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'अण्णा किसकी ओर हैं,आंदोलन सिर्फ कांग्रेस के शासन में करना है क्या? शिवसेना मुखपत्र “सामना” ने पूछा प्रश्न...
Posted by : achhiduniya
30 January 2021
शिवसेना मुखपत्र सामना के संपादकीय में लिखा गया है कि अब अन्ना
को बताना चाहिए कि वो किसान के साथ हैं या सरकार के साथ हैं? संपादकीय
का शीर्षक है- 'अण्णा
किसकी ओर हैं! संपादकीय में लिखा गया है,मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते अन्ना दो
बार दिल्ली आए और उन्होंने जोरदार आंदोलन किया।
इस आंदोलन की मशाल में तेल डालने का काम तो भाजपा कर रही थी,लेकिन विगत सात वर्षों में मोदी शासन में नोटबंदी से लॉकडाउन तक कई निर्णयों से जनता
बेजार हुई, लेकिन
अन्ना ने करवट भी नहीं बदली,
ऐसा आरोप भी होता रहा है। मतलब आंदोलन सिर्फ कांग्रेस के शासन
में करना है क्या? बाकी
अब रामराज अवतरित हो गया है क्या? संपादकीय में आगे लिखा है,अन्ना द्वारा अनशन का अस्त्र बाहर निकालना और
बाद में उसे म्यान में डाल देना,
ऐसा इससे पहले भी हो चुका है। इसलिए अभी भी हुआ तो इसमें
अनपेक्षित जैसा कुछ नहीं था। भाजपा नेताओं द्वारा दिए गए आश्वासन के कारण अन्ना
संतुष्ट हो गए होंगे तो यह उनकी समस्या है। किसानों के मामले में दमन का फिलहाल जो
चक्र चल रहा है, कृषि
कानूनों के कारण जो दहशत पैदा हुई है बुनियादी सवाल उसे लेकर है। इस संदर्भ में एक
निर्णायक भूमिका अन्ना अख्तियार कर रहे हैं और उसी दृष्टिकोण से अनशन कर रहे हैं, ऐसा
दृश्य निर्माण हुआ था, परंतु
अन्ना ने अनशन पीछे ले लिया। इसलिए कृषि कानून को लेकर उनकी निश्चित तौर पर भूमिका
क्या है, फिलहाल
तो यह अस्पष्ट ही है।गौरतलब है की महाराष्ट्र के पूर्व
मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने कल
अन्ना हजारे से मुलाकात की थी और उन्हें सरकार द्वारा उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों
पर आश्वासन दिया था। इसके बाद अन्ना ने अपने अनशन को टालने का एलान किया है। महाराष्ट्र
की सत्ताधारी पार्टी शिव सेना ने अपने मुखपत्र 'सामना' में
सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे पर निशाना साधा है और उनके द्वारा अपने
प्रस्तावित अनशन को रद्द किए जाने पर तंज कसा है।



