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- दिमाग होता है सबसे बड़ा GPS {ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम} ट्रैकर...जाने कैसे...?
Posted by : achhiduniya
28 December 2020
वैज्ञानिकों ने पहली बार यह रिकॉर्ड किया कि
हमारा दिमाग भौतिक स्थानों का नेविगेशन कैसे करता है और दूसरों की स्थानों को कैसे
याद रखता है। इससे यह पता चलता है कि हमारा दिमाग एक कॉमन को पैदा कर सकता है जो
यह याद रखता है कि दूसरे लोग हमारी तुलना में कहां पर मौजूद हैं। शोधकर्ताओं ने
खास तरह का बैगपैक का उपयोग किया जिससे वे वायरलैस तरीके से मिरगी के मरीजों के
मस्तिष्क की तरंगों की निगरानी कर सकें जब वे एक खाली कमरे में छिपे हुए दो पैरों
के निशान को ढूंढ रहे थे। नेचर में प्रकाशित इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने रिपोर्ट
किया है कि तरंगें एक खास तरह के पैटर्न में बहती हैं जिससे पता चलता है कि हर
व्यक्ति के दिमाग में दीवार और दूसरी सीमाओं का एक नक्शा बन जाता है। हमारा दिमाग (Brain) कैसे काम करता है यह जानना एक बहुत ही जटिल प्रक्रिया (Cmplex process) है। हमारी एक एक क्रिया (Action) को मस्तिष्क कैसे पहचानता है और किसी काम को करने के लिए दिमाग में कैसी गतिविधियां (Activities) होती हैं यह जानना एक जटिल काम है। ऐसे ही एक शोध में
वैज्ञानिकों ने यह पता लगाता है कि हमारा दिमाग किसी स्थान पर जब जाता है (Navigation) तो वह हमारी तुलना में दूसरों की स्थिति (Location of others) का पता कैसे लगता है और उसे याद (Track) कैसे रखता है या उसे कैसे पहचनाता (Mark) है। लॉस एंजेलिस की यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया के डेविड गैफिन
स्कूल ऑफ मेडिसिन में साइकिएट्रिस्ट नैनथिया सथेना ने बताया, ऐसा पहली बार हुआ कि हम सीधे यह अध्ययन करने में सफल रहे कि
कैसे किसी व्यक्ति का दिमाग किसी वास्तविक स्थान में मार्गनिर्देशन करता है जब
वहां और भी लोग मौजूद हों। मजेदार बात यह रही कि हर प्रतिभागी के दिमाग की तरंगें
एक खास और समान तरह से बह रही थीं जब वे कमरे के एक कोने में बैठते थे और दूसरे को
चलते हुए देखते थे। इससे यह पता चला कि यह तरंगें दूसरे लोगों के रास्ते का पता
लगाने के लिए भी उपयोग में लाई जाती हैं। यह अध्ययन यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ
हेल्थ (NIH)
के ब्रेन रिसर्च थ्रू एडवांसिंग इनोवेटिव
न्यूरोटेक्नोलॉजीस (BRAIN) का
हिस्सा था। इस अध्ययन में टीम ने 31 से 52 साल की उम्र के प्रतिभागियों के एक ऐसे
समूह के साथ काम किया जिनके दिमाग में सर्जरी से उनकी मिरगी के दौरों को नियंत्रित
करने के लिए इलेक्ट्रोड डाले गए थे। ये इलेक्ट्रोड प्रतिभागियों के दिमाग के
याद्दाश्त केंद्र में रखे गए थे जिसे मीडियल टेम्पोरल लोब कहते हैं जो नेविगेशन को
नियंत्रित करता है। यह कुतरने वाले जीवों में प्रमाणित भी हो चुका है। पिछले 50
सालों से वैज्ञानिकों ने यह खोजा था कि इस लोब के न्यूरॉन जीपीएस यानि ग्लोबल
पोजीशनिंग सिस्टम की तरह काम करते हैं। इस लेख के प्रमुख लेखक और UCLA में पोस्ट डॉक्टोरल स्कॉलर मिथायस स्टैन्गल ने बताया, हम कैसे नेविगेट करते हैं इसमें मीडियल टेम्पोरल लोब की भूमिका
कई बार अप्रत्यक्ष रूप से और टुकड़ों में प्रमाणित होती रही है,लेकिन इन विचारों का तकनीक रूप से परीक्षण बहुत मुश्किल था। डॉ
सथेना की टीम ने इस विचारों की गहराई से पड़ताल करने का इरादा किया। इसके अलावा
टीम ने ऐसा बैकपैक बनाया जो दूसरे शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी होगा जो दिमाग और
दिमाग की बीमारियों का अध्ययन करना चाहते हैं।





