- Back to Home »
- Judiciaries »
- संविधान के तहत दे न्याय शरीयत कानून करता है भेदभाव,मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा....
संविधान के तहत दे न्याय शरीयत कानून करता है भेदभाव,मुस्लिम महिला ने सुप्रीम कोर्ट का खटखटाया दरवाजा....
Posted by : achhiduniya
16 March 2024
देश में
अब एक मुस्लिम महिला ने शरीयत कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस कानून के खिलाफ बोलने वाले लोग शुरू से यह कहते आए हैं कि इस कानून में मुस्लिम
महिलाओं को पूरी आजादी नहीं है और उनपर कई पाबंदियां भी हैं। शरीयत कानून के खिलाफ
सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर जाने वाली भी एक मुस्लिम महिला ही है। शरीयत कानून के खिलाफ शीर्ष अदालत
में याचिका लगाने वाली महिला का नाम बुशरा अली है। बुशरा अली का कहना है कि इस
कानून में महिला के साथ भेदभाव किया गया है। यह भेदभाव संपत्ति के बंटवारे से
जुड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में महिला ने कहा है कि उनके पैतृक संपत्ति के
बंटवारे में
उन्हें पुरुषों के समान अधिकार नहीं मिला है। जबकि देश के संविधान में
महिलाओं को समानता का अधिकार दिया गया है। बुशरा अली ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी
याचिका के जरिए ये कहा है कि यह अनुच्छेद जाति, धर्म या जेंडर यानी लिंग के आधार पर
किसी भी नागरिक के साथ भेदभाव को रोकता है। महिला का कहना है कि जब उनके परिवार
में संपत्ति का बँटवारा हुआ तो उसे 7/152 का हिस्सा दिया गया। महिला ने दावा
किया कि वहीं पुरुषों को 14/152 का हिस्सा दिया गया, जो उसकी हिस्सेदारी से दोगुना है।
बुशरा ने कहा है कि यह शरिया का कानून आर्टिकल -13(1)का भी उल्लंघन करता है।
बुशरा अली का कहना है कि भारतीय
संविधान सभी को बराबरी का हक देता है, इसलिए संपत्ति का बंटवारा भी इसी
कानून के तहत किया जाना चाहिए। यहां आपको बता दें कि बता दें कि मुस्लिमों में
सिविल मामलों का निबटारा शरीयत कानून पर आधारित मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार होता
है। दरअसल केरल हाईकोर्ट ने 6 जनवरी को इस मामले में शरीयत कानून के पक्ष में फैसला सुनाया था। बुशरा ने अब हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बहरहाल
महिला की याचिका पर अदालत ने 11 भाई-बहनों को नोटिस जारी किया है। इनमें चार बहनें शामिल हैं।
बता
दें कि दुनिया के कई इस्लामिक देशों में शरिया कानून का राज है। इनमें सऊदी अरब, ईरान, ब्रुनेई, अफगानिस्तान, सुडान और कतर जैसे कई देश शामिल हैं।



