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मल्टीप्लेक्स हॉस्पिटल खोल लिए लेकिन बेसिक चीज ऑक्सीजन प्लांट नहीं लगाए..हाई कोर्ट की दिल्ली सरकार को फटकार...
Posted by : achhiduniya
28 April 2021
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑक्सीजन की कमी पर अस्पतालों पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि लोगों ने
बड़े-बडे अस्पताल तो खड़े कर लिए लेकिन कभी अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट लगाने के
लिए कदम नहीं उठाए। यही हाल सरकारी अस्पतालों का है। हम अब इतनी बड़ी समस्या से
जूझ रहे हैं,लेकिन अब समस्या है और जो है उसी से काम चलाना होगा। हाईकोर्ट
ने ये टिप्पणी तब कि जब बत्रा अस्पताल ने कहा कि उसे उसके हिस्से की पूरी ऑक्सीजन
नहीं मिल रही है। महाराजा अग्रसेन अस्पताल ने भी अदालत में शिकायत दर्ज कराई कि
उसे होटल के साथ जोड़ा गया है लेकिन इसमें ऑक्सीजन सहित सुविधाएं नहीं हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि आपने सही कहा कि यह सब कागजी
कवायद है। व्यवस्था करने से पहले आप होटल को अटैच नहीं कर सकते। आपके पास डॉक्टर
नहीं, मेडिकल स्टॉफ नहीं, ऑक्सीजन
नहीं है और आप होटलों को अटैच कर रहे हैं। दिल्ली सरकार ने कहा कि हम सिर्फ उन होटलों को
अटैच करते हैं जिनमें इंतजाम किया गया है। दिल्ली सरकार ने अदालत को बताया ऑक्सीजन
को लेकर अहम आदेश जारी किए गए हैं। केंद्र के फार्मूले के तहत अस्पतालों व सप्लायरों
की सूची तैयार की गई है। दिल्ली सरकार के वकील ने ऑक्सीजन सप्लायर का ब्यौरा अदालत
में पेश किया। आज 14 ऑक्सीजन रिफिलर हैं। इनमें से कुछ ऐसे हैं जिनकी क्षमता अत्यधिक है
और कुछ की कम है। प्रत्येक अस्पताल के लिए एक रिफिलर को जोड़ा गया है। यदि मुख्य
आपूर्तिकर्ता ऑक्सीजन सप्लाई नहीं कर पा रहा है तो रिफिलर से पूरा किया जा रहा है।
अब एक अस्पताल के लिए एक रिफिलर है और एक लिंक रिफिलर भी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लेकिन क्या उन लोगों
को ऑक्सीजन मिलेगी जो लोग घर पर इलाज कर रहे हैं? उनको भी
तो ऑक्सीजन मिलनी चाहिए। दिल्ली सरकार ने कहा कि हमारे लिए 490 MT ऑक्सीजन आवंटित की गई है,लेकिन वो अभी आ नहीं रही, जबकि दिल्ली में 700 MT की जरूरत है। फिलहाल 445 MT के
हिसाब से काम कर रहे हैं। फिलहाल 20MT सरकार
के पास आपातकालीन ऑक्सीजन रखी गई है। दिल्ली सरकार ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी द्वारा एक बैठक की गई जिसमें सभी पक्षों ने भाग
लिया था। प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं ने अगले 72 घंटों
मे आपूर्ति सामान्य होने का अनुमान लगाया है। इसके आधार पर हमने यह आदेश पारित
किया।



