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- छापा मारने वाले ED के निदेशक की नियुक्ति पर उठे सवाल....?
Posted by : achhiduniya
10 May 2023
सुप्रीम
कोर्ट ने गैर सरकारी
संगठन कॉमन कॉज की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि इसकी
जांच होनी चाहिए कि क्या प्रवर्तन निदेशालय [ईडी] के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के
तीन साल के कार्यकाल का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 1997 के फैसले के विपरीत है, जिसमें ईडी और केंद्रीय जांच ब्यूरो के
प्रमुखों के लिए न्यूनतम दो साल का कार्यकाल निर्धारित किया है। सुप्रीम कोर्ट ने
कहा कि वह एक सेवानिवृत्त अधिकारी का कार्यकाल केवल असाधारण परिस्थितियों में
बढ़ाने के अपने 2021
के फैसले पर फिर
से
विचार करेगा। मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा की
दोबारा से नियुक्ति का है। सुप्रीम कोर्ट ने मिश्रा को तीसरी बार सेवा विस्तार दिए
जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। 8 सितंबर, 2021 को न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की बेंच ने मिश्रा के
कार्यकाल को दो साल से आगे बढ़ाने के केंद्र के आदेश को बरकरार रखा था। हालांकि, बेंच ने कहा था कि सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त
करने वाले अधिकारियों के कार्यकाल में
विस्तार केवल दुर्लभ और असाधारण मामलों में
किया जाना चाहिए। विस्तार थोड़े समय के लिए होना चाहिए न कि अनिश्चित काल के लिए। मामले
में सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था,केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम और अदालत के 1997 के फैसले को धारा 25 (डी) में शामिल किया गया है, जिसमें कहा गया है, विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम 1999 या इस समय लागू किसी भी कानून में प्रवर्तन
निदेशक पदभार संभाले जाने के बाद से कम से कम दो वर्ष की अवधि तक पद पर बने रहेंगे।
उन्होंने कहा कि 1997
के फैसले में न्यूनतम
कार्यकाल का प्रावधान है। इसमें दो साल
से अधिक के कार्यकाल को लेकर कुछ नहीं कहा
गया है। संजय कुमार मिश्रा को 19 नवंबर,
2018 के एक आदेश के बाद
दो साल के लिए दोबारा से पद पर नियुक्त किया गया था। 13 नवंबर, 2020 को केंद्र ने उनका कार्यकाल एक साल के लिए बढ़ा दिया। एनजीओ कॉमन कॉज ने एक
जनहित याचिका दायर कर 13 नवंबर, 2020 के आदेश को इस आधार पर रद्द करने की मांग की कि मिश्रा का तीन साल का कार्यकाल
सीवीसी अधिनियम की धारा 25 का उल्लंघन करता है। नवंबर 2021 में मिश्रा का एक साल का विस्तार समाप्त होने
के साथ, तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने
अध्यादेशों पर हस्ताक्षर किए। इन अध्यादेश में सीबीआई और ईडी को नियंत्रित करने वाले
कानूनों में संशोधन किया गया। जिससे सरकार को ये ताकत मिल गई कि वो प्रवर्तन
निदेशालय के दोनों प्रमुखों को उनके पदों पर कायम रख सकते हैं। साथ ही एक साल का
एडिशनल विस्तार तब तक जारी रखा जाएगा जब तक कि वे प्रमुख के रूप में पांच साल पूरे
नहीं कर लेते।
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