- Back to Home »
- Judiciaries »
- BJP के चुनाव चिन्ह पर लगा प्रश्न चिन्ह हाईकोर्ट तक पहुंची बात....
Posted by : achhiduniya
10 December 2020
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बीजेपी द्वारा राष्ट्रीय
फूल कमल को चुनाव चिन्ह के इस्तेमाल करने संबंधी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए
निर्वाचन आयोग से इस बात पर जवाब तलब किया है कि किसी राजनैतिक दल को राष्ट्रीय
पुष्प कमल चुनाव निशान के तौर पर कैसे दिया गया? यह
आदेश मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने
चौरीचौरा, गोरखपुर के सपा नेता काली शंकर की जनहित याचिका पर दिया है। याचिका
की सुनवाई 12 जनवरी को होगी। कोर्ट में यह मुद्दा भी उठा है कि राजनीति दलों
द्वारा चुनाव चिन्ह का लोगो के रूप में प्रचार के लिए छूट देना निर्दलीय प्रत्याशी
के साथ भेदभाव है। स्वतंत्रता सेनानी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में भारतीय
जनसंघ की स्थापना की थी। जो आगे चलकर बीजेपी पार्टी में तब्दील हो गई। पहले भारतीय जनसंघ का चुनाव चिन्ह दीपक हुआ करता था। 1977 में इंदिरा गांधी ने आपातकाल खत्म करने की
घोषणा की इसके साथ देश में फिर से आम चुनाव की प्रक्रिया भी शुरू हो गई। जनसंघ का
जनता पार्टी में विलय हो गया। उस समय दीपक का चिन्ह बदलकर हलधर किसान हो गया। फिर 6 अप्रैल 1980 को भारतीय जनता पार्टी के नाम से एक
नये राजनीतिक दल की स्थापना की गई और अटल बिहारी वाजपेयी इसके पहले अध्यक्ष बने।
जिसके बाद पार्टी का चुनाव चिह्न कमल बनाया गया। बीजेपी के संस्थापकों ने कमल को चुनाव चिह्न इसलिए बनाया था क्योंकि इस चिह्न को पहले भी
ब्रिटिश शासन के खिलाफ इस्तेमाल किया गया था। याचिका में कहा गया है कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 एवं चुनाव
चिन्ह आदेश 1968 के अंतर्गत चुनाव आयोग को चुनाव लड़ने के लिए राष्ट्रीय राजनीतिक
दल को चुनाव चिन्ह आवंटित करने का अधिकार है। चुनाव आयोग को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का
उल्लंघन करने पर



