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- सोशल मीडिया गले की फास या जीने की आस....?
ने अहम सामाजिक मुद्दों को भी उठाने में भी अपनी उपयोगिता साबित की है। जैसे कि #MeToo मूवमेंट को सोशल मीडिया से काफी ताकत मिली है। मौजूदा समय में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव से शायद ही कोई अनजान हो। सोशल मीडिया इंसान के निजी जीवन से लेकर सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी अहम किरदार अदा करने लगा है। सोशल मीडिया से कैसे इंसान का व्यवहार बदलता है और कैसे उसको बिजनस एवं करियर के अवसर में बदला जा सकता है। सोशल मीडिया पर रोजाना बड़ी संख्या में टेक्स्ट डेटा जेनरेट होता है। कंपनियां इन डेटा का इस्तेमाल उपभोक्ताओं के
व्यवहार का अध्ययन करने के लिए करती हैं। इनका विश्लेषण किया जाता है और विश्लेषण की कई तकनीकों का इस्तेमाल करके कंपनियां और संगठन अपने लक्षित ग्राहक, उनके व्यवहार, उत्पाद आदि के बारे में जानकारी जुटाते हैं। सोशल मीडिया से जमा हुए डेटा का विश्लेषण करने वाली तकनीकों में सेंटिमेंट ऐनालिसिस, टॉपिक मॉडलिंग, स्टॉक मार्केट की भविष्यवाणी, ग्राहकों पर प्रभाव, न्यू ऐनालिटिक्स, सोशल नेटवर्क ऐनालिसिस, कस्टमर सर्विस आदि अहम हैं। उदाहरण के लिएसेंटिमेंट ऐनालिसिस का इस्तेमाल करके उपभोक्ताओं के व्यवहार के बारे में कीमती जानकारी जुटाई जाती है। उदाहरण के लिए अगर आप किसी उत्पाद के बारे में नेगेटिव बात करते हैं तो दूसरे भावी ग्राहक उससे दूर भाग जाएंगे। इसका संबंधित उत्पाद और कंपनी पर बुरा असर पड़ेगा। इसी तरह से टॉपिक मॉडलिंग है। टॉपिक मॉडलिंग में सोशल मीडिया से उन टॉपिक का डेटा जुटाया जाता है, जिन पर सोशल मीडिया में चर्चा हो रही है। इसकी मदद से यह पता लगाया जाता है कि लोग सोशल मीडिया पर किस चीज के बारे में बात कर रहे हैं। फिर कंपनियां और संगठन उस हिसाब से अपनी रणनीति बनाते हैं।



