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हैकिंग असंभव EVM की होती है तीन लेयर सिक्यॉरिटी,वोटिंग मशीन पर उठे सवालों पर बोले मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार
Posted by : achhiduniya
15 October 2024
मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने EVM
पर
सवाल उठाने वालों को करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग तो यहां तक कह देते
हैं कि जब पेजर को उड़ाया जा सकता है, तो EVM हैक कैसे नहीं हो सकते हैं?
ऐसे
लोगों को समझना चाहिए कि पेजर कनेक्टड होता है। ईवीएम कनेक्टड नहीं होती है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले ईवीएम
की पोलिंग एजेंट्स की मौजूदगी में इतने स्तरों पर जांच की जाती है कि उसमें
गड़बड़ी का कोई चांस नहीं है। वोटिंग के पहले और वोटिंग के बाद ईवीएम के बारे में
चुनाव आयोग ने डीटेल में
जानकारी दी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ने कहा कि ईवीएम की छह
महीने पहले एफएलसी होती है। इसमें उसकी पहली चेकिंग होती है। ईवीएम को स्टोरेज में
रखने, उसकी कमिशनिंग, बूथ में ले जाने से लेकर वोटिंग के बाद स्ट्रॉन्ग रूम तक ले जाने
तक की पूरी प्रक्रिया में हर बार राजनीतिक दल के एजेंट मौजूद रहते हैं। उन्होंने
कहा कि वोटिंग से पांच या छह दिन पहले भी ईवीएम की कमिशनिंग होती है। उस दौरान
उसमें बैटरी डाली जाती है और सिंबल पड़ते हैं। इसके बाद ईवीएम को सील किया जाता है।
यहां तक कि ईवीएम की बैटरी पर भी उम्मीदवार के एजेंट के दस्तखत होते हैं।
कमिशनिंग
के बाद ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम में रखा जाता है। उस पर डबल लॉक लगता है। तीन लेयर की सिक्यॉरिटी होती है। वोटिंग के लिए
जब ईवीएम पोलिंग बूथ पर जाती है, तो यही प्रक्रिया दोहराई
जाती है। इसकी वीडियोग्राफी भी की जाती है। किस नंबर की मशीन किस बूथ पर जाएगी, यह सब बताया जाता है। इसका रेकॉर्ड रखा जाता है। बूथ पर पोलिंग
एजेंट्स को मशीन में वोट डालकर दिखाए जाते हैं।
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