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- लूट की खुली छूट दे दी है निजी अस्पतालों को सरकार ने..मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय
Posted by : achhiduniya
20 May 2021
कोर्ट मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नमन नागरथ ने बताया कि राज्य
सरकार ने 4 सितंबर 2020 को आदेश जारी किया था कि निजी
अस्पताल कोरोना के इलाज के लिए 29 फरवरी 2020 के शेड्यूल रेट से 40
प्रतिशत अधिक चार्ज ले सकेंगे। हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल
2021 को आदेश जारी किया था कि यदि कोरोना के इलाज को लेकर निजी
अस्पतालों में रेट निर्धारित नहीं हैं तो राज्य सरकार इलाज के रेट निर्धारित करे।
श्री नागरथ ने बताया कि 29 फरवरी 2020 के पहले निजी अस्पतालों के रेट निर्धारित ही नहीं किए गए थे, फिर किस आधार पर निजी अस्पतालों ने वेबसाइट पर रेट अपलोड कर दिए
हैं। यही वजह है कि निजी अस्पतालों के कोरोना मरीजों से मनमाने रेट वसूले जा रहे
हैं। अधिवक्ता अजय गुप्ता ने डिवीजन बैंच को बताया कि प्रशासन द्वारा निजी
अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन 1300 से 1400 रुपए में दिए जा रहे हैं। निजी अस्पताल मरीजों से रेमडेसिविर
इंजेक्शन के अधिकतम रेट 4500 से 5000 रुपए तक वसूल कर रहे हैं। डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को इस पर
हलफनामा पेश करने का निर्देश दिया है। मध्य प्रदेश
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस मोहम्मद रफीक और जस्टिस
अतुल श्रीधरन की डिवीजन बैंच ने बुधवार को तल्ख टिप्पणी करते कहा कि निजी
अस्पतालों में कोरोना के इलाज के अधिकतम रेट को लेकर राज्य सरकार न तो अपने आदेश
का क्रियान्वयन करा पा रही है, न ही 19 अप्रैल को कोर्ट
द्वारा जारी आदेश का पालन करा रही है। ऐसा लगता है सरकार ने निजी अस्पतालों को लूट
की खुली छूट दे दी है। डिवीजन बैंच ने राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि निजी
अस्पतालों में कोरोना के इलाज के अधिकतम रेट निर्धारित करने पर कोर्ट मित्र के साथ
विचार कर जवाब पेश किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 24 मई को निर्धारित की गई है।



