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- क्यू गरजते-बरसते और फटते है बादल,कितने तरह के होते हैं बादल..समझे प्राक्रतिक विज्ञान...?
Posted by : achhiduniya
14 May 2021
सबसे पहले आपको जान लेना चाहिए कि बादल क्या हैं? वो किसी
पानी के बड़े गुब्बारे की तरह होते हैं, जिनमें
बहुत सारा पानी इकट्ठा होता है। बादल कैसे अपने भीतर पानी छुपाकर रखते हैं, इस सवाल का जवाब सरल तो नहीं है। बादल किसी बाल्टी जैसे नहीं हैं। हमारे आस-पास
की हवा पानी से भरी हुई है। पानी तीन
रूपों में आता है: तरल (जिसे आप पीते हैं), ठोस
(बर्फ) और गैस (हवा में नमी)। बादल के अंदर पानी की मात्रा आपके चारों ओर हवा में
पानी की मात्रा से कुछ अलग नहीं है। बादल के मुख्य तौर पर तीन तरह के होते हैं-
सिरस, क्युमुलस और स्ट्रेटस। इन नामों को बादलों की प्रकृति और आकार
के आधार पर रखा गया है। ऊँचाई पर उड़ने वाले सबसे सामान्य बादल सिरस कहलाते हैं।
सिरस का अर्थ है गोलाकार। इन्हें लगभग रोज़ आसमान में देखा जा सकता है। ये बादल
हल्के और फुसफुसे होते हैं। ये बर्फ के कणों से बने होते हैं। यहाँ तक कि गर्मी के
मौसम में दिखने वाले बादलों में भी बर्फ के कण होते हैं क्योंकि उतनी ऊँचाई पर
काफ़ी सर्दी होती है। क्युमुलस का अर्थ है ढेर। अपने नाम की ही तरह ये बादल रूई के
ढेर की तरह दिखते हैं। अगर ये गहरे रंग के होते हैं तब इनसे पानी या ओलों की वर्षा
हो सकती है। ऐसे बादलों को क्युमुलोनिंबस कहते हैं। इनमें अक्सर आधा करोड़ टन से
ज्यादा पानी होता है। बादल का फटना बारिश का एक चरम रूप है। सामान्य तौर पर बादल
फटने से मूसलाधार बारिश होती है। इस दौरान इतना पानी बरसता है कि क्षेत्र में बाढ़
जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है। बादल फटने की घटना अमूमन पृथ्वी से 15 किलोमीटर
की ऊंचाई पर घटती है। इसके कारण होने वाली वर्षा लगभग 100 मिलीमीटर प्रति घंटा की
दर से होती है। कुछ ही मिनट में दो सेंटी मीटर से अधिक वर्षा हो जाती है, जिस कारण भारी तबाही होती है। मौसम विज्ञान के अनुसार जब बादल
भारी मात्रा में आद्रता यानि पानी लेकर आसमान में चलते हैं और उनकी राह में कोई
बाधा आ जाती है, तब वो अचानक फट पड़ते हैं, यानि तब उनका संघनन बहुत तेजी से होता है। इस स्थिति में एक
सीमित इलाके में कई लाख लीटर पानी एक साथ पृथ्वी पर गिरता है। बादल के अंदर का
ठंडा तापमान इस नमी या वाष्प को तरल में बदल देता है। यह तरल बादलों में लाखों, अरबों या यहां तक कि खरबों छोटी पानी की बूंदों के रूप में
मौजूद रहता है। वैज्ञानिक इस प्रक्रिया को संक्षेपण या कंडेंसेशन कहते हैं। अब
क्या पानी की बूंदों का ये बड़ा गट्ठर जमीन पर गिरेगा या नहीं यानि बारिश होगी कि
नहीं, ये कई कारकों पर निर्भर करता है,लेकिन
जब तक बादल के संपर्क में रहने वाली बूंदें छोटी होती हैं तो उनका वजन बहुत कम
होता है, तब वो हवा के साथ तैरती रहती हैं। बादल में बूंदें बहुत छोटी
हैं और बहुत कम वज़नी। बादल में, वे हवा के साथ तैरती हैं या बस
हवा में लटकती हैं। पृथ्वी पर गिरने के लिए, बादल की
बूंदों को भारी होना पड़ता है। जब वो अन्य बूंदों के साथ मिलकर भारी हो जाती हैं
तो बारिश के रूप में पृथ्वी पर आने लगती हैं। बारिश के होने में एक अहम फैक्टर पृथ्वी
की आकर्षण शक्ति भी होती है। जो बादलों के पानी को अपनी ओर खींचती हैं। वैज्ञानिकों
का अनुमान है कि एक वर्ग मील के क्षेत्र में गिरने वाली एक इंच बारिश 17.4 मिलियन
गैलन पानी के बराबर होती है। इतना पानी लगभग 143 मिलियन पौंड वजन का होगा! यानि कई
सौ हाथियों के वजन के बराबर। आप अब खुद सोच सकते हैं कि जब बादल तैरते हैं तो ये हल्के
फुल्के नहीं होते बल्कि अपने साथ खासा वजन लेकर चलते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक,एक औसत कम्यूलस क्लाउड का वजन 1.1 मिलियन पाउंड है! इसके बारे
में आप कुछ देर सोचें। इसका मतलब है कि मानसून आने के बाद किसी भी पल आपके सिर से
ऊपर लाखों पाउंड पानी तैर रहा होता है। यह पानी 100 हाथियों के बराबर होता है।






