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- मोदी सरकार के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंची व्हॉट्सएप बताई यह वजह...
Posted by : achhiduniya
26 May 2021
व्हॉट्एप, केंद्र सरकार की ओर से तैयार
नए डिजिटल नियमों के खिलाफ है। व्हॉट्सएप का कहना है कि नए नियमों के कारण पूछने
पर बताना पड़ेगा कि सबसे पहले किसने मेसेज भेजा। इससे यूजर्स की प्राइवेसी प्रभावित
होगी। व्हॉट्सएप के मुताबिक, यूजर्स का चैट ट्रेस करने का
मतलब हर मेसेज का फिंगरप्रिंट पास रखना होगा। इससे प्राइवेसी जैसे फंडामेंटल राइट
का उल्लंघन होगा। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स
से नए डिजिटल नियमों के अनुपालन के बारे में स्थिति रिपोर्ट देने को कहा है। आईटी मंत्रालय ने नए सोशल मीडिया नियमों के तहत कंपनियों की ओर से नियुक्त मुख्य
अनुपालन अधिकारी, भारत स्थित शिकायत अधिकारी के बारे में ब्योरा
मांगा है। आईटी मंत्रालय ने कहा कि बड़ी सोशल मीडिया कंपनियों के लिए अतिरिक्त
जांच-पड़ताल की जरूत समेत अन्य नियम बुधवार से प्रभाव में आ गए हैं। सोशल मीडिया
पर सरकार की नई गाइडलाइंस के खिलाफ व्हॉट्सएप के हाईकोर्ट पहुंचने पर सरकार ने
अपना जवाब दिया है। उसने कहा है कि वह प्राइवेसी जैसे मौलिक अधिकार की रक्षा के
लिए प्रतिबद्ध है,लेकिन नए
नियम-कायदों से व्हॉट्सएप के ऑपरेशन और यूजरों की प्राइवेसी पर कोई असर नहीं
पड़ेगा। उसने साफ कर दिया है कि कंपनी को मेसेज का सोर्स बताना होगा। यह निजता का
उल्लंघन नहीं है। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कंपनी
की ओर से उठाई गई चिंता पर कहा कि नए डिजिटल नियमों से व्हॉट्सएप का सामान्य
कामकाज प्रभावित नहीं होगा। नए डिजिटल नियम के तहत व्हॉट्सएप को किन्हीं चिन्हित
संदेशों के सोर्स की जानकारी देने को कहना प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं है। प्रसाद
ने कंपनी के नए नियमों को लेकर जताई गई चिंता पर कहा कि ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, कनाडा में सोशल मीडिया
कंपनियों को उनमें कानूनी तौर पर हस्तक्षेप की अनुमति देनी होती है। आईटी मंत्रालय
ने कहा कि व्हॉट्सएप की ओर से मध्यवर्ती दिशानिर्देशों को चुनौती देना नियमों को
प्रभाव में आने से रोकने का दुर्भाग्यपूर्ण प्रयास है। प्रसाद ने कहा है कि केंद्र
सरकार अपने नागरिकों की निजता के अधिकारों की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर कानून-व्यवस्था सुनिश्चित
करना भी सरकार की जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने यह भी कहा कि
सभी स्थापित न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार, निजता
के अधिकार सहित कोई भी मौलिक अधिकार एब्सोल्यूट नहीं हैं। मौलिक अधिकार भी उचित
प्रतिबंधों के अधीन है। पहली बार मैसेज भेजने वाले से संबंधित दिशानिर्देश इन्हीं
तार्किक प्रतिबंध के उदाहरण हैं।



