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गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति कोविंद ने किसानों- जवानो-वैज्ञानिको के लिए कृतज्ञता का दिया संदेश...
Posted by : achhiduniya
25 January 2021
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने कहा,हमारे राष्ट्रीय त्योहारों को सभी देशवासी, राष्ट्र-प्रेम की भावना के साथ मनाते हैं। गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भी हम पूरे उत्साह के साथ मनाते हुए, अपने राष्ट्रीय ध्वज तथा संविधान के प्रति सम्मान व आस्था व्यक्त करते हैं। कोविंद ने कहा, दिन-रात परिश्रम करते हुए कोरोना-वायरस को डी-कोड करके और बहुत कम समय में ही वैक्सीन को विकसित करके, हमारे वैज्ञानिकों ने पूरी मानवता के कल्याण हेतु एक नया इतिहास रचा है। हमारे सभी किसान, जवान और
वैज्ञानिक विशेष बधाई के पात्र हैं और कृतज्ञ राष्ट्र गणतन्त्र दिवस के शुभ अवसर पर इन सभी का अभिनंदन करता है। राष्ट्रपति ने कहा कि 2020 सीख देने वाला वर्ष रहा है, जो हमें मुश्किलों से कैसे उभरना है ये सीख देता है। हमारे राष्ट्रीय त्योहारों को, सभी देशवासी, राष्ट्र-प्रेम की भावना के साथ मनाते हैं। गणतन्त्र दिवस का राष्ट्रीय पर्व भी, हम पूरे उत्साह के साथ मनाते हुए, अपने राष्ट्रीय ध्वज तथा संविधान के प्रति सम्मान व आस्था व्यक्त करते हैं। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, आत्म-निर्भर भारत ने कोरोना-वायरस से बचाव के लिए अपनी खुद की वैक्सीन भी बना ली है। अब विशाल पैमाने पर, टीकाकरण का जो अभियान चल रहा है वह इतिहास में अपनी तरह का सबसे बड़ा प्रकल्प होगा। मैं देशवासियों से आग्रह करता हूं कि आप सब, दिशा-निर्देशों के अनुरूप, अपने स्वास्थ्य के हित में इस वैक्सीन रूपी संजीवनी का लाभ अवश्य उठाएं और इसे जरूर लगवाएं। आपका स्वास्थ्य ही आपकी उन्नति के रास्ते खोलता है। राष्ट्रपति कोविंद ने कहा, हम सबको संवैधानिक नैतिकता के उस पथ पर निरंतर चलते रहना है जिसका उल्लेख बाबासाहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने 4 नवंबर, 1948 को, संविधान सभा के अपने भाषण में किया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है। संविधान में निहित मूल्यों कोसर्वोपरि मानना, समता, हमारे गणतंत्र के महान यज्ञ का बीज-मंत्र है। सामाजिक समता का
आदर्श प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित करता है, जिसमें
हमारे ग्रामवासी, महिलाएं, अनुसूचित
जाति व जनजाति सहित अपेक्षाकृत कमजोर वर्गों के लोग, दिव्यांग-जन
और वयो-वृद्ध,
सभी शामिल हैं। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर
राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में राष्ट्रपति कोविंद ने बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, महात्मा
गांधी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, संविधान
की उद्देशिका में रेखांकित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता के जीवन-मूल्य हम सबके लिए पुनीत आदर्श हैं। यह
उम्मीद की जाती है कि केवल शासन की ज़िम्मेदारी निभाने वाले लोग ही नहीं, बल्कि हम सभी सामान्य नागरिक भी इन आदर्शों का दृढ़ता व
निष्ठापूर्वक पालन करें।



