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- महाराष्ट्र शिंदे सरकार को मिला जीवन दान...सुप्रीम कोर्ट ने कही यह बात
Posted by : achhiduniya
11 May 2023
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह अयोग्यता पर फैसला नहीं लेगा। स्पीकर को इस मामले में जल्द फैसला लेने
के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने कहा कि पार्टी में बंटवारा अयोग्यता कार्रवाई से
बचने का आधार नहीं हो सकती। उद्धव को दोबारा बहाल नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने
कहा कि व्हिप को पार्टी से अलग करना लोकतंत्र के हिसाब से सही नहीं होगा। पार्टी
ही जनता से वोट मांगती है। सिर्फ विधायक तय नहीं कर सकते कि व्हिप कौन होगा। उद्धव
ठाकरे को पार्टी विधायकों की बैठक में नेता माना गया था। 3 जुलाई को स्पीकर ने शिवसेना के नए व्हिप को
मान्यता दे दी। इस तरह दो नेता और 2 व्हिप हो गए। स्पीकर को स्वतंत्र जांच कर फैसला लेना चाहिए था। गोगावले
को
व्हिप मान लेना गलत था क्योंकि इसकी नियुक्ति पार्टी करती है। राज्यपाल को वो नहीं
करना चाहिए जो ताकत संविधान ने उनको नहीं दी है। अगर सरकार और स्पीकर अविश्वास
प्रस्ताव पर चर्चा टालने की कोशिश करें तो राज्यपाल फैसला ले सकते हैं,लेकिन इस मामले
में विधायकों ने राज्यपाल को जो चिट्ठी लिखी,उसमें यह नहीं कहा कि वह MVA सरकार हटाना चाहते हैं। सिर्फ अपनी पार्टी के नेतृत्व पर सवाल उठाए। कोर्ट ने
कहा कि किसी पार्टी में असंतोष फ्लोर टेस्ट का आधार नहीं होना चाहिए। राज्यपाल को जो भी प्रस्ताव मिले थे,वह स्पष्ट नहीं थे। यह पता नहीं था कि असंतुष्ट
विधायक नई
पार्टी बना रहे हैं या कहीं विलय कर रहे हैं। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में
सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने पिछले साल महाराष्ट्र
में हुए राजनीतिक संकट को लेकर यह फैसला सुनाते हुए इसे बड़ी बैंच को सौंप दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि स्पीकर को राजनीतिक दल की तरफ से नियुक्त व्हिप को ही
मान्यता देनी चाहिए। अध्यक्ष को हटाने का
नोटिस अयोग्यता नोटिस जारी करने के लिए अध्यक्ष की शक्तियों को प्रतिबंधित करेगा
या नहीं जैसे मुद्दों को एक बड़ी पीठ की ओर से जांच की जरूरत है।
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