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- मुस्लिम बच्चियो को नही मिलता पैत्र्क संपति में बेटों जैसा हक..जाने शरीयत कानून...?
Posted by : achhiduniya
10 May 2023
शरीयत
एक्ट 1937 के अनुसार उत्तराधिकार और संपत्ति संबंधित विवाद का निपटारा होता है। हिन्दुओं में जहां बेटी पिता की संपत्ति में बराबर की हकदार है, वहीं मुस्लिम लॉ के अनुसार एक
मुस्लिम परिवार में जन्मी बेटी को पिता की संपत्ति में अपने भाई के मुकाबले आधा
हिस्सा ही मिलता है। एक मुस्लिम महिला के इस प्रावधान को सुप्रीम
कोर्ट में चुनौती देने के बाद से ही संपत्ति में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को
लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुस्लिमों में शरीयत एक्ट 1937 के तहत उत्तराधिकार संबंधित विवाद
का निपटारा होता है। संपत्ति या पैसे का बंटवारा पर्सनल
लॉ के तहत तय उत्तराधिकारियों में होता है। अगर किसी शख्स की मौत हो जाए तो उसके संपत्ति में उसके बेटे, बेटी, विधवा और माता पिता को किस्सा
मिलता है। बेटे से आधी संपत्ति बेटी को देने का प्रावधान
है। पति की मौत के बाद विधवा को संपत्ति का छठवां हिस्सा दिया जाता है। मुस्लिम बेटी शादी के बाद या फिर तलाक के बाद भी अपने पिता के घर में
हक से रह सकती है यदि उसके कोई बच्चा नहीं होता है। कानून के अनुसार अगर बच्चा बालिग
है तो वह अपनी मां की देखरेख कर सकता है तो उस मुस्लिम महिला की जिम्मेदारी उसके
बच्चों की हो जाती है। शरीयत कानून के तहत पारिवारिक
संपत्ति के बंटवारे में मुस्लिम महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले आधा हिस्सा देने
के प्रावधान
को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इस पर अभी सुनवाई चल रही
है। सुप्रीम कोर्ट में बुशरा अली नामक महिला ने अर्जी दाखिल की है। उसका कहना है कि संपत्ति के बंटवारे में उन्हें पुरुष सदस्य की तुलना
में आधी हिस्सेदारी मिली है और यह भेदभाव है। याचिका
में मुस्लिम पर्सनल लॉ की धारा-2 को चुनौती दी गई है और कहा गया है कि इसके तहत मुस्लिम महिलाओं
को पारिवारिक संपत्ति में पुरुषों की तुलना में आधी हिस्सेदारी मिलती है। यह धारा संविधान
के अनुच्छेद-15
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