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- CAA के खिलाफ 190 याचिकाओं पर 19 मार्च को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट...
Posted by : achhiduniya
15 March 2024
भारत
सरकार ने साल 2019
में कानून बनाया
था। इस कानून से साल 2014 से
पहले पाकिस्तान,बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए
शरणार्थियों को यहां की नागरिकता दी जाएगी। इसमें इन देशों से आए अल्पसंख्यकों (हिंदू,ईसाई,सिख,जैन, बौद्ध और पारसी) समुदाय के लोगों को
भारत की नागरिकता मिल सकेगी। भारत सरकार द्वारा देश में नागरिकता (संशोधन) विधेयक लागू कर दिया
गया है। इसके तहत अब तीन पड़ोसी देशों से आए अल्पसंख्यकों (हिंदू, ईसाई, सिख, जैन, बौद्ध और पारसी) समुदाय के लोगों
को भारत की नागरिकता मिल सकेगी,लेकिन देश
भर में सेक्युलरिज्म का नारा लगाने वालों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। इंडियन
यूनियन मुस्लिम लीग [IUML] ने CAA पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की
थी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम संगठनों की CAA के खिलाफ दायर की गई याचिका पर सुनवाई
करने के लिए तैयार हो गया है। अब 19 मार्च को IUML द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई
की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने इस याचिका पर
आदेश देते हुए कहा कि CAA पर रोक लगाने का मांग वाली सभी 190 याचिकाओं पर 19 मार्च को अंतरिम आवेदन
[AI] के साथ सुनवाई करेगी। साथ ही चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम इस मामले
की सुनवाई मंगलवार को करेंगे। इसके 190 से अधिक मामले हैं।
सभी मामलों की सुनवाई की जाएगी।
हम पूरा बैच लगाएंगे। बता दें कि इन याचिकाओं में
मुस्लिमों को भी नागरिकता देने की मांग की गई है। बता दें कि इस मामले में सबसे
पहला केस इंडियन मुस्लिम लीग ने 2019 में फाइल किया था। इसके
बाद CAA के विरोध में कई
याचिकाएं दायर की गई। जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ
इंडिया [DYFI] ने भी सीएए रोकने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर
की थी। इसके साथ ही IUML द्वारा दायर की गई याचिका में कहा गया
है कि यह कानून असंवैधानिक और मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण है। इसके साथ ही
उनका दावा है कि इस कानून के सभी प्रावधान मनमाने हैं और इसके प्रावधान केवल
धार्मिक के आधार पर केवल एक ही वर्ग को अनुचित लाभ देते हैं, यह कानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन है।



