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- हिंदुत्ववादी विचारधारा के खिलाफ राजनीति करने वाले औवैसी क्या वाकई मुस्लिमो के है हिमायती ...?
Posted by : achhiduniya
15 November 2020
हैदराबाद से दो दशक तक लोकसभा के सदस्य रहे सलाहुद्दीन ओवैसी के सबसे बड़े पुत्र असदुद्दीन ओवैसी ने राजनीति में कदम रखने से पहले क्रिकेट के मैदान में हाथ आजमाया और बतौर तेज गेंदबाज विश्वविद्यालय स्तर पर खेले। लंदन से वकालत की पढ़ाई करके लौटने के बाद उन्होंने पहली बार साल 1994 में राजनीतिक सफर की शुरुआत की। वह हैदराबाद की चार मीनार विधानसभा सीट से पहली
बार चुनाव लड़े और जीते। साल 2004 में वह पहली बार लोकसभा पहुंचे और इसके बाद हर लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की। बिहार विधानसभा चुनाव में अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन {AIMIM } ने पांच सीटें जीत कर राजनीतिक विशेषज्ञों को चौंका दिया। कांग्रेस एवं राजद का महागठबंधन सत्ता की दहलीज तक पहुंचकर भी रुक गया तो उसकी एक बड़ी वजह AIMIM के मुस्लिम मतों
में सेंध लगाने को ही माना जा रहा है। ओवैसी और AIMIM के राष्ट्रीय राजनीति में उभार को कांग्रेस और उसके साथी दल भाजपा विरोधी मतों में बंटवारा करने वाली ताकत के तौर पर देखते हैं। धर्मनिरपेक्षता की सियासत की पैरोकार मानी जाने वाली पार्टियां ओवैसी को भाजपा की बी-टीम और वोट कटवा कहती हैं, लेकिन 51 वर्षीय ओवैसी का कहना है कि देश में कहीं से चुनाव लड़ना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और अपनी हार के लिए उन्हें
जिम्मेदार ठहराने वाली पार्टियां भाजपा को रोकने में समर्थ नहीं हैं। ओवैसी सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में पिछड़े मुसलमानों के लिए आरक्षण की पैरोकारी करते हैं। उन पर कई बार मुस्लिम सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने के आरोप भी लगते हैं, लेकिन वह इससे इनकार करते हुए कई बार कह चुके हैं कि उनकी राजनीति सिर्फ हिंदुत्ववादी विचारधारा के खिलाफ है। ओवैसी ने राजनीति के केंद्र में मुसलमानों के साथ दलितों को लाने का भी पूरा प्रयास किया और इसी
कोशिश में वह अक्सर 'जय भीम, जय मीम का नारा लगाते हैं। महाराष्ट्र में मुस्लिम-दलित एकता वाले राजनीतिक प्रयोग के तहत उन्होंने वंचित बहुजन अगाढ़ी के साथ गठबंधन किया, लेकिन उनके इस प्रयोग को अपेक्षाकृत सफलता नहीं मिली। 2019 के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र औरंगाबाद की सीट और फिर विधानसभा चुनाव में दो सीटें जीतकर ओवैसी की पार्टी ने प्रदेश में एक बार फिर अपनी मौजूदगी का अहसास कराया। अब बिहार में
उसके प्रदर्शन ने AIMIM और ओवैसी को मौजूदा राजनीतिक बहस के केंद्रबिंदु में ला दिया है। कांग्रेस महासचिव तारिक अनवर का कहना है, ओवैसी की राजनीति विशुद्ध सांप्रदायिक है। उनका उभरना हमारे देश और लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। कांग्रेस को सभी कट्टरपंथी ताकतों के खिलाफ लड़ना होगा और जनता को समझाना होगा कि इनकी राजनीति देशहित में नहीं है।





