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- MP-CG-RJ चुनावी रेवड़िया [मुफ़्त] बटना शुरू..क्या कहते है विशेषज्ञ..?
Posted by : achhiduniya
17 August 2023
ड्यूक यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और मशहूर समाजशास्त्री डैन एरीली ने फ्रीबीज
यानी सरकार की ओर से दी जा रही मुफ्त सुविधाओं पर शोध किया है। इसके अनुसार चुनाव में
मुफ्त वादे पैसों से ज्यादा भावनाओं से जुड़ा हुआ होता है, इसलिए लोगों पर यह सीधा और तुरंत असर करता है। एरीली के मुताबिक चुनाव के
दौरान मुफ्त वादे की घोषणा सुनने के बाद आम लोगों के व्यवहार और उसके पैटर्न में
बड़ा बदलाव होता है। आम जनता मुफ्त वादों
की घोषणा सुन किसी एक पक्ष की ओर झुक जाते हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि कम
मार्जिन वाले सीटों पर मुफ्त चुनावी वादे मास्टरस्ट्रोक का काम करता है। राजनीतिक
दल अपने-अपने सुविधानुसार मुफ्त वादे
करने से नहीं चूकना चाहते हैं। भारत में
चुनाव के दौरान मुफ्त वादों की घोषणा पर रोक के लिए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका
भी दाखिल है। जानकारों का मानना है कि जब से चुनाव में राजनीतिक दलों ने प्रोफेशनल
रणनीतिकारों का सुझाव लेना शुरू किया है, तब से मुफ्त में बांटने का प्रचलन तेजी
से बढ़ा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों
ने 15 अगस्त के मंच से मुफ्त चुनावी वादों की झड़ी लगा दी।
अकेले राजस्थान के
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 7 मुफ्त घोषणाएं की। मध्य प्रदेश के सीएम
शिवराज सिंह चौहान ने 4 मुफ्त वादों का ऐलान मंच से ही कर दिया। छत्तीसगढ़
के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी लोकलुभावन वादे करने में पीछे नहीं रहे। तीनों
राज्यों में अब से 2 महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। जानकार
मुफ्त वादों की घोषणा को चुनावी हथियार के रूप में देख रहे हैं। पिछले 8 विधानसभा चुनाव में रेवड़ियों ने जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाई है।
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