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- 11 महीने का ही मकान –दुकान किराया करारनामा [ रेंट एग्रीमेंट] क्यू..?
Posted by : achhiduniya
21 July 2023
जब भी आप मकान या दुकान ऑफिस किराए पर लेने
जाते है तो ज्यादातर लोग किराया करारनामा [रेंट
एग्रीमेंट] 11 महीने के लिए ही बनाते हैं,लेकिन क्या
आपने कभी यह सोचा है कि आखिर करारनामा [रेट
एग्रीमेंट] 11 महीने के लिए ही क्यों बनता हैं, इसे पूरे साल या फिर उससे ज्यादा समय के लिए क्यों नहीं बनाया
जाता है? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 है। इस एक्ट के सेक्शन 17 के अनुसार, एक साल से कम के लीज समझौतों को रजिस्टर करना अनिवार्य नहीं है।
इसका मतलब यह है कि अगर किराये की अवधि 12 महीने से
कम है, तो बिना रजिस्ट्रेशन के समझौता किया जा सकता है। यह मकान मालिक
और किरायेदार दोनों को सब-
रजिस्ट्रार के कार्यालय में जाने और रजिस्ट्रेशन शुल्क
का भुगतान करने की परेशानी से बचाता है। इस तरह के
शुल्कों से बचने के लिए, आमतौर पर 11 महीने का करारनामा [एग्रीमेंट]
किया जाता है। इसके अलावा, यदि किराये की अवधि एक वर्ष से कम
है, तो स्टांप शुल्क भी बच जाता है, जिसका
भुगतान किराए के एग्रीमेंट के रजिस्ट्रेशन के समय करना पड़ता है। इसलिए मकान मालिक
और किरायेदार पारस्परिक रूप से लीज को रजिस्टर नहीं करने के लिए सहमत होते हैं। 11 महीने से अधिक या कम के लिए एग्रीमेंट किया जा सकता है।
जब कोई
व्यक्ति रेंट एग्रीमेंट रजिस्टर करता है तो स्टांप ड्यूटी किराए की राशि और रेंटल
अवधि के आधार पर तय की जाती है। किराये की अवधि जितनी लंबी होगी, स्टैंप ड्यूटी उतनी ही अधिक लगेगी। इसलिए, जितने अधिक समय के लिए एक एग्रीमेंट किया जाता है, उतना ही अधिक पैसा दोनों पार्टियों को देना पड़ता है। वहीं, 11 महीने से कम का करार करने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं देना
होता है।
ज्यादातर रेंट एग्रीमेंट 11 महीने के
लिए किए जाने के पीछे का कारण रजिस्ट्रेशन और स्टैंप ड्यूटी जैसी अन्य कानूनी
प्रक्रियाओं के खर्च और भीड़भाड़ से बचना होता है। यह जमींदारों और किरायेदारों को
अनावश्यक शुल्क के बिना किराये का समझौता करने का एक आसान और सुविधाजनक विकल्प
प्रदान करता है।