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आरोपी की पैतृक संपत्तियों को अपराध की आय के रूप में जब्त कर सकता है ED...? कानूनी पहलुओ पर करेगा विचार सुप्रीम कोर्ट
Posted by : achhiduniya
11 October 2021
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस सीटी रविकुमार
की बेंच ने 8
अक्टूबर के अपने आदेश में ED की अपील पर आरोपियों को नोटिस जारी किया था और चार सप्ताह के
भीतर उनसे जवाब मांगा। ED की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर
जनरल एस वी राजू ने बताया कि हाईकोर्ट ने यह देखने में स्पष्ट गलती की है कि PMLA के तहत कार्यवाही याचिकाकर्ताओं की पुश्तैनी संपत्ति के संबंध
में आगे नहीं बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की टिप्पणी 2002 के अधिनियम की धारा 2(1)(यू) में
अपराध की आय की
परिभाषा के विपरीत है। हाईकोर्ट
ने अपने आदेश में पहले आरोपी के खिलाफ शुरू की गई कार्यवाही को यह कहते हुए खारिज
कर दिया था कि याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान उसकी मृत्यु हो गई थी। वहीं, दूसरे आरोपी के खिलाफ बेंगलुरु के प्रिंसिपल एंड सेशन जज के
समक्ष लंबित अभियोजन को रद्द कर दिया था। साथ ही मैसूर जिले में याचिकाकर्ताओं की
पारिवारिक संपत्तियों के संबंध में कुर्की की कार्यवाही को भी रद्द कर दिया था। सुप्रीम
कोर्ट कानूनी
मुद्दे की जांच करने के लिए सहमत हो गया है कि क्या प्रवर्तन
निदेशालय धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत
आरोपी की पैतृक संपत्तियों को अपराध की आय के रूप
में कुर्क कर सकता है। कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने के लिए
प्रवर्तन निदेशालय {ED} ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर
की थी। आदेश में कहा गया था कि धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत कार्यवाही पैतृक संपत्ति के संबंध में आगे नहीं बढ़
सकती है।