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- नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट क्या होता है क्या दोनों एक है या अलग-अलग...?
Posted by : achhiduniya
24 August 2024
किसी भी जुर्म को साबित करने के लिए पुलिस की तरफ से आरोपी का
पॉलीग्राफ टेस्ट या नार्को टेस्ट कराया जाता है जिससे सच्चाई का पता चले। ऐसे में
ये पॉलीग्राफ या नार्को टेस्ट क्या है इसकी जन सामान्य लोगों को जानकारी
जम होती है।
वैसे सबसे पहले आपको बता दें कि पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट दोनों अलग-अलग हैं। इसमें
से पॉलीग्राफी टेस्ट इंसान के सच और झूठ का पता लगाने के लिए किया जाता है। सामान्य
भाषा में इसे लाई डिटेक्टर टेस्ट भी कहा जाता है। इसमें कुछ मशीनों का प्रयोग किया
जाता है जिसके जरिए अपराधी या आरोपी का झूठ पकड़ा जाता है। दरअसल पॉलीग्राफ मशीन
को आरोपी के शरीर के साथ अटैच किया जाता है और इसके सेंसर्स से
आ रहे सिग्नल को एक
मूविंग पेपर (ग्राफ) पर रिकॉर्ड किया जाता है। इसी के जरिए पता लगाया जाता है कि वह
व्यक्ति सच बोल रहा है या झूठ। इस दौरान उसके बीपी से लेकर हृदय के धड़कन तक की
सघन गणना की जाती है। इस प्रक्रिया में आरोपी को कोई इंजेक्शन नहीं दिया जाता है। आरोपी
का यह टेस्ट पूरे होशोहवास में होता है। वहीं नार्को टेस्ट के बारे में बता दें इस
टेस्ट के दौरान आरोपी को सोडियम पेंटोथल की डोज इंजेक्शन के जरिए दी जाती है।
जिससे आरोपी बेहोशी की स्थिति में आ जाता है। इस दौरान उसका दिमाग पूरी तरह से
सक्रिय रहता है। नार्को टेस्ट से पहले व्यक्ति का फिटनेस टेस्ट किया जाता है। वैसे
आपको बता दें कि आरोपी के दोनों ही प्रकार के टेस्ट के लिए अदालत की मंजूरी लेना
जरूरी होता है। इसके साथ ही जिस शख्स का टेस्ट होना है,उसकी सहमति भी इसके लिए
जरूरी होती है। कई देशों में यह पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।
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