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- हवस का पुजारी ही क्यों, हवस का मौलवी क्यों नहीं....? धीरेंद्र शास्त्री
Posted by : achhiduniya
02 October 2024
बागेश्वर धाम प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सवाल उठाया था कि क्यों सिर्फ हवस के पुजारी
शब्द का इस्तेमाल किया जाता है, हवस के मौलवी नहीं।
उन्होंने कहा मुस्लिम मौलवियों की कभी बेइज्जती नहीं करते, लेकिन हिंदुओं के दिमाग में प्रायोजित तरीके से
ऐसे शब्द भरे गए हैं, जैसे-हवस का पुजारी।पंडित
धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने कहा मैंने
किसी मजहब के लिए ऐसा नहीं बोला कि हवस का
पुजारी ही क्यों बोला जाता है, हवस का मौलवी क्यों
नहीं। इस बयान पर किसी मौलवी के आपत्ति उठाये जाने पर पलटवार करते हुए धीरेंद्र
शास्त्री ने कहा कि जो इसपर आपत्ति कर रहे हैं वो नालायक हैं, इनको कोई ज्ञान नहीं है। उन्होंने ये भी कहा कि
सभी पुजारी गलत नहीं होते, फिर सभी को क्यों
टारगेट किया जाता है। धीरेंद्र शास्त्री ने आतंकवादी संगठनो पर इजरायल की कारवाई पर कहा कि
यही तो गलत है,
हम जोड़ने वालों की बात करते हैं तो वह
तोड़ने की बात करते हैं,वहीं उन्होने
नवरात्रि पर देवी आराधना पर कहा कि जब
तक हम यह प्रण नहीं ले लेते कि हम बहू-बेटियों के ऊपर उठने वाली उंगली को तोड़ नहीं देते, तब तक देवी की आराधना का कोई औचित्य नहीं है। धीरेंद्र शास्त्री के इस विवादित बयान पर हल्ला
मच गया और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने आपत्ति जाहिर की। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के
मौलाना शहाबुद्दीन ने बाबा बागेश्वर के बयान
को नफरती बयान बताया है। मौलाना शहाबुद्दीन ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री हमेशा आपत्तिजनक
बातें करते हैं,यह उनके नजरिए और उनकी सोच को दर्शाता है।
धार्मिक व्यक्ति होकर भी वह इस तरह की उल-जुलूल बातें करते रहते हैं, उनको ऐसे बयान देने में शर्म आनी चाहिए। जब आप
धर्म प्रचारक हैं तो आपको हमेशा
अच्छी बात कहनी चाहिए, ऐसी बात कहनी चाहिए
जो लोगों के लिए सबक हो,लेकिन ये तो हमेशा ऐसी बात करते हैं जो आपत्तिजनक होते
हैं। ऐसे बयान देकर तो उन्होंने सभी धर्म के प्रचारकों को, चाहें वो हिंदू हों या मुसलमान, कटघरे में खड़ा कर दिया है।
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