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- जीरो FIR क्या है,कौन दर्ज करवा सकता है,क्या है नफा-नुकसान...?
Posted by : achhiduniya
09 July 2024
देशभर
में 1 जुलाई से तीन नए कानून लागू हो गए
हैं, इसके साथ ही IPC, CRPC और IEA
की धाराएं गुजरे जमाने की
बात हो गई हैं। इनकी जगह अब भारतीय न्याय संहिता,
भारतीय नागरिक सुरक्षा
संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम ने ले ली
है। नये कानूनों से एक आधुनिक न्याय प्रणाली स्थापित हो गई है,जिसमें
zero FIR पुलिस में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराना,
SMS के
जरिये समन भेजने जैसे इलेक्ट्रॉनिक माध्यम और सभी जघन्य अपराधों के वारदात स्थल की
अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान शामिल हैं। पहले घटनास्थल वाले क्षेत्र में
भी जीरो एफआईआर दर्ज करवाई जाती थी,लेकिन अब कहीं भी FIR दर्ज
करवाई जा सकेगी। जीरो FIR नॉर्मल
एफआईआर की तरह ही होती है। बस
इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके बीच अधिकार क्षेत्र की कोई भी अड़चन पैदा
नहीं होती है। नॉर्मली पुलिस तभी एफआईआर दर्ज करती है,
जब वह केस उसके अधिकार
क्षेत्र वाली जगह पर हुआ है,लेकिन जीरो FIR में पीड़ित या फिर उसका जानकार कोई
भी किसी भी थाने में FIR दर्ज करा सकता है। पुलिस इसी आधार
पर जांच शुरू कर देती है और बाद में संबंधित क्षेत्र के थाने में इसे ट्रांसफर कर
दिया जाता है। नए कानून लागू होने के बाद अब कोई भी पीड़ित क्राइम होने की स्थिति
में किसी भी थाने में जीरो एफआईआर दर्ज करा सकेगा।
15
दिनों के भीतर इसे मूल
जूरिडिक्शन, यानी जहां क्राइम हुआ है,उस
एरिया में भेजना होगा। वहीं विक्टिम को FIR की कॉपी भी मिलेगी। अब देश के हर
पुलिस स्टेशन में क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम एप्लिकेशन (CCTNS) के तहत सभी केस दर्ज किए जाएंगे। जीरो FIR के क्या फायदे हैं:- बिना किसी
देरी के पुलिस को घटना की जानकारी मिल जाती है। अहम सबूतों को नष्ट किए जाने से समय रहते
बचाया जा सकता है। मामला अधिकार
क्षेत्र का न भी हो तो भी पुलिस को तुरंत एक्शन लेना पड़ता है।
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