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भ्रामक विज्ञापन कर फ़से आचार्य बालकृष्ण और योग गुरु रामदेव सुप्रीम कोर्ट ने हाजिर होने का दिया हुक्म...
Posted by : achhiduniya
19 March 2024
CJI डीवाई
चंद्रचूड़ की बेंच के एक जज और दो अन्य सुप्रीम कोर्ट जजों को 15 जनवरी 2024 को एक गुमनाम पत्र मिला था। इसमें कहा
गया था कि 21 नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि को ऐसे भ्रामक विज्ञापन देने से
रोक दिया था, लेकिन
इसके बावजूद ऐसे विज्ञापन जारी किए गए। इस पत्र के साथ विज्ञापन की कॉपी भी लगाई
गई थी। पिछले साल 29 नवंबर 2023 को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाई थी। इंडियन
मेडिकल एसोसिएशन की याचिका पतंजलि आयुर्वेद के विज्ञापनों पर आपत्ति जताने को लेकर
थी। IMA ने कहा
था कि पतंजलि के दावों की पुष्टि नहीं हुई है। ये ड्रग्स एंड अदर मैजिक रेडेमीड
एक्ट
1954 और
कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 जैसे
कानूनों के खिलाफ है। उस समय जस्टिस
अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्र की बेंच ने पतंजलि को फटकार
लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट ने
अवमानना नोटिस का जवाब नहीं देने पर आयुर्वेदिक कंपनी पतंजलि आयुर्वेद के
प्रबंध निदेशक आचार्य
बालकृष्ण और योग
गुरु रामदेव को सुनवाई
की अगली तारीख पर पेश होने को कहा है। अवामाना का नोटिस एलोपैथिक दवा के मामले में जारी किया गया था। इस केस से जुड़ी अगली सुनवाई अब दो हफ्ते बाद होगी। सुप्रीम कोर्ट
का कहना है
कि पहली नजर में दोनों
(आचार्य बालकृष्ण और योग गुरु रामदेव) ने कानून का उल्लंघन किया है। फरवरी 2024 में सुप्रीम
कोर्ट ने विज्ञापनों में छपे फोटो के आधार पर नोटिस जारी किया था। सर्वोच्च न्यायालय ने पतंजलि और बालकृष्ण को
अवमानना का नोटिस भेजकर बीमारियों के इलाज पर भ्रामक विज्ञापनों को लेकर जवाब
मांगा था। कोर्ट ने पूछा था कि क्यों ना उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि उन्होंने 21 नवंबर, 2023 को
सुप्रीम कोर्ट को दिए गए वादे का उल्लंघन किया था।
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