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- विदेशो से आ रही मदद क्या अपनी सही जगह पर पहुंच रही हैं...?
ने कहा कि ऐसी कोई वेबसाइट या पारदर्शी व्यवस्था नहीं है जहां लोग अप्लाई करके मदद ले सकते हैं। ऐसे में अमेरिकी टैक्सपेयरों का पैसा खर्च करके जो मदद भेजी जा रही है, क्या उस पर यह देखा जा रहा है कि हम कितनी मदद भेज रहे हैं और कैसे मदद वितरित की जा रही है? इस सवाल पर विदेश विभाग की डिप्टी प्रवक्ता जलीना पोर्टर ने कहा कि किसी भी विशेष वेबसाइट पर इसे लेकर कोई
जानकारी नहीं है, लेकिन हम भारत में अपने भागीदारों की मदद के लिए प्रतिबद्ध हैं। अब तक विदेशों से 20 फ्लाइट्स आ चुकी हैं। इनमें कुछ 900 ऑक्सीजन सिलिंडर, 1,600 कॉन्सनट्रेटर्स और 1,217 वेंटिलेटर सहित जीवन-रक्षक दवाइयां हैं,लेकिन इन्हें इनके डेस्टिनेशन तक पहुंचाने में लॉजिस्टिक्स की दिक्कत आ रही है। अधिकारी ने कहा कि हम जिंदगियां बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम वक्त से लड़ रहे हैं। दुनियाभर के कई देशों से मेडिकल सप्लाई और जीवनरक्षक दवाइयों के रूप में मदद पहुंच रही है, लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये मदद अपनी सही जगह पर पहुंच रहे हैं? सरकारी अधिकारियों ने यह बात स्वीकार की है कि उनके सामने विदेशों से आ रही मदद के वितरण में कुछ आरंभिक
समस्याएं आ रही हैं। इनमें से एक समस्या कस्टम पर हो रही देरी है। इससे निपटने के लिए सरकार ने आज आयातकों के लिए एक ऑनलाइन फॉर्म जारी किया है। गौरतलब है की विदेशी मदद लेकर 20 फ्लाइट्स भारत पहुंची हैं, लेकिन इनमें से बहुत सी फ्लाइट्स में ऑक्सीजन कॉन्सनट्रेटर्स और रेमडेसिवीर दवा हफ्तों से कस्टम पर फंसी हुई है। अधिकारियों के अनुसार उनके सामने लॉजिस्टिक्स और कंपैटिबिलिटी की दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिससे देरी हो रही है। एक अधिकारी ने कहा कि पहली प्राथमिकता विदेशी मदद को सरकारी अस्पतालों में पहुंचानने की है क्योंकि
वो सुविधाएं मरीजों के मुफ्त में मुहैया कराते हैं। एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर कोविड संबधी दवाइयों और उपकरणों को कस्टम क्लियरेंस की प्रक्रिया को गति देने के लिए वित्त मंत्री के सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेस एंड कस्टम्स (CBIC) ने आज एक ऑनलाइन फॉर्म जारी किया है।




