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'सामना’ का नाम ‘पाकिस्ताननामा’ या ‘बाबरनामा’ कर देना चाहिए... भाजपा नेता आशीष शेलार की शिवसेना को सलाह
Posted by : achhiduniya
22 August 2021
शिवसेना सांसद संजय राउत ने अपने लेख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा
14 अगस्त को भारत के बंटवारे की त्रासदी के तौर पर याद किए जाने के आह्वान पर
टिप्पणी की प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कहा था कि वे भारत के बंटवारे को भूलें
नहीं। उन्होंने 14 अगस्त को बंटवारे का स्मृति दिवस के तौर पर मनाने को कहा है
यानी 15 अगस्त को आजादी का उत्सव मनाया जाए और इससे एक दिन पहले
बंटवारे के दर्द
को याद किया जाए। इस पर संजय राउत ने टिप्पणी करते हुए लिखा था कि पाकिस्तान बनने
के लिए नाथूराम गोडसे ने निहत्थे महात्मा गांधी को दोषी मानकर उन पर गोलियां बरसा
दीं। इसकी बजाए अगर वे बैरिस्टर मोहम्मद अली जिन्ना पर अपना पिस्तौल खाली कर देते
तो देश का बंटवारा ही नहीं होता और आज बंटवारे को त्रासदी के तौर पर याद करने की
नौबत ही नहीं आती। भारतीय जनता पार्टी विधायक
आशीष शेलार ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ का नाम ‘पाकिस्ताननामा’ या
‘बाबरनामा’ करने की सलाह दे डाली है। उन्होंने
शिवसेना सांसद संजय राउत के रोखठोक नाम से छपे लेख पर आपत्ति उठाते हुए कहा है।आशीष शेलार ने कहा
है कि कांग्रेस द्वारा इतिहास को जो गलत तरीके से पेश करने की कोशिश की गई है, संजय राउत उन्हीं कोशिशों को बल दे रहे हैं यानी राउत कांग्रेस
द्वारा इतिहास बदल कर लिखे जाने की कोशिशों का साथ दे रहे हैं। जिन्ना की वजह से
ही देश का बंटवारा हुआ। इस पर
दो मत होने का कारण ही नहीं है। गांधी जी पर गोली, हमला और
उनके खून का समर्थन करने का सवाल ही नहीं उठता। संजय राउत विरोधाभासी बातों को लिख
रहे हैं और कंफ्यूजन पैदा कर रहे हैं। हम बता दें कि संजय राउत ने अपने लेख में
लिखा था,कुछ लोग गांधी की हत्या करनेवाले पंडित गोडसे की मूर्ति की आज
भी पूजा करते हैं। वे उनकी फांसी के दिन उत्सव मनाते हैं। गोडसे को श्रद्धांजलि के
रूप में, वे गांधी की प्रतिमा पर गोली बरसाकर गांधी की हत्या का एक बार
फिर जश्न मनाते हैं। विभाजन न हो ऐसा कहने व लिखनेवाले मुट्ठी भर लोग उस समय भी
ठीक ऐसा ही बर्ताव कर रहे थे और जी रहे थे। उस समय किसी विभाजन विरोधी गोडसे ने
पाकिस्तान की
रट लगानेवाले जिन्ना पर पिस्तौल खाली कर दी होती तो 75 साल बाद बंटवारे को त्रासदी मानते हुए उसे याद करने की नौबत ही
नहीं आई होती। गोडसे ने निहत्थे गांधी को मार डाला। क्योंकि उनके विचार में एकमात्र वही विभाजन के
दोषी थे। तो जिन्ना कौन थे? इसलिए शेलार ने कहा ‘सामना’ का नाम ‘पाकिस्ताननामा’ किया जाए। शेलार का कहना है कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने कहा कि 14 अगस्त को बंटवारे की त्रासदी के तौर पर याद किया
जाए, इसे भूला ना जाए, तो इससे
पाकिस्तान के पेट में दर्द हुआ। जो बात पाकिस्तान के पेट में दर्द पैदा कर रही है, वही दर्द शिवसेना के मुखपत्र सामना में संजय राउत के लेख में उतर रहा है। इसलिए सामना का नाम अब
बदल देना चाहिए और इसका नाम पाकिस्ताननामा या बाबरनामा कर देना चाहिए।