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- One Earth, One Family, One Future... PM- मोदी
Posted by : achhiduniya
07 September 2023
वसुधैव कुटुम्बकम – हमारी
भारतीय संस्कृति के इन दो शब्दों में एक गहरा दार्शनिक विचार समाहित है. इसका अर्थ है, पूरी दुनिया एक परिवार है। यह एक ऐसा सर्वव्यापी दृष्टिकोण है, जो हमें एक सार्वभौमिक परिवार के रूप में प्रगति करने के
लिए प्रोत्साहित करता है। एक ऐसा परिवार जिसमें सीमा, भाषा और विचारधारा का कोई बंधन ना हो। जी-20 की भारत की अध्यक्षता के दौरान, यह विचार मानव-केंद्रित प्रगति के आह्वान के रूप में
प्रकट हुआ है। हम One Earth के
रूप में, मानव जीवन को बेहतर बनाने के लिए एक साथ आ रहे हैं। हम One Family के रूप में विकास के लिए एक-दूसरे
के सहयोगी बन रहे हैं और One Future के
लिए हम एक साझा उज्ज्वल भविष्य की ओर एक साथ आगे बढ़ रहे हैं। भारत का सबसे तेज गति
से बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाना कोई आकस्मिक घटना नहीं है।
हमारे सरल, व्यावहारिक और सस्टेनेबल
तरीकों ने कमजोर और वंचित लोगों को हमारी विकास यात्रा का नेतृत्व करने के लिए
सशक्त बनाया है। अंतरिक्ष से लेकर खेल, अर्थव्यवस्था से लेकर उद्यमिता तक, भारतीय महिलाएं विभिन्न
क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। आज महिलाओं के विकास से आगे बढ़कर महिलाओं के
नेतृत्व में विकास के मंत्र पर भारत आगे बढ़ रहा है। हमारी जी-20 प्रेसीडेंसी जेंडर
डिजिटल डिवाइड को पाटने, लेबर फोर्स में भागीदारी के अंतर को कम करने और
निर्णय लेने में महिलाओं की एक बड़ी भूमिका को सक्षम बनाने पर काम कर रही है। भारत
के लिए,
जी-20 की अध्यक्षता केवल एक
उच्च स्तरीय कूटनीतिक प्रयास नहीं है। मदर ऑफ डेमोक्रेसी और मॉडल ऑफ डाइवर्सिटी के
रूप में हमने इस अनुभव के दरवाजे दुनिया के लिए खोल दिए हैं। जी-20
2023 का
एक्शन प्लान भविष्य की दिशा निर्धारित करेगा। इससे एसडीजी को हासिल करने का रास्ता
तैयार होगा। भारत में, प्राचीन काल से प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर आगे
बढ़ना हमारा एक आदर्श रहा है और हम आधुनिक समय में भी क्लाइमेट एक्शन में अपना
योगदान दे रहे हैं।
ग्लोबल साउथ के कई देश विकास के विभिन्न चरणों में हैं और इस
दौरान क्लाइमेट एक्शन का ध्यान रखा जाना चाहिए। क्लाइमेट एक्शन की आकांक्षा के साथ
हमें ये भी देखना होगा कि क्लाइमेट फाइनेंस और ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी का भी ख्याल
रखा जाए। हमारा मानना है कि जलवायु
परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए पाबंदियों वाले रवैये को बदलना चाहिए। क्या
नहीं किया जाना चाहिए' से हटकर क्या किया जा सकता है, वाली सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। हमें एक रचनात्मक
कार्यसंस्कृति पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। एक टिकाऊ और सुदृढ़ ब्लू
इकोनॉमी के लिए चेन्नई एचएलपी हमारे महासागरों को स्वस्थ रखने में जुटी है। ग्रीन
हाइड्रोजन इनोवेशन सेंटर के साथ, हमारी अध्यक्षता में स्वच्छ एवं ग्रीन हाइड्रोजन से
संबंधित एक ग्लोबल इकोसिस्टम तैयार होगा।
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