सबब बन गया है। खासकर
ट्विटर पर उनकी फिल्म 'छपाक' कंट्रोवर्सी
में आ गई है।
#boycottchhapaak ट्विटर पर टॉप ट्रेंड बना हुआ
है और लोग दीपिका को ट्रोल कर रहे हैं कि जब लक्ष्मी अग्रवाल पर नदीम खान नामक
शख्स ने तेजाब फेंका था तो उनकी बायॉपिक 'छपाक' में उस कैरेक्टर का नाम क्यों बदल दिया गया। सोशल मीडिया पर यूजर्स दावा
कर रहे हैं कि नदीम के कैरेक्टर का नाम फिल्म में राजेश है। दरअसल, 'छपाक' एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की ही
कहानी है। नदीम के कैरेक्टर का नाम राजेश रखने का दावा सोशल मीडिया पर किया जा रहा
है, 'छपाक' की पीआर टीम से जुड़े
सूत्रों ने कहा कि फिल्म में नदीम के कैरेक्टर का नाम बाबू है।




